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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक जज ने एक महिला के यौन उत्पीड़न के मामले में जो फैसला सुनाया है, वह इतना भयावह है कि तमाम न्यायिक परंपराओं को मात देता है...
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00:0036 गड़ हाई कोट के जज नरेंद कुमार व्यास का क्या किया जा सकता है?
00:07क्या कहा जा सकता है उनको जिन्होंने 22 साल पुराने एक मामले में
00:13बलातकार के दोशी पाए गए ट्रायल कोट में जिसे दोशी सिद्ध किया गया
00:18उस शक्स को राहत दी और कहा जो कहा उसे बोलना भी बहुत मुश्किल है
00:25कि आपने महिला के प्राइवेट पार्ट पर वीर गिराया यानि एजैकूलेशन किया
00:32लेकिन पेनेट्रेशन नहीं किया शायद पूरा पेनेट्रेशन नहीं किया
00:37इसलिए हाप बलातकार के दोशी नहीं है एश कीजिए आपकी सजा हम कम करते हैं
00:44साथ साल की सजा सुनाई थी 2005 में ट्राइल कोट ने
00:48उसे इस माननी हाई कोट के जज ने कम करके साड़े तीन साल कर दी है
00:55और जिस तरह से डीटेल में डिस्क्रिप्शन दिया गया है
00:59उसे पढ़कर ऐसा लग रहा था कि 22 साल पहले जो महिला जो लड़की इस यातना से गुजरी थी
01:08उसे उसे बड़ी यातना से गुजरने के लिए हाई कोट के इस जज ने मजबूर किया होगा
01:17जिस तरह से इस पर हंगामा है और हंगामा होना चाहिए सवाल उठाया जाना चाहिए
01:23क्योंकि इससे पहले इलहाबाद हाई कोट के भी ऐसे ही एक मानिनी जज ने
01:28इस तन पकड़ना नाड़ा खोड़ना घसीटना इसे एटेम्ट तु रेप तक नहीं माना था
01:35बाद में सुप्रीम कोट ने कहा कि वह जज गलत था यह एटेम्ट तु रेप है
01:41अब 36 गड़ के इस मानिनी हाई कोट के जज पर क्या सुप्रीम कोट कोई आक्शन लेगा
01:48क्या महिला की गरिमा के साथ खिलवार करने का ठेका उठा रखा है
01:52इस तरह के जजोने सवाल हमें आपको पूछना होगा
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