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बेबाक भाषा के अजय सिंह कहिन कार्यक्रम में लेखक विचारक अजय सिंह ने हिंदी की तीन किताबों दिगंबर की मुक्तिबोध, ऊषा राय की आलोचना और शोभा सिंह के कविता संग्रह की चर्चा की और बताया कि इन्हें पढ़ना क्यों ज़रूरी है
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00:03आदाब मैं अजय सिंग हिंदी का कवी और लेखक बेबाग भाशा पर आप से मुखातिव हूँ
00:12आदाब मैं अजय सिंग हिंदी का कवी और लेखक बेबाग भाशा चैनल पर आप लोगों से मुखातिव हूँ
00:22आगे से इस चैनल पर अजय सिंग कहिन नाम से एक स्तंभ या कॉलम या सीरी जो भी आप इसे
00:33कहें उसे शुरू किया जाएगा
00:36आज के इस प्रोग्राम में मैं तीन किताबों पर संग्षेप में बात करूँगा
00:42आपको पता होगा कि दिल्ली में जनवरी दो हजार छबीस में विश्व पुस्तक मेला लगा था जिसमें बहुत सारी किताबें
00:53जारी की गएं हिंदी, अंग्रीजी, अन्य भारती भार्शाओं में
00:58उन में से तीन किताबों पर मैं खास तोर पर चर्चा करना चाहूँगा, हिंदी की किताबें हैं तीनों
01:05उसमें से पहली किताब है, मैं दिखाना चाहूँगा अपनों को
01:10मुक्ति बोध व्यक्तित विचारधारा पर गारगी प्रकाशन से किताब आई है और लेखा कनवादक दिगंबर नहीं से प्रस्तुत किया है
01:22दूसरी किताब है कविताएं बदलाव की सौंदर्य और वैचारी की उशाराय कभी और कहानिकार हैं
01:32उनके आलोजनात्मक लेखों का संग्रह है जिसे न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने च्छापा है और तीसरी किताब है शोभा सिंग का
01:42नया और तीसरा कविता संग्रह
01:45मा का गीला चुम्बन डरता है ताना शाह
01:48इसे गुल मोहर किताब ने छापा है
01:51तो इन तीन किताबों पर मैं कुछ आप लोगों से बाचित करूँगा
01:58तो ये किताब है मुक्तिबोद, विक्तित, विचारधारा और साहित
02:01एक अंतरंग बाचित जिसे दिगंबर ने प्रक्तुत किया है
02:06यह दरसल दिगंबर और उनके साथियों ने दोहजार चौबीस में
02:11मुक्तिबोद पर एक कारिक्रम, एक बाचीत रखी थी
02:16जिसमें ट्रेड उनियान, किसान आंदोलन, मैदूर आंदोलन, बुद्धी जीवी, छात
02:23यह सब लोग उसमें शामिल हुए थे
02:25हाले कि उनके नाम नहीं दिए गये हैं
02:27लेकिन उसकी भूमिका में दिगंबर ने बताया है
02:31कि यह उस बाचीत के आधार पर
02:33जो मुक्तिबोद को समझने के लिए की गई थी
02:36उसके आधार पर यह किताब तैयार की गई है
02:41इस किताब को तैयार करने का मकसद यह था
02:43कि गजानन माधव मुक्तिबोद को
02:45जो हिंदी के एक शीर्ष कवी और गद्देकार हैं
02:48उन्हें कैसे समझा जाए
02:50आम तोर पर उनके बारे में एक धारणा रही है
02:52कि वो बहुत दुरूध, मुश्किल कवी हैं
02:57रहस्यवादी हैं, राजक्तावादी हैं
03:00बीहडों में विचरते हैं वगएरा वगएरा
03:02एक पूरा एक बनाया गया था
03:06उसके बरक्स यह जो किताब है
03:08जो आई है, वो एक मुक्तिबोत को
03:10एक मार्सिस्ट, एक क्मूनिस्ट पोएट के तורपर
03:14क्मूनिस्ट कवी के तौरपर
03:16पुनरसापित करती है
03:17मैं पुनरसापित शब इसलिए इस्तिमाल कर रहा हूँ
03:20कि मुक्तिबोत की शुरूआइए
03:34विचार हुआ
03:35उसमें इस पहलू की आमतोर पर अंदेखी की गई
03:39और इसको कि वो एक कमनिश थे
03:42इसको हमेशा बैक्ग्राउंड में रखा गया
03:45तो ये किताब जो है ये मुक्तिबोध वाली
03:51ये एक प्रकार से मुक्तिबोध को फिर से
03:57यानि खोजती है ने सिरे से
04:00और उसमें जो बाचीत है वो बाचीत मुझे बहुत दिल्चस्प और काम लायक लगी
04:05मुक्तिबोध की कविताओं के आधार पर जिस तरह से बाचीत की गई है
04:10उससे पता चलता है कि मुक्तिबोध को समझा जा सकता है
04:15वो अग्ये यानि न समझने वाले कवी नहीं है
04:19उन्हें समझा जा सकता है और समझने के तरीके टूल्स क्या हैं आपके पास कौन से हैं इस पर भी
04:25डिपेंड करता है
04:26तो ये जो किताब है वो एक जिसे कहा जाए कि मुक्तिबोध को एक कम्मुनिस्ट कवी के तौर पर सामने
04:35रखती है
04:36और इसलिए मुझे लगता है कि यह किताब पढ़ी जानी चाहिए देखी जानी चाहिए
04:43किताब में कुछ सरली करण भी है कुछ जगह कुछ तथ्यात्मक असंगतियां भी हैं
04:49जिने मैं उम्मीद करता हूँ कि अगले संसकरण में दूर कर लिया जाएगा
04:54लेकिन यह किताब जिनकी मुक्तिबोत को जो लोग जानना चाहते हैं समझना चाहते हैं
05:00उन्हें यह किताब पढ़नी चाहिए
05:03दूसरी किताब जिसके बारे मैं मैं बात करना चाहूंगा
05:07वो कविताएं बदलाओ की सौंधरी और वैचारी की उशाराय की है
05:15उशारा कवी और कहानिकार हैं और आलोच नाय भी लिखती है
05:20और यह किताब न्यू वर्ल पब्लिकेशन से छपी है
05:24तो इसमें एक ग्यारा कवियों की कविताओं पर लेख है
05:29अब मैं यह कहूंगा कि एक सहिर्दय आलोच की दृष्टी है जो कविता पर मोहित है
05:37मैं समझता हूँ कि यह किताब भी पढ़ी जानी चाहिए देखी जानी चाहिए
05:42और हाल फिलहाल के हिंदी कवियों और एक उर्दू कविय पर इस तरह के शायद यह पहली किताब मुझे दिखाई
05:51पड़ी
05:51और भी होंगी किताब लेकिन मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है
06:05शोभा सिंग, भगवान सरूप कटियार, सुभाश राय, अनिता भारती, हरे प्रकाश उपाध्याय
06:15आज पर ये एक पढ़े जाने लाइक लेक हैं और कविता कला और विचार दृष्टी
06:24इन दोनों को यह किताब लेकों के माध्यम से सामने ले आती है
06:31तीसरी किताब जिसकी मैं चर्चा करना चाहूँगा वो है मा का गीला चुम्बन ढरता है तानर्शा
06:38ये शोभा सिंग का तीसरा और नया कविता संग्रा है जिसे गुलमोहर किताब ने च्छापा है
06:45इसमें 41 कविताएं हैं
06:48इसका कवर एक पसिद्य चित्रकार खुर्रम अमीर का बनाया हुआ है
06:54और तीन लेहकों ने
06:56शीला रोहेकर, किरन सिंग और बजरंग बिहारी तिवारी ने
07:02इस कविता संग्रा पर अपनी अपनी राय दी है
07:05जिसे किताब में च्छापा गया है
07:09शुभा सिंग की एक कविता पंक्ति है
07:11दिल ने कहा
07:13पध्धरी मौसम में
07:15करवाहट के सूखे पत्ते जर जाने का दिन है
07:20तो इस कविता संग्रा को पढ़ते हुए
07:23आप ये पाएंगे
07:25कि करवाहट के सूखे पत्ते
07:29एक गहन बिम्ब माला में
07:31जो शुभा सिंग की कविताओं की खास विशेष्टा है
07:34वो कैसे सूखे पत्ते जरते हैं
07:39ये इन कविताओं से गुजरते हुए
07:41आपको पता चलेगा
07:43तो ये एक जिसे कहा जा कि
07:46ये पठ्टनी समवेदनात्मक
07:49विचारशील कविताओं का संग्रह है
07:52जिसे देखा पढ़ा जाना चाहिए
07:55शुक्रिया
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