00:12झाल झाल
00:41देदी
00:44देदी
00:46क्या हो आशाती
00:47तुबीती व्याकुल की हो
00:50मैंने देखा
00:52मैंने देखा कुछ था
00:55समभब तर्स वापने था
00:56तुब आशा लग रहा था मानूस सच हो
01:00इतना अद्बुर
01:03इतना वजित्र
01:10वो वहाँ
01:13कहाँ
01:19सतीव वहाँ तो कुछ भी नहीं है
01:26तो क्या कह रही है
01:27मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है
01:32चल चल मेरे साथ
01:41बेटो
01:42शान्थ हो जाओ और बेटो
01:55चल करहें कर
02:15अब शान्थ होकर
02:16विस्तार में बता
02:20एक विचित्र आक्रती
02:25मृत्य करती हुई
02:32आधानर
02:34आधी नाडी
02:40वहाँ से मेरी उड़ चले आ रहे थे
02:46धुन्ध ही धुन्ध थे
02:52इसी कारण मुखाकृती सपश नहीं हो सकी
02:56पर नजानी क्यों ऐसा आभास हो रहा था
03:00कि मैं उन्हें जानती हूँ
03:03कि मेरा कोई सम्मंध हो उन से
03:08दिशेश रूप से उस नारी से
03:11मैंने ऐसी आक्रती पहले कभी नहीं देखी
03:16कभी उसकी कलपना भी नहीं की
03:20फिर मुझे ऐसा सुपने क्यों आया दे दी
03:25और वो परवत उसे तुम्हें आजीवन देखती आई हूँ
03:30और आज आज एक विच्छत्र सा आकर्शन था उसमें
03:37जैसे वो मुझे अपनी और बुला रहा हूँ
03:43मैं इन सब का क्या अर्थ निकालू देदी
03:46क्या था वो? कौन था?
03:50क्या वो मेरे भविश्य से जोड़े किसी प्रसंकी और संकेत था?
03:54या फिर मेरे भूत काल के भूली हुए कोई कड़ी।
04:06सती, तु चिंता मत कर।
04:09प्राया ऐसा भी होता है कि हमारे स्वपन बड़े ही विचित्र ढंग से
04:15हमारे मन के छुपे हुए भाओं को तर्शा जाते हैं।
04:20जिसका संबंध ना तो हमारे भविश्य से होता है ना ही हमारे भूत काल से।
04:29सती, तेरे लिए बीते हुए दिन बड़े ही तनाव पूर्णे रहे हैं।
04:35पिताची को तेरे कारण लज्जित होना पड़ा।
04:39वे तुझसे क्रोधित भी हुए, तुझे दंडित भी किया।
04:44इन सब का तेरे उपर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ा होगा।
04:51और ये स्वपन भी तेरी उसी व्याकुलता का प्रतीक है।
04:56तो चिंता मत कर, जैसे जैसे समय बितेगा, तेरा मन भी शांत हो जाएगा।
05:03और फिर इस प्रकार के स्वपन भी आने बंद हो जाएगे।
05:08सती, तेरे स्नान का समय हो रहा है।
05:26अधिजी ठीक कहती है, सपना ही रहा होगा।
05:31जिसका कोई अर्थी नहीं, मुझे अपने मन को और द्रिर बनाना होगा।
05:37ताकि पुने कोई ऐसा विचाए, मुझे विचलित ना कर सके।
05:45चाहे कुछ भी हो जाए।
05:47तुम लोग सती को बन में अखेला छोड़के नहीं लोटोगे।
05:50समझ में आया।
05:53भले ही सती तुम्हें लोटने का आदेश दे।
05:56किन्तु तुम सब उसकी इस आदेश का पालन नहीं करोगी।
06:00और हाँ, आवश्रिकता पड़े तो एक पाल की तयार रखना।
06:04कहीं सती को वहां से वापस लाना पड़ा तो।
06:08लीदी, मेरी तो कोई सुनता है नहीं।
06:18सती, उमारे खाव तो अभी भरे भी नहीं।
06:21और तुम।
06:33दीदी, मैं अपना ध्यान रखूंगी।
06:37मैं भचन देती हूं।
06:44मैं अपना रखूंगी।
06:52मैं अपना रखूंगी।
06:56मैं अपना रखूंगी।
06:59मैं अपना रखूंगी।
07:14मैं क्रूंगी।
07:27म suspension Goddess
07:48आपर लोग
08:18स्वाम, भोजन, मुझे बोजन की च्छनी है, और वैसे भी सभा के लिए देर हो रही है,
08:31स्वाम, सभा से आकर तो अजकारे बहुत है, भोजन के लिए वापस आना संभव नहीं है,
08:50अपना दुख व्यक्त करना निर्बल्टा का प्रतीक नहीं होता, स्वामी,
08:55कब तक, कब तक ये पिता, उस प्रजापती से हारता रहेगा, कब तक,
09:23कल की तरह आज भी, कमल के फूल मिलना दूभार लग रहा है,
09:31पर भगवान विश्णू की क्रिपास से कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा,
10:00उस भी एफवान विट्ड़ाय ओवान विखार लगवान विद्ड़का,
10:30झाल झाल
11:08प्रजबती दक्ष की पुत्री देवी सती को प्रणाम प्रणाम और आप जिस मूर्तिकार ने भवान विश्णो की वो बव्य मूर्ति
11:21बनाई थी हम उसी के समधाये के हैं
11:29देवी शेवलिंग स्थाफिक कर दीजिया भूर्तिका मंदीर में प्रवेश ना करना आपके पिता के लिए अपमांग जनक होगा प्रजा का
11:38उनपर से विश्वास उड़ जाएगा
11:55पर आप सब जा कहां रहे हैं
11:59पिता जी ने घाओ दिया पुत्री उनमें नमक लगा रही है जैसे कि यह कुछ जानती नहीं है इन्हीं की
12:05वज़े से थो हमारी यह दशा हुई है
12:11जब पूरे सत्य का पता ना हो तो चुप रहा करो
12:17इसमें देवी का क्या दोश है वो क्या कह रही है क्या हुआ
12:26उस दिन मंदर में मूर्थी स्थापना के समय जो कुछ भी हुआ
12:32उसके लिए प्रजापती ने अपने किशेतर से हमें बहिश्कृत कर दिया है
12:37क्या
12:43आप दुखी ना हो
12:47किन्तों आप सब जाएंगे कहा
12:52वही जहां नियम रीती नीती आडंबर जे मुक्तोने के परच्छा थी
12:57मुनश्य का जाना संभव हो सकता है
13:01महादेव की शर्ण है
13:07और प्रजापती ने तो स्वयम हमें ऐसी जीवन शैली से मुक्त करके
13:11महादेव के पास जाने का अफसर दे दिया है
13:13हमें दोनका आभारी होना चाहिए
13:19आप चिंतित क्यों है
13:23कमल के फूलों की खोज में हैं ना आप
13:29यहां से तीस कोस दूर एक विशाल कुंड है
13:32उसकी विशेश्टा यही है
13:35कि वहां सदैव अनगिनत कमल के लिए रहते हैं
13:41सच हां लेकिन वहां पहुचना रास्ता बहुत कठिन है
13:51यदि असंभव भी हो तो भी मैं अवश्य जाऊंगी
13:58मैं कबसे भटक रहे थी दुशा बताने के लिए धन्यवाद
14:05कंदी।
14:31हरुमात इडिए्टी
14:37झाल झाल
15:05झाल
15:43झाल
15:51झाल
15:53झाल
15:54झाल
15:58झाल
16:06झाल
16:30मैं शीग्री को जैसा करने जा रहा हूँ
16:33जिसके पशात आपके मादेव को यह अनभूती हो जाएगी
16:37के उसने प्रजापती दक्ष की शक्ति और उसके सामर्थ को आकने में कितनी बड़ी भूल की है
17:05आपके आपके आपके आपके दर्शुद कर लेता हूँ
17:11झाल