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This episode beautifully portrays Mahadev’s calm and divine nature as he protects the universe from negativity and destructive energies. Meanwhile, Sati’s faith and unwavering belief in Shiva show the beginning of a powerful spiritual bond. The episode highlights themes of devotion, destiny, and divine power, setting the stage for major events that will soon unfold.

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Transcript
00:12झाल झाल
00:41देदी
00:44देदी
00:46क्या हो आशाती
00:47तुबीती व्याकुल की हो
00:50मैंने देखा
00:52मैंने देखा कुछ था
00:55समभब तर्स वापने था
00:56तुब आशा लग रहा था मानूस सच हो
01:00इतना अद्बुर
01:03इतना वजित्र
01:10वो वहाँ
01:13कहाँ
01:19सतीव वहाँ तो कुछ भी नहीं है
01:26तो क्या कह रही है
01:27मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है
01:32चल चल मेरे साथ
01:41बेटो
01:42शान्थ हो जाओ और बेटो
01:55चल करहें कर
02:15अब शान्थ होकर
02:16विस्तार में बता
02:20एक विचित्र आक्रती
02:25मृत्य करती हुई
02:32आधानर
02:34आधी नाडी
02:40वहाँ से मेरी उड़ चले आ रहे थे
02:46धुन्ध ही धुन्ध थे
02:52इसी कारण मुखाकृती सपश नहीं हो सकी
02:56पर नजानी क्यों ऐसा आभास हो रहा था
03:00कि मैं उन्हें जानती हूँ
03:03कि मेरा कोई सम्मंध हो उन से
03:08दिशेश रूप से उस नारी से
03:11मैंने ऐसी आक्रती पहले कभी नहीं देखी
03:16कभी उसकी कलपना भी नहीं की
03:20फिर मुझे ऐसा सुपने क्यों आया दे दी
03:25और वो परवत उसे तुम्हें आजीवन देखती आई हूँ
03:30और आज आज एक विच्छत्र सा आकर्शन था उसमें
03:37जैसे वो मुझे अपनी और बुला रहा हूँ
03:43मैं इन सब का क्या अर्थ निकालू देदी
03:46क्या था वो? कौन था?
03:50क्या वो मेरे भविश्य से जोड़े किसी प्रसंकी और संकेत था?
03:54या फिर मेरे भूत काल के भूली हुए कोई कड़ी।
04:06सती, तु चिंता मत कर।
04:09प्राया ऐसा भी होता है कि हमारे स्वपन बड़े ही विचित्र ढंग से
04:15हमारे मन के छुपे हुए भाओं को तर्शा जाते हैं।
04:20जिसका संबंध ना तो हमारे भविश्य से होता है ना ही हमारे भूत काल से।
04:29सती, तेरे लिए बीते हुए दिन बड़े ही तनाव पूर्णे रहे हैं।
04:35पिताची को तेरे कारण लज्जित होना पड़ा।
04:39वे तुझसे क्रोधित भी हुए, तुझे दंडित भी किया।
04:44इन सब का तेरे उपर बड़ा ही गहरा प्रभाव पड़ा होगा।
04:51और ये स्वपन भी तेरी उसी व्याकुलता का प्रतीक है।
04:56तो चिंता मत कर, जैसे जैसे समय बितेगा, तेरा मन भी शांत हो जाएगा।
05:03और फिर इस प्रकार के स्वपन भी आने बंद हो जाएगे।
05:08सती, तेरे स्नान का समय हो रहा है।
05:26अधिजी ठीक कहती है, सपना ही रहा होगा।
05:31जिसका कोई अर्थी नहीं, मुझे अपने मन को और द्रिर बनाना होगा।
05:37ताकि पुने कोई ऐसा विचाए, मुझे विचलित ना कर सके।
05:45चाहे कुछ भी हो जाए।
05:47तुम लोग सती को बन में अखेला छोड़के नहीं लोटोगे।
05:50समझ में आया।
05:53भले ही सती तुम्हें लोटने का आदेश दे।
05:56किन्तु तुम सब उसकी इस आदेश का पालन नहीं करोगी।
06:00और हाँ, आवश्रिकता पड़े तो एक पाल की तयार रखना।
06:04कहीं सती को वहां से वापस लाना पड़ा तो।
06:08लीदी, मेरी तो कोई सुनता है नहीं।
06:18सती, उमारे खाव तो अभी भरे भी नहीं।
06:21और तुम।
06:33दीदी, मैं अपना ध्यान रखूंगी।
06:37मैं भचन देती हूं।
06:44मैं अपना रखूंगी।
06:52मैं अपना रखूंगी।
06:56मैं अपना रखूंगी।
06:59मैं अपना रखूंगी।
07:14मैं क्रूंगी।
07:27म suspension Goddess
07:48आपर लोग
08:18स्वाम, भोजन, मुझे बोजन की च्छनी है, और वैसे भी सभा के लिए देर हो रही है,
08:31स्वाम, सभा से आकर तो अजकारे बहुत है, भोजन के लिए वापस आना संभव नहीं है,
08:50अपना दुख व्यक्त करना निर्बल्टा का प्रतीक नहीं होता, स्वामी,
08:55कब तक, कब तक ये पिता, उस प्रजापती से हारता रहेगा, कब तक,
09:23कल की तरह आज भी, कमल के फूल मिलना दूभार लग रहा है,
09:31पर भगवान विश्णू की क्रिपास से कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा,
10:00उस भी एफवान विट्ड़ाय ओवान विखार लगवान विद्ड़का,
10:30झाल झाल
11:08प्रजबती दक्ष की पुत्री देवी सती को प्रणाम प्रणाम और आप जिस मूर्तिकार ने भवान विश्णो की वो बव्य मूर्ति
11:21बनाई थी हम उसी के समधाये के हैं
11:29देवी शेवलिंग स्थाफिक कर दीजिया भूर्तिका मंदीर में प्रवेश ना करना आपके पिता के लिए अपमांग जनक होगा प्रजा का
11:38उनपर से विश्वास उड़ जाएगा
11:55पर आप सब जा कहां रहे हैं
11:59पिता जी ने घाओ दिया पुत्री उनमें नमक लगा रही है जैसे कि यह कुछ जानती नहीं है इन्हीं की
12:05वज़े से थो हमारी यह दशा हुई है
12:11जब पूरे सत्य का पता ना हो तो चुप रहा करो
12:17इसमें देवी का क्या दोश है वो क्या कह रही है क्या हुआ
12:26उस दिन मंदर में मूर्थी स्थापना के समय जो कुछ भी हुआ
12:32उसके लिए प्रजापती ने अपने किशेतर से हमें बहिश्कृत कर दिया है
12:37क्या
12:43आप दुखी ना हो
12:47किन्तों आप सब जाएंगे कहा
12:52वही जहां नियम रीती नीती आडंबर जे मुक्तोने के परच्छा थी
12:57मुनश्य का जाना संभव हो सकता है
13:01महादेव की शर्ण है
13:07और प्रजापती ने तो स्वयम हमें ऐसी जीवन शैली से मुक्त करके
13:11महादेव के पास जाने का अफसर दे दिया है
13:13हमें दोनका आभारी होना चाहिए
13:19आप चिंतित क्यों है
13:23कमल के फूलों की खोज में हैं ना आप
13:29यहां से तीस कोस दूर एक विशाल कुंड है
13:32उसकी विशेश्टा यही है
13:35कि वहां सदैव अनगिनत कमल के लिए रहते हैं
13:41सच हां लेकिन वहां पहुचना रास्ता बहुत कठिन है
13:51यदि असंभव भी हो तो भी मैं अवश्य जाऊंगी
13:58मैं कबसे भटक रहे थी दुशा बताने के लिए धन्यवाद
14:05कंदी।
14:31हरुमात इडिए्टी
14:37झाल झाल
15:05झाल
15:43झाल
15:51झाल
15:53झाल
15:54झाल
15:58झाल
16:06झाल
16:30मैं शीग्री को जैसा करने जा रहा हूँ
16:33जिसके पशात आपके मादेव को यह अनभूती हो जाएगी
16:37के उसने प्रजापती दक्ष की शक्ति और उसके सामर्थ को आकने में कितनी बड़ी भूल की है
17:05आपके आपके आपके आपके दर्शुद कर लेता हूँ
17:11झाल

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