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the divine tension between cosmic forces takes center stage. Narad Muni arrives at Prajapati Daksh’s court just as Daksh announces that his sacred literature will intentionally ignore Lord Shiva and focus only on Brahma and Vishnu. Narad questions Sati about her father’s decision, asking whether Shiva should be included in the Vishnu sculpture her father is creating — but Sati insists it was merely a mistake and not deliberate. Afterward, Narad departs for Kailash Parvat where Lord Shiva remains deep in meditation, setting the stage for even greater spiritual conflict and divine revelation in the episodes ahead.

✨ Themes: devotion, divine identity, the clash between tradition and truth.👇👇

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Transcript
00:13एक अद्यंद महत्पूर्ण घोशना है
00:17जिसके लिए मैंने आप सब को यहां बुलाया है
00:21मैं एक आचार सहिता की रचना करने जा रहा हूँ
00:26जो दक्ष सहिता के नाम से जानी जाएगे
00:30उच्च जीवन के निर्वा हे तू इसमें बताये गए नियम सभी का मार्ट दर्शन करेंगे
00:38और इस सहिता से यह भी इस पश्ट हो जाएगा इस सभ्यता में यदि किसी की पूझा होगी
00:47केवल उनकी जो इस फ्रिस्टी की रचना करते हैं जो इसका संरक्षन करते हैं
01:01भगवान विश्णो प्रम्हा और इसके अत्रिक और कोई नहीं उसके पश्चाथ किसी के मन में यह संदे नहीं रहेगा
01:17कि एक सब्समाज में उस असभ्यव विनाशकारी शिव का पूझा योग कोई स्थान नहीं रहेगा
01:32प्रजापती प्रजापती
01:40देवरिशी नारत सभा क्यों रा रहे हैं
01:45नारायन नारायन
01:53रे अबोध दे मूड मेरे आगमन की घोशना करने की कोई आवशक्त नहीं है
02:00देवताओं से लेकर मनुष्य तक सब जानते हैं
02:04कि नारत को तो रमता जोगी होने का श्राप है
02:11समय की भाती नारत भी एक स्थान पर कहीं टिकर बैठी नहीं सकता
02:17कहीं भी किसी भीक्षन पस्तित हो जाता है
02:21एना प्रजापती
02:27प्रणा प्रणा देवर्शी नारत
02:33सब्त कहा आपने देवर्शी नारत
02:38चुकि आप इसे दूसरों के निजी जीवन में
02:42अस्तक्षेप करने की सुच्छन्दता मानते
02:47और इसी लिए आपका ये श्राप अभिशाप बन जाता है
02:52किसी के साथ कुछ भी कस्त प्रत गड़े
02:56वो आपके लिए आनंद प्रत हो जाता है
03:01स्नेह
03:02प्रजापती का अपरमपार स्नेह है मुझसे
03:05और क्यों नहों
03:08हमारे पिता भी तो एक ही है
03:11प्रह्मदेव
03:12और हमारे इश्ट देव भी एक ही है
03:16भगवान विश्णू कहिए
03:20मेरे इस अनुशाष्ट
03:23और सुव्यवस्थित नगर में
03:28आपकी उपस्तिती का कारण क्या है
03:33प्रजापती
03:33मैंने सुना है कि
03:35आप किसी दक्स सहिता की रचना कर रहे हैं
03:39आचार सहिता जैसा कुछ
03:42ठीक सुना है आपने
03:44
03:46तो क्या वो सारी बातें सत्य हैं
03:49कौन सी बातें
03:50नहीं मैंने सुना है कि
03:55नारायन नारायन
03:57जाने दीजिये क्या बात करनी
03:59क्या सुना है आपने देवर्शी
04:02सुना है कि आपके निजी जीवन पर आजकल
04:05महादेव का गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है
04:10कि और ये भी सुना है कि सती ने नारायन मूर्ती स्थापना में शिवलिंग की स्थापना करती तो विश्वासी नहीं
04:21कर पाया प्रजापती आपको बड़ा दुख हुआ होगा न या फिर कहीं ऐसा तो नहीं प्रजापती कि आप स्वयम महादेव
04:34के साथ संधी करने का विचार
04:37कर रहे हैं मुझे विश्वास था इसी लिए आप यहां आए जितना मैं आपको जानता हूं समस्तर यहां आए हैं
04:49तो यहां से सीधे आप शिव के पास जाएं तो कह दीजेगा उस शिव से
04:59यह उसकी खुरूरता ने प्रजापती दक्ष के संकल्प को और भी द्रण कर दिया है
05:09मैं शीगिरी को जैसा करने जा रहा हूं जिसके पश्चात आपके महादेव को यह अनुभुती हो जाएगी
05:17यह उसने प्रजापती दक्ष की शक्ति और उसके सामर्च को आखने में कितनी पड़ी भूल की
05:30नारायन नारायन चलो नारत समय कम है और काम बहुत नारायन नारायन प्रणाम प्रजापती
05:44रांदेवर शिला
06:15आहाहाहा देवी सती के दर्शन आहाहा हुआ प्रुंतु इस दशा में है ओहोओ भूले नाद भूले नाद
06:27महादेव मैं आ रहा हूँ परन्तु पहले यहां का तापमान तो नापनू नारायन नारायन नारायन नारायन
06:42प्रनाम मुनिवर सुखी रहो सती परन्तु तुम कुछ दुखी सी लग रही हो
06:54यह क्या है प्रायश्च्ट प्रायश्च्ट ने ऐसा क्या कर दिया जो उसे प्रायश्च्ट करना पड़ रहा है
07:09था कुछ पिताजी का आदेश है कि मैं एक लाग कमलों पर विश्नु नाम लिख कर इसे पूरा करो
07:16या तेरे ही हो सती, यदि दंड इतना कठिन है तो अपराद भी उतना ही बड़ा होगा
07:31जाने दो, घाओं कुरेदने का मेरा सुभाव ही नहीं है
07:36और भूल तो हम सभी से हो जाती है
07:41वैसे सती, मैंने सुना है कि तुमने बहुत बड़ा कारेकर दिखाया है
07:50पिताद्वारा आयोजित विष्टू मूर्ती स्थापना में तुमने महादेव को बुला लिया
07:57सती, तुम इतनी साहसी हो ज़े ग्यात नहीं था
08:01वो साहत नहीं, मेरी मूर्खता थी, भूल की थी मैंने
08:09पिताजी को दुखी किया, उसी का प्रायश्चित कर रही हूँ
08:13मैं कदापी उस प्रसंग की चर्चा नहीं करना चाहती
08:17क्यों क्यों, क्या तुम्हें महादेव इतने बुरे लगे
08:24हाँ, वेशबूशा से तो सब्जे नहीं है, परंतु दिखने में तो दिख थाक है
08:32और ये तो कहना होगा सथी, कि उनके व्यक्ठित्व का अपना ही एक आकर्शन आवश्य है
08:40शमा कीजिए देवर्शी, इस प्रायश्चित को पूरा करने के लिए में समय बद हूँ
08:46मुझे आज्या दीजी, रणा
08:58नारायन, नारायन, महादेव, यहां का ताकुमार तो बढ़ा हुआ ही है इस समय
09:06और इससे पहले कि यहां की ग्रीश्मरतु आपके कैलाश परवत की सारी बर्व पिगला दे
09:12मैं आपके दर्शन कर लेता हूँ
09:15और अब मेरे पास तो आपके दर्शन का कारण भी है
09:21नारायन, नारायन, नारायन, नारायन
09:39वाह, महादेव, वाह, विश्व के सबसे उचे परवत पर बैठे हैं, संसार के सारे जहमेलों से दूर, ले लीजिये, जितना
09:51अनन लेना चाहते हैं अपने योग का, वैरा का,
09:54परंतु शीग्र ही ये सब बदलने वाला है, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, नारायन, नारायन, पेचारी सती,
10:14कहां उन भव्य महलों में रहने वाली, चंदन और घी की सुगन में खिलने वाली, इन स्मशान और सन्यासियों के
10:25साथ कैसे जियेगी,
10:33नारत मुनी, आपके मनोरंजन की पूर्ण विवस्था हो रही है, नारायन, नारायन,
10:52आपके मनोरंजन की पूर्ण विवस्था हो रही है, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन,
11:05नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, न
11:18महादेव तक पमचरी के लिए प्रेट और गंच से मिलना अनिवार है दूरी बनाए रखो उझे दूरी बनाए रखो तुम्हारी
11:26गंच मुझसे छेली नहीं जा रही
11:34क्या मतलब मैं महादेव के दर्शन है तुम्हारे हर प्रशन का उत्तर दू अरे दिवर्शी आप तो क्रोधित हो रहे
11:55हैं चक्कर क्या है की
11:57आप सारे सारे ब्रह्मान का ब्रह्मन मिचरते रहते हैं इतना कुछ देखते हैं इतना कुछ सुनते हैं और हम हमें
12:07देखिया हमें तो यहां से नीचे जाने के अनुमती ही नहीं अनुमती ही नहीं बस जब केवल कहीं हमें मादेव
12:13भेशते हैं यह से अपने साथ लिकर जाते
12:17इसी ल्ए हमें कुछ पता ही नहीं चलता कि दीचे चल क्या रहा है अब आज से घ्यानी से बात
12:22करकर कि हमारा घ्ञान
12:24पढ़ती है तो आप लोगों की जानकारी के लिए एक बास आप लोगों बतादू है कि यहां कोई आने वाला
12:37है कौर
12:42है एक स्त्री का अगमंद्र यह जो तिन बर आराम से पैट कर आँ चिरिम भूखते हैं यह सारी सतंत्रता
12:55हमसे जिन जाएगी
12:58किसी भी स्त्री का स्कैलास पर कोई काम नहीं कोई काम नहीं
13:14प्रणाम देवर्शी नारत तुम दोनों सुधरने वाले नहीं हो क्यों साताते हो देवर्शी नारत को अचाओ अचाओ यहां से
13:30देवर्शी नारत आपका कैलाश पर नंदी सोगत करो
13:38अचाओ ।
14:06कर दो कर दो कर दो दो
14:40कर दो दो दो कर दो मैं sü सक्कान एफॉर नीजन
15:01कर दो कर दो
15:04कर दो कर दो कर दो
15:12शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव
15:20शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव
15:27शिव शिव शिव शिव शि
15:35Maha Vali Shiva
16:00Media
16:01Shiva shiba, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva
16:15नारत मैं दक्ष के उस मंदिर में सती के बुलाने पर गया आवश्य था था पर केवल इसी लिए क्यूंकि
16:24सती ने सच्छे मन से सची श्रथा से मुझे पुकारा था
16:31एक वक्त के अलावा मेरे जीवन में ना सती का कोई मैत्व है ना हिस्थान
16:43का कुष कुष कर देिर तास्त शिते का क
17:01झाल झाल

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