00:13एक अद्यंद महत्पूर्ण घोशना है
00:17जिसके लिए मैंने आप सब को यहां बुलाया है
00:21मैं एक आचार सहिता की रचना करने जा रहा हूँ
00:26जो दक्ष सहिता के नाम से जानी जाएगे
00:30उच्च जीवन के निर्वा हे तू इसमें बताये गए नियम सभी का मार्ट दर्शन करेंगे
00:38और इस सहिता से यह भी इस पश्ट हो जाएगा इस सभ्यता में यदि किसी की पूझा होगी
00:47केवल उनकी जो इस फ्रिस्टी की रचना करते हैं जो इसका संरक्षन करते हैं
01:01भगवान विश्णो प्रम्हा और इसके अत्रिक और कोई नहीं उसके पश्चाथ किसी के मन में यह संदे नहीं रहेगा
01:17कि एक सब्समाज में उस असभ्यव विनाशकारी शिव का पूझा योग कोई स्थान नहीं रहेगा
01:32प्रजापती प्रजापती
01:40देवरिशी नारत सभा क्यों रा रहे हैं
01:45नारायन नारायन
01:53रे अबोध दे मूड मेरे आगमन की घोशना करने की कोई आवशक्त नहीं है
02:00देवताओं से लेकर मनुष्य तक सब जानते हैं
02:04कि नारत को तो रमता जोगी होने का श्राप है
02:11समय की भाती नारत भी एक स्थान पर कहीं टिकर बैठी नहीं सकता
02:17कहीं भी किसी भीक्षन पस्तित हो जाता है
02:21एना प्रजापती
02:27प्रणा प्रणा देवर्शी नारत
02:33सब्त कहा आपने देवर्शी नारत
02:38चुकि आप इसे दूसरों के निजी जीवन में
02:42अस्तक्षेप करने की सुच्छन्दता मानते
02:47और इसी लिए आपका ये श्राप अभिशाप बन जाता है
02:52किसी के साथ कुछ भी कस्त प्रत गड़े
02:56वो आपके लिए आनंद प्रत हो जाता है
03:01स्नेह
03:02प्रजापती का अपरमपार स्नेह है मुझसे
03:05और क्यों नहों
03:08हमारे पिता भी तो एक ही है
03:11प्रह्मदेव
03:12और हमारे इश्ट देव भी एक ही है
03:16भगवान विश्णू कहिए
03:20मेरे इस अनुशाष्ट
03:23और सुव्यवस्थित नगर में
03:28आपकी उपस्तिती का कारण क्या है
03:33प्रजापती
03:33मैंने सुना है कि
03:35आप किसी दक्स सहिता की रचना कर रहे हैं
03:39आचार सहिता जैसा कुछ
03:42ठीक सुना है आपने
03:44ओ
03:46तो क्या वो सारी बातें सत्य हैं
03:49कौन सी बातें
03:50नहीं मैंने सुना है कि
03:55नारायन नारायन
03:57जाने दीजिये क्या बात करनी
03:59क्या सुना है आपने देवर्शी
04:02सुना है कि आपके निजी जीवन पर आजकल
04:05महादेव का गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है
04:10कि और ये भी सुना है कि सती ने नारायन मूर्ती स्थापना में शिवलिंग की स्थापना करती तो विश्वासी नहीं
04:21कर पाया प्रजापती आपको बड़ा दुख हुआ होगा न या फिर कहीं ऐसा तो नहीं प्रजापती कि आप स्वयम महादेव
04:34के साथ संधी करने का विचार
04:37कर रहे हैं मुझे विश्वास था इसी लिए आप यहां आए जितना मैं आपको जानता हूं समस्तर यहां आए हैं
04:49तो यहां से सीधे आप शिव के पास जाएं तो कह दीजेगा उस शिव से
04:59यह उसकी खुरूरता ने प्रजापती दक्ष के संकल्प को और भी द्रण कर दिया है
05:09मैं शीगिरी को जैसा करने जा रहा हूं जिसके पश्चात आपके महादेव को यह अनुभुती हो जाएगी
05:17यह उसने प्रजापती दक्ष की शक्ति और उसके सामर्च को आखने में कितनी पड़ी भूल की
05:30नारायन नारायन चलो नारत समय कम है और काम बहुत नारायन नारायन प्रणाम प्रजापती
05:44रांदेवर शिला
06:15आहाहाहा देवी सती के दर्शन आहाहा हुआ प्रुंतु इस दशा में है ओहोओ भूले नाद भूले नाद
06:27महादेव मैं आ रहा हूँ परन्तु पहले यहां का तापमान तो नापनू नारायन नारायन नारायन नारायन
06:42प्रनाम मुनिवर सुखी रहो सती परन्तु तुम कुछ दुखी सी लग रही हो
06:54यह क्या है प्रायश्च्ट प्रायश्च्ट ने ऐसा क्या कर दिया जो उसे प्रायश्च्ट करना पड़ रहा है
07:09था कुछ पिताजी का आदेश है कि मैं एक लाग कमलों पर विश्नु नाम लिख कर इसे पूरा करो
07:16या तेरे ही हो सती, यदि दंड इतना कठिन है तो अपराद भी उतना ही बड़ा होगा
07:31जाने दो, घाओं कुरेदने का मेरा सुभाव ही नहीं है
07:36और भूल तो हम सभी से हो जाती है
07:41वैसे सती, मैंने सुना है कि तुमने बहुत बड़ा कारेकर दिखाया है
07:50पिताद्वारा आयोजित विष्टू मूर्ती स्थापना में तुमने महादेव को बुला लिया
07:57सती, तुम इतनी साहसी हो ज़े ग्यात नहीं था
08:01वो साहत नहीं, मेरी मूर्खता थी, भूल की थी मैंने
08:09पिताजी को दुखी किया, उसी का प्रायश्चित कर रही हूँ
08:13मैं कदापी उस प्रसंग की चर्चा नहीं करना चाहती
08:17क्यों क्यों, क्या तुम्हें महादेव इतने बुरे लगे
08:24हाँ, वेशबूशा से तो सब्जे नहीं है, परंतु दिखने में तो दिख थाक है
08:32और ये तो कहना होगा सथी, कि उनके व्यक्ठित्व का अपना ही एक आकर्शन आवश्य है
08:40शमा कीजिए देवर्शी, इस प्रायश्चित को पूरा करने के लिए में समय बद हूँ
08:46मुझे आज्या दीजी, रणा
08:58नारायन, नारायन, महादेव, यहां का ताकुमार तो बढ़ा हुआ ही है इस समय
09:06और इससे पहले कि यहां की ग्रीश्मरतु आपके कैलाश परवत की सारी बर्व पिगला दे
09:12मैं आपके दर्शन कर लेता हूँ
09:15और अब मेरे पास तो आपके दर्शन का कारण भी है
09:21नारायन, नारायन, नारायन, नारायन
09:39वाह, महादेव, वाह, विश्व के सबसे उचे परवत पर बैठे हैं, संसार के सारे जहमेलों से दूर, ले लीजिये, जितना
09:51अनन लेना चाहते हैं अपने योग का, वैरा का,
09:54परंतु शीग्र ही ये सब बदलने वाला है, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, नारायन, नारायन, पेचारी सती,
10:14कहां उन भव्य महलों में रहने वाली, चंदन और घी की सुगन में खिलने वाली, इन स्मशान और सन्यासियों के
10:25साथ कैसे जियेगी,
10:33नारत मुनी, आपके मनोरंजन की पूर्ण विवस्था हो रही है, नारायन, नारायन,
10:52आपके मनोरंजन की पूर्ण विवस्था हो रही है, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन,
11:05नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, नारायन, न
11:18महादेव तक पमचरी के लिए प्रेट और गंच से मिलना अनिवार है दूरी बनाए रखो उझे दूरी बनाए रखो तुम्हारी
11:26गंच मुझसे छेली नहीं जा रही
11:34क्या मतलब मैं महादेव के दर्शन है तुम्हारे हर प्रशन का उत्तर दू अरे दिवर्शी आप तो क्रोधित हो रहे
11:55हैं चक्कर क्या है की
11:57आप सारे सारे ब्रह्मान का ब्रह्मन मिचरते रहते हैं इतना कुछ देखते हैं इतना कुछ सुनते हैं और हम हमें
12:07देखिया हमें तो यहां से नीचे जाने के अनुमती ही नहीं अनुमती ही नहीं बस जब केवल कहीं हमें मादेव
12:13भेशते हैं यह से अपने साथ लिकर जाते
12:17इसी ल्ए हमें कुछ पता ही नहीं चलता कि दीचे चल क्या रहा है अब आज से घ्यानी से बात
12:22करकर कि हमारा घ्ञान
12:24पढ़ती है तो आप लोगों की जानकारी के लिए एक बास आप लोगों बतादू है कि यहां कोई आने वाला
12:37है कौर
12:42है एक स्त्री का अगमंद्र यह जो तिन बर आराम से पैट कर आँ चिरिम भूखते हैं यह सारी सतंत्रता
12:55हमसे जिन जाएगी
12:58किसी भी स्त्री का स्कैलास पर कोई काम नहीं कोई काम नहीं
13:14प्रणाम देवर्शी नारत तुम दोनों सुधरने वाले नहीं हो क्यों साताते हो देवर्शी नारत को अचाओ अचाओ यहां से
13:30देवर्शी नारत आपका कैलाश पर नंदी सोगत करो
13:38अचाओ ।
14:06कर दो कर दो कर दो दो
14:40कर दो दो दो कर दो मैं sü सक्कान एफॉर नीजन
15:01कर दो कर दो
15:04कर दो कर दो कर दो
15:12शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव
15:20शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव शिव
15:27शिव शिव शिव शिव शि
15:35Maha Vali Shiva
16:00Media
16:01Shiva shiba, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva, Shiva
16:15नारत मैं दक्ष के उस मंदिर में सती के बुलाने पर गया आवश्य था था पर केवल इसी लिए क्यूंकि
16:24सती ने सच्छे मन से सची श्रथा से मुझे पुकारा था
16:31एक वक्त के अलावा मेरे जीवन में ना सती का कोई मैत्व है ना हिस्थान
16:43का कुष कुष कर देिर तास्त शिते का क
17:01झाल झाल