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the tensions between King Daksh and Lord Shiva continue to rise. King Daksh remains unshaken in his plans to punish Sati for her loyalty to Shiva, ignoring heartfelt pleas from his wife Prasuti and others to show mercy. Even the respected sage Bhrigu supports Daksh’s harsh decision rather than easing Sati’s suffering. As the conflict deepens, the gods begin to discuss the growing arrogance of Daksh and its possible consequences for the cosmic balance. Meanwhile, Sati experiences a powerful vision of Lord Shiva, reflecting her deep spiritual connection with him and foreshadowing events that will intensify the rivalry between devotion and destiny.👇👇

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Transcript
00:15पिताजी आपको इतना मान देते हैं
00:18कोई भी निर्णने आपके परामर्श के बिना नहीं लेते
00:23उनकी हर योजना में आपकी सहमती होती है
00:27तो क्या सबते रिशी भ्रिगू के लिए ये संभब नहीं
00:30कि वे पिताजी से कहके सती की दंडादेश की कठोड़ता को कम करा सके
00:48उसकी दशा देखी है आपने
00:52जैसे कोई अपराद ही नहीं हो ऐसा भी कोई अपराद नहीं किया उसने
00:57जिसके लिए उसे इतना दंडित किया जाए
01:01ये अन्याय है
01:04यही न्याय है
01:07प्रजापती दक्ष के निर्णे की महनता देखिए
01:10अपने पुत्री को इस प्रकार दंडित करने में कैसी महनता
01:14अपने विचारों के संकीरनता से बाहर निकल कर इसे देखिए
01:19अपने स्वार्थ के आवरन हटा कर
01:22किसी दूसरे को कठोड़ दंड कोई भी दे सकता है
01:27किन्तो अपने सबसे प्रिय पुत्री को
01:29जिसमें प्रान बसते हो उसे सीमा लांगने के लिए इतना कठोड़ दंडे पाना
01:35ये है महानविक दित्वा
01:38वो चाहते तो सब शमा कर सकते थे
01:42कौन प्रशन उठा था उनके इस निरने पर
01:44ये सब आपके पिता की शिव विरोधी गदिविधियों का परिणाम है
01:50उनकी सती को शिव से दूर करने की योजना
01:54सती को शिव के और निकट लाती जा रही है
01:59योजना
02:02आपको लगता है ये पिताजी की योजना है
02:10शिव को अपमानित करने के लिए प्रजापती ने
02:12विश्णु मूर्ती में शिवलिंग की स्थापना नहीं की
02:17परिणाम सती का दधीची के आश्रम जाना
02:22शिव के नाम से परिचित होना
02:26और प्रजापती दक्ष द्वारा निर्धारित प्राश्चित करने के लिए
02:31सती जिस तरहे का जीवन निर्वाह कर रही है
02:37वो स्वयम शिव की जीवन शैली ही तो है
02:42प्रजापती ने सती को जिस मार्ग पर चलने को विवश्च कर दिया है
02:51वहां से अब सती का लौटना संभव नहीं
03:11प्रौटना संभव नहीं
03:40कर दो कर दो
04:12कर दो
04:13कर दो
04:15कर दो
04:18कर दो
04:20कर दो
04:21कर दो
04:35उचेंगे नहीं की सथी कैसी है
04:43एक पर चल कर देखेंगे नहीं
04:46कैसे उसके पाउं के
04:49छाले
04:58याद है आपको
05:01जब सती छोटी थी
05:03और कभी अस्वस्थ हो जाये करती थी
05:08आपका तो
05:09किसी कारे में मन नहीं लगता था
05:15जब तक उठीक नहीं हो जाती थी
05:18आप उसके पास ही बैठे रहते थे
05:20मानो अब लाचार हो
05:33इस बार मैं लाचार नहीं हो प्रसुती
05:40सती के शरीर सती के मन
05:42और सती की आत्मा पर लगा हुआ एक एगाओ
05:46और उसकी हर पीड़ा से
05:48जतना दुख आज मुझे हो रहा है
05:50उससे पहले कभी नहीं
05:54क्योंकि मैं जानता हूँ कि सती को इस बार
05:58मेरे विरुद्ध हतियार बनाया क्या
06:02मुझे शती नहीं पहचा सके
06:05तो मेरी पुत्री को माध्यम बना लिया
06:10और इसकी शती पूर्ती तर्शिव को करनी ही पढ़ेगी
06:15चुकाना होगा उसे मेरी पुत्री पर आया हुआ
06:17एक-एक कश्ट का रिण
06:22अपनी सहिता के हर शब्द हर नियम दौरा
06:25मैं शिव के दुसास और उसकी चाल का उत्तर देने चाह रहा हूँ
06:34अपनी सती का घाव भरने से पहले
06:38मैं इस सहिता के हर नियम को तजा के लिए अन्वार बना दूँगा
06:46सदी की पीड़ा मिटने से पहले है
06:50मैं शिव कर नामी मिटा ना
06:56शांता कारम
07:00भुजग शयनम
07:07पत्मनाभं सुरेशं
07:11वन्दे विष्णू
07:16भवभयहरं
07:20सर्वलो कैकनाथं
07:26प्रणाम प्रभु
07:33प्रणाम प्रमदेव
07:37क्या बात है आप चिंतित लग रहे हैं
07:41मेरा मानस पुत्र दक्ष
07:43उसे मैंने प्रजापती न्युक्त किया था
07:47ताकि जिस संसार की मैंने रचना की है
07:50वो उसका संचालन करें
07:54किंतु अपने करतव्य का निर्वाह करते करते
07:57वो अपनी मर्यादा ही भूल बैठा है
08:03क्यूं? क्यूं कर रहा है वो ये सब?
08:07क्या आप इसका कारण नहीं जानते?
08:10जानता हूं
08:12मेरे ही अहंकार का तो मानवी करण है
08:16ये मेरा मानस पुत्र दक्ष
08:20जिस प्रकार
08:22मुझे इस संसार की रचना करने का घमंड हो गया था
08:26ठीक उसी प्रकार
08:27दक्ष को भी
08:29इस संसार के संचालक होने का घमंड हो गया है
08:33क्यों?
08:36महादेव ने जो आपको
08:37पूजा अर्चना से वहिशकृत कर दिया था
08:40क्या उसका क्लेश नहीं है पिताच्री?
08:43क्लेश एक बात है नारद
08:46परन्तु इस कारण से
08:48वो महादेव से अपनी तुनला
08:50नहीं कर सकता
08:52दक्ष को अहंकार हो गया है
08:54कि भगवान की
08:56विभूतियों में उसका भी वही स्थान है
08:58जो महादेव का है
09:00इसका क्या हल है भगवन?
09:04आपके अहंकार का पांचवा सिर
09:06महादेव ने काटा था
09:09तो दक्ष के कर्म भी
09:11महादेव तक उसको पहुँचा ही देंगे
09:16परन्तु भगवन
09:17पिता ब्रह्मा के पांच सर थे
09:19एक कट गया
09:21चार रह गये
09:22परन्तु भाता दक्ष का तो केवल एक ही सर है
09:25यदि वो भी कड़ जा है तो
09:31माना
09:31माना कि महादेव का इस प्रकार से विरोध करना अच्छी बात नहीं है
09:37परन्तु भाता दक्ष ने भी
09:39कटोर परिश्रम से नगर संस्क्रति की स्थापना की है
09:42कर्मकांड की स्थापना की है
09:44प्रत्वी को जीवन निर्वाह के योग्य बनाया है
09:47और वो तो आप ही की उपासना करते हैं प्रभू
09:52और अब तो मनुष्य का जीवन आदर्श जीवन व्यतीत करवाने के लिए
09:56उन्होंने दक्ष सहिता भी रचली है
09:59अब उनकी इतनी उपलब्दियों को भूल कर
10:15मक्षमा करें प्रभू ये मेरे अपने विचार है
10:17और दूसरी ओर है महादेव कर्मकान, सांसारी क्रीती, नीती
10:23इनसे उनको कोई ले ना देना ले
10:27वो तो ध्यान, मगन बैठे रहते हैं अपने कहला आश्पर
10:32जब उन्होंने अपनीक आराधना के लिए अपने भक्तों से किसी नियम के पालन की अपेक्षा नहीं रखी
10:38तो दक्स के किसी दियम का उनका क्यों प्रवाव पड़े
10:42वैरागी के लिए ये सारी चीज़ें किस काम थी
10:48वैसे प्रभू वैरागी से याद आया
10:53क्या हमारे महादेव सदेव वेरागी ही बने रहेंगे या फिर
11:01शिवका पूर्ण वेराग तो हमारे लिए भी चिंता का विशे
11:06पर उन्हें कैसे समझाएं कि उनकी यह अना सक्ति संसार के लिए
11:11शुजन के लिए लाबदायक नहीं है
11:13भबन
11:21आप चाहे कितना भी चिंतन कर ले
11:24उपाय के लिए आपको मेरे पास ही आना होगा
11:31सत्ति कहा आपने
11:33आपके बिना विश्नु का तो कोई अस्तित्वे ही नहीं
11:37पूरुवकाल में महादेव नहीं कहा था न
11:39कि वो एक स्त्री से विवाह करके
11:41लोग के उत्तम कारे की सिद्धी करेंगे
11:45जी
11:47कहा था
11:48दक्षपुत्री सत्ति के रूप में जन्मी
11:50देवी शक्ती ही तो वो स्त्री है
11:57अब देर है तो केवल
11:58महादेव को सत्ति के और आकरशित होने की
12:03उसके पश्चात
12:05वो अपने को सती से अलग नहीं कर पाएंगे
12:43हैं वो अपने को सती संधियर का है
12:43है एंप लो अपने को स्वीन है
12:58है आत रचा से कथाया नहीं कर दिए
13:03कर दो कर दो
13:32कर दो
13:58कर दो
13:59झाल झाल
14:33झाल
15:25झाल
15:38झाल
15:47झाल
15:52झाल
15:59झाल
16:03झाल
16:04झाल
16:05झाल
16:07झाल
16:07झाल
16:08झाल
16:08झाल
16:08झाल
16:08झाल
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