00:15पिताजी आपको इतना मान देते हैं
00:18कोई भी निर्णने आपके परामर्श के बिना नहीं लेते
00:23उनकी हर योजना में आपकी सहमती होती है
00:27तो क्या सबते रिशी भ्रिगू के लिए ये संभब नहीं
00:30कि वे पिताजी से कहके सती की दंडादेश की कठोड़ता को कम करा सके
00:48उसकी दशा देखी है आपने
00:52जैसे कोई अपराद ही नहीं हो ऐसा भी कोई अपराद नहीं किया उसने
00:57जिसके लिए उसे इतना दंडित किया जाए
01:01ये अन्याय है
01:04यही न्याय है
01:07प्रजापती दक्ष के निर्णे की महनता देखिए
01:10अपने पुत्री को इस प्रकार दंडित करने में कैसी महनता
01:14अपने विचारों के संकीरनता से बाहर निकल कर इसे देखिए
01:19अपने स्वार्थ के आवरन हटा कर
01:22किसी दूसरे को कठोड़ दंड कोई भी दे सकता है
01:27किन्तो अपने सबसे प्रिय पुत्री को
01:29जिसमें प्रान बसते हो उसे सीमा लांगने के लिए इतना कठोड़ दंडे पाना
01:35ये है महानविक दित्वा
01:38वो चाहते तो सब शमा कर सकते थे
01:42कौन प्रशन उठा था उनके इस निरने पर
01:44ये सब आपके पिता की शिव विरोधी गदिविधियों का परिणाम है
01:50उनकी सती को शिव से दूर करने की योजना
01:54सती को शिव के और निकट लाती जा रही है
01:59योजना
02:02आपको लगता है ये पिताजी की योजना है
02:10शिव को अपमानित करने के लिए प्रजापती ने
02:12विश्णु मूर्ती में शिवलिंग की स्थापना नहीं की
02:17परिणाम सती का दधीची के आश्रम जाना
02:22शिव के नाम से परिचित होना
02:26और प्रजापती दक्ष द्वारा निर्धारित प्राश्चित करने के लिए
02:31सती जिस तरहे का जीवन निर्वाह कर रही है
02:37वो स्वयम शिव की जीवन शैली ही तो है
02:42प्रजापती ने सती को जिस मार्ग पर चलने को विवश्च कर दिया है
02:51वहां से अब सती का लौटना संभव नहीं
03:11प्रौटना संभव नहीं
03:40कर दो कर दो
04:12कर दो
04:13कर दो
04:15कर दो
04:18कर दो
04:20कर दो
04:21कर दो
04:35उचेंगे नहीं की सथी कैसी है
04:43एक पर चल कर देखेंगे नहीं
04:46कैसे उसके पाउं के
04:49छाले
04:58याद है आपको
05:01जब सती छोटी थी
05:03और कभी अस्वस्थ हो जाये करती थी
05:08आपका तो
05:09किसी कारे में मन नहीं लगता था
05:15जब तक उठीक नहीं हो जाती थी
05:18आप उसके पास ही बैठे रहते थे
05:20मानो अब लाचार हो
05:33इस बार मैं लाचार नहीं हो प्रसुती
05:40सती के शरीर सती के मन
05:42और सती की आत्मा पर लगा हुआ एक एगाओ
05:46और उसकी हर पीड़ा से
05:48जतना दुख आज मुझे हो रहा है
05:50उससे पहले कभी नहीं
05:54क्योंकि मैं जानता हूँ कि सती को इस बार
05:58मेरे विरुद्ध हतियार बनाया क्या
06:02मुझे शती नहीं पहचा सके
06:05तो मेरी पुत्री को माध्यम बना लिया
06:10और इसकी शती पूर्ती तर्शिव को करनी ही पढ़ेगी
06:15चुकाना होगा उसे मेरी पुत्री पर आया हुआ
06:17एक-एक कश्ट का रिण
06:22अपनी सहिता के हर शब्द हर नियम दौरा
06:25मैं शिव के दुसास और उसकी चाल का उत्तर देने चाह रहा हूँ
06:34अपनी सती का घाव भरने से पहले
06:38मैं इस सहिता के हर नियम को तजा के लिए अन्वार बना दूँगा
06:46सदी की पीड़ा मिटने से पहले है
06:50मैं शिव कर नामी मिटा ना
06:56शांता कारम
07:00भुजग शयनम
07:07पत्मनाभं सुरेशं
07:11वन्दे विष्णू
07:16भवभयहरं
07:20सर्वलो कैकनाथं
07:26प्रणाम प्रभु
07:33प्रणाम प्रमदेव
07:37क्या बात है आप चिंतित लग रहे हैं
07:41मेरा मानस पुत्र दक्ष
07:43उसे मैंने प्रजापती न्युक्त किया था
07:47ताकि जिस संसार की मैंने रचना की है
07:50वो उसका संचालन करें
07:54किंतु अपने करतव्य का निर्वाह करते करते
07:57वो अपनी मर्यादा ही भूल बैठा है
08:03क्यूं? क्यूं कर रहा है वो ये सब?
08:07क्या आप इसका कारण नहीं जानते?
08:10जानता हूं
08:12मेरे ही अहंकार का तो मानवी करण है
08:16ये मेरा मानस पुत्र दक्ष
08:20जिस प्रकार
08:22मुझे इस संसार की रचना करने का घमंड हो गया था
08:26ठीक उसी प्रकार
08:27दक्ष को भी
08:29इस संसार के संचालक होने का घमंड हो गया है
08:33क्यों?
08:36महादेव ने जो आपको
08:37पूजा अर्चना से वहिशकृत कर दिया था
08:40क्या उसका क्लेश नहीं है पिताच्री?
08:43क्लेश एक बात है नारद
08:46परन्तु इस कारण से
08:48वो महादेव से अपनी तुनला
08:50नहीं कर सकता
08:52दक्ष को अहंकार हो गया है
08:54कि भगवान की
08:56विभूतियों में उसका भी वही स्थान है
08:58जो महादेव का है
09:00इसका क्या हल है भगवन?
09:04आपके अहंकार का पांचवा सिर
09:06महादेव ने काटा था
09:09तो दक्ष के कर्म भी
09:11महादेव तक उसको पहुँचा ही देंगे
09:16परन्तु भगवन
09:17पिता ब्रह्मा के पांच सर थे
09:19एक कट गया
09:21चार रह गये
09:22परन्तु भाता दक्ष का तो केवल एक ही सर है
09:25यदि वो भी कड़ जा है तो
09:31माना
09:31माना कि महादेव का इस प्रकार से विरोध करना अच्छी बात नहीं है
09:37परन्तु भाता दक्ष ने भी
09:39कटोर परिश्रम से नगर संस्क्रति की स्थापना की है
09:42कर्मकांड की स्थापना की है
09:44प्रत्वी को जीवन निर्वाह के योग्य बनाया है
09:47और वो तो आप ही की उपासना करते हैं प्रभू
09:52और अब तो मनुष्य का जीवन आदर्श जीवन व्यतीत करवाने के लिए
09:56उन्होंने दक्ष सहिता भी रचली है
09:59अब उनकी इतनी उपलब्दियों को भूल कर
10:15मक्षमा करें प्रभू ये मेरे अपने विचार है
10:17और दूसरी ओर है महादेव कर्मकान, सांसारी क्रीती, नीती
10:23इनसे उनको कोई ले ना देना ले
10:27वो तो ध्यान, मगन बैठे रहते हैं अपने कहला आश्पर
10:32जब उन्होंने अपनीक आराधना के लिए अपने भक्तों से किसी नियम के पालन की अपेक्षा नहीं रखी
10:38तो दक्स के किसी दियम का उनका क्यों प्रवाव पड़े
10:42वैरागी के लिए ये सारी चीज़ें किस काम थी
10:48वैसे प्रभू वैरागी से याद आया
10:53क्या हमारे महादेव सदेव वेरागी ही बने रहेंगे या फिर
11:01शिवका पूर्ण वेराग तो हमारे लिए भी चिंता का विशे
11:06पर उन्हें कैसे समझाएं कि उनकी यह अना सक्ति संसार के लिए
11:11शुजन के लिए लाबदायक नहीं है
11:13भबन
11:21आप चाहे कितना भी चिंतन कर ले
11:24उपाय के लिए आपको मेरे पास ही आना होगा
11:31सत्ति कहा आपने
11:33आपके बिना विश्नु का तो कोई अस्तित्वे ही नहीं
11:37पूरुवकाल में महादेव नहीं कहा था न
11:39कि वो एक स्त्री से विवाह करके
11:41लोग के उत्तम कारे की सिद्धी करेंगे
11:45जी
11:47कहा था
11:48दक्षपुत्री सत्ति के रूप में जन्मी
11:50देवी शक्ती ही तो वो स्त्री है
11:57अब देर है तो केवल
11:58महादेव को सत्ति के और आकरशित होने की
12:03उसके पश्चात
12:05वो अपने को सती से अलग नहीं कर पाएंगे
12:43हैं वो अपने को सती संधियर का है
12:43है एंप लो अपने को स्वीन है
12:58है आत रचा से कथाया नहीं कर दिए
13:03कर दो कर दो
13:32कर दो
13:58कर दो
13:59झाल झाल
14:33झाल
15:25झाल
15:38झाल
15:47झाल
15:52झाल
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