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The plot continues around the dynamics between Karn, Urvi, and other royal figures. The episode shows important social events — including a celebration involving Bhanumati — where Karn’s presence changes the usual order of things. Actions in this episode lead to conflicts and reactions, especially involving Urvi’s decisions influenced by how Karn behaves. This episode deepens the emotional tension between Karn and Urvi while also introducing challenges and misunderstandings related to their relationship and Karn’s role in the royal court.👇👇

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Transcript
00:22अर्चन
00:36अगर भानुमती के स्वयमबर गई तो सब मुझे परिशान करने लगेंगे
00:40पूछेंगे कि अपने ब्यामे मैं उन्हें कब बुला रही हूँ
00:43नए, मैं भानुमती से ना उसकी शादी के बाद ही मुझेंगे
01:03अर्चन, यह रतना हमारी मित्रता का प्रतीक है
01:07इसे दुश्मन ही करके पाना चाहते हो
01:10अगर सच में यह रतना चाहते हो
01:12तो महराज के प्रस्ताफ के वारे में विचार करो
01:20अर्फी
01:26और भी
01:32महावी रर्चन से यह उम्मीद नहीं थी
01:34कि एक पत्थर के लिए वो अपना धनुष भाहर निकाल लेंगे
01:38वो रतन उनकी संपन्ती थी
01:40तो उनकी इच्छ है
01:42वो रतन तुम्हें देना चाहे या ना चाहे
01:45मैंने भी निवेतन किया था
01:48पर फिर उन्होंने मेरे सामने कोई रास्ता नहीं चोड़ा
01:51और कोई रास्ता नहीं था
01:53सिर्फ एक ही रास्ता था यूद का अन गिनर जाने जाने का रास्ता
01:57सिर्फ एक पत्थर के लगने दिल को पत्थर मत बना और जुन
02:00में शिर्फ एक पत्तेर रहा काने हुरनी
02:03उचसे कीम्ती हो चलाया तुमारे लिए
02:05तभी तो तुमने कह दिया
02:08उसके लिए भानमधी से विवा कर लो
02:13हाँ कहा था
02:15वो भी सिर्फ इस लिए क्योंके तुम यूध पे अड़ गए थे
02:18हाँ अड़ गया था
02:19क्योंकि मेरी मित्रु रत्ना मांगने के लिए मेरे शत्रु सूथ पुत्र की पास चली के लिए
02:28तो अब फुरत्ना उस रंग भूमी का वो अधूरा निरने हो क्या है
02:32जिसे वापस लाकर वीर अर्चुन अपनी श्रिष्टा साबित करना चाहते है
02:37अर्चुन इतना दुर्बलनी है कि रिदय वुमी के फैसले रंग भूमी पर करें
02:44और मैं अपनी श्रिष्टता नहीं अपनी मित्रता साबित करा था
02:48अर्वियो बेट तुमने मुझे दी ती वो सूथ पुत्र कहा से बीच में आ क्या
02:52वो रतम उसने तोड़ा था वो रतम मैं संभाल नहीं पाया था इसलिए से वापस लाने का दायत वो मेरा
02:57है
02:57मैं तुमसे तुम्हारे मित्रता का प्रमान नहीं चाहते है अपने हट और अपने आपको साबित करने का यह उनमाद छोड़
03:04दो अर्चुन
03:07कि यह छोड़ दो कहने के बज़ा है कि तुम मेरे भावनों को समझना शुरू करती ना तो अच्छा होता
03:15हूँ
03:31तो भेज दिया अर्जुन को हस्तनापूर
03:35क्या हुआ कहीं राजकुमारी उर्वी के दिल ने जलकर ये तो नहीं कहा कि अर्जुन को इस रूववती के सामने
03:42से हटा अगर इसके तीर चल गए तो तेरा क्या होगा
03:50ऐसी कोई बात नहीं है
03:51अरे जाओ राजगरानों में भी जब नए दीपक जलते हैं तो पूरे संसार में खबर फैल जाती है
03:57ये तो आग लगने का मामला है तुम्हारे और अर्जुन के हिर्दे में लगिया
04:07मैं तुम सबको सपष सब्दों में कह रही हूँ
04:10मैं और अर्जुन सिर्फ और सिर्फ मित्र है
04:13मेरे और अर्जुन के बीच उस तरह का प्रेम दी है जिसका तुम इशारा कर रही हूँ
04:17पर हां ये बात भी सच है कि जो जगे मेरी जीवन में अर्जुन की है
04:22वो जगे और कोई नहीं ले सकते
04:25और वो जगे सिर्फ और सिर्फ एक मित्र की है
04:31एक प्रोश और इस तरही मित्र कैसे हो सकते है
04:41मेरे गुरुजी श्री कृष्ण कहते है
04:43मित्रता मित्रता ही होती
04:45उसमें कोई शर्थ नहीं होती
04:47कि वो मित्रता किसी औरत से की जाए
04:52किसी राजा से की जाए या किसी रंग से
04:56अच्छा दोस्ती से
04:58पर कई बार दोस्तों का ही बिया भी तो हो जाता है
05:05चलो मान लिया
05:06तुमारे हिर्दय में अर्जुन के लिए प्रेम नहीं है
05:09अगर अर्जुन के लिए नहीं है
05:11तो कोई और है क्या तुम्हारे हिर्दय में?
05:29राज कुमारी, कहां खो गई?
05:32जिसके खयालों में खोई हुई हो, उसका नाम हमें भी तो बताओ.
05:39जिस दिन ऐसा लगा कि कोई आ गया है रिदय में, तो अवश्य बताओंगे.
05:44अब जब मुझे ही नहीं पता तो तुम्हें क्या बताओं?
05:55कलिंग राज जब केवल, एक राद दूर है मित्र.
05:59किन्तु ऐसा लग रहा है कि ये राद के चार पहर, चार बढ़सो जितने लंबे होंगे.
06:07सच कह रहा हूं मित्र, ये राद बहुत ही कटनाईयों से निकलेगी.
06:13और मेरे मन में एक भै भी है.
06:17शूर वीर दुर्योधन के मन में भै?
06:20किस से?
06:21शत्रो की बात होती तो भै का कोई प्रश्न ही नहीं था.
06:26शत्रो को तो बल से भी जीता जा सकता है.
06:29किन्तु इस्त्री का मन, उसकी था तक तो ब्रह्मजी भी नहीं पहुश सके.
06:35डर इस बात का है मित्र की कई भानुमती, स्वैमवर में किसी और को न चुलने.
06:41मित्र स्वैमवर हो या ना हो, ये एक स्त्री का अधिकार होना चाहिए कि वो किसको स्विकार करे.
06:49किन्तु मेरा दिल कहता है, कि जब राज्शकुमार दुर्योधन किसी के सामने खड़े हो,
06:55तो एक स्त्री किसी और की और देखी नहीं सकती.
07:01तुम मेरे मित्र हो, और तुम जानते हो कि या भानुमती से कितना प्रेम करते हैं,
07:06तो तुम मैसे ही कहूगे, किन्तु भानुमती, वो तो ये सब नहीं जानते ना?
07:13तो कोई उपाई है इस भे को बगाने का?
07:15स्वेंबर से पहले, तुम भानुमती को मेरा ये प्रेम पत्र पहुचा दो.
07:21इसमें हमने अपनी दिल की बात लिखी, और भानुमती से अनुरोध किया है,
07:25कि वो ये स्वेंबर ना रखे.
07:27हम उसे ऐसे ही ब्याकर, हस्त ना पोड़ ले जाएंगे.
07:31जाओ, मेरा प्रेम पत्र भानुमती को दिया हूँ.
08:09ये रत्म तो मैं आपको आपको आपके नहीं दे सकता हूँ.
08:24आप अपने सब्र की हध पतायां.
08:25अग्ली पूर ने मा.
08:26अग्ली पूर ने मा से पहरे ये रत्म आपके पास होगा.
08:43पूरन मासी में अब केवल दस दिन बचे हैं
08:46जो अपने अर्जुन नहीं लापाया, वो कर्ण कैसे लाएगा?
08:50चुप करो तुम दोनों
08:54बानुमती
08:59उफ बानुमती
09:01बहुत सुन्दर दिख रही है, इतनी कि चांद को भी लजा दो
09:07सारी कुवारी लड़कियों की राजकुमारी भानुमती के पान उत्सब में स्वागत है
09:13तुम इस उत्सब में क्यों आई हो?
09:17शमा करें, पर कुवारी तो मैं भी हूँ
09:20इस नाते मेरा भी अधिकार बनता है, कि मैं इस उत्सब में आऊ
09:24कुमारी हो
09:26राजकुमारी नहीं
09:30जानती हूँ
09:31पर अगर मैं आप राजकुमारीयों को इस पान की महिमा ना बताओ
09:35तो आप राजकुमारीया सिर्फ ये पान खाएंगी
09:38और पीच करके ठूप देंगी
09:39ऐसा है?
09:41तो बताओ महिमा, कि तो ध्यान रहे
09:44पात अगर आनंद में नहीं हुई
09:46तो इस उत्सब से बाहर निकाल दी जाओगी
09:56हरियाली पत्ते की लोजी आज सुनो कहानी
09:59ये रसिया क्या-क्या खेल रचाए
10:01क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:04जिसकी काया दिल्प्यों जैसी प्रेम संदेशा गाए
10:08बिन सजनी के गाल सजन का फोटों को छू जाए
10:11दान दात में गुच्मुच करता कैसा खेल खेले तू पानी
10:16क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:19लाल रंग का कुर्टा पैने घाट घाट का नटकट छोड़ा
10:23कभी मीठा कभी सादर कभी कभी पलं तोर्च छोड़ा
10:27इसके चाकर मेना आए तो क्या खाक जी जबानी
10:30क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:35ये हुई पान की बात
10:37अब राज कुमारे जी का अनृत्त तो बनता ही है
11:16सत्मे रंगोलियों जैसे
11:20कौनी सर्फ नामी है
11:25जाने कब को साक्षा आए
11:29जो मेरी कल्प नामी है
11:34वो जो रस्या है चित चौर जाने होगा हो किसो
11:43पहना दे मुझे कंदना
12:00जाने हो जाने होगा है
12:02आप आप आप आप, आप आप
12:56मैं हूँ प्रीम कमी ही रचना, मैं हूँ चित्रकार का सपना
13:05मैं हूँ प्रीम कमी की रचना, मैं हूँ चित्रकार का सपना, सारी नक्षत्र है बग में
13:14मेरी कोरी कंचता या मेरी सुंदरता है मारा, मेरी हाथ दिला कोरी जगर ने
13:24उसको रिखलू अपने संग, उसको रचलू अपने रंग, मेरी जैसा मेने सजना
13:34मेरी जैसा मेरी जैसा मेरी जैसा यार ने
13:43मेरी जैसा मेरी जैसा यार ने
14:01कर दो कर दो
14:32अपने सब्र की हद बताएं अगली पौने माद उससे पहले रत में आपके पास होगा
15:05इन्हें यहां लाया जाए
15:32क्वारी लड़कियों के उतसब में चोरी छुपके से आना
15:39कायर और कप्टी के अलावा एक लजजित पुरुष्च्यों सुंदर युक्यों को देखने की लालच में आया हो वो जूट तो
15:48बोलेगा ही डंड पक्का है
15:53भानुमती अपरादी को अपना बख्ष रखने का एक मौका दिया जाए क्या पता है हाँ हो सकता है कि सच
16:03में कोई संदेशा लेकर आये हो अंगराज
16:09दिखाईए क्या संदेशा लेकर आये हैं आप
16:11मौका दिखाईए क्या संदेशा लेकर दिखाईए क्या संदेशा लेकर आये हैं
16:40शब्दों के मायजाल में फसने वालों में से नहीं हूँ मैं
16:44एक अच्छे कवी के आगे जितनी सोने की मोहरे उच्छा ली जाएं उनके रस अपने आप बढ़ते जाते हैं
16:51अब कौन जानें ये तुम्हारे मित्र के दिल का हाल है या किसी कवी की कलम का कमाल है
17:02कह दीजिये उन्हें कि वो हमारे स्वेंबर में आएं अगर वो हमें पसंद आए तो क्यों नहीं हम उन्हें अपना
17:10पती कहलवाने का अफसर देंगे
17:34सुनी
18:08करते हैं
18:23आपको कुछ कहने वाली थे?
18:29हाँ, वो, ये बात तो आपकी मित्रकी हुए
18:33उस अपरात का क्या जो आप अब कर रहे हैं?
18:37अब कौनसा अपरात किया मैं?
18:40यहां इतनी सारी सुंदर कन्या हैं
18:44इन सब के सामने मूँ मोडे ऐसी चली जा रहे हैं
18:52आपको नहीं लगता कि ये हम सब की सुंदरता का अपमान हुआ?
18:56शमाचा हुआ, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था
18:59मैं आश्चर्य चकित हूँ
19:02रंग भूमी में अरजुन के तीर जिसका सर न चुका पाये
19:07उसका सर कुछ नाजुक नजरों के सामने चुका हुआ है
19:16चलो इसका भी शमादान दे दिया
19:19लेकिन उस अपराद का क्या?
19:21आपकी वज़े से जो हमारा नृत्य रुका है
19:25हमारा संगीत रुका
19:26यहां रंग में भंग पढ़ गया
19:29उसका दंड तो देंगे कम से कम?
19:31यदि ये अपराद है
19:33तो दंड स्विकार है
19:36तो ठीक है
19:38जिसने संगीत रोका
19:40वही उसे शुरू करेगा
19:42कुछ गा कर, कुछ बजा कर
19:47अपना दंड पूरा करें अंग्राज कर्ण
20:05जो तंड मिला है तो पूरा करके जाएंगे
20:07कुछ पूराओ करेंगे
20:12वही तो कर शो दो दंड यूजिक
20:20जाएंगे
20:21ट्रुशबंद
20:21भाइंगे
20:22यह थाएंगे
20:26अपना यह
20:29को दो एवन

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