00:22अर्चन
00:36अगर भानुमती के स्वयमबर गई तो सब मुझे परिशान करने लगेंगे
00:40पूछेंगे कि अपने ब्यामे मैं उन्हें कब बुला रही हूँ
00:43नए, मैं भानुमती से ना उसकी शादी के बाद ही मुझेंगे
01:03अर्चन, यह रतना हमारी मित्रता का प्रतीक है
01:07इसे दुश्मन ही करके पाना चाहते हो
01:10अगर सच में यह रतना चाहते हो
01:12तो महराज के प्रस्ताफ के वारे में विचार करो
01:20अर्फी
01:26और भी
01:32महावी रर्चन से यह उम्मीद नहीं थी
01:34कि एक पत्थर के लिए वो अपना धनुष भाहर निकाल लेंगे
01:38वो रतन उनकी संपन्ती थी
01:40तो उनकी इच्छ है
01:42वो रतन तुम्हें देना चाहे या ना चाहे
01:45मैंने भी निवेतन किया था
01:48पर फिर उन्होंने मेरे सामने कोई रास्ता नहीं चोड़ा
01:51और कोई रास्ता नहीं था
01:53सिर्फ एक ही रास्ता था यूद का अन गिनर जाने जाने का रास्ता
01:57सिर्फ एक पत्थर के लगने दिल को पत्थर मत बना और जुन
02:00में शिर्फ एक पत्तेर रहा काने हुरनी
02:03उचसे कीम्ती हो चलाया तुमारे लिए
02:05तभी तो तुमने कह दिया
02:08उसके लिए भानमधी से विवा कर लो
02:13हाँ कहा था
02:15वो भी सिर्फ इस लिए क्योंके तुम यूध पे अड़ गए थे
02:18हाँ अड़ गया था
02:19क्योंकि मेरी मित्रु रत्ना मांगने के लिए मेरे शत्रु सूथ पुत्र की पास चली के लिए
02:28तो अब फुरत्ना उस रंग भूमी का वो अधूरा निरने हो क्या है
02:32जिसे वापस लाकर वीर अर्चुन अपनी श्रिष्टा साबित करना चाहते है
02:37अर्चुन इतना दुर्बलनी है कि रिदय वुमी के फैसले रंग भूमी पर करें
02:44और मैं अपनी श्रिष्टता नहीं अपनी मित्रता साबित करा था
02:48अर्वियो बेट तुमने मुझे दी ती वो सूथ पुत्र कहा से बीच में आ क्या
02:52वो रतम उसने तोड़ा था वो रतम मैं संभाल नहीं पाया था इसलिए से वापस लाने का दायत वो मेरा
02:57है
02:57मैं तुमसे तुम्हारे मित्रता का प्रमान नहीं चाहते है अपने हट और अपने आपको साबित करने का यह उनमाद छोड़
03:04दो अर्चुन
03:07कि यह छोड़ दो कहने के बज़ा है कि तुम मेरे भावनों को समझना शुरू करती ना तो अच्छा होता
03:15हूँ
03:31तो भेज दिया अर्जुन को हस्तनापूर
03:35क्या हुआ कहीं राजकुमारी उर्वी के दिल ने जलकर ये तो नहीं कहा कि अर्जुन को इस रूववती के सामने
03:42से हटा अगर इसके तीर चल गए तो तेरा क्या होगा
03:50ऐसी कोई बात नहीं है
03:51अरे जाओ राजगरानों में भी जब नए दीपक जलते हैं तो पूरे संसार में खबर फैल जाती है
03:57ये तो आग लगने का मामला है तुम्हारे और अर्जुन के हिर्दे में लगिया
04:07मैं तुम सबको सपष सब्दों में कह रही हूँ
04:10मैं और अर्जुन सिर्फ और सिर्फ मित्र है
04:13मेरे और अर्जुन के बीच उस तरह का प्रेम दी है जिसका तुम इशारा कर रही हूँ
04:17पर हां ये बात भी सच है कि जो जगे मेरी जीवन में अर्जुन की है
04:22वो जगे और कोई नहीं ले सकते
04:25और वो जगे सिर्फ और सिर्फ एक मित्र की है
04:31एक प्रोश और इस तरही मित्र कैसे हो सकते है
04:41मेरे गुरुजी श्री कृष्ण कहते है
04:43मित्रता मित्रता ही होती
04:45उसमें कोई शर्थ नहीं होती
04:47कि वो मित्रता किसी औरत से की जाए
04:52किसी राजा से की जाए या किसी रंग से
04:56अच्छा दोस्ती से
04:58पर कई बार दोस्तों का ही बिया भी तो हो जाता है
05:05चलो मान लिया
05:06तुमारे हिर्दय में अर्जुन के लिए प्रेम नहीं है
05:09अगर अर्जुन के लिए नहीं है
05:11तो कोई और है क्या तुम्हारे हिर्दय में?
05:29राज कुमारी, कहां खो गई?
05:32जिसके खयालों में खोई हुई हो, उसका नाम हमें भी तो बताओ.
05:39जिस दिन ऐसा लगा कि कोई आ गया है रिदय में, तो अवश्य बताओंगे.
05:44अब जब मुझे ही नहीं पता तो तुम्हें क्या बताओं?
05:55कलिंग राज जब केवल, एक राद दूर है मित्र.
05:59किन्तु ऐसा लग रहा है कि ये राद के चार पहर, चार बढ़सो जितने लंबे होंगे.
06:07सच कह रहा हूं मित्र, ये राद बहुत ही कटनाईयों से निकलेगी.
06:13और मेरे मन में एक भै भी है.
06:17शूर वीर दुर्योधन के मन में भै?
06:20किस से?
06:21शत्रो की बात होती तो भै का कोई प्रश्न ही नहीं था.
06:26शत्रो को तो बल से भी जीता जा सकता है.
06:29किन्तु इस्त्री का मन, उसकी था तक तो ब्रह्मजी भी नहीं पहुश सके.
06:35डर इस बात का है मित्र की कई भानुमती, स्वैमवर में किसी और को न चुलने.
06:41मित्र स्वैमवर हो या ना हो, ये एक स्त्री का अधिकार होना चाहिए कि वो किसको स्विकार करे.
06:49किन्तु मेरा दिल कहता है, कि जब राज्शकुमार दुर्योधन किसी के सामने खड़े हो,
06:55तो एक स्त्री किसी और की और देखी नहीं सकती.
07:01तुम मेरे मित्र हो, और तुम जानते हो कि या भानुमती से कितना प्रेम करते हैं,
07:06तो तुम मैसे ही कहूगे, किन्तु भानुमती, वो तो ये सब नहीं जानते ना?
07:13तो कोई उपाई है इस भे को बगाने का?
07:15स्वेंबर से पहले, तुम भानुमती को मेरा ये प्रेम पत्र पहुचा दो.
07:21इसमें हमने अपनी दिल की बात लिखी, और भानुमती से अनुरोध किया है,
07:25कि वो ये स्वेंबर ना रखे.
07:27हम उसे ऐसे ही ब्याकर, हस्त ना पोड़ ले जाएंगे.
07:31जाओ, मेरा प्रेम पत्र भानुमती को दिया हूँ.
08:09ये रत्म तो मैं आपको आपको आपके नहीं दे सकता हूँ.
08:24आप अपने सब्र की हध पतायां.
08:25अग्ली पूर ने मा.
08:26अग्ली पूर ने मा से पहरे ये रत्म आपके पास होगा.
08:43पूरन मासी में अब केवल दस दिन बचे हैं
08:46जो अपने अर्जुन नहीं लापाया, वो कर्ण कैसे लाएगा?
08:50चुप करो तुम दोनों
08:54बानुमती
08:59उफ बानुमती
09:01बहुत सुन्दर दिख रही है, इतनी कि चांद को भी लजा दो
09:07सारी कुवारी लड़कियों की राजकुमारी भानुमती के पान उत्सब में स्वागत है
09:13तुम इस उत्सब में क्यों आई हो?
09:17शमा करें, पर कुवारी तो मैं भी हूँ
09:20इस नाते मेरा भी अधिकार बनता है, कि मैं इस उत्सब में आऊ
09:24कुमारी हो
09:26राजकुमारी नहीं
09:30जानती हूँ
09:31पर अगर मैं आप राजकुमारीयों को इस पान की महिमा ना बताओ
09:35तो आप राजकुमारीया सिर्फ ये पान खाएंगी
09:38और पीच करके ठूप देंगी
09:39ऐसा है?
09:41तो बताओ महिमा, कि तो ध्यान रहे
09:44पात अगर आनंद में नहीं हुई
09:46तो इस उत्सब से बाहर निकाल दी जाओगी
09:56हरियाली पत्ते की लोजी आज सुनो कहानी
09:59ये रसिया क्या-क्या खेल रचाए
10:01क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:04जिसकी काया दिल्प्यों जैसी प्रेम संदेशा गाए
10:08बिन सजनी के गाल सजन का फोटों को छू जाए
10:11दान दात में गुच्मुच करता कैसा खेल खेले तू पानी
10:16क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:19लाल रंग का कुर्टा पैने घाट घाट का नटकट छोड़ा
10:23कभी मीठा कभी सादर कभी कभी पलं तोर्च छोड़ा
10:27इसके चाकर मेना आए तो क्या खाक जी जबानी
10:30क्या जाने दीवानी ओ तू क्या जाने दीवानी
10:35ये हुई पान की बात
10:37अब राज कुमारे जी का अनृत्त तो बनता ही है
11:16सत्मे रंगोलियों जैसे
11:20कौनी सर्फ नामी है
11:25जाने कब को साक्षा आए
11:29जो मेरी कल्प नामी है
11:34वो जो रस्या है चित चौर जाने होगा हो किसो
11:43पहना दे मुझे कंदना
12:00जाने हो जाने होगा है
12:02आप आप आप आप, आप आप
12:56मैं हूँ प्रीम कमी ही रचना, मैं हूँ चित्रकार का सपना
13:05मैं हूँ प्रीम कमी की रचना, मैं हूँ चित्रकार का सपना, सारी नक्षत्र है बग में
13:14मेरी कोरी कंचता या मेरी सुंदरता है मारा, मेरी हाथ दिला कोरी जगर ने
13:24उसको रिखलू अपने संग, उसको रचलू अपने रंग, मेरी जैसा मेने सजना
13:34मेरी जैसा मेरी जैसा मेरी जैसा यार ने
13:43मेरी जैसा मेरी जैसा यार ने
14:01कर दो कर दो
14:32अपने सब्र की हद बताएं अगली पौने माद उससे पहले रत में आपके पास होगा
15:05इन्हें यहां लाया जाए
15:32क्वारी लड़कियों के उतसब में चोरी छुपके से आना
15:39कायर और कप्टी के अलावा एक लजजित पुरुष्च्यों सुंदर युक्यों को देखने की लालच में आया हो वो जूट तो
15:48बोलेगा ही डंड पक्का है
15:53भानुमती अपरादी को अपना बख्ष रखने का एक मौका दिया जाए क्या पता है हाँ हो सकता है कि सच
16:03में कोई संदेशा लेकर आये हो अंगराज
16:09दिखाईए क्या संदेशा लेकर आये हैं आप
16:11मौका दिखाईए क्या संदेशा लेकर दिखाईए क्या संदेशा लेकर आये हैं
16:40शब्दों के मायजाल में फसने वालों में से नहीं हूँ मैं
16:44एक अच्छे कवी के आगे जितनी सोने की मोहरे उच्छा ली जाएं उनके रस अपने आप बढ़ते जाते हैं
16:51अब कौन जानें ये तुम्हारे मित्र के दिल का हाल है या किसी कवी की कलम का कमाल है
17:02कह दीजिये उन्हें कि वो हमारे स्वेंबर में आएं अगर वो हमें पसंद आए तो क्यों नहीं हम उन्हें अपना
17:10पती कहलवाने का अफसर देंगे
17:34सुनी
18:08करते हैं
18:23आपको कुछ कहने वाली थे?
18:29हाँ, वो, ये बात तो आपकी मित्रकी हुए
18:33उस अपरात का क्या जो आप अब कर रहे हैं?
18:37अब कौनसा अपरात किया मैं?
18:40यहां इतनी सारी सुंदर कन्या हैं
18:44इन सब के सामने मूँ मोडे ऐसी चली जा रहे हैं
18:52आपको नहीं लगता कि ये हम सब की सुंदरता का अपमान हुआ?
18:56शमाचा हुआ, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था
18:59मैं आश्चर्य चकित हूँ
19:02रंग भूमी में अरजुन के तीर जिसका सर न चुका पाये
19:07उसका सर कुछ नाजुक नजरों के सामने चुका हुआ है
19:16चलो इसका भी शमादान दे दिया
19:19लेकिन उस अपराद का क्या?
19:21आपकी वज़े से जो हमारा नृत्य रुका है
19:25हमारा संगीत रुका
19:26यहां रंग में भंग पढ़ गया
19:29उसका दंड तो देंगे कम से कम?
19:31यदि ये अपराद है
19:33तो दंड स्विकार है
19:36तो ठीक है
19:38जिसने संगीत रोका
19:40वही उसे शुरू करेगा
19:42कुछ गा कर, कुछ बजा कर
19:47अपना दंड पूरा करें अंग्राज कर्ण
20:05जो तंड मिला है तो पूरा करके जाएंगे
20:07कुछ पूराओ करेंगे
20:12वही तो कर शो दो दंड यूजिक
20:20जाएंगे
20:21ट्रुशबंद
20:21भाइंगे
20:22यह थाएंगे
20:26अपना यह
20:29को दो एवन