00:00बहुत समय पहले की बात है। भारत के मध्य भाग में एक समरिध राज्य था, मालवगड। वहां के राजा, वीरसेन न केवल स्पष्ट योध्धा थे, बलकि संस्कृती, धर्म और न्याय के संरक्षक भी थे। उनके दर्बार में विद्वान, संगीत कार और कलाकार का नाम
00:30वे महल की दीवारों पर रामायन और महा भारत के चित्र बनवाते हैं, जो आज भी भारत के सांस्कृतिक चमतकार माने जाते हैं। राजमहल में हर साल वसंत उत्सव मनाया जाता था, जिसमें लोक नरित्य, संगीत और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी होती थी। एक बार प�
01:00वापस आकर उन्होंने एक विशाल सभा में सभी सैनिकों और प्रजाजनों का सम्मान किया।