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जहां महादेव कहलाए 'नीलकंठ', देखें मंदार पर्वत से जुड़े रहस्यों की खोज

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00:00अब जाकर के जैसे निकल देते के गेट पे ही मना हूँ जो नहीं कर सामत दो
00:09हुआ जाए अफ्ट पूर से देखें ऐसा लगता है जैसे एक शिबलिंग है विशाल का यह शिबलिंग है
00:20उस चोटी पर आपको लेकर जा रहे हैं
00:25पुरी दुनिया में इतनी बड़ी एक प्थर का पाड़ और कहीं भी नहीं
00:29खोकला है इसको हलका में उठा के कहीं भी हम रोटेट कर सेगे
00:33पुर्णिमा की राथ को इसमें आवाजे शुनाई देती
00:38प्रमान की सबसे अद्भूत विश्वस्निया और कल्पनिया चीजें जो हैं
00:42वो समुद्र मंधन से निकली थी
00:44वो रहस्य जिसमें पर्वत की उचाई भी है समुद्र की गहराई भी है
00:57जिसमें सभ्यता की सच्चाई है वो रहस्य जहां अम्रित भी है विश्वी है
01:03नमस्कार मैं हूँ श्मीता सिंग और आप देख रहे हैं अद्भूत और विश्वस्निया और कल्पनिया
01:08समुद्र मंधन की कहानी सब ने सुनी है
01:11लेकिन समुद्र को मतने के लिए
01:12जिस मतनी का इस्तमाल हुआ था
01:14उस मंदार परवत पर इस समय हम मौझूद है
01:16आज हम आपको धरती से लेकर
01:19मंदार परवत की चोटी तक
01:21आपको वो सभी अद्भुत किस्से सुनाएंगे
01:38कभी यहाँ पर सबसे सिद्ध देव और सबसे दुर्दान्त असूर आये थे
01:55यही निकला खामरे यही विश्पीकर मादेव नील कंट कहलाय थे
02:15जो परवत मेरे सामने है उसी से कहते हैं हुआ था समुद्र मन्थन पर अगर यहीं हुआ था मन्थन तो समुद्र कहां है
02:41कहते हैं दुनिया के सबसे बड़े साम नागों के राजा बासुकी से यह मन्थन हुआ
02:51पर दुनिया में इतने बड़े साम का कोई अस्तित्व रहा है क्या
02:55भगवान शंकर के गले में लिप्टे यही है नागराज बासुकी
03:02दावा है कि इस मंदार परवत पर उनके शरीर के रगड़ के निशान आज भी है
03:08700 फीट तक गोलाई में उठता हुआ एक ही चटान से बना अध्भुत परवत है मंदार
03:17इनसान तो छोड़िये देवताओं से भी पुराने इस परवत से जुड़ी अध्भुत और विश्वसनिये और कल्पनिये कहानियों के निशान क्या सचमुच आज भी मौजूद है
03:30बहुत ज्यादा उची चड़ाई नहीं है पर रहस्य बहुत गहरा है
03:38चलिए हम भी रहस्य के इस समुन्दर में डुपकी लगाते हैं और शुरू करते हैं दुनिया के सबसे अध्भुत परवत की चोटी तक का सफर
03:48मैंने जब मन्दार परवत को पहली बार देखा तो ऐसा लगा जिसे दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग मेरे सामने हो
04:14पर यह शिवलिंग नहीं इसे तो मथनी कहना सही होगा मथनी यानि चर्निंग रॉट जिससे समुद्र मन्थन में इस्तेमाल किया गया
04:25नमस्षिवाए चा नमस्षिवाए
04:32ओम नमस्षिवाए
04:36ओम नमस्षिवाए
04:44यहां पर जैसे जैसे परेटन बढ़ा है वैसे वैसे बहुत जरिये हो गया है अब यहां पर जाने के लिए
04:53जाने के लिए सीड़ियां थी उन्हें पक्की करके टाइल लगाये गया है एक रोपवे है जो सीधा उपर मन्दार परवत की उपर आपको ले जाता है लेकिन हमारी मन्षा ये थी कि हम संपूर परवत को देखें हम जो निशानों की बात होती है जब यहां पर घ्रशन से व
05:23आंगित सुन्द राये दिव्यंबर आये चदिघंबर आये नमाशिवाये केहते हैं ना कठिन रास्ता ही अक्सर बेमिसाल मन्जिलों तक ले जाता है इसी उमीद के साथ हम आगे बढ़ से लोगे क्योंकि अगर यहां कि अधुत अंशूं को चूने तो यह ब्रम्हांड और
05:53यहीं सबसे पहले शिव के गले में नाग विराजें यहां सबसे पहले धर्ती पर गिरा विश्ष यहां सबसे पहले धर्ती पर छलका अमृत
06:23पुराण कहते हैं कि यहीं विश्ष नू को मा लक्ष्मी अर धांगनी के रूप में मिली
06:45मान्यताएं बताती हैं कि दीपावली से पहले धन्तेरस की प्रथा का यहीं जन्म हुआ
06:51ये स्थान युगों की गाथाओं से पुराना है इस परवत ने महा देव का करुणा अवतार देखा है
06:59इस परवत ने कचुए के रूप में भगवान विश्णू का दूसरा अवतार देखा है
07:11इस परवत ने देखा है युगों पुराना देवों और असुरों का महा संग्राम
07:20इस परवत ने देखा है पृत्वी पर हुआ पहला धर्म अधर्म का युद्थ
07:34इस परवत पर आज भी दिखते हैं समुद्र मन्थन के समय रस्सी बनकर लिप्ते नागराज वासुकी के निशान
07:42इस पूचना भी अद्भुत है कि जिस जगह पर मैं मौजूद हूँ वहाँ से सनातन धर्म के सभी देवी देवताओं के कहानिया चुड़ी है
08:05किम वदनती कुछ गाथाएं हैं जो राजा चौल वंस में किसी राजा को कुष्ट होगिया था
08:12को सिकार करने के लिए आये इस जगह पानी कहीं मिला नहीं पियास से वो तर्पते रहे
08:18पानी कहीं मिली नहीं तो एक जिगह सुगर से सुगर जो जानवर लोग पानी पीता था उसमें
08:24सुगर लोग नहाता था उसमें कीचर से भरावा एक फ्रसा जल था कहीं पे
08:28वो इतना बीवस हो गए कि उस पानी को चान के मंगबाल दी
08:33और जैसे उस पानी को हाथ में लिए
08:36हाथ का कस्ट दूर हो जाता है
08:38उसके बाद वो चमतकार देखके
08:40उस कीचर में जाके अपने को दूबोते हैं
08:42लगाते हैं
08:44भाव भीवोर हो के भाव भगवान का नाम लेखे
08:47उसका सर्मडो खतम हो जाता है तब से इसका नाम पापर ने उन्होंने ही जिर्णो धार किया
08:52अच्छा ये कितना सिद्ध शेत्र है पूरा मंदार परवत शेत्र
08:55सिद्ध पिठ है पारवती का एक आंग येहां भी गिडा अट बावन पूरान देवी भागवत मंदारों कामचारी नों बावन सिद्धी बिट गिने जाते हैं जिसे एक में सिद्धी पिठ यहां भी है मंदराचल फर इसलिए मंदार सिद्ध चेत्र है
09:10बंदार पे आरुहन का नहीं है, मंदारम सिखरम द्रिष्टवा, मंदार के शिखर का दर्शन करना है, ना कि आरुहन करना है, कहे अनेग रिशी मुनी महात्मा आ हैं, और भगवान विश्णू का अच्छा पप्तार लेके अपनी पीठ पर भगवान मंद्राचर परवत को र�
09:40ना अक्छर प्रनवात वड़ा है, आपको लगता है, यहां अभी भी बहुत रहस्य हैं, जो मानम समझी नहीं सकता है, बहुत रहस्य है, लगता है, हमने अपने कुछ एह सास किया है, हम 1929 से पुजा करना है मैड़म, इससे मंदिर हमने समने बनी, आप अभी भी पुर्णि
10:10पुरानिक मानेताओं के अनुसार सत्यूग में एक बार दुरवासा रिशी के श्राप के कारण देवताओं की शक्ती कम हो गई थी, तब वो भगवान शिव और विश्नु के पास गए, भगवान ने समुद्र मन्थन के जरिए अमरित प्राप्त करने का सुछाओ दिया, ल
10:40मंदार परवत को डूबने से बचाने के लिए तब कचुए के रूप में अवतार लिया, जिसे कुर्मा अवतार कहा जाता है, समुद्र के बीचों बीच कचुए पर टिक कर मंदार परवत घूमने लगा
10:52यहां की चड़ाई बड़ी ट्रिकी है, इसलिए क्यूंकि सीधा एक ही चटान का हिस्सा होने की वज़े से आपको कोई गृप नहीं मिलता है पैरों में, बीच में कुछ पत्थर अगर ऐसे पड़े हैं तो उससे फाइदा हो जाता है, लेकिन यहां से अब मंदार परवत का
11:22शिव जी ने यहां हलाहल जरूर पिया, यहां पर विश्व जरूर पिया, लेकिन यह शिवलिंग नहीं, बलकि मतने का एक ऐसा एक चर्निंग रॉट जिसे कहा जाता है, जिसके साथ ही इस विश्व को कई अनूठी चीज़े मिली, विश्वी मिला अम्रित भी
11:52समुद्र मंथन से कुल मिलाकर 14 रतन निकले थे, सफेध हाथी एरावत जिसे इंद्र ने ले लिया, कौस्तोब मनी भगवान विश्व ने वक्ष पर धारन कर ली, पारिजात व्रिक्ष जिसे स्वर्ग में लगाया गया, बाद में कृष्ण जी ने अवतार लिया तो वो उ
12:22जिनसे भगवान विश्व ने विवाह कर लिया, इससे निकला काल कूट विश्व, स्रिष्टी को बचाने के लिए भगवान शिव ने विश्व का पान किया, और अंत में निकला अम्रित
12:34अम्रित के लिए देवताओं और दैत्यों में युद्ध छिड़ गया, तब भगवान विश्व ने मोहिनी रूप धरा और देवताओं को अम्रित पान करा दिया, जब अम्रित की छीना जपती चल रही थी, तब अम्रित की बुंदे चार जखों पर गिरी
12:57उत्तर प्रदेश के प्रयाग राज में, गंगा यमुना सरस्वती के संगम स्थल पर, उत्तराखंड के हरिद्वार में हरकी पोडि पर ब्रह्मकुंड में, महराश्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तड़ पर और मध्यप्रदेश के उज्जैन में ख्षिप्रा न�
13:27हैं मतलब यह पूरी कारीगरी आप देखेंगे बारीक यह सब पुराना है लेकिन इस पर पेंट जो है वो नया है
13:35पूरे रास्ते में पानी के कई कुंड देख रहे थे लेकिन हम पहले उस शंख कुंड तक जाना चाहते थे
13:47जहां कुछ सालों पहले सफाई के दौरान एक शंख के दिखाई देने की खबर आई थी यह उसी समय की अद्भुत और विश्वस्निय और कल्पनिय तस्वीर है
13:59यह जो तस्वीर आप देख रहे हैं यह एक विशाल का शंख की है और यह जो शंख है वो यहां शंख कुंड के नीचे है यानि कि जब यहां पानी सूखता है तभी वो दिख सकता है यहां पर लगभग 15 फीट बताया जाता है कि इसकी गहराई है अभी तो आपको यह पर्थर
14:29उसमें उपर से नीचे की तरफ तो देख पाना मुम्किन नहीं है कुछ चटान दिख रहे हैं कुछ सीडियां दिख रही है लेकिन वो शंख आँखों से उजल रहता है और यह जो कुंड है यह भी शंख के आतार में है जो आप आस्मान से अगर देखेंगे तो आप उस र�
14:59जो विष्णु का शंख है जूनोगे मिलेगा तो मैंने उस सतरफ नीचे जाके वह शंख निकला वह विष्णु का शंख है पांच जन शंख है शाड़े पांच शंख बढ़ बड़ा है वो निकल पाया है नहीं आज भी वह जल के अंदर है वह सुरक्षः थ है इस इस वर क
15:29गया है कि समुदर से पहली बार जो पिर्थवी निकली वो बांका यही एरिया था इसको छीर सागर बोलते थे इसको अगर देखा जाया तो हवाई दूरी यहां से वेव बंगाल की मात्र 100-500 किलिमेटर है जो कभी कालांतर में यहां रहा होगा मैंने एक सीता कुन के सफाई कर
15:59मैं भी खड़ा होके देखा कि अगर आकरांता तोड़ेंगे तो मुर्ती को कहां चिपाएंगे तो मुझे आभाद सुआ कि जल के अंदर डाल सकते हैं तो मैंने उसके सब्सक्राइब को अधिक मंदिर थे और लगवक मुखितस 8-10 कुंड भी है अच्छा आपको लगता है क
16:29सब्सक्राइब को शार्थक प्रियास कि ऐसा कहीं नहीं हुआ दोनों आपस में युद्ली लड़े हैं केवल विनाश के लिए एक यही बाका है जहां सिर्जन हुआ है और बाका भी जो जगा है बाका अस्टावकर के नाम पर बाका पड़ा है अच्छा तो यह आपको लग �
16:59करतन कभी अस्थान है कि हमें अश्चर हुआ कि जिस जगह का इतना सम्रिद्ध प्राचीन और पौरानिक इतिहास है वहां के बारे में बहुत अधिक लोगों ने शायद सुना भी नहीं है और इसलिए हम चड़ाई करते हुए अंदेखी जगों को आपको दिखाते हुए र
17:29के रास्ते में हमें कई मंदिर दिखें कई कुंड दिखें नर्सिंग गुफा जहां गुप्त काल का मंदिर स्थित है
17:38सीता कुंड जहां मानेता है कि कभी देवी सीता ने छट पर्व किया था
17:52यह मद्धिक्षेत्र शिव का कहा गया है परवत में जी मद्धिक्षेत्र शिव का कहा गया है जो ऊपर का विश्णु का चेत्र नीचे भी विश्णु का चेत्र कहा गया है चुकि कच्छुआ हो कर अपने पीठ परूनों ने तो उपर और नीचे विश्णु जी हैं बीच
18:22दिभ भी कहा जाता है,
18:23इसकी बरावरी का कोई खेटर तो है नहीं.
18:26पुराणा में भी इसकी बहुत चर्चा है,
18:29लेकिन प्रचार पर साए कम हुआ है,
18:32हम उसके चलते पीछे हो गाया है.
18:34लेकिन अभी भी कहा जाता है,
18:36कि मंदार के शिखर को देखने वाले का पुनरजन्म नहीं होता
18:40अच्छा, मुक्ती मिल जाती है
18:42मोक्ष की प्राप्ती यहाँ पर हो जाती है
18:46यह जो क्षेत्र है, अगर समुद्र मंथन हुआ
18:48यहाँ, पर यहाँ तो समुद्र नहीं है, समुद्र से दूर है
18:52वो टेथिस सागर हुआ करता था इस इलाके में कभी
18:57आप देखेंगे यहाँ के पत्थरों को भी अगर
18:59तो पत्थर आपको गोल मिलेंगे, कोई सीधे कट वाले नहीं मिलेंगे आपको
19:03इसका मतलब है अपर्दन हुआ है
19:05और वह अपर्दन वायू अपर्दन नहीं है
19:08वह हवा से नहीं कटा
19:11वह जब भी कटा तो जल अपर्दन है
19:14जल अपर्दन के कई प्रमाण है नीचे भी मैं आपको दिखाऊंगा
19:17बहुत सारे प्रमाण है
19:19कि जब समुद्र की लहरें टकराती है पत्थरों से
19:22तो उसके निशान हो जाये करते हैं
19:25और पत्थर के अपनी प्रकड़ती होती है
19:26हर तरफ के पत्थर के अपनी प्रकड़ती होती है
19:28जब वो निशान पड़ते हैं
19:30तो असपस्ट नजर आता है कि वो किस तरीके से अपरदन हो रहा है
19:33बाकाजीले में और भी कई जगा है
19:35जहां आपको
19:37मश्रूम इस्टॉन मिलेंगे
19:39rare होता है मश्रूम इस्टॉन
19:41मश्रूम इस्टॉन का
19:43मतलब होता है कि उपर से वह इस्टॉन
19:45रहा और नीचे से अपर्दी थोके
19:47वो अंब्रेला की तरफ बन गया, मश्रूम की तरफ बन गया
19:49तो उसके चारों तरफ का जो कटाव होता है
19:52वो जल का कटाव है
19:54वो वायूदाप का कटाव नहीं है
19:56तो जल अपरदन हुआ
19:58तो इसके बहुत सारे प्रमाण मेल जाते हैं
20:00कि यहां समुद्रत हाथ
20:01हमारे आसपास के पत्थरों की सन्रचना थी तो ऐसी ही
20:09पर क्या सचमुच ऐसा था?
20:12क्या यहां समुद्रत था?
20:14इस जटल सवाल को मन में लिए
20:16हम वही स्थित शिव मंदिर की ओर मुड़े
20:31जिस थान पर ये मंदिर है
20:33माननेता है कि यहीं पर शिव जी ने विश्पान किया
20:36यहां जो मुख्य पुजारी थे
20:38उन्हें लोग प्रेम से पगला बाबा कहते हैं
20:41पूरी दुनिया में इतने बड़ी एक प्थर का पहाड़ और कहीं भी नहीं
20:51तो कहा जाता है कि समंदमन्तन हुआ था तो उसमें 14 रतन प्राप्तृ थी ना
20:58जो अधार रतन में 1 रतन 20 भी वा था तो 20 पीने वाले यही अस्थान वताया जयता है
21:04जहान मादेव हैं और यहां पर अखंडी जह उती अच्छा दिन से चल दें इसी जगे पर महदेव ने विष्धारन किया तो बगल बगल सब लोग उटाएंगे
21:16इसका मतलब क्या हुआ?
21:38मूक्ष मिल जायगा
21:44करें म曾gesetzिन करें था . खरने मंदर करें दिख से कि इन दुखन दिखन
21:50मनदर की सिखर पर मसुधन हुआ कि मंजिर का UM Esse मिख से कि अ चुछ मंदिर को mai अ
21:56और यह जो नाग्राज बासुकी th tha.. वो
22:00इनोंसे मन्थन हुआ , वही शिपजी के ?
22:05ऐसा है , छोग को जानते हैं ?
22:10एक बास्की नाग जो संकर जी पुनले में है , एक शेस नाग जो भुष्ण भगवान आराम करते है
22:17और एक कालिया नाग जिसको कृष्ण अनाथन की है , जी थी नाग का आता है
22:22तो संकाजी के गले में जो बासकी नाक्टी, उन्ही से इनको लपेटा गया था
22:27सब मन्रसी बनाया गी
22:28मंदारपरवत को
22:30और उससे हुआ था
22:31जिसको कहते हैं बासकी नाकट
22:34बासकी नाथ है नहीं है तो बासकी नाथ
22:38वैसे आपको नागराज बासुगे से जुड़ी एक बहुत दिल्चस्प जानकारी और देते हैं
22:46पौरानिक भी और वैज्ञानिक भी
22:48जब किसी भी चीज को मथा जाता है
22:54तो केवल वो चर्णिंग रॉड नहीं होता है
22:57यानि कि मतनी नहीं है
22:58बलकि उसमें जो रस्यों से उसे मता जाता है
23:02तो इतना बड़ा परवत था
23:04कैसे मता जाए सागर को
23:06तो कथा ये है कि नागबासुकी को लपेटा गया था इस पर
23:13और उसके बाद जो सर का हिस्सा था
23:16वहाँ से पकड़ा असुरों ने
23:17और पूँच का हिस्सा था
23:19वहाँ से पकड़ा देवताओं ने और फिर दोनों ने मथा उसे, मथा सागर को
23:24जब मन्धन शुरू गुआ तो घ्रशन से शरीर जगे जगे से खायल होने लगा
23:32ऐसी मानिता है कि उस समय जो रगड से परवत पर निशान पड़े
23:39वो आज भी मन्दार परवत पर देखे जा सकते हैं
23:42तो जो बासुकी नाग से हुए घ्रशन की बात है जो तस्वीरों की बात है
23:56वहाँ तक हमने बहुत दिशाओं से आगे बढ़ने की कोशिश की पर बहुत कठिन चड़ाई वहाँ पर थी
24:01तो प्रियरंजन है हमारे साथ बांका से हमारे समवाद आता है यह वो हिससाब दिखा रहे है जहां पर दिखता है
24:08तो हम ड्रोन से वो तस्वीरों जो ले रहे हैं वो भी हम आपको दिखा रहे हैं फ्रेम में और यहां पर
24:31हितेश जो रिकॉर्ड कर रहे हैं वो भी हम क्योंकि उसको समझना मुश्किल है तो प्रेरंजर हमें दिखा रहे हैं कि कहां तक हम ड्रोन ले जाएं क्लोज अप करके
24:40यह सही है कि जो निशान हम देख रहे थे और जिनको लेकर माननेता है कि वो नागराज बासुकी के हैं वो निशान बहुत अलग थे
24:51अगर आपके मन में यह सवाल चल रहा है कि इतने बड़े आकार का कोई नाग हो सकता है भला तो ज़रा रुकिए
24:59गुजरात में करीब 4.7 करोड साल पहले रहने वाले एक प्राचीन साप के जीवाशन मिलने का दावा है
25:10इसको नाम दिया गया है वासुकी इंडिकस इंडिकस का मतलब है भारत से जुड़ा और वासुकी नाम वासुकी नागराज के नाम पर दिया गया है
25:19वैज्यानिकों का दावा है कि ये सांप भारत में पाया जाता था और बहुत बड़ा और शक्तिशाली थी
25:28शोदकर्ताओं को इसकी 27 रीड की हड्डियां मिली जो अच्छी हालत में थी
25:33इनकी लंबाई लगभग 37.5 से 62.7 मिली मीटर और चोड़ाई 62.4 से 111.4 मिली मीटर तक थी
25:45इसका शरीर गोल और बेलनाकार था
25:49IIT रूर्की के वैज्यानिकों के अनुसार अब विलुप्त हो चुका ये सांप दुनिया के सबसे लंबे सांपों में से एक रहा होगा
25:56आज के 6 मीटर लंबे अनकॉंडा भी इसके सामने छोटे लगते हैं
26:02वैज्यानिकों का अनुमान है कि वासुकी इंडिकर्स की लंबाई करीब 10.9 से 15.2 मीटर तक हो सकती थी
26:10तो क्या वासुकी इंडिकर्स के जो जीवाश्म भारत में मिले
26:18वो समुद्र मन्थन वाले नागराज वासुकी जैसे किसी नाग के रहे होंगे
26:22पक्खे तोर पर नहीं कहा जा सकता
26:24लेकिन हाँ इससे ये तो कहा जा सकता है कि इसका लंबा स्वरूप और कल्पनिय नहीं है
26:30जितने भी अलग-अलग किसम के साफ है जो अभी जीवित नहीं है जो अभी जीवित है भी उन सब के साथ हमने इसकी कंपारिजन की परहाए कि और तब जाके पता चला कि मटसॉइडे
26:45बोलके एक प्राचीन साप की एक फैमिली थी जो अभी और नहीं पाया जाता है जो अभी और जीवित नहीं है तो यह उसी का एक वन्षज है और फिर जैसे आप देख सकते हैं कि इसकी जो रीर की हड़ी है वो काफी बड़ी है तो इसे हमें यह थोड़ा अंदाजा था कि शा
27:15हमें यह पता चला कि यह हमारे जो वासुकी इंडिकस है वो करीबन 11 से 15 मीटर लंबा है यह शायद दुनिया का सबसे बड़ा इसनेक हो सकता है अपनी अपनी फैमिली में तो यह सबसे बड़ा है ही इसके अलावा जो सबसे बड़ा इसनेक था अभी तक को जो नोन है जिसक
27:45अजगर प्रजाती का सांप था जिसको मैट्सवाइड ग्रूप बोलता है तो वो फटिसल मिलियनियस एगो वो गुजरात में पाया जाते थे उस समय गुजरात का जो क्लाइमेट था क्लाइमेट था वो था हुमीड और उसमें वहां पे बहुत स्वंस हुआ करते थे स्वं
28:15वासुकली इंडिकस ये था सेमाई अक्याटिक अजगर एक प्रजाती का सांप जो कुछ समय में पाया जाते थे नागराज वासुकी मुख्य रूप से हिंदू और कुछ बौध परंपराओं में भी पूजे जाते हैं अलग-अलग देशों में उनकी पूजा या उनसे ज�
28:45पराओं और हिंदू प्रभाव के कारण कुछ खेत्रों में नाग देखता की पूजा होती है जिसमें वासुकी का भी उनलेक मिलता है कंबोडिया लाओस और थाइलिंड में बहुत हिंदू प्रभाव के कारण नाग की पूजा और सम्मान होता है वासुकी नाम से कम लेकिन
29:15तक नागराज वासुकी पूरी तरह से जख्मी नूचिके लिए तब भगवान शिव ने उन्हें उनके सेवा भाव के कारण गले में धारण कर लिया और वो हमेशा के लिए महादेव के गले का हार बन गए
29:26वासुकी को महादेव मिले दैत्यों को हार देबताओं को विजय अम्रित भगवान विश्नु को माता लक्ष्मी लेकिन विश्पान के बाद भगवान शंकर कहां गए
29:56यह हम मंदार टॉप पे पहुँच गए हैं और यहां एक छोटा सा मंदिर है यह काशी विश्वनात श्री मंदार काशी विश्वनात महादेव
30:21चलते एक पूजा चल रही है समय अंदर आईए
30:43मान्यता है कि विश्वान के बाद नील कंठ महादेव का पहला कदम मंदार परवत पर ही पड़ा
30:49और उन्होंने यहां हजारों वर्ष तपस्या की जिसके प्रतीक के रूप में मंदार परवत पर आज़ भी काशी विश्वनात मंदिर है
30:59यहां यहां यहां यहां पर हजार परस तपसी किया उसने भवान ने ऐसे मंदिर विश्करमां का बना हुआ बहुत बिस्तार था इसमें की वो बाबरी बजद बकत वच्छा अच्छा मूर्ती था इसमें सोना का गढ़ा हुआ था
31:21अच्छा उत्रप वह उस टाइम वह खंती-खंती से वोड़ कार की और जो मन हुआ उकर के वह चला किया
31:29मंदार परवत का काशी विश्वनात मंदर त्रिलिंग का हिस्सा है
31:37एक बाबा वैजनात, दूसरे बाबा वासुकीनात
31:41और तीसरे मंदार परवत पर विराजे बाबा काशी विश्वनात
31:44यहीं पर चोटी पर एक जैन मंदर भी स्थापित है
31:53जैन मान्यताओं में भी मंदार परवत की बहुत अभिक एहमियत है और उनके अनुसार यहाँ पर बार्वे तिर्थंकर जो थे उनकी यह तपो भूमी है यानि भगवान वासुपुज स्वामी की तपो भूमी
32:09यहाँ जैन के तीन मंदिर है जिसमें से मुख्य मंदिर जहां की भगवान वासुपुजी जो जैन के बार में तिर्थंकर है उनकी मुख्ष की भूमी है यहाँ पर एक समय पर मुंक्यन है कि और भी मंदिर हुआ करते थे क्योंकि रास्ते भर हमने देखा है अवशेश तूट
32:39हुआ था उससे पहले समुद्र मंधन हुआ और समुद्र मंधन में इस परवत को मतनी के रूप में जूज किया गया था और इसमें बहुत सारे भगवान का उतार भी यहां से सम्मिली थे
32:48बाका एक ऐसा जिला है जहां उत्तर में समतल और उपजाओ मैदानी क्षेतर है जबकि दक्षण में पत्रीली जमीन और पहाड़ी शिंखलाएं मिलती है
33:01इस जिले की उसत उचाई लगभग 135 मीटर है जबकि अधिक्तम उचाई 395 मीटर है लेकिन मैदानी क्षेतरों के बीच ही खड़ा है एक ऐसा परवत जो अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है
33:14मंदार परवत जिसकी उचाई है करीब 210 से 240 मीटर मिश्रित भोगोलिक बनावट वाले क्षेतर बाका में अखेले एक चक्टान से बना मंदार परवत सीना ताने अपने पौराणी के दिहास की गवाही देता है
33:32दरसल गूगर्ब शास्त्रियों का मानना है कि मंदार परवत कोई पहाडी शिंखला नहीं है ये एक इकलौती बड़ी चक्टान ग्रैनाइट की एक ऐसी अकेली और विशाल चक्टान से बनी पहाडी जो आसपास के समतल इलाके में अचानक उंचाई परूठती है
33:50सर्क ये कहा जाता है कहीं के भी जमीन हो वो सालों साल हजार साल लाग साल में बदलती रहती है क्या इस पूरेक शेत्र की धरती भी बदली है
34:05यह बिलकुल बदली है, अगर यह बदली नहीं होती तो आज हम इस परवत को नहीं देख रहे होते हैं
34:11यह माना जाता है कि यह जो परवत है वो जो प्राचीन काल है
34:18मिनमम इसका 400 मिलियन एर सेगो इनका बना होगा, कम से कम जो है
34:25और यह एक इंट्रुसिव अंतरवेदी चत्तान है यह ग्रेनाइट का बना हुआ है और ब्लै ग्रेनाइट है तो ग्रेनाइट जो होता है वो एक्ट्वली अगनियस रॉक है
34:36तो यह अगर बना हुआ ता कभी यह धरातल के निचे रहा होगा जो आज हमको एक इस रूप में दिखाई पड़ा है
35:06मजबूत ग्रानाइट से बनी ये चट्टान हिंदू ग्रंथों में दर्ज वैदिक काल की घटनाओं की कहानी बयान कर दी है
35:16लेकिन साथ ही अपने साथ लाती है कई अद्भुत अविश्वस्निय और कल्पनिय सवाल भी
35:23ये जो परवत है उसके जो स्टोन के बारे में आप बता रहे हैं यहां पर पानी भी बहुत है जो छोटे-चोटे कुंध हम देख रहे हैं यह जिसको पाफरीनी कुंध कह रहे है या उंपर चंक कुंध वगरा
35:41तो ये पानी की मौजूद्टी बहुत रहती है इसमें या ये कुछ अलग आप से लगता है यह पानी की मौजूद्ट तो इसके नीचे जो है
35:51परशेशेल उपरविस्य चट्टाने हैं तो यहां पर रायेगी बर्षा के द्वारा गिसे तो यहां लगाए टो उसका कोई वह नहीं है कि इस निची हो सकता है या फिर वह सकता है यह तो जो काफी ठोस होती है
36:04कि अगनेयस कहा तो यह पानी कोई मात्र होते हैं, वे अगनेयस जहेंगेमा इतनी है क्या ह्सक्तर पुछप्स कंश कहते है,
36:12अगुझ की कोई भी जिवास मोगते हैं, वो सारे की अवसेशिस में नहीं पाया जाते।
36:16इसको मोनोलित हैं हम भाते हैं यह एक आकी परवत है और यह उनका परवत रागत है पूरा का
36:36पूरा पूरा यह एक ही चटान बना हों Hello Oh
36:39ये परवत एक ऐसे इलाके में स्थित है जो मुख्यता मैदानी क्षेत्र है
36:46ये क्षेत्र भागलपूर दुमका राजबार्ग के पास है जहाँ चारों और समतल मैदानी
36:51इसके आस पास का मैदानी क्षेत्र मुख्य रूप से क्रिशी योग्य है
36:56इन इलाकों में खेती होती है और ये एक मात्र ऐसा परवत है जो इस पूरे क्षेत्र में नजर आता है
37:02ऐसा लगता है जैसे इस पहाडी को किसी ने यहाँ इन मैदानों के बीच उठा कर रख दिया
37:07लेकिन अब इसका दूसरा अध्भुत पहलू भी देखे
37:15अगर ये परवत समुद्र मन्थन में इस्तेमाल हुआ तो फिर समुद्र कहा है
37:21बिहार के अंदर समुद्र का खयाल भी आना अपने आपने अविश्वस नहीं लगता है
37:29क्योंकि आधुनिक भूगोल तो ऐसी कोई बात नहीं करता
37:33क्या ये समभव हो सकता है इसका राज करोणों साल पहले कहीं दपन हो
37:38बिहार के इस क्षेत्र में क्या किसी जमाने में समुद्र रहा होगा
37:44अगर हां तो क्या समुद्र पीछे हट गया
37:47हवाई दूरी के अनुसार बांका में स्थित मंदार के सबसे करीब समुद्र 200 किलोमीटर के आसपास बंगाल की खाडी में
37:56तो क्या कभी बंगाल की खाडी का पानी बिहार तक रहा होगा
38:02यह जो पुरा गजयतिक प्लेण है और यह लोगा गंजयतिक प्लेण प्लेण के बिलकुल अगरफाग में श्रिफवन
38:12जे जो गंजयतिक प्लेन है जवड़ वोग जीवर अब अगरफाग अगरफा के खाट्रवाग का hört तो यह जो हमारा जो प्लेटो है
38:20प्लेटो इसका ठीक अगर भाग है तो निश्य तोर पे यहां पर कभी समुद्र का भाग रहा होगा इसमें और यह जो गंजटिक प्लेन है आज से गो जो है यह कभी समुद्र का भाग में से तोर पे रहा होगा
38:35वैज्यानिकों के अनुसार 541 मिलियन वर्ष से लेकर 66 मिलियन वर्ष के बीच एक खारे पानी का विशाल जलक्षेत्र था जिसको टाथिस सी कहा जाता था
38:50टाथिस सी पैलियोजोईक युग के अन्त से लेकर सेनोजोईक युग तक रहा चुरुवात में इसने उत्तर के लॉरेशिया और दक्षन के गोनवाना नाम के बड़े भूभागों को अलग किया
39:03बाद में ये बड़े भूभाग तूट कर आज के महदवीब बन गए
39:07लॉरेशिया में आज का उत्तरी अमेरिका और युरेशिया का उत्तरी हिस्सा शामिल था
39:12जबकि गोनवाना में दक्षन अमेरिका, अफ्रीका, भारत का कुछ भाग, आस्ट्रेलिया और अन्ताक्टिका शामिल थे
39:19महादवीपों की टक्कर से अलपाइन हिमाले परवत माला बनी और धीरे धीरे ये सागर खत्म हो गया
39:26लेकिन सवाल जाइज है इसका बिहार से सम्बंद कैसे स्थापित हो सकता है
39:35दरसल विज्ञान ये भी कहता है कि जब भारतिये टेक्टॉनिक प्लेट्स उत्तर की ओर बढ़ी और यूरेशन प्लेट्स से टक्रा गई
39:42तो इस टक्कर के कारण समुद्र की तलहटी उपर उठी और हिमाले परवतों का निर्मान हुआ
39:48इन उभरते पहाडों के दक्षण में एक विशाल गहरी धसी हुई भूमी बनी जो धीरे धीरे नदियों के अवसाद से भरती गई
39:56इसी प्रक्रिया से आधूनिक इंडो ग्यांजेटिक प्लेंस बने और आगे चलकर बिहार के इस खशेत्र का निर्मान हुआ
40:04वैसे हम आपको साथ ही ये भी बताएंगी कि मानेता के अनुसार जिस शीर सागर का मन्थन हुआ था वो पौराणिक मानेताओं के अनुसार साथ समुन्दर में पाँचमा और सर्वोच माना जाता है ये बैकुंठ लोग का हिस्सा माना जाता है
40:22हालां कि पिछले 30 वर्षों से मंदार परवत पर शोद कर रहे मनोज कुमार मिष्र के पास एक अलग तर्क है अलग थियोरी है
40:35ये चेत्र में ये जब्धा करा है किया ये क्षेत्र में ये ये चेत्र में हुए करता था क्या bul enc vote how the
40:58शीर सागर गुजरात में है आज भी आप देखियेगा द्वारका द्वारका के नीचे जो इस टेचू बगर है वो भगवान विष्णू का ऐसा रूप है जो लगता है छीर सागर में सयन कर रहा हूँ अच्छा जो द्वारका के पास कुछ मीठा पानी भी है तो वही छीर सा�
41:28तो मै ने इसका विरुद नहीं जाए, मैं जानना चाहा कि बात क्या है मन्दार मेरा ही है लेकिन ये जो event हुआ जो फोकस किया गिया है वहा कैंद तो चीर सागर कि सरी पानी तो नमकिन है तो चीर सागर जिस एरिया में था तो हम आपर चुकि जितना भी शीर महारत नहे थे
41:58अपने जीवन में जो अनुभब किया और देखा उसको मैंने पुरानों से भी मेल कराया
42:15सच्मुच में यह विश्व का एक अनोखा फर्वत है
42:19जहां पर एक साथ तेंटीस करोड़ देवी देवताओं की निवासस्थली है
42:27जिसका की प्रमान पर्वत पर्विभिन भगनावसे से पता चलता है
42:34और तीसरे मनु के काल में यानि तामस का जो काल रहा है वह थर्ड मनु जो है उसके काल में दानवों के राजा थे बली
42:48बलेदान सब्द की भी उतपत्ति जो हुई है उसी से
42:52सच मुच इतना सिद्ध क्षेत्र इतना सम्रिद्ध क्षेत्र और भौगोलिक वैज्यानिक रूप से जिसकी बातें वर्तमान में भी पिट और सही बैट रही है
43:12दुनिया में कहीं नहीं इस क्षेत्र में और शोध की जरूरत है लेकिन कुछ बातें जो सपश्टूप से सामने हैं
43:20वो ये कि भारत में विशालका इस साम के जीवाश्मन मिले हैं जिस क्षेत्र में मंदार परवत है बहां कभी समुद्र होने के प्रमान हैं
43:30मंदार क्षेत्र के पत्थर आम मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं
43:36प्रमान की सबसे अद्भूत विश्वस्निय अकल्पनिय चीजें जो हैं वो समुद्र मंथन से निकली थी
43:47लेकिन अब मंदार परवत को प्रतीक्षा है एक और मन्थन की जहाँ पर वो रिसर्च की जाए शोध की जाए और जो अद्भूत विश्वस्निय अखल्पनिय बातें की जाती हैं उनके साथ वो प्रमान भी प्रत्यक्ष मौजूद हो
44:03अबी के लिए इतना ही हितेश कुमार और सयद मोसिन के साथ मुझे दीजे इजाज़त देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक
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