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गुरुदत्त के किस्सों से सजा आजतक का मंच, देखें फौजिया दास्तानगो का अनोखा अंदाज
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00:00:00साहित्य आज तक में हमारा प्रयास होता है आपके लिए कुछ अलग कुछ अनूठा और वो लोग जो कुछ अलग हट कर साहित्य को एक अलग रूप में प्रस्तूत करते हैं उन सब को आपके बीच लेकर आएं
00:00:12फौजिया दास्तानगो भारत की ऐसी एकलोती महला दास्तानगो हैं जिन्होंने सोलवी शताब्दी की उर्दू मौखिक कथा कला दास्तानगोई को नहीं जान दी है
00:00:24पुरानी दिल्ली में जन्मी हैं पली बढ़ी हैं पुरानी दिल्ली में ही
00:00:27दादी नानी की कहानियों पडोसियों की बातें उर्दू साहित्य की क्लासिक किताबों से भरा हुआ है
00:00:37उन्हें उर्दु भाशा, साहित्य और दास्तान गोई से बच्पन से ही गहरा लगाओ था
00:00:42अब ये पूरी टीम आपके सामने है और इस पूरी टीम का ये जो प्रयास है
00:00:48उनके साथ, उनके शब्दों में, उनकी नजरिये से पेश है दास्तान एक गुरुदत
00:00:56स्वागत कीजिए तालियों के साथ
00:00:58खौतिन हुजरात आदा, मेरा नाम है फौजिया दास्तान गोई
00:01:04तो हम आज आपके सामने पेश करने जा रहे हैं दास्तान ए गुरुदत
00:01:08दास्तान ए गुरुदत शिरू करने से पहले मैं ये बताना चाहूंगी
00:01:12कि ये ट्रडिशनल दास्तान गोई नहीं है, ये म्यूजिकल दास्तान गोई है, इसमें मेरा साथ देंगे सुधिप तबले पर, रतिका जैन गाने के लिए, अंकित गिटार पर और रिशब कीबोर्ट पर
00:01:29खौतिनों हजरात, दास्ताने आपने बहुत सी सुनी होंगी, मगर आज की दास्तान खास है, क्योंकि ये गुरुदत के लिए है, और मैं दास्तान शुरू करने से पहले मैं ये जरूर बताना चाहूंगी, कि दो लोग ये दास्तान यहां तक नहीं पहुशती है, अगर दो
00:01:59आपको हमारी दास्तान में कोई चीज पसंद आए, लुथ आए, मज़ आए, तो आप कहेंगे, वा, एक जमाना था, कहा जाता था, कि जिसकी ताली पिड़ गई, उसकी इज़त उतर गई, मुझे लगता है, कि आज जिसकी ताली नहीं पिड़ती, उसकी इज़त उतर जाती
00:02:29दोपहर जादा बेतर रहेगा कहना, आज की घलती हुई दोपहर में मैं आपका खायर मखदम करती हूँ, और आगास करती हूँ, आए दास्ता का करे आगास, एक बुलबुले चमन को जिस पे थानाज, तर्ज जिसकी जुदा जुदा अंदाज, जो के था अपने वक्त की आ
00:02:59आज हम कर रहे हैं उसको याद, आप थी जिसकी खामोशी फर्याद, फिल्म साजी के फन का था उस्ताद, उसके जैसे हुआ ना उसके बाद, धूप में जो पुहार मध्धम था, बजम गुल में जो मिसले शबनम था, जिसने छेडी थी कैमरे पे घजल, नगमे जिन्दगी
00:03:29रोश्टी में पिघल, ढूरने पर मिले न जिसका बदल, अक्स दरक्स था वो महवे कलाम, है गुरूदत उस चराख का नाम, है गुरूदत उस चराख का नाम
00:03:44हाजरीन, आज हम जिस अजीम फनकार की दास्तान लेकर आपकी खिदमत में हाजर हुए हैं, वो सिर्फ एक फिल्मकार नहीं, सिर्फ एक अदाकार नहीं, बलके एक शायर भी था, जो रीलों पर उदासी की गजल कहने का हुनर जानता था
00:04:02उसके हिस्से में गमों की कड़े धूब तो खुब आई, पर खुशियों की रिमजिम से उसकी दुनिया कम कम ही आबाद हो सकी, ये बात सच है कि उस तक पहुशने का रास्ता, जिन्दगी की तर्क हकीकतों की तरहां पत्रीला और खारदार है, लेकिन फिल्म के पर्दे पर
00:04:32आज हम वही रुदाद लेकर आपके सामने हाजिर हुए हैं, किसी और गम में इतनी खलीशे निहा नहीं हैं, गम दिल मेरे रफीको गम रायगा नहीं हैं, इनी पत्थरों पे चलकर अगर आ सको तो आओ, मेरे घर के रास्ते में कोई कहकशा नहीं है, मेरे घर के रास्ते में
00:05:02बूज मेरा क्या नाम रे नदी किनारे गाओ रे
00:05:15पीपल जू में मूरे आंग नार थंडी थंडी चाहाओ रे
00:05:20बूज मेरा क्या नाम रे नदी किनारे गाओ रे
00:05:25पीपल जू में मूरे आंग नार थंडी थंडी चाहाओ रे
00:05:30दिलवालों के बीच में मेरी अखिया है बदना
00:05:51एक पहली फिर वे कोई पूझे मेरा नाम ये चली ये चली पूझो तो कित जाओ रे
00:06:07पूझ मेरा क्या नाम रे ननी किनारे गाओ रे
00:06:12पीपल जुमे मोरे आंगना थंडी थंडी चाओ रे
00:06:17पीपल जुमे मोरे आंगना थंडी थंडी चाओ रे
00:06:23तो हाजरین इस कहानी का आगाज होता है
00:06:27उननीस सो बीस में जब मंगलोर के एक छोटे से कजबे में
00:06:31एक नया नवेला जोड़ा किसी जोतिशी के पास पहुँचता है
00:06:35जिन्दगी की जद्दो जहद से परेशान ये जोड़ा
00:06:39अपनी आप बीती उस जोतिशी को सुनाता है
00:06:42और अपनी खिस्मत का रास दरियाफ्ट करता है
00:06:45लड़की का हाथ देखते ही
00:06:47उस जोतिशी की आँखे चमक उटती है
00:06:50वो कहता है बेटी तुम्हारा नसीब बहुत हुचा है
00:06:54चन्द ही बरस के अंदर तुम्हारे घर के अंदर एक ऐसे बेटे का चरम होगा
00:07:00जिसकी पहचान सरहदों में नकैद हो सकेगी
00:07:04उसकी रोशनी तुम्हारे आंगन से निकल कर लोगों के दिलों तक पहुचेगी
00:07:09दुनिया उसे उसके नाम से नहीं उसके हुनर से पहचानेगी
00:07:14वक्त गुजरता है
00:07:16जिन्दी की अपनी छोटी छोटी खुशियों और गमों के साथ
00:07:20आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ती है और फेर आती है वो तारीख
00:07:259 जॉलाई 1925 यानी गुरुदत की पैदाईश का दिन
00:07:31पैदाईश के बारवे दिन पालने की रसम हुई
00:07:34पूरा घर फूलों और रंगोलियों से सजाया गया
00:07:39भोज, परसाद, उपहार और आशिरवात से पांदुकोन परिवार का पूरा घर खिल उठा
00:07:46बच्चे के लिए दो नाम सुझाए गए किसी ने कहा वसंत कुमार रख दो
00:07:51तो किसी ने कहा गुरुदत चूंकि जनम गुरुवार को हुआ था
00:07:56इसलिए वसंती और शिवशंकर ने अपने बेटे का नाम गुरुदत रखा
00:08:01गुरुदत का परिशानियों से नाता काफी पुरा ना था हाजरिग
00:08:06उनके पिता सफलता में नहीं कवीता में यकीन रखते थे
00:08:10जो जिन्दगी गुजाने और घर चलाने के लिए काफी नहीं था
00:08:14इसलिए परिवार को बड़े बेटे गुरुदत से काफी उमीदे थी
00:08:20तो शहर दर शहर भड़ता हुआ ये परिवार आखिर में कलकत्ता पहुँचा
00:08:25कलकत्ता में ही गुरुदत के बच्पन का बाकाइदा आगाज हुआ
00:08:32सुनो गजर क्या गए समें गुजरता जाए
00:08:53ओर जीने वाले ओर बुले बाले सुना ना
00:09:00तो ना ना सुनो गजर क्या गए
00:09:04किन चुन पल है तिरी जीवन के
00:09:24धूम चल अपी दिन है बिलन के
00:09:30किन चुन पल है तिरी जीवन के
00:09:34तूम चल अपी दिन है मिलन के
00:09:38भूर जीने वाले भूर भूले वाले सुना ना
00:09:43भूना ना सुना ना
00:09:47भूना भूना ना
00:09:49तो हाजरीन गदर गौष शाहर दानत या बदानत जोहरी
00:09:54यानि मोती की खदर या तो बादशा जानता है या सुनात
00:09:58कलकता में ही गुरुदत की मुलाकात उस शक्स से भी हुई
00:10:02जिसने उनकी तमाम बेचैनियों उनकी तमाम सवालों को सिनेमा की तरफ मोड दिया
00:10:09उस शक्स का नाम था बीबी बैनिगल बैनिगल गुरुदत के रिष्टे के मामा थे
00:10:15और यकीनन गुरुदत के पहले गुरु भी थे
00:10:19बैनिगल ने गुरुदत के अंदर छिबे कलेकार को बच्चपन में ही पहचान लिया था
00:10:25गुरुदत हर इत्वार अपनी नारी के साथ ट्राम में बैट कर बैनिगल के घर पहुँच जाते
00:10:31और उनके ग्रामो फोन पर S.D. बर्मन के गाने बार बार बजाते
00:10:37उनकी गहर मौजूद्गी में उनका कैमरा उठाकर चिडिया घर चले जाते
00:10:42और वहाँ जानवरों की तस्वीरे खीशते कैमरे से खिरते रहते और कहते
00:10:48एक दिन मैं भी फिल्म बनाऊंगा गुरुदत के इस मासुम खाफ पर बैनिगल ने उन्हें कभी नहीं टोका
00:10:56बलके उनकी होसला अवजाई की बैनिगल की दुनिया में खाफ देखने की इजाज़त थी
00:11:02वो ऐसी दुनिया थी जहां तखयूल को दबाया नहीं जाता था बलके परवान चढ़ाया जाता था
00:11:10कलकत्ता में भी परिवार की मुश्किले कम नहीं हुई घर की हालत खस्ता थी
00:11:16हर्चा चलाने के लिए वसंती ने प्राइविट टूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था
00:11:21मैट्रिक पास करनी के बाद गुरुदत को भी मजबूरन नौकरी करनी पड़ी
00:11:26शुरुआती दिनों में टेली फून आपरेटर की नौकरी और फिर हिंदुस्ता लीवर्स के कलकत्ता ओफिस में मुलास्मत
00:11:34जिन्दगी बेहतरी की तरफ तो बढ़ रही थी लेकिन गुरुदत अंदर से खुश नहीं थे
00:11:41वो रोज खुद को इस नौकरी में फसा हुआ महसूस कर रहे थे
00:11:45एक सुबा गुरुदत अपने मामा बीबी बैनिगल से मिलने आए
00:11:49बैनिगल ने हान ही में एक नई पेंटिंग बनाई थी
00:11:53इस पेंटिंग में साप ने एक आदमी के पूरे जिस्म को जकर रखा था
00:11:59पेंटिंग देखकर गुरुदत से रहा नहीं गया
00:12:02कहने लगे मामा इसे देखकर मेरा नाचने का मन कर रहा है
00:12:06बैनिगल उनके अंदर उठ रहे तुफान को फौरन भाब गए
00:12:10वो गुरुदत को कलकत्ता के इडन गाडन ले गए
00:12:14और कैमरा खोल कर कहा नाचो और अपने अंदर की बेचैनी को बाहर निकाल फेको
00:12:21फिर क्या था पुर्जोश और मदमस गुरुदत ने बैनिगल की लाल शाल अपने सिर पर रख ली
00:12:27अपनी कमर पर एक पीला कपड़ा बांद लिया और अपनी धुन में रक्स करने लगे
00:12:44के कैमरी में कैद ये कोई मामोली रक्स नहीं था ये नौजवान गुरुदत की आजादी का रक्स था
00:12:52वो कहते हैं ना रक्स आजादी हुआ जब खामोशी की ताल पर चड़ गया खाबों का नशा जिन्दगी की चाल पर तोड़कर पिंजरा परिंदा आसमा में उड़ गया
00:13:05और किताबे उम्र में ताजा वरक एक जुड़ गया
00:13:10और किताबे उम्र में ताजा वरक एक जुड़ गया
00:13:15तद्वीर से बिगडी हुई तकदीर बना ले
00:13:33अपने पे भरूसा है तुए दाव लगा ले लगा ले दाव लगा ले
00:13:43तद्वीर से बिगडी हुई तकदीर बना ले तकदीर बना ले
00:13:50अपने पे भरूसा है तुए दाव लगा ले लगा ले दाव लगा ले
00:13:58दरता है जमानी की निगाहों से भला क्यूं?
00:14:17निगाहों से भला क्यूं? दरता है जमानी की निगाहों से भला क्यूं?
00:14:24निगाहों से भला क्यूं? इनसाथ तेरे साथ है इल्जाम उठा ले
00:14:31अपने पे भरूसा है तुए दाव लगा ले लगा ले दाव लगा ले
00:14:41हाजरीन दोस्तों की मदद से उधै शंकरक इंडिया कल्चर सेंटर में आडिशन दिया और गुरुदत को वहां चुन भी लिया गया
00:14:51जब गुरुदत कलकता से अलमोडा पहुँचे तब उनकी उम्र सिर्फ सोला बरस थी काले घने बाल खामोश चेरा और उस पर ऐसी मासूमियत के जो एक बार देख ले वो भूलना पाए
00:15:04उदय शंकर को उनके टैलेंट से ज्यादा उनके अंदर लावी की तरहा उबलता हुआ जजबा पसंद था
00:15:12वो जनून जो किसी फनकार की पहचान होता है उनके अंदर जो आग था वो उसी वक जाहर हो चुका था
00:15:20सब को मालूम था ये लड़का आगे जाकर सरूर कुछ बड़ा करेगा
00:15:24ऐसा लगता था जैसे जिन्दगी ने उन्हें आखिर कार वो जगा दे दी है जहां वो खुल कर सांस ले सकते हैं
00:15:33रक्स मौसकी ले तस्वीर और तस्वीर यही तो थी उनकी दुनिया अभी चंद साल ही गुजरे थे के वर्ल वार टू का आगाज हो गया और उदेशंकर को अपना डांस सेंटर बन करना पड़ा
00:15:47ये खबर गुरुदत के लिए जबरदस सद्मा थी सिंदगी अभी समली ही थी आखों में कुछ खाब जड़ पकड़ने लगे थे के फिर से वही दरबदरी वही सवालात वही बेयकीनी और वही अंजाना सा खौफ
00:16:05वो कहते हैं ना घर से निकले मंजिले मकसूत की जानिब गए देखिए हमको जुनू इस बार ले जाए कहां
00:16:15खाब आखों में लिए हम धूंडते हैं रात दिन वक्त की इस धूप में होते हैं अपसाए कहां
00:16:23इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा ना हुआ
00:16:51इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा ना हुआ गैर तो गैर थे अपनों का सहारा ना हुआ
00:17:11इस भरी दुनिया में
00:17:27गुरुदत अलमोरा से निकले तो किस्मत गुरुदत को पूना ले गई यहां परभाद स्टूडियो में पचास रुपे महीने पर बतौर असिस्टेंट डांस डिरेक्टर काम मिल गया उन दिनों परभाद स्टूडियो में हम एक हैं की शूटिंग चल रही थी जिसमें मरक
00:17:57कानन की आखे उन से चार हुई और देखते ही देखते दोनों में गुर्बत बढ़ गई गुर्बत क्या जनाब बात इससे भी दो हाथ आगे निकल गई एक दिन महतरमा ने देव साहब से उनकी पसंदीदा कमीज पहन कर आने की फरमाईश कर दी पूछने पर मालुम हुआ क
00:18:27आशू कहे दिन तो दिन रात तो रात अगले रोज देव साहब ने अपनी पूरी अलमारी च्छान मारी पर पसंदीदा कमीज का नाम और निशान नहीं परिशान होकर देव साहब ने अपनी बहन को फोन किया जो इत्तिवाक से उन दिनों पूने में ही रुकी हुई थी अर
00:18:57अच्छी लगेगी तुम पर अरे पहन कर तो देखो मरता क्या ना करता देव साहब धोबी की इस कारिस्तानी को मन ही मन में कोशते हुए किसी दूसरे की खमीज पहन कर स्टूडियो के लिए रवाना हो गए भई मकसद ये था कि स्टूडियो के बाद मौतर्मा से मुलाकाद
00:19:27आप हम एक हैं के लीड अक्टर हैं इस्टूडियो में आपके बड़े चर्चे हैं देवानान ने जवाब दिया बर खुदा बिल्कुल सही पहचाना खाकसार को देवानंद कहते हैं गुर्दत ने कहा जी मेरे नाम गुर्दत है मैं मिस्टर बेडिकर को असिस्ट कर रहा ह�
00:19:57अरे मिया शट तो आपकी भी काफी शानदार है आपने कहां से ली गुर्दत ने जवाब दिया अरे मैंने तो चोरी की है अब यह ही इतनी खुबसूरत क्या करता देव सहाम ने कहा और मुझे मेरे धोबी ने तोफे में दी है ये कहते ही दोनों हस पड़े और ये खुबस�
00:20:27कि जिस दिन देव अनंद प्रोड्यूसर बनेंगे वो गुरुदत को डिरेक्टर के तौर पर अपनी फिल्म में लेंगे और अगर गुरुदत किसने किसे फिल्म का डिरेक्शन किया तो वो देव अनंद को बतौर हीरो अपनी फिल्म में लेंगे
00:20:42कुछ वक्त के बाद प्रभाद कमपनी के साथ गुरुदत का इकराण नामा खतम हो गया और वो बंबई आ गए
00:21:12दिल है मुश्किल जीना यहां जरा हटके जरा बचके यह है बंबई मेरी जाए
00:21:22कहीं बिल्डिंग कहीं ट्राविंग कहीं मोटर कहीं मिल पिलता है यहां सब कुछ इक मिलता नहीं दिल
00:21:40इंसा का नहीं कहीं नाम निशाद जरा हटके जरा बचके यह है बंबई मेरी जाए
00:21:50खातिनों हजरात गुरुदत के पास कोई काम नहीं था अंद्रून मायूसी और गुस्से से भर चुका था
00:22:03कहने को बहुत कुछ था मगर खामोशी ने चारो जानी एक दिवार सी तामीर कर दी थी
00:22:10ऐसे में उन्होंने कलम का दामन थाम लिया अंदर लावी की तरह उबलते हुए जजबों को अलफास के मोती में प्रोरा शुरू कर दिया
00:22:20अपनी बेचेनी और वक्त की कश्मकश को कागस के पन्नों में कैद करने लगे
00:22:26दफ्तरों के चक्कर काटते हुए लिखी गई इस कहानी का उन्वान भी पहले कश्मकश ही था
00:22:33इस कहानी में गुरूदत की नाराजगी नाउमीदी और उलजण अपने असली तेवर में नज़र आए
00:22:41इसे लिखते वक्त उन्होंने खुद से वादा किया था कि वो एक दिन इस कहानी को कागस के सफेज सिया से उठा कर फिल्म के परदे पर जिन्दा जरूर करेंगे
00:22:56हाजरीन आज हम और आप गुरूदत के इस खाप को प्यासा के नाम से जानते हैं
00:23:03जी हाँ वो ही प्यासा जिसे टाइम मैगजीन ने भी बीसमी सदी की सौ सबसे बेहत्रेन फिल्मों में शुमार किया था
00:23:12ये कूचे ये नीलाम घर दिल कशी के
00:23:40ये लुटते हुए कारवा जिन्दगी के
00:23:49कहा है कहा है मुहाफिस खुदी के
00:23:57जिन्हे नाज है हिंद पर वो कहा है
00:24:06कहा है कहा है कहा है
00:24:15कहा है
00:24:19फ़ादिनों हजरात 1948 में जिद्धी के रिलीज होने के बाद देवनन्द स्टार बन चुके थे
00:24:26फिल्मी दुनिया में उनका सिक्का चल चुका था
00:24:30आखों में खाम लिये पूने से निकले दो दोस्तों में से एक अपनी मन्जिल के बेहत खरीब था
00:24:37और वही दूसरा काम की तलाश में दफ्तरों के मायूस चक्कर काट रहा था
00:24:43एक शाम अचानक देवनन्द तुफों और गुलदस्तों के साथ गुरुदत के घर पहुचे
00:24:49उन्होंने खुशखबरी दी कि वो एक फिल्म बनाने जा रहे हैं
00:24:52और कहा गुरु मैं चाहता हूँ के इस फिल्म का डारेक्शन तुम करो
00:24:57गुरुदत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा
00:25:00वादा अपनी जगा लेकिन देवनन्द को गुरुदत की सलाहियतों का बहुभी अंदाजा था
00:25:07फिल्म का नाम था बाजी
00:25:09आगाज हो चुका था खुशी के दिनों का अब
00:25:14किसमत ने कर लिया था हमें यू ही मुन्तखिब
00:25:17आंगन में चांदनी का बसे रा था रोज औ शब
00:25:21एक दर्द मन था जिसे दिल की खबर थी सब
00:25:25बरसों के बाद वादा निभाने वो आया था
00:25:29नेमत है दोस्ती ये बताने वो आया था
00:25:33नेमत है दोस्ती ये बताने वो आया था
00:25:38खुशीनों हजरात बाजी फिल्म की लीड सिंगर गीता रॉय थी
00:25:42वो पहले दिन जब गानों की रहरसल के लिए पहुँची
00:25:46तो एक नौजवान उनकी गाड़ी के पास आया और बोला
00:25:49आईए मैं आपको रहरसल रूम लिए चलता हूँ
00:25:52बिंगॉली में बात करते हुए इस आदमी को देखकर
00:25:56गीता रॉय थोड़ा सा चौकी अंदर पहुचकर
00:26:00उन्होंने बर्मन से पूछा
00:26:01ये बिंगॉली सज्जन कौन है
00:26:03बर्मन ये सुनकर हस पड़े
00:26:05और अरे वो बिंगॉली नहीं है
00:26:08बस उसका ना गुरुदत है
00:26:10वो इस फिल्म का डिरेक्टर है
00:26:12तो खौदिनों हजरात
00:26:14ये थी गुरुदत की
00:26:16गीताराए से
00:26:17पहली मुलाकात
00:26:31नजरे मिली क्या किसी से
00:26:38हालत बदल बदल गई
00:26:41कल तक हमारा
00:26:53ना पूछ कैसा हाल था
00:26:56मिलती कहीं
00:26:58आख दिल को ये मलाल था
00:27:00कल तक हमारा
00:27:02ना पूछ कैसा हाल था
00:27:04मिलती कहीं
00:27:06आख दिल को ये मलाल था
00:27:09उसने जो देखा
00:27:11तो हसरत ने गल गई
00:27:13सुन प्यारे
00:27:15सुन प्यारे
00:27:17अपनी तो खिसमत बदल गई
00:27:20सुन प्यारे
00:27:21अपनी तो खिसमत बदल गई
00:27:24खौदिनों हजरात
00:27:27इसके बार
00:27:28मुलाकातों का सिलसिला कभी नहीं थमा
00:27:30दोनों कभी देवनन के घर होने वाली पार्टियों में मिलते
00:27:34कभी शूटिंग से वक्ष चुरा कर लॉंग ड्राइव पर निकल जाते
00:27:39बारिश दोनों को पसंद थी
00:27:41बारिश होती तो दोनों खुद को रोक न पाते
00:27:44और सड़क पर निकल पड़ते
00:27:46घंटों बंबई की भागती सड़कों पर चहल कदमी करते
00:27:51गुरुदत गीता रोय पर फिदा हो चुके थे
00:27:54दिल्चस्प बात ये है कि उस वक गुरुदत अपनी पहली फिल्म डरिक कर रहे थे
00:28:01जबके गीता राए आसमान का चमकता हुआ सितारा थी
00:28:06वो कहते हैं न वो एहदे जवानी वो खराबात का आलम
00:28:11नगमात में डूबी हुई बरसात का आलम
00:28:15आवाज में कलियों के चटकने की लताफत
00:28:20रफतार में बहते हुए नगमात का आलम
00:28:24हस्ती हुई आँखों से सवलात की बारिश
00:28:29जलते हुए होटों से जवाबात का आलम
00:28:33कुछ मुछ को खबर थी ना उन्हें होश था अपना
00:28:37अल्ला हरे मद होशी औ जजबात का आलम
00:28:41ऐ राश आए मस्ती का सबब पूछने वाले
00:28:45देखा है कभी पहली मुलाकात का आलम
00:28:49बाबुजी धीरे चलना फ्यार में जरा सम्हलना
00:29:06आँ बड़े दोखे हैं बड़े दोखे हैं इस राह में
00:29:13बाबुजी धीरे चलना
00:29:16क्यों हो कोई हुए सर चुकाएं
00:29:36जैसे चाते हो सब कुछ लुटाएं
00:29:40ये तो बाबुजी पहला करदम है
00:29:44नजराते हैं अपने पराएं
00:29:49हाँ बड़े दोखे हैं बड़े दोखे हैं इस राह में
00:29:56बाबुजी धीरे चलना
00:29:58खौतिनों हजरात उन दिनों बाजी की शूटिंग शुरू ही हुई थी
00:30:03सेट पर देवानंद और गुरुदत किसी सीन के बारे में बातचीत कर रहे थी
00:30:08कि अचानक एक शराबी लड़ खड़ाता हुआ सेट के अंदर दाकिल हो गया और आस पास रखी चीजों से टकराते हुए
00:30:17गुरुदत के बिल्कुल सामने पहुँच गया सेट पर अफरा तफरी मच गई सबकी निगाहें उस शराबी पर जातिकी थी
00:30:25शराबी अपने आप से उजरूल बाते करता मन ही मन बकपकाता लेकिन उसका अंदाज मज़ेदार था
00:30:33उसकी हरकते देखकर सेट पर मौजूद तमाम लोग हसी से लोटपोट हो गए
00:30:39किसी को कुछ समझ आता इससे पहले ही अचानक वो संजीदा हो गया और नर्म लहजे में बोला जी मैंने शराब नहीं पी है मैं तो बस एक बस कंड़क्टर हूँ बल्डास ताने सहाब ने मुझे यहां सर्प्राइस आउडिशन देने के लिए भेजाए
00:30:51बिना तैयारी के दिया गया यह आउडिशन गुरुदत को बेहत पसंदाया उन्होंने बाजी में उस बस कंड़क्टर को रोल दे दिया हाजरी उस बस कंड़क्टर का नाम था बदरुदीन जमालुदीन काजी जब फिल्म पूरी हो गई और जब गुरुदत ने अपनी पह
00:31:21बदरुदीन ही लिख दें यह सुनकर बदरुदीन ने कहा अरे मिया ऐसा लगेगा जैसे मैं किसी का निका पढ़ाने जा रहा हूं गुरुदत को यह सुनकर हसी आ गई वो कुछ देर सोचने के बाद बोले यार तुम शरावी आदमी की एक्टिंग जबरदस करते हो और मेर
00:31:51जाने कहा मेरा जिगर गया जी अभी अभी अभी अहीं था किधर गया जी किसी की अदाओं पे मर गया जी बड़ी बड़ी अक्टियों से डर गया जी
00:32:15कही मार डर के चुहा तो नहीं हो गया कुने कुने देखा न जाने कहां खो गया
00:32:36कुने कुने देखा न जाने कहां खो गया यहां उसे लाए काही कुबे न कामरे जल्दी जल्दी ढूंडों के होने लगी शामरे
00:32:48मेरे जाने कहां मेरा जी गर गया जी अभी अभी यही था किदर गया जी किसी की अगाओ दे मर गया जी बड़ी बड़ी अखियों से डर गया जी
00:33:06खातिनों हजराद बाजी ने सिनेवा दोस्तों के दिलों में एक ऐसी जगा बनाई कि गुरुदत रातो रात एक बड़ा नाम बन गए
00:33:16वो कहते हैं न ढूंडोंगे अगर मुलकों मुलकों मिलने के नहीं नायाब है हम
00:33:23जो याद ना आए भूल के फिर एह हम नफसो वो खाब है हम एशो के पता कुछ तू ही बता अब तक ये करिश्मा कुछ न खुला हम हैं दिले बेताब नहा या आप दिले बेताब है हम
00:33:40कुछ ही वक्त के बाद गुरुदत और गीता रौई की सगाई भी हो गई और फिर शादी हाला के गुरुदत और गीता दद एक मुहबत की दो पढ़तें एक खाब के दो चेहरे थे
00:33:53शादी से पहले ही दोनों में ये फर्क साफ साफ नजर आता था
00:33:58उनके दर्मियान जो फासला था वो सिर्फ दो लोगों के भीच का नहीं बलके दो नजरीऊं दो मिजआज़ों और दो अलग हाकिकतों से महबत करने वाले लोग थे
00:34:11जहां गीता दर्थ एक खुश मिजाद जिन्दगी की हकिकतों से महबत करने वाली और रिवाईती जजबात में गुंदी हुई खातुन थी
00:34:22वहीं गुरुदत पेचीदा जहन के मालिक तनहाई कश्मकश और अंधूनी खलफिशार से भरे हुए इनसान है
00:34:31पर कहते हैं ना महबत में करें क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता मेरा मरना भी तो मेरी खुशी से हो नहीं सकता
00:34:42वो इश्क ही क्या जो अंजाम के डर से आगाज ही में अपने परों को समेट ले
00:34:49इश्क होना था हुआ और तमाम खूबियों और खामियों को दरकिनार कर दोनों शादी के बंधन में बन गए
00:34:58ये गालिबन गुरुदत की जिन्दगी का सबसे हसीन दौर था
00:35:03हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दे तो
00:35:18हम मूद के पलकों को इस दिल को सजा दे तो
00:35:25हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दे तो
00:35:32इन जुल्फों में गुन्देंगे हम फूल महाबत के जुल्फों को चटक कर हम ये फूल गिरा दे तो
00:35:52इन जुल्फों में गूंदेंगे हम फूल मुहाबत के जुल्फों को चटक कर हम ये फूल किरा देतो
00:36:06हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा देतो
00:36:22खातिनों हजरात गुरुदत किसी काम के सिलसले में हैदराबाद गए थे
00:36:32जहां उनकी कार से एक भैंस की टककर हो गई
00:36:35इस हाथसे में कार को काफी नुकसान हुआ
00:36:39एक दिन का सफर तीन दिन में तबदील हो गया
00:36:43जिस काम से गए थे वो भी नहो सका
00:36:45गुरुदत इस बात से काफी चुड़े हुए थे
00:36:49मरता क्या ना करता अब दिन तो काटने ही थे
00:36:52किसे डिस्ट्रिब्यूटर से मिलने उनके ओफिस चले गए
00:36:56अभी पहुचे ही थे के बाहर अचानक तेश शोर सुनाई दिया
00:37:00सामने कार आकर रुकी जिसको भीर ने चारो तरफ से घेड लिया
00:37:06दरवाजा खुला और एक लड़की कार से बाहर निकली
00:37:09ये मनजर देखकर गुरुदत कुछ लम्हों के लिए ठिटक गए
00:37:14उन्होंने हैरानी से डिस्ट्रिब्यूटर की तरफ देखा
00:37:17डिस्ट्रिब्यूटर ने कहा ये वहीदा रह्मान है
00:37:21अच्छा उन्होंने जवाब इक डिस्ट्रिब्यूटर ने गुरुदत से कहा
00:37:27अरे इस लड़की ने अभी हाल ही में डास नंबर किया है
00:37:31ऐसा धमा का कि लोग इस पर फरिवता हो गए है
00:37:34वहीदा रह्मान गुरुदत ने सोचा
00:37:37ये तो मुसल्मान है उर्दू भी बोलती होगी
00:37:40गुरुदत के दिल में एक लहर सी दोड़ गई
00:37:44जैसे किसी देरीना तलाश की गिरेग खुल गई हो
00:37:48उन्हें शायद इसका अंदाजा नहीं था
00:37:51कि ये मुलाकात उनकी जिन्दगी में एक नया बाप खोलने वाली है
00:37:56उन्हों ने इस डिस्टिब्यूटर से फौरण वहीदा रह्मान से मिलने की खुआहिज जाहिर करी
00:38:01ये गुरुदत की वहीदा रह्मान से पहली मुलाकात थी
00:38:06गुरुदत ने कुछ महीने बाद गुरुदत ने उन्हें CID फिल्म में एक रोल देकर ब्रेक भी दिया
00:38:13CID के बाद गुरुदत की तकरीबन हर फिल्म में वहीदा रह्मान की मुख्य भूमिकर रही
00:38:21गुरुदत और वहीदा रह्मान की ओन स्क्रीन केमिस्ट्री ने अफ़ाहों का बाजार गरम कर दिया था
00:38:29इसका असर उनकी जाती जिन्दिगी पर भी खूब पड़ा
00:38:33जानने क्या तुने कही जानने क्या मैंने सुनी
00:38:52बात कुछ बनी गई जानने क्या तुने कही
00:39:01संचना हट्ची हुई थर्थरा हट्ची हुई
00:39:25जाग उठे खब कही बात कुछ बनी गई जानने क्या तुने कही जानने क्या मैंने सुनी
00:39:51बात कुछ बनी गई
00:39:56हाजरीन किया आबाद विराना रहे तूटे मकानों में
00:40:05हमारी जिन्दगी गुजरी मुसलसल इम्तिहानों में
00:40:09मगर जागी हुई आखों से हमने खाब देखा है
00:40:14हम अपना घर बनाएंगे किसी दिन आस्मानों में
00:40:19किराए के मकानों में गुजरा हुआ बश्पन अपने लिए आगे चल कर एक बड़े घर का खाब जरूर देखता है
00:40:27अपने घर का खाब
00:40:29सो एक खाब गुरुदत की आखों ने भी देखा था
00:40:32बॉंबे के सबसे आले शान इलाके में एक आले शान बंगले का खाब
00:40:37पाली हिल का इलाका घने दरकतों समंदरों के किनारे खुबसूरत पहाड़े की वज़ा से
00:40:44फिल्मी सितारों का पसंदीदा हुआ करता था
00:40:48ये इलाका गुरुदत को भी काफी पसंद था
00:40:51उन्होंने मन ही मन ये तैकर लिया था कि अगर किसमत ने साथ दिया
00:40:56तो एक दिन वो इसी इलाके में अपना घर बनाएंगे
00:41:00और ऐसा हुआ भी तीन बीगा में फैला हुआ गुरुदत का ये खुबसूरत घर
00:41:06गुरुदत के लिए उनके सपनों के घर जैसा था
00:41:10उन्होंने इसे बड़े अर्मानों से बनवाया था
00:41:13लकडिया कश्मीर से आई थी
00:41:15मामल जिटली से मंगवाए गए थे
00:41:18और काली लंदन से
00:41:20हरा भरा सुन्दर लौन इंतहाई खुबसूरत बगीचा
00:41:24समंदर के किनारे बसा या लिशान बंगला
00:41:28हर किसी को अपना कायल बना लेता था
00:41:31गुरुदत खुद भी अपने घर को पाली हिल का
00:41:35सबसे खुबसूरत घर माते थे
00:41:37इस घर में गुरुदत और गीतदत ने
00:41:41अपनी शादी के बाद सबसे खुबसूरत लम्हें बिताए थे
00:41:45और इस घर का नाम था बंगला नमबर 48
00:41:49यहीं उनके बेटी की पैदाईश भी हुई
00:41:52शादी के शुरुवाती दिन खौबों की ताबीर जैसे थे
00:41:57हर लम्हा मुस्कुराहट, हर मन्जर बहार
00:42:11पियाए सुझिया में समाएं गयो रे
00:42:20कि मैं तन मन की सुदबुद गवा बैठी
00:42:24पियाए सुझिया में समाएं गयो रे
00:42:29कि मैं तन मन की सुदबुद गवा बैठी
00:42:33हरे आहट पे समझी हो आए गयो ने
00:42:38चट गूंगट पे मुखडा छुपा बैठी
00:42:47पिया एसोचियां पे समाए गयो रे
00:43:03उरे अग्ना में जब पुरवययां चले
00:43:16उरे द्वारे की खुल गई के वड़िया
00:43:29मैंने जाना कि आ गई सावर्या मोरे
00:43:38चट दूलन की सजिया पे जा बैनी
00:43:43दियाए सोजिया में समाए गयो रे
00:43:47कि मैं तन मन की सुद बुद गवा बैनी
00:43:52हरे आहट पे समझी हो आई गयो रे
00:43:56हरे आहट पे समझी हो आई गयो रे
00:44:00चट दूलन के पुखड़ा चुपा बैटी
00:44:05पियाए सोजिया में समाए गयो रे
00:44:10कैदे हयाते बंद गम असल में दोनों एक है
00:44:16मौत से पहले आदमी गम से नजात पाए क्यों
00:44:21गुरुदत की शोहरत आसमान चुने लगी थी
00:44:24और गीता दद का करियर धलान पर था
00:44:27ये फर्क रफ़ता रफ़ता उनके रिष्टे के आईने में
00:44:31दरारे डानने लगा कुछ मामूली जोग नोग जोग बहसों
00:44:35तकरार में बदली और फिर उनकी जिन्दिग्यों का महवर ही
00:44:39गीता दद जो कभी कहकों की तस्वीर थी अबुदासी की मूरत में
00:44:45तबदील होती जा रही थी गुरुदत भी दिन बदिन अपनी फिल्म के किरदारों की तरह होते
00:44:51जा रहे थे तनहा और खामोश शादी चल नहीं रही थी दर्मियान में
00:44:57बद्गुमानी की एक मजबूत दिवार थी
00:45:01वक्त ने किया क्या हसी सितम तुम रहे न तुम
00:45:22हम रहे न हम वक्त ने किया
00:45:32बेकरार दिल इस तरह मिले
00:45:52जिस तरह कभी हम जुदा न थे
00:46:02हम बेकरार दिल इस तरह मिले
00:46:12जिस तरह कभी हम जुदा न थे
00:46:22तुम भी को गए हम भी को गए
00:46:32एक राह पर चल के दो खदम वक्त ने किया
00:46:46क्या हसी सितम तुम रहे न तुम
00:46:56हम रहे न हम वक्त ने किया
00:47:06खातिनों हजरात गुरू दद जो सिनेमाई खाबों की जबान बखूबी जानते थे
00:47:12अपने दिल के नक्ष पढ़ने में नाकाम रहे
00:47:15लेकिन इन्ही खामोशियों के पीछे शायद कोई धरकन अब भी बाकी थी
00:47:22उनीस सो अठावन में गीता दद को लिखे खत में गुरू दद कहते हैं
00:47:27पिर ये जो भी हो ये याद रखना कि तुम मेरा हिस्सा हो और हमेशा मेरा हिस्सा रहोगी
00:47:35शायद तुम नहीं जानती कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूँ
00:47:40शायद जब मैं ना रहूँ तब तुम्हें इसका एहसास हो
00:47:44जब गुरू दद ने महसूस किया कि गीता दद उन से दूर हो रही हैं
00:47:49उनके अंदर का वो नर्म गोशा जाग उठा
00:47:52जो अक्सर उनकी वहशत के पाउं तले दब जाया करता था
00:47:57और फिर एक खामोश सी कोशिश हुई
00:48:00महबत को दोबारा आवास देने की
00:48:03रिष्टे को फिर से बहाल करने की
00:48:07और गीता दद को वापस पाने की
00:48:10गुरुदत ने गीता दद को अपनी पहली फॉरन ट्रिप पर दावत दी
00:48:15वेरूत की फजाएं, वो समंदर, उन दोपहर की खामोशियों
00:48:21और रात की हलकी हलकी शराबों में कुछ ऐसा था
00:48:25जिसने पुराने दिनों की यादे ताजा कर दी थी
00:48:28वहीं गुरुदत ने एक फैसला किया
00:48:31ना सिर्फ गीता दद के करियर को सहारा देने का
00:48:35बलके उन्हें हिरोईन के तोर पर लॉंच करने का
00:48:39बैरूद से लोडते ही उन्होंने अपनी अगली फिल्म का एलान कर दिया
00:48:44फिल्म का नाम था गौरी और उसकी हिरोईन थी गीता दद
00:48:49सुभा का वक्त था कलकत्त की फिजा में शूट की गहमा गहमी थी
00:48:54गुरुदत ने आवाज दी गीता को बुलाओ शॉट रेडी है
00:48:58किसी ने कहा जी मैं मेक अप कर रही है
00:49:01कुछ वक्त और लगेगा
00:49:03इस शॉट में कहानी के हिसाब से
00:49:06गीता दद को एक सादा सी गिसी पिटी साड़ी पहनी थी
00:49:10खुले बाल, माथे पर एक बिंदी
00:49:12कोई सजावट नहीं, कोई चमक धमक नहीं
00:49:16मगर देर होती गई
00:49:18गुरुदत का सब्र जवाब देने लगा
00:49:20उन्होंने रामू सरिया सिखा
00:49:22अरे जाओ देखो क्या हो रहा है
00:49:24रामू गए, मेकप रूम में
00:49:26गीता आइने के सामने बैठी
00:49:28बाल सबार रही थी
00:49:29भाबी, सब इंतिजार कर रहे हैं
00:49:32शॉट तयार है, बस भाईया
00:49:34आती हूँ, ये कहकर
00:49:36गीता दत फिर आइने में गुम हो गई
00:49:38रामू वापस नहीं लोटे
00:49:40तो गुरू दत खुझ चल दिये
00:49:42दर्वाजा खोला
00:49:43और अंदर का मंज़र देखकर
00:49:45आग बबूला हो गए
00:49:47ये क्या है, किसने खाना तुम्हें ये सब करने को
00:49:50मैंने कहा था ना
00:49:51के कैरेक्टर सिंपल है
00:49:53ये मेक अप, ये हैरी स्टाइल
00:49:55क्या गाओं की औरते ऐसे लगती है
00:49:57यूनिट के सब लोग सुन रहे थे
00:49:59गीता दत का चेहरा
00:50:01हैरत और दुख से पत्राया हुआ था
00:50:04फिर वो भी तूड गई
00:50:05तुम क्या चाते हो
00:50:07यही न, कि मैं वहीदा रह्मान से बत्तर लगूँ
00:50:10चंद लम्हों के लिए सननाटा चा गया
00:50:14गुरू दत पल्टे
00:50:15और सननाटे में बस एक सदा तैर गई
00:50:18पैक अप
00:50:18वो शॉर्ट जो होना था वो कभी नहीं हुआ
00:50:22बस रह गई
00:50:23एक कभी न मिटने वाली खामोशी
00:50:26और दो तूटते हुए दिलों की
00:50:29आखरी बाजगश्ट
00:50:31आखरी बाजगश्ट
00:50:32आखरी बाजगश्ट
00:50:34जाने हो कैसे
00:50:48लोग थे जिनके
00:50:51प्यार को प्यार मिला
00:50:56हमने तो जब कलियां मांगे
00:51:01काटों काहार मिला
00:51:06जाने हो कैसे
00:51:09लोग थे जिनके
00:51:12प्यार को प्यार मिला
00:51:17खुशियों के मन्जिरों में तो
00:51:33गम के गर्द में चाहत के नग में चाहे तो
00:51:44आहे सर्द में
00:51:48देके बोच को दूना कर गया
00:51:55जो घम खाब मिला
00:51:58हमने तो जब कलियां मांगे
00:52:04काटों काहार मिला
00:52:09जाने हो कैसे
00:52:13लोग थे जिनके
00:52:15प्यार को प्यार मिला
00:52:19खातिनों हजरात गुरुदत मिजच से जुनूनी थे
00:52:25और उनका जुनून उनकी फिल्मों में बख्यूभी नजर आता था
00:52:28फिल्में उनका खाफ थी
00:52:30और उस खाफ की ताबीर के लिए
00:52:32वो कुछ भी कर सकते थे
00:52:33कोई अच्छी कहानी सुनते
00:52:35तो फौरान उसे परदे पर उतारने के मनसूबे बनाने लगते
00:52:39उनकी तमाम फिल्मों में इसी बेंतिहा जनून का नतीजा थी
00:52:44कागज के फूल इस जनूनी सिलसिले की आखरी कड़ी को कहते है
00:52:49फिल्म इंडस्ट्री कैसे चलती है जूनियर आर्टिस से लोग किस तरह पेश आते हैं
00:52:54काम्याबी को किस तरह सराहा जाता है
00:52:57और कैसे नाकामी का एक जटका आपको हाशिये पर लाप फेकता है
00:53:03इन तमाम पेचीदा सवालों का जाइजा लेती हुई
00:53:07इस खुबसूरत फिल्म से गुरुदत को बहुत उम्मीदे थी
00:53:12उन्हें यकीन था कि ये फिल्म भी प्यासा की तरहा हाथो हाथ ली जाएगी
00:53:17पर ऐसा ना हो सका
00:53:19बाद में कागज के फूल अपने असलूब और जुदागाना अंदास के हवाले से जानी जरूर गई
00:53:26और इसका शुमार गुरुदत की क्लासिक फिल्मों में भी हुआ
00:53:30लेकिन उस वक ये फिल्म बॉक्स आफिस का महौल नहीं बना सकी
00:53:37जुनून और जजबात का चोली दामन का रिष्टा है
00:53:40गुरुदत जुनूनी भी थे और जजबाती भी
00:53:44फिल्म बनाते तो दिलो जान सब उस फिल्म पर कुर्बान कर देते
00:53:49उन्होंने कागज के फूल में खुद को इस गदर जोग दिया था
00:53:54कि वो इसकी नाकामी बरदाश ना कर सके
00:53:57बिलाखिर फैसला किया कि बतौर डिरेक्टर ये उनकी आखरे फिल्म थी
00:54:04और हुआ भी ऐसा ही
00:54:06कुछ अपनी फिल्मों के किदारों की तरहां गुरुदत खुद भी एक पेचिदा इनसान थे
00:54:11दो बार खुदकुशी की नाकाम कोशिश कर चुके थे
00:54:15एक बार दो तिन रात को एक बार तो दो तिन दिन कौमा में रहे
00:54:21अपने वजूद की तमाम उल्जनों से धूर भाग जाना चाते थे गुरुदत
00:54:26उन्होंने जिस शे की तलाश थी वो हर कीमत पर उसे पा लेना चाते थे
00:54:32नासिर काजमी की जुबानी कहें तो गए दिनों का चिराग लेकर किधर से आया
00:54:40किधर गया वो अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो
00:54:47बस एक मोती से चप दिखाकर बस एक मीठी से धुन सुनाकर सितारा शाम बनके आया
00:54:55बरंगे खाब शहर गया वो बरंगे खाब शहर गया वो
00:55:10तंगा चुके है खश्म खशे जिन्दगी से हम
00:55:22तंगा चुके है खश्म खशे जिन्दगी से हम
00:55:35ठुकरा ना दे जहा को कही बेखुदी से हम
00:55:47हम घम जदा है लाए कहा से खुशी के गी
00:55:58कहा से खुशी के गीत देंगे वही जो पाएंगे इस जिन्दगी से हम
00:56:17हम देंगे वही जो पाएंगे इस जिन्दगी से हम
00:56:31हाजरीन कागज के फूल की नाकामी के बाद वो बिलकुल तनहा हो गए थे
00:56:41बीवी बच्चों से अलग एक फ्लैट में अकेले रहते थे
00:56:44कुछ दोस्तों और अजीजों के सिवा किसी से नहीं मिलते थे
00:56:48बाहर की दुन्या के लिए जो दर्वाजे पहले से बन थे अब पूरी तरह मुकफल हो चुके थे
00:56:55शराब और नीन की गोलियों के सहारे राते गुजरने लगी
00:56:59उन दिनों अगर उनका कोई साथी था तो बस उनका खाली कमरा, खाली बिस्तर, खाली आखें और उन आखों में दूर दूर तक फैली हुई
00:57:11कभी न खत्म होने वाली तनहाई
00:57:14अब तो घबरा की ये कहते हैं के मर जाएंगे, मर के भी चैन न पाया, तो किधर जाएंगे
00:57:29इस्टूडियो पहुँचे लेकिन दुपहर के खाने के बाद पैक अप कर पतंग उडाने का फैसला कर लिया
00:57:36ट्राइवर को भेज कर बच्चों को बुलवाया और उनके साथ काफी देर तक पतंग उडाई
00:57:42फिर बच्चों के साथ स्टूडियों से निकले और चिराग दिन बुटीक पर शॉपिंग की
00:57:48बच्चों के लिए और भाई देवी दत के लिए महंगे महंगे कपड़े खरी दे दिन भर की मस्ती के बाद बच्चों को उनके घर छोड़ा
00:57:56और खुद देवी दत के साथ अपने फ्लैट पर आ गए देवी दत को भूख लगी तो गुरुदत ने उनके लिए ओमलेट भी बनाया
00:58:05देवी दत जब जाने लगे तो गुरुदत ने उन्हें अगले दिन के किरकिट मैच की दो टिक्टे भी दी
00:58:12देवी दत के जाते ही अब्रारलवी पहुँच गए
00:58:15उस रात अब्रारलवी बहारे फिर भी आएंगी के आखरी सीन पर काम कर रहे थे
00:58:20ये सीन फिल्म के हिरोईन माला सिनहा पर फिल्माया जाना था
00:58:25जो तमाम दुखों से परेशान होकर खुद को एक कमरे में बंद कर लेती है और दम तोड़ देती है
00:58:32अब्रार ने सीन गुरुदत को सुनाया और उनसे राए मांगी पर गुरुदत खामोश रहे और शराब पीते रहे
00:58:41अब्रार अल्वी ने दुबारा पूछा आपको पसंद नहीं आया क्या अपने ध्यान में गुम गुरुदत ने इस बार जवाब दिया
00:58:49तुम्हें पता है अब्रार मुझे डर है कि मैं किसी दिन पागल हो जाओंगा
00:58:54तनहाई वो बला है जो इनसान को अंदर से खोकला कर देती है
00:58:59कुछ देर की चुपी के बाद गुरुदत ने अब्रार से सीन दोबारा सुनाने के लिए कहा
00:59:05सीन का खात्मा हिरोईन माला सिनह की मौत से होता है
00:59:09और क्लाइम मिक्स में कैफी आजमी की लिखी हुई दो लाइने
00:59:14बदल जाए अगर माली चमन होता नहीं खाली
00:59:19बहारे फिर भी आती हैं बहारे फिर भी आएंगी
00:59:24इस बार पूरे ध्यान से सुनने के बाद गुरुदत ने अब्रार अल्वी की तारीफ की और कहा
00:59:30अब्रार इस फिल्म में हमारी हिरोई चा जाएगी
00:59:34अब्रार देर रात तक स्क्रिप्ट को पूरा करने में लगे रहे
00:59:38जब उन्होंने गुरुदत से खाने का पूछा
00:59:41तो उन्होंने ये कहते हुए मना कर दिया कि वो ठके हुए हैं और आराम करना चाहते हैं
00:59:48इतना कहकर गुरुदत अपने कमरे में चले गए और दर्वाजा अंदर से बंद कर लिया
00:59:55ये दर्वाजा दोबारा गुरुदत अंदर से कभी नहीं खोलने वाले थे
01:00:02गुरुदत जा चुके थे
01:00:05जैसे किसी सीन का क्लोज अप जिसमें कैमरा रुख जाता है
01:00:09और रोशनी रफता रफता आखों से ओजल हो जाती है
01:00:14गुरुदत की फिल्म जैसी जिन्दगी का परदा गिर चुका था
01:00:19सिर्फ 49 साल की उमर में
01:00:21लेकिन हाजरीन सोचने वाली बात ये है
01:00:25क्या सिर्फ एक फिल्म की नाकाम्याबी इतना तोड सकती थी गुरुदत को
01:00:30कि वो जिन्दगी से ही मुँ मोडने हमारा खयाल है नहीं
01:00:34ये परदा सिर्फ एक फिल्म की नाकाम्याबी की वज़ा से नहीं गिरा था
01:00:40गुरुदत बरसों से इसी खाई के मुहाने पर खड़े थे
01:00:44जिन्दगी के बरक्स मौत उन्हें ज्यादा खीशती थी अपनी तरफ
01:00:49उसकी कशिस ज्यादा थी
01:00:51प्यासा के शायर विजय को दरासल जिन्दगी की प्यास थी
01:00:55लेकिन बत्रिसमति से वो जिस दुनिया में रह रहे थे उसमें फनकार और उसके फन को पूझा तो जाता था लेकिन उनके इस दुनिया से चले جाने के बाद
01:01:06और शायध इसलिए इस बनावटी और फ़र्जी दुनिया से दूर चले गए गुरुदत
01:01:12कागस के फूल की नाकामियाबी तो बस एक बहाना थी
01:01:17बेवक्त की इस मौत ने पूरी दुनिया को ज्छोड कर रख दिया था
01:01:23हर आख नम थी, हर चेहरा उदास था
01:01:26और हर शक्स हैरत में मुब्तिला था
01:01:31कैफी आजमी ने गुरुदत की मौत का गम कुछ इस तरह बयान किया है
01:01:37रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
01:01:41तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
01:01:46डरता हूं कहीं खुशक ना हो जाए समंदर
01:01:50राख अपनी कभी आप पहाता नहीं कोई
01:01:54एक बार तो खुद मौत भी घबरा गई होगी
01:01:58यू मौत को सीने से लगाता नहीं कोई
01:02:03माना के उजालों ने तुम्हें दाख दिये थे
01:02:07बेरार ढले शमा बुझाता नहीं कोई
01:02:11साकी से गिला था तुम्हें मैं खाने से शिक्वा
01:02:15अब जहर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई
01:02:19हर सुब हिला देता था जंजीर जमाना
01:02:23क्यों आज दिवाने को जगाता नहीं कोई
01:02:27अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के
01:02:37नाजे दिले बेताब उठाता नहीं कोई
01:02:42नाजे दिले बेताब उठाता नहीं कोई
01:02:47नाजे दिले बेताब उठाता नहीं कोई
01:02:52ये इनसा के दुश्मन समाज़ों की दुनिया
01:03:06ये महलों ये तखतों ये ताज़ों की दुनिया
01:03:17ये इनसा के दुश्मन समाज़ों की दुनिया
01:03:24ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
01:03:38ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
01:03:47प्रफुज जलान को इस्टेज पर इंवाइट करना चाहूंगी और इतनी मुश्किलों के बावजूद इतनी ध्यान से आपने सुना बहुत बहुत बहुत शुक्रिया मैं फौज यादास्तान गो आपसे विदा लेती हूँ अपने टीम के साथ बहुत बहुत बहुत शुक्र
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