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साहित्य आजतक के मंच पर 'साइको शायर', अपनी कविताओं से जीता सबका दिल
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00:00आशा करता हूं कि यहां पर मुझे कोई भी नहीं जानता है क्यूंकि जो कविता है मैं आज पढ़ने की कोशिश में हूँ और फिराख में आया हूँ ना जानना ही बहतर है मुझे लगता है
00:10कि यहां पर कितने लोग जो मुझे नहीं जांते हैं कि घर वाले कि लेगए दोस्ति कि लेगए चल दुझा दुचिश एक छादू दिखाता हूं ऐसा कुछ लए दिख कारे
00:20चेहरे दिखा है हमें क्या बात है दो दो हाथ भी उपर नहीं करने हैं बहुत कारिया अच्छा नहीं कर रहे हो तुम कोई एक यहाँ पर यहाँ पर क्या बात है पहली सफ में बैठे हो सर इसलिए पूछा क्योंकि देखो अंजानों से मिलने से पहले मैं फिल शुरू करने से �
00:50चिंगारी से रूष से लेता हूं जुबा से अंदा हूं दिल की आखों से देख लेता हूं या फिर यू को हो कि मैं कभी हूं कभी समझते हैं हाया ना जो क्या होता है ना कि जब लोगी कठा होता है ना उसके अमुमन दो कारण होते हैं एक जिसमें तालियां सीटियां बच
01:20अब गर भी हो रहा है फड़ भी रही है क्योंकि देखिए हम है तो मरा थी और आये है यूपी की धर्थी पर बताईए वह भी हिंदी बढ़ने के लिए हिंदुस्तान में हम नहीं रहते हैं हम हिंदुस्तान अपने में समा के हर जगा पर जाते हैं कभीता हैं पड़ते हैं लो
01:50थोड़ी सी घंटी बद सकती है अंदर है ना लेकिन सब जिंदा है कि न मुझे देखना है बार जारा मेरे लिए तालियां बजा दो बड़ी आसे
01:58हाँ
01:59हाथ काट कर रख दूँगा
02:05हाथ काट कर रख दूँगा ये नाम समझा जाए तो और कितनी दिक्कत होगी पता है राम समझा जाए तो भाई राम राम तो कह लोगे पर राम सा दुख भी सहना होगा पहली चनूती ये होगी कि मर्यादा में रहना होगा
02:25ये मर्यादा में रहना मतलब कुछ खास नहीं कर जाना है बस त्याग को गले लगाना है और रहेंकार जलाना है अब अपने राम लला के खातिर इतना ना कर पाओगे
02:38अर शबरी का जूटा खाओगे तो पुरुशत्तम कहलाओगे
02:41ये काम क्रोध के भीतर रहेकर तुमको शीतल बनना होगा
02:48राम जी बन सकते हम बन सकते आप भी बन सकते में थड़े सिंपल फॉलो कर लीजिए गा बन जाएंगे सुनेंगे
02:54ये काम क्रोध के भीतर रहकर
02:57ये जो मोम आया है
02:59काम क्रोध के भीतर रहकर
03:01तुमको शीतल बनना होगा
03:02बुद्ध भी जिसकी च्छाओं में बैठे
03:04वैसा पीपल बनना होगा
03:06बनना होगा ये सब कुछ
03:07और वो भी शुन्य में रहकर प्यारे
03:09तब ही तुमको पता चलेगा तै कितने अदुभूत राम हमारे
03:12अब सोच रहे हो कौन हूँ मैं
03:17चलो पता ही देते हैं
03:19तुमने ही तुन नाम दिया था ता मैं पागल कहलाता हूँ
03:21नया नया हूँ यहाँ तुना पहले किसी को
03:23देखा है वैसे तो हूं तरेता से
03:25मुझे किसी ने कल्योग भेजा है
03:27भई बात वहां तक फैल गई है
03:31कि यहां कुछ तो मंगल होने को है
03:33भरत से भारत हो है
03:35राज में सुनाए राम जी आने को है
03:36बड़े भागशाली हो तुम सब
03:40वहां पर सब यह कहते है
03:42कि हम तो राम राज में रहते थे
03:44पर इन सब में राम रहते है
03:45मतलब तुम सब में राम का अंश छुपा है
03:51यानि वह तुम में आते हैं रहने
03:54सच्छे या की गलत ख़बर
03:56अगर सच्छी है तो क्या कहने
03:58तो सब को राम पता ही होगा
04:01तो सब को राम पता ही होगा
04:03भी घर के बड़ों ने बताया होगा
04:04बताओ
04:06बताओ फिर कि क्या है राम
04:09बताओ
04:10बताओ भी है कि क्या है राम
04:14या भी हाथ दर उस तरकश में बान बन में जिनों ने किया
04:17गुजा रहा है या फिर कैसे रावण मारा लक्षमन
04:19जिनको कहते भाया जिनकी पत्री सीता माया
04:21घर ये तो हो गई वही कहानी एक था राजा एक थी राणी
04:24क्या सच में तुमको राम पता है
04:25कि वो भी आप हम बता है
04:27बड़े दिनों से हूँ यहाँ पर सब कुछ देख रहा हूँ
04:31कबसे प्रभू से मिलने आया था
04:32मैं उने छोड़ कर मिला हूँ सबसे
04:34एक बात कहूं कर बुरा ना मानो
04:36नहीं तुम तुरंत ही क्रोधित हो जाते हो
04:39पूरी बात तो सुनते भे नहीं सीधे घर पर आ जाते हो
04:42ये तुम लोगों के नाम जपो में पहले सा आराम नहीं
04:47ये तुम लोगों के नाम जपो में पहले सा आराम नहीं इस जबरदस्ति के जैश्री राम में सब कुछ है बस राम में
04:54ये राज निती का दाया बाया जितना मर्जी खेलो तुम
05:01लिफ्ट हो राइट हो हमें नहीं फरक पड़ता थी
05:04ये राज निती का दाया बाया जितना मर्जी खेलो तुम चेताओ निको लेकिन मेरी अपने जहन में डालो तुम
05:09नीजी स्वार्थ के खातिरगर को राम नाम को गाता हो तो खबरदार गरजुरत की और मेरे राम को बाटा थो
05:15भारत भूका कभी हूँ मैं तभी निडर हो कहता हूँ राम है मेरी हर रचना में मैं बजरंग में रहता हूँ
05:21भारत की नीव है कविताएं ये साहित्य ये मंच भारत की नीव है कविताएं और सत्य हमारी बातों में तभी कलम हमारी तीखिय और साहित्य हमारे हातों में
05:33तो सोच समझ कर राम कोहो तुम यह बस आतिश का नारा नहीं जब तक राम रिदे में नहीं तुमने राम पोकारा नहीं
05:40राम कृष्ण की प्रतिमा पर पहले भी खड़े सवाल हुए ऐसे नहीं कि आज ही धोके में थे नहीं
05:47राम कृष्ण की प्रतिभापर पहले भी खड़े सवाल हुए
05:50भे लंका और एक कुरुक छेत्र यू ही नहीं थे लाल हुए
05:53प्रसन हसना भी है और पलपल रोना भी है राम
05:59मैं रहाँ असफल प्रयास आपके सामने रख रहा हूँ
06:03कि मुझे क्या लगता है राम जी क्या है
06:04प्रसन हसना भी है और पलपल रोना भी है राम सब कुछ पाना भी है
06:09और सब पाकर खोना भी है राम
06:10प्रमा जी के कुल से होकर जो जंगल में सोए हो
06:13जो अपनी जीतक अर्च चोड़ा रावण की मौत पे रोए हो
06:16शिवजी जिनकी सेवा खातिर मारूती रूप में आ जाए
06:19शेशनाग खुद लक्षमन बनकर जिनके रक्षक हो जाए
06:21और तुम लोबकरो दहेंकार छलकपट सीने से लगा कर सो जाओगे
06:25तो कैसे भक्त बनोगे उनके कैसे राम समझ पाओ
06:27अगोर क्या है पता नहीं बस शिवजी का वर्दान चाहिए है
06:35कल शिवरात्री है स्टेटस लगा दिए
06:38कल लगाएंगे ठीक है
06:41पहले नरग तुम जाओगे बता है
06:42अगोर क्या है पता नहीं बस शिवजी का वर्दान चाहिए
06:46ब्रह्म चेरे का इल्म भी नहीं बस बक्त सुरुफ हनुमान चाहिए
06:49और भगवा तो क्या है क्या ही पता पर लहराना सब को होता है
06:53भगवा क्या है क्या ही पता पर लहराना सब को होता है
06:56भगवा क्या है वो जाने जो भगवा ओड के सोता है
06:59राम से मिलना राम से मिलना राम से मिलना है गर तुमको तो निश्चित अवध्या जाना होगा जी राम से मिलना है यदि तुमको तो निश्चित अवध्या जाना होगा पर उससे पहले भी तरजा संगापने राम को लाना होगा अब बोलो जैसिया राम
07:17दक्षीने लक्षमनों यस्यवामे तुजनकात्मजा पूरतो मारुतिर यस्यतम वंदे रगुनन्दनम लोका भिरामम रणरंग धीरम राजीवनेतरम रगुवन शनाथम कारुन्य रूपम करुणा करंतुम श्री राम चंद्रम शरनम प्रपद्य यह है हमारे राम
07:36बहुत धन्यवाद मुझे हाँ बुलाया कुछ आपको मैं मुझे लगता है और और आदे घंटे के लिए बहुत बोर करने वाला हूं ठीक है बस बने रहिएगा क्योंकि मुझे एक बार देखना तो पड़ेगा कि कविताएं सुनने की मनशा से बैटे है नहीं बैटे है या फ
08:06हलका किया जाएं एक सुट्टा ब्रेक लिया जाएं कविता से कविता से यहां पर देखो यह नैशनल टेलिविजन पर पूछना बहुत ही गंदी बात है ठीक है लेकिन रिट्रिम हो जाएगा यहां पर कौन है जो दुमरुपान करता है आप नहीं दिख रहे हो हाथ उपर क
08:36लिटा नहीं कोई दोस्त लेके आ जाता है हम दो कश मार के देखते हैं जब हमने जिन्दिग में पहली बार दो कश मार के देखे हमें लगा कि यह सिग्रेट सिग्रेट नहीं है है रिपोर्टर की वांड है ऐसे गुमाओ टेंशन गाया और मुझे ख्याल आया कि यारी सिग
09:06पर नहीं जिनने हाद उपर नहीं किया और फूकते भी हैं ठीक है तो इसको भी ताके माध्यम से मुवी करना शूरू करतेंगे तैयार है सब
09:12क्या कहती सिग्रेट अगर सिग्रेट बोल पाती माह और हलका आपके लिए कर रहें वरना बहुत गंबीर हो जाता पता है क्या कहती सिग्रेट यहीं कहती कि शायरी कर मुझे शायरी कर मुझे एक सुट्टे ने फरमाया था शायरी कर मुझे एक सुट्टे ने फरमाया था ब
09:42मिल जाएगर चाय के साथ तो हर एक कत्रा मीठा है यह चोर ठीक है कोई पहली दो उंगलियों में कोई अंगुटे से पकड़ता है तब हम सुट्टे को सुट्टा हम को जगड़ता है भरी बारिष में भीगते कहीं चाय का ठेला देख लिया एक कट एक लाइट का जुमला तब
10:12अब देख उसे पनवाडी ने बारिश में दौड लगाई थी, बिन मांगे कमाल बरो उसके हाथ थमाई थी, उसका उसका पहला कच लेते ही, वो लंबी सांस छोड़ देना और चिलना बड़ी दूर से कि भाया, खाते में जोड लेना, अब धुए का बादल बनाती उसके एक �
10:42तो मुस्कुरा के बोला उसने, उसने ठीके, तो मुस्कुरा के बोला उसने, इतना घूर मत जरा होश में आ, जल्दी से उसे फूंक ले, कही सुट्टा खतम ना हो जाये तेरा, नाम पूछ लेना फुरस थे, जब मुकमल तेरी तलम होगी, डर मत भागूंगी नी जब तक �
11:12अभी वगल में खडी हसीना नजरों से उजल हो चुकी थी, दो पल का सपना दिखा कर असलियत में जा चुकी थी, तब एक माल बरो मैंने मंगाई, तो एक माल बरो मैंने मंगाई, माची से उसको आग लगाई, खीचा जैसे ही पहला कश्व सफेद परी लोट आई, और कहा,
11:42प्रवचन देने तो नहीं आया है न, फूको मरो, मैं यह नहीं कहता कि मत्यों या पीने से जान गवादोगे, चलता है कभी का भार किसी मौके पर करदोकश लगा लोगे, पर घातक है सुट्टा कर उसमें जिंदगी का मकसद खो जाए, जब तक तुम सुट्टे को पीओ ठ
12:12अजले सुनने की फिराख से भी कोई बैठा है, नहीं बैठा है, या फिर सीधे नजमें नजमें करके जाना है यहां से, शेयर पड़ सकते हैं आप दूसरा, तो क्या कहना पड़ता है उसके लिए, पकला है, मैं भी कहां बूच रहा हूं, लखना हूं, मैं बताओ, तो मतला
12:42कि दोनों मैंसे आए खुदा, मेरे बहुत ही प्यारा यह मतला दो शेयर है, मेरे बहुत ही दिल से लिखे थे, और सब को शायद सब के जहन तक जाएंगे अगर गवर से सुनेंगे, कि दोनों मैंसे आए खुदा कुछ तो एक अता कर दे, या तो मुझ को قाबिल कर, या तो �
13:12या तो मुझको काबिल कर या तो फिर रिहा कर दे और हुसन और दौलत की भी रिशवत दिल को दे देखी।
13:42को काबिल कर या तो फिर रिहा कर दे और हमारे तो बसकी नहीं है जैसी इसकी हालत है रख दे दुनिया उजाड कर या तो फिर सजा कर दे
13:50सुन रहे गौर से सुन रहे एक और पड़ा जाएं एक और पड़ा जाएं
13:56कि के पूछो मत की क्यू है मेरे कामयाब अशार बहुत
14:12बहुत जोर से तालिया बजानी पड़ती है ठीक है कैसे जोर से यह जोर से है कि जोर से ठीक है लेकिन यह दी कुछ समझ में ना है तो और जोर से बजाओ ताकि साइड वाले को लगे को प्रकांड मूरक है तुम रमांड स्वामी हो
14:25अब पूछो मत के क्यों है मेरे कामयाब अशार बहूत यह उड़ गया है बहुत जोर से ठीक है लेकिन कहने का मतलब यह है कि मत पूछो कि मेरे कविताएं इतने कामयाब क्यों है
14:42पूछो मत के क्यों है मेरे कामयाब अशार बहुत
14:46बेगेरत से तौबा करती नजमे है खुद्दार बहुत
14:50पूछो मत के क्यों है मेरे कामयाब अशार बहुत
14:56बेगेरत से तौबा करती नजमे है खुद्दार बहुत
14:59और दो चारों के फल सफे से दो चार सो मर जाएंगे
15:03शेर सुनियेगा
15:05कि दो चारों के फल सफे से दो चार सो मर जाएंगे
15:08दो चार भी हो जंग में तो काफी है गदार बहुत
15:11और ये मेरा मराश्टिन शेर कहलो
15:17कि सिवा मर गया सोच के अवरंग क्यों इतना इतराता है
15:24सिवा मर गया सोच के अवरंग क्यों इतना इतराता है
15:28छत्रपती के इस खेमे में बाकी है सरदार बहुत
15:31और आकरी शेर आकरी शेर फिर कमिताओं की तरफ बढ़ते हैं
15:36कि घर में शीशा हो अगर तो जाके देखो एक दफा घर में शीशा हो अगर तो जाके देखो एक दफा कहते हो यह ऐसी है वह वैसी है सरकार बहुत
15:47बहुत दन्यवाद
15:51अब कविता हों पर वापस आते हैं
15:53जो कविता है मुझे पढ़ने के लिए यहां पर बुलाए गया था
15:55उसमें से पहली कविता है
15:57सूर्यपुत्र कर् Efron
16:00तो यहां पर कितने लोगों ने सुनी है मेरी कविता करण
16:03तो बहुत है, बहुत से लोगों ने नहीं सुनी है, ठीक है, दूसरी कविता है, इसको पढ़ने जा रहा हूँ, उसका नाम है भारत, तो वो कुस कवितां से शुरू करते हैं, क्योंकि देखिए, मुझे एक बात, बहुत बाद में पता चेली हिंदुस्तान में, कि यहां पर �
16:33किस पर लिखना होता है, सब आके कह रहे थे कि भाईया वो चारपाश टॉपिक हैं, उसके बाहर मच जईयो, वरना तुम समास से बरखास्त हो जाओगे, मैं कहा कौन से, तो कहता है यह तो इश्क हैं, फिर प्यार हैं, फिर महाबबत हैं, फिर आशिगी हैं, फिर बेवफा
17:03कैसे नहीं हुआ, बोई स्कोल में पड़े हैं, हमारा फिमेल इंट्रेक्शन माइनस में है, तुम ब्रेकप्स की ब्रेकप्स की बाते कैसे कह सकते हो, लेकिन नहीं समाज एक्सेप्ट नहीं करेगा, इस दर से लिख रहे थे, लोग को पसंद भी आ रहा था, कुछ को जुमल
17:33मुहबबत, इश्क्फला, नजाने, क्या-क्या पाठ पड़ बैठ है, दुआ किसी और की कबूल हुई हम तूटते तारे से लड़ बैठ है, अब सुनने में बहुत बढ़ी आकिन है, लेकिन वाहियात कितना है दिख रहे हैं, कभी हुआ नहीं हमाय साती है, लेकिन समाज न
18:03किसी को, अब जिने याद नहीं है, या आपकी गलती नहीं, हिंदुस्तानियों की बिमारी है, कि अगली चाया और नहाने के बाद हम पिछला खाना बुल जाते है, तो यह तो बहुत बार सो पहली की बात है, जब वो गटना हुई है, तो समझ में नहीं आ रहा था, कि इस प
18:33लिखा नहीं है किसी नहीं, बहुत चनिनना नाम है, उंगलियों पे गिनने वाले, वो लोग है बस, तो इस पर लिखिया जाता है, नहीं जाता है, तब एक बात पता चली कि जिन जिन इमोशन को, जिन जिन भावनाओं को मैं अब तक महसूस भी नहीं कर पा रहा था, उस प
19:03होते ही दो तरह के कभी हैं, और हम शायद दूसरे हैं, एक वो जो लिखते हैं मैं फिलो में कहर ढ़ने के लिए, हम लिखते हैं गाउं से शहर जाने के लिए, तो यहां से थोड़ा करेकरम तबदील हो सकता है, आपके सामने दो औप्शन रखते हैं, एक या तो आपको प्य
19:33और ऐसा मतलब यह नहीं है कि हम प्यार महबत बता नहीं रहे, सुना नहीं रहे, तो लिखन नहीं सकते हैं, ठीक हैं, बस हम इस बात से डरते हैं कि कही हमारे फेलो राइटर्स का दुकान ना बंद हो जाएं, क्योंकि कलम उठाऊं तो लगता है खुदा ना करे के जंग हो �
20:03यहां से कारे करम थोड़ा सा तब्दील होगा, यहां से थोड़ा सा बदलेगा, वो जो भिनोना कांड हुआ था, वो जो किस्सा हुआ था, वो आपके सामने वैसे का वैसा रखता हूं और उसके बाद बताता हूं कि यह कहानी मैंने क्यों सुनाई, क्योंकि गुस्सा आ रह
20:33प्रजिक होती है ना यहां से आपको कौन सी आशा कौन सी उर्जा मिल रही कौन सी खोप ले के आप रस्ते पूतर गया हो हाथ में कटी हुई गर्दन होने का बजा है जलती मुंबत्तियां क्यों है तो वह मुंबत्ति वालों पर गुसारा था और उन पर यह कविता लिखी थी
21:03मुंबत्तियों का जूलूस निकाला ठंडे जिगर के मुर्दों ने देख रहे थे दूर से जब गिरी हुई थी मर्दों में अब मर्द कहे भी तो कैसे इने दरीन दे जिस्वम के भूके हैं खेर हमें कैल में इस बात का जब तक खुद की बहनों की ना सुनते चीखे
21:20उजाले के बाद आ रही हैवानियत की राते है दिन में चुपे दरीन दे इन रातों में मन राते है इसी एक रात के जाले में पहरी बहना मेरी अटक गई घना अंदेरा तरा हो मैं उसी अंधेरे में बटक गई जहासा दिखा कर मदद का छुपाया चेहरा शेतानों ने घर �
21:50अब इसी बात की बहुत बढ़ाई अब हिमत है तो सुनो कहानी मानो के खुद के बेटी पर लिखी है घिनो नी लगे तो भी सुन लेना ये कहानी आखों देखी है सड़क किनारे घसिटते फिरो बहन को मेरी ले गए फटते कपड़ों के साथ अंदे कानून को जासा दे ग�
22:20भूख मिटी ती शैतानों की भूख मिटी ती शैतानों की पर जाहिल जैन हम काफी थी बहोश पड़ी थी रास्ते पर पर जान भी भी बाकी
22:39पहले देख दो लो किस धर्म का ताकि जलें या काड़ दे धन्य वाद
22:50तब से कुछ चीजे बदली, कुछ अलग लिखना शुरू किया, जो सच है वो लिखना शुरू किया, उसमें से कविता जो आपने सुनी वे राम कविता मैंने लिखी, मुझे लगता है, किसी ने लिखवाई, भगवान ने लिखवाई, वैसे ये कविता आपके सामने रखूं
23:20और आपके सामने कुछ kolर आगया, कुछ धरह्म आगया, आपको लगा की नहीं, यह जुन के एक है, आर्य यह क्यूं होता है पाईता है, पता है कि यह तो बच्चों की कहानी है कि बच्चे से, बच्चे का अगर ध्यान यहां से की हटा करे यहां पे डालना है ना, तो उसके सा
23:50पर धरम का ता कि जलाए या गाड़ दे तो कही ना कही ये मान के चला जाए कि ये बलातकार बलातकार तो होते रहेंगे पर धरम का जगड़ा करना जरह important है
24:00मान ले
24:02हाया ना
24:04आवाज नी आरी हाया ना
24:08देखो हिचकी चाहट है
24:10अर्सकुटा से बढ़ने वाली है के पर ऐस सामने रखना हूं जितनी तेजी से आपने हां कहा है उतनी तेजी सायद कदम पिछई
24:18मत wallet ले लेड़ ना बस इस कविता का
24:20एक
24:21कि ये कविता पढ़ने से पहले मैं
24:23कंसेंट लेता हूँ
24:24कि पूरी कविता सुने बगर कोई चपल फेक्के नहीं मारेगा
24:27ठीक है
24:27बोलो आया ना अब बोलो
24:30पूरी कविता सुनने के बाद
24:33कोई चपल फेक्के
24:34पूरी कविता सुनने से पहले कोई चपल फेक्के
24:36नहीं मारेगा, पूरी कविता के बाद मैं खुद अनुमती दे दूँगा, ठीक है, फूल फेक नहीं कि जब फेक नहीं है न, शुरू करें, इस कविता का नाम है भारत, और उसका चप्टर पहला जिसका नाम है रंग, रंग आपके सामने रखता हूं, कि क्या मैं मुझरिम कह
25:06क्या मैं मुझरिम कहला हूंगा, क्या होगा इलजाम, गर हरे रंग से हिंदू लिग दू भगवे से इसलाम, आगे बढ़ा जाए या रुख जाएं, बढ़ा जाएं, क्या बात है, क्या मैं मुझरिम कहला हूंगा, क्या होगा इलजाम, गर हरे रंग से हिंदू लिग दू �
25:36एक है, सहर पहर और शाम एक है, जहर शहद और जाम एक है, सूरत चंदा रात एक है, बादल और बरसाथ एक है, पानी एक है, हवा एक है, बिमार पड़ो तो,
25:46समधार हो, पर खून सभी का अलग है शायद, बूंद बूंद में फरक है शायद,
25:52खून सभी का अलग है शायद, बूंद में फरक है शायद, गरम किसी का, किसी का ठंडा, किसी का उंदा, किसी का गंदा, किसी का महंगा, किसी का सस्ता, किसी का रेशम, किसी का खस्ता, यह अलग है तो अलग रंग दो, यह रंग एक है, ऐसे कैसे, खून बहे तो बुरी बात है
26:22तो यह नहीं ना था या होगा भी नहीं तो ना ही मजभी जंग होगी ना उनकी वज़े कोई रंग होगी हाँ होगी बहस पर हालातों पर सब गोर करेंगे बस बातों पर फिर क्या-क्या होगा नहीं पता यकिनन एक उमंग होगी हर सरहद प्यासी मर जाएगी और माएं बेटो
26:52होगी बरबाद नसल
26:53देखो वो नहीं है तो सब कुछ अच्छा होगा
26:56जरूरी नहीं है ना ये भी हो सकता है
26:58कि या होगी बरबाद नसल
27:00सब चोर खूनी लुटे रहे होंगे
27:02डर ही खतम हो जाएगा तो सब
27:04ही एक से चेहरे होंगे
27:05तो मैं कह दूं कि वह है वहाँ पर
27:08ठीक वही होता है जहाँ पर
27:10देख रहा है हमें वहाँ से जो दिखता नहीं हमें यहाँ से
27:13मनाया जुसने ब्रह्मांड सारा सासों को
27:15हमारी दिया सारा सवारा हमको
27:16बड़े प्यार से बड़े उम्मिद और रैतबार से
27:18भेजा फ immunity पर हमको
27:20कहा के सुरश वन कर्चम को
27:22कहा के मेरा अंशे तुम मेरे कारये के भुजाएं हो तुम
27:26मेरा साराज भी तुम हो
27:28मैं शायद खुद को भाप रहा हूँ
27:29जोए जीवन तुम को सोप रहा हूँ
27:31दिखा रहा हूँ बरोसा तुम पर
27:32बस बनाए रखना खुद के दम पर
27:34लोटोगे जब
27:35लोटोगे जब
27:36कल्यू कांथ हो, कयामत की रात हो
27:39लोटोगे जब, तब स्वागत होगा
27:41बड़े प्यार से पास बिठा कर
27:43पर अब से दुनिया तुम्हारी है
27:45तुम ही संभालो, रखो टिका कर
27:47अगर है तो यही कहा होगा ना मोटा मोटा
27:51और देखता होगा नीचे अब तो
27:54और देखता होगा नीचे अब तो
27:57आखों में आग बर देखता होगा
27:58नेतर पीडा से फटते होंगे जब भी जाग कर देखता होगा
28:01भरोसा ही उतोड़ा है उसका
28:02कि वो शायद यह सोता होगा
28:04हम यहां से उसको रुलाते रहे गए
28:06वो वहाँ बेट कर रोता होगा
28:07क्यों तो मन करता है उसी को नीचे बुला है
28:12और कहें कि आ नीचे
28:14अरे आ नीचे अब आजा भाहिरे
28:16आ दुनिया को
28:18हाथ लगा यह सड़ रही है जिन्दा लाशे
28:21तू आ और इनको आग लगा
28:22आ नीचे
28:24आ नीचे बाजा भाहिरे आ दुनिया को हाथ लगा
28:27यह सड़ रही है जिन्दा लाशे तू आ और इनको
28:29आग लगा पर क्या तू सच में है
28:31वहाँ पर
28:31और है तो तेरा धरम बता
28:35पर क्या तू सच में है वहाँ पर
28:39और है तो तेरा धरम बता
28:41बहस छिड़ी है नीचे आजा और बता
28:43कौन सा धरम बढ़ा, शुक्रिया
28:45बहुत प्यार से आप सुन रहे हैं
28:49शो की आखरी कविता आपके सामने रखते हैं
28:52बहुत समय की पाबंदी है, यहां पे तो खुल के बात नहीं कर पा रहा है, खैर,
28:56क्योंकि देखो, हमारे पास देने के लिए कुछ है नहीं, तो आखरी कविता,
29:00जिस कविता के लिए शायद बहुत से लोग बैटे हैं, अब तक कान बंद गर के बैटे थे,
29:04यहां पे शायद खुल जाए, ठीक है, तो आप पढ़ेंगे, लेकिन दूसरी बात बताना यह चाहिए दिल के बात है,
29:10कि हमारे पास देने के लिए उसके अलाओ कुछ नहीं है, कुछ जमली बनाते है, कुछ शब्द बनाते है,
29:14वो आपके सामने परोस्ते है, आपको पसंद आता है, चले जाते है, उसके अलाओ क्या दे आपको,
29:17क्या है हमारे पास, एक कवी के तौर पर, एक शायर के तौर पर, एक कलम है, एक कापी है, और एक कवी का जोला है, एक कहानी, एक किरदार, और कुछ लोगों का मेला है,
29:44रापता है कोई मुझसे
29:46अगर नहीं है तो फिर ऐसा क्यूं है
29:48अंजान हुना
29:50तो क्यों कहते हो यार ये मेरे जैसा क्यूं है
29:52किरदार चाहे अलग-अलग
29:55तो किरदारों को देख नहीं
29:56सबकी कहानी एक सी है अंतर ये के एक नहीं
29:58तबी सुनाओ आकर तुमको तुम्हारे शहर तुम्हारी गली में, बताओ तुमको क्या चुपा है, फूल बन रही किसी कली में, फिर उठाकर जोला अपना चल पड़ू, जहां पाओ कहे, क्योंकि नक्षे में ऐसा गाव नहीं, जिसे बंजारे का गाओं कहें, तो बंजारे ह
30:28नवा के हाँ चुके हैं, ठीक है, तो आखरी कविता, आपके सामने नजर करता हूँ, जिस कविता ने मुझे अबजीत मंडे से अभी मंडे बनाया, अभी मंडे से साई को शायर बनाया, मुझे अलग-अलग शेहरों में जाके कविता हैं पढ़ने का मौका दिया, मुझे ब
30:58तो उसी सूर्य पुत्र की महारथी की कविता कहानी आपके सामने रखूंगा उनके नजर ये से जो महाभारत उसने देखी थी उन्होंने देखी थी वो आपके सामने रखूंगा और आपसे विदा लूँगा तयारे सब आखरी कविता के लिए यहां पर पूरा जोश चाहिए
31:28कि वह साधारन बालक तो कताई नहीं है अगर उश्य दुर्वास जी का वर्दान है कुंती की कोक है और स्वयम सुर्य भगवान धरती पे आने की चेश्ठा अगर कर रहे हैं तो बालक साधारन बालक नहीं है जिसके आने पे धरती फटिग बादर गर जाएंगे वह सब कुछ ह
31:58वज्रधरा पर कड़कर विद्वन्स मचाते उत्रे सारे वज्रधरा पर सरसर गिरती वर्षा पहुंची जैसे तैसे वसुदा के घर तीनों लोग में मच गई हल्चल समय ही ऐसा गुजरा था वह माजमुना भी तर एक बालक सूरज बन कर उत्रा था
32:11यह इतिहास का जो काला पन्ना सबने मिलकर फाड़ दिया धर्म के नीचे योध्धा को एका धर्मी कहकर गाड़ दिया गाथा यह उस वीर के जिसके रोम रोम में दिनकर हो जिसे दाह मिला जीवन भर जैसे बेल पत्र बिन्शंकर हो
32:28अब शेश बची कहानी उनकी हम तो सुनाना पाएंगे कहानी को विस्तार स्वरुप खुदकर्न सुनाने आएंगे
32:38कि ये अभी की है नहीं द्वापर की बीती बात है
32:44ये अभी की है नहीं द्वापर की बीती बात है
32:47जहां कौन किसका है सगा और कौन किसके साथ है
32:50जहां कौन है माता पिता और कौन भाई बंद है
32:53जहां बिच रही लाशों पे बैठे सोयम परमानंद है
32:55जहां बंश के आधार मुझको विर्थ बतलाया गया
32:58और हक किसी का चीनने में अर्थ बतलाया गया
33:01जहां दुर्योधन ही है सबी बस पक्षे उनके है अलग
33:03जहां बस कपट की बात है बस कक्षे उनके है अलग
33:06कृष्ण ही बस धर्म की यहां डोर लेकर चल रहे
33:09गोविंद ही बस है यहां जो दुख में हसकर जल रहे
33:12उनके अलावा कौन है आगे जो मेरे टिक सके
33:15अरे वो स्वयम ही है परम लेटार ही जो दिक सके
33:18और रण में जो कुछ भी हुआ मैं उसको ना दोराओंगा
33:21मैं सत्य कहने आ गया हूँ
33:26सत्य कहे के जाओंगा
33:28मैं चुनूँगा दुरियो धन तुम ना चुनो
33:30पर मुझ अधर्मी से प्रतम तुम धर्म क्या है वो सनो
33:34के धर्म के धर्म और अधर्म की बनियाद ही गर कर्म है
33:38धर्मों और धर्म की बुनियाद ही गर कर्म है
33:42और कर्म से निर्मल है जो गर उसके संग में धर्म है
33:45तो कहदो काना यह जहां में दान करना पाप है
33:47और यहां में सूत के गर जन्म लेना श्राप है
33:50कहदो क्षत्रियों को जाके
33:55केदो शत्रियों को जाके बानों को तुम फेक दो
33:58रण में कीची प्रतिंचा पर जात रख कर देख लो
34:01अर यूद दरण में था ही नहीं वो रण ही अंतर मन में था
34:03और योगिता की लाश बन में गिर गया उस रण पे था
34:06श्रापो और वचनों के जब मैं मर रहा था डेर पर तब करन को
34:10इस माल डाला भगवान उने घेरत रख पर एक मित्र था एक ही था पर काफी था
34:20पर एक मित्र था जो मित्रता की था कदर करता मेरे एक वो दुर्यो धन ही था जो
34:25संग सफर करता मेरे फिर वो चुनेगा
34:27लक्ष को और मैं प्रतेंचा तान दूँ
34:29और उसके खातिर ना तो फिर मैं किसके खातिर जान
34:31सो भी अरजुन आ गए
34:35तो सो से बिढ मैं जाओंगा
34:37सो भी अरजुन आ गए
34:39तो सो से बिढ मैं जाओंगा
34:41और जो कहा था पहले भी मैं फिर उसे दोराओंगा
34:43के पांडवो को तुम रखो
34:45मैं कौरवों की भीड से
34:47तिलक्षिकस्त के बीच में जो टूटे ना वो
34:49रीड मैं सूरज का अंशे होके
34:51फिर भी हूँ अचूत मैं आरे वर्थ को
34:53जीते लूँ ऐसा उसूत पूत मैं
34:55उन्ती पुत्र हूँ मगर नहूँ सी को प्रियम है
34:57इंद्र मांगे भीक जिससे
34:59ऐसा उंख्षत्रियम है
35:00और जो लिखा नसीब में
35:07वो ही सत्य क्यों यहां
35:09यह दुविदा मेरी नहीं याप की भी हो सकती है
35:11कि ऑद और से सुणिएगा
35:26की कोई भूलनहीं से निशकारनप मान को
35:27कौनते यह नहीं राद है
35:29मुझा दिरत की संतान को
35:31कुंती का मैं अंश नहीं ना मुझ से
35:33उसका नाता है मैं कर नहीं यह कर नहीं हूँ
35:35जो सूत पतर कहलाता है
35:37आओ
35:41अब बताओं महाँ भरत के सारे पत्र ये
35:43भोले की सारी लीला थी
35:44किशन के हाथ सुत्र थे
35:46बल्शाली बताया जिन्हें
35:48वो सारे राजपुत्र थे
35:49काभिल दिखाया बस लोगों को उची गोत्र रखे
35:52ये गोत्र वर्न जात पात
35:54सबकली के नाम है द्वापर में
35:56बीते कल सही तो कलियोग बदनाम है
35:58तब इसोने को पिगला के डाला
35:59शोन तेरे कंट में नीची जाती होके
36:02किया वेदो का पटन तुने गुना था
36:03तेरा यही तु सारती कहां चे था
36:05तो क्यों चिपे मेरे पिछे में तो उनीका बन चे था
36:08ये उची नीची की हिजड़ वो एहंकारी द्रोण था
36:11वीरो की उसकी सूची में अरजुन के सिवा कौन था
36:18घर धनन जे हिश्रिष्ट था
36:20तो क्यों डरेक लवे से
36:21ग्यान पत्पे बिक्रे जो दिखाएं काटे वो गुरू
36:32ये व्याक्या कभी न बदलेगी न बदली थी उसमें कोई बदल नहीं होने वाला
36:36गुरू कौन है
36:38ग्यान पत्पे विकरे जो दिखाएं काटे वो गुरू जो ग्यान जब की थाली में समान बाटे वो गुरू
36:45गुरू वो है जिनके होते स्रिष्टी खिल खिलाती है गुरू के चर्नों पही तो द्रिष्टी दिल मिलाती है
36:50अब बताओ कैसे मैं उस द्रोन को गुरू कहूं
36:52जो मुझको शिश्चना कहे
36:53मैं उसकी ग्रिना क्यों सहूं
36:54उन राजवनशियों को ही बस उसकी शिक्षा जा मिले
36:57इन आधार लेती बेलों से हम रिक्ष कई गुना भले
37:00अड़े पार्थ के ही इर्दगिर्द रची हुई कथा ये
37:06मानते हो अब तो मान जा
37:09पार्थ के ही इर्दगिर्द रची हुई कथा ये
37:13और पार्थ से जो स्रिष्ट था उस कर्न की व्यता ही
37:16रथपे सजाया उसने
37:21रथपे सजाया उसने कृष्ण हनुमान को
37:24रत्पे सजाया उसने कृष्ण हनुमानों को योद्धाओं के युद्ध में लड़ाया भगवानों को
37:29नंदलाल तेरी डाल पीछे अंजनिय थे नियती का ठोरती जो दोनों बंदनिय थे
37:34इन उचे-उचे लोगों में मैं ठैरा चूटी जाता का
37:39कुछ सही अंजान मेना घर काना घाट का सोने साता तन मेरा अभेद मेरांग था
37:44करन का कुंडल चमके लाल नीले रंग का इतिहास सक्ष है यो दमेनी पून था बस एक मजबूरी थी में वचनों का शोकीन था
37:51और ना दिया होता वचनों मैंने कुंती माता को तो पांड़ वो के खून से मैं दोता अपने हाट अब मैंने ये कहा नहीं कि मैं सही और सब गलत पर मेरी गलती गलती है उनकी गलती बाता लग हाँ द्रोपदी के संग हुआ जो उसमें मेरी ही भूलती
38:15पर द्रोपदी ने जो किया वो कैसे केशव भूलू मैं कैसे भूलू मैं कैसे भूलू मैं
38:30साम दाम दंड भेद सुत्र मेरे नाम का, गंगा मा का लाडला में एक खामखा बदनाम था, कवरवों से हो कि भी कोई करन को न भूलेगा, जाना जिसने मेरा दुख हो करन करन बोलेगा, बासकर, पिता मेरे, हर किरन मेरा सुवरन है, मन में अशोक में, तूदो खाली परन है, �
39:00का है, लेकिन जाते जाते ये करन, इन करनों से कुछ कहना चाहेगा, सुनेंगे, हाया ना, कि देखो, आपकी भाशा में कहा जाए, तो हमारी महाबर्द, हमारी भगबसड हम पालते हैं, उसमें से सीखो और आगे बढ़ो, कि बीते कल को छोड़ दो, ठीक, बीते कल को छोड
39:30मिलके तुम्हें नीचे कीचते रहेंगे, बेवजे, कई शोन भी जलेंगे, अब तब आईने में देखकर, खुद को तुम निहारना, और भीतर तुम्हारे सो रहे है, उस करन को पुकारना, पिर चाहे जितने युद्धों किसी भी कुरुक छेत्र में, तुम्हार अतिर प
40:00बहुत धन्याद, प्लीज प्लीज बेट जाएए, बहुत धन्याद, साहित या आज तक, कि हमें बुलाया और पढ़ने का मौका दिया, तब तक मिलते हैं अगले किसी शो में, तब तक के लिए शुबरातरी, शबाख, खेरा और शुक्रिया
40:17एक और कविता, या एक और कोई रचना सुनना चाहेंगे आप, एक और बार जोर से, जोर्श के साथ, एक और, एक और
40:43क्या सुनना चाहेंगे, दूसरी कविता, कौन सी सुनना चाहेंगे, कोई कविता आपको लगता है
40:50पूल सुननी है, देखो जाते हैं, ट्रॉमा लेज़े क्यों जाना है तुमffen
40:54हमारी आपकी पहचान में
41:24एक लड़का होता ही है, जिस लड़के के लिए हम कहते हैं न कि भोला राम है, भोला शाम है, इसका शरीर तो बढ़ता रहता है, जो एक एक पुरुषका बढ़ना चाहिए, लेकिन कुछ medical conditions ऐसी होती है कि उसका दिमाग अभी बच्चा है, सब की पहचान में ऐसा लड़का हो
41:54उसके लिए दुनिया इतनी खुबसूरत है, कि उसे लगता है दुनिया में दो ही सबसे खराब चीजे हैं, एक जूट बोलना, दूसरा चोरी करना, इसके आलावा तीसरी खराब चीज उसके लिए नहीं है, और घरवाले भी उसे उतना ही काम दिया करते थे, उस लड़के क
42:24यह थेली और जा नीचे वाली दुकान से, घर के नीचे वाली दुकान से बस फूल लेके आजा, उसे लगता है आसान काम है, सबको लगता है आसान काम है, वो घर के नीचे जाता है, और फूलों की दुकान पर जाने के बस पता है, फूलों की दुकान तो बंद है, बिचार
42:54वह पर जाता हैowy लेकिन फूलों की दुकान नहीं मिलती है और फिर एक एक थोराह रुक जाता है
43:02हेम अब आप यह क्टें परिशान है क्योंकिर चैह चोराह पर फ्रे महव chi यहां से भी आ रही हैो
43:10मेक यहां से भी आ रही है
43:12फूल यहां भी है
43:14फूल यहां भी है
43:16फरक बस इतना है
43:18यहां डाली में है
43:20यहां बालो में है
43:21फरक बस इतना है
43:26कि यहां पर हर किसम का एक फूल है
43:28यहां पर बस मुगरा है
43:30और गुलाब है फरक बस इतना है
43:31कि यहां पर हर घर का एक मरद है
43:34और यहां पर कोई भी मरद
43:36कोई भी घर में गुसे जा रहा है
43:38उसे लगता है कि यह तो फूल बोचने का क्यों सा तरीका हो गया
43:40यह तो हमने कभी नहीं देखा
43:42और जितना उसके पास दिमाग है
43:45जितना वो सोच सकता है
43:46जितना उसका तर्क वितर्क चलता है, उसे ये लगता है कि ये फूल बेचने वाले लोग नहीं है, ये समाज को जहासा दे रहे है, ये शायद गाउं के चोर है, और अड़ा मारके यहां पर बैड़ गया है, जैसे ही शाम होती है, रात होती है, फूल फूल छोड़ के ये गा�
44:16और थानेदार से कहता है, मैम, इस्क्यूज मी, प्लीज, मैम, ड्रोन भाई सबको हटाइए, आपको परिशन कर रहे हैं ये, हाया ना, तो जोर से ताली बजा दो उसके लिए, ठीक है, अब द्यान इधर, ठीक है, ड्रोन कभी जिन्दक में देखा नहीं है, ऐसे अनमत करो,
44:46उसे लगता है कि इतनी बड़ी मैंने खोज कर दी है, अब मुझे पुलीस बनना है, और भागते भागते थाने में जाता है, और थानेदार साब से कहता है, कि कोत वाली की एक सबासी हमको भी कोई पकड़ा दो, सिल्वा लेंगे खुदी ही पर कोई लाकर खा की कपड़ा द
45:16गेरुआ, सफेद हरी लाइटे, बीच में नीला नीला भी, इंद्र धनु भी शर्मा जाये, फीका पड़े हर मेला भी, इतनी रोशनी होकर भी गलियों में गुप पंदेरा था, वहीं छुपेते चोरों शायद उनका वही बसे रा था, तभी एक महतरमा को एक नजर क्या द
45:46तो मैं बोला फूल दिखाओ, वह बोली जरपास तो आओ, तो मैंने बोला फूल दिखाओ, वह बोली जरपास तो आओ, जबरदस्ती फिर अंदर कीचा, मैंने बोला नहीं नहीं, वह बोली बस दोसो दे दे, सुबह से बोनी हुई नहीं, वह बलता अच्छा बाबा कौन से
46:16पर कैसे फूल की लेंगे
46:17ले ले मुझको
46:21अरे ले ले मुझको या आगे बढ़ जा
46:23यहां इरा गिराको की कमी नहीं है
46:25हम इत्तर वाले फूले बेटा हमें
46:27खुश्बुस सनी हुई है
46:28बड़े महंगे बिकते हैं
46:30हमें किसी बात की कमी नहीं
46:32लोग हम पर सोने आते हैं
46:33बस हमारे नीचे जमीन है
46:35कोटवाल कहता कि
46:40जाहिर से बाते चिड़ेगा
46:41कोटवाल कहता उड़ जा सले
46:42उड़ जा सले बाहर निकल तुम्हें मा भेन पर आ जाओंगा
46:46क्या कहता कोटवाल
46:46उड़ जा साले बाहर निकल तुम्हें मा भेन पर आ जाओंगा
46:49तवाइफों को चोर बता कर सोचा अफसर हो जाओंगा
46:52तो पागल कहता कि माफ करना साहिब
46:56माफ करना साहिब बस एक आखरी बिंती है
47:00क्या कहता है कि माफ करना साहिब बस एक आखरी बिंती है
47:04तीन साल, चेह महिना, दो दिन
47:06ये अब तक की गिंती है
47:07एक शिकायत दर्ज हुई थी लड़की के गुम हो जाने की
47:10वही दिखी थी मुझको कल वो
47:12एक धुन सुनी थी रोने की
47:14वो गजरे वाली रूट गई थी
47:16यादे हैं?
47:18वो गजरे वाली रूट गई थी
47:20बोली फिर से आना नहीं
47:22मेरी तरह थी मुरक शायद
47:23भाई को पहचाना नहीं
47:25बहुत धन्यवाद
47:26बहुत बहुत बहुत शुक्रिया
47:29एक बार फिर से बहुत जोरदार तालियों के साथ
47:31थैंक यू बोले फ्रीज, थैंक यू सो मज
47:34बहुत बहुत बहुत प्यार लखनौ और आते रहेंगे सुनाते रहेंगे बहुत धन्यवाद बुलाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया
47:41थैंक यू सो मच थैंक यू
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