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  • 2 hours ago
आजतक के मंच पर यूपी के लड़के परितोष त्रिपाठी से सुनें प्रेम कविताएं

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00:00इतनी उम्बीद नहीं थी मुझे
00:01थैंक यू समच
00:03एक बार साइट आज तक के लिए
00:05और लखनाओं की धर्ती के लिए जोरदार तालियां होनी चाहिए
00:08अदब की जगह है और
00:11मतलब मौज भी लेते हैं तो
00:13दाइरे में रहके लेते हैं न
00:15यूपी का हूँ मैं देवरिया जन्मस्थान है मेरा
00:22तो ऐसा लग रहा है कि
00:24मेरे लिए राजधानी नहीं है मेरे लख रहा हूँ आंगन है
00:27तो मैं अपने घर में आया हूँ
00:29आपके घर का आपके कस्बे का कस्बाई लड़का है
00:31एक्टर मैं बाद में हूँ पहले मैं यूपी में जन्म लिया एक लड़का हूँ बस वही प्रेम है उसी बल पे कुछ सुनाते हैं
00:39एक तो आज क्या है तिवहार है है न
00:41जो जवान है उनका तो अभी भी चल रहा होगा बाकी बज़र्गों का तो कल है
00:48और जवानों का जिनका मामला आज नहीं बनेगा उनका भी कली है हमारी शादी हो गई हमारा भी कली है
00:57तो सुनिये कि लोग इश्क में गर्मा करम चार लाइन फिर उसके बाद बात करेंगे
01:04मैं यूपी से हूँ यूपी का मामला काफी बदल गया है
01:07पहले यूपी में पूरिया करक और नेता मुलायम होते थे
01:11आजकल उल्टा हो गया है
01:14अच्छा मेरे बच्पन में ऐसा था कि लाइट बहुत जाती थी
01:18यूपी में लाइट की समस्या बहुत रही है
01:20और लोग आकड़े कहते हैं कि यूपी की आबादी सबसे जादा है
01:24अब लाइट जाने का आबादी का क्या रिष्टा है मुझे मालूम नहीं है
01:28आपको मालूम हो तो बजाओ ताली
01:31बाइटे हैं बाइटे लंडे बाइटे हैं
01:36जै परकाश भीया बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बढ़ाई आज तक रहा है।
01:54अच्छा मुझे लगता है कि यूपी हर आदमी को आना चाहिए जो बाकी राज्यों के लोग हैं तो जीते जी आजाओ नहीं तो बाद में लोग मटके में बानारस ले जाएंगे और फिर कहो कि अंधेरा है और हमारे वालाइट की प्रॉब्लम है पर स्वागत है यूपी में म
02:24वाइफाई है कई लोग के पापासवर्ट है उसका तो लोग इश्क में मीठे जो आ रहे हैं वाजाएं आप लोग ओटीपी का वेट कर रहे हैं क्या आ क्यों नहीं जाते हैं लोग इश्क में मीठे को भी जहर बताते हैं हम तुम साथ दिखें देखने वाले कहर बताते हैं
02:54देखने वाले कहर बताते हैं और हर दरगा के धागे में मांगा है सिर्फ तुमको, आके देखना शेहर पे शेहर बताते हैं।
03:24बेटा कल्यान सिंग के टाइम पास हुए हम। अरे सब कला के पेपर हम लोग फेल हो गए थे कमल टेड़ा बना देते थे।
03:34कला ने जो कला दिखाई सरा महत खराब हो गया जीवन का। तो यूपी बोर्ड बहुत मतलब तेरर है। यूपी बोर्ड से जो पढ़ गया वो कुछ भी कर लेगा।
03:42कुछ भी कर लेगा। तो वह बोते थे कल्याण सिंह के टाइम पास हुए हैं तुम क्या समझते हो इमांदारी से पास हुए हैं वह इमांदारी से टीचर बने हैं।
03:52बस वह यह तिलक पे स्कूल भाड़े पे दिया करते हैं पता नहीं कौन सी मंधारी है यह और मिड़े मिल का चावल शेबुरी मैंने अपने घर पे देखा हैं पता नहीं क्या ही मंधारी है यह पर मुझे यह लगता है कि हमारे शहर में और खास करके जो यूपी बोर्ट से प�
04:22फिश्की होती है उसी इश्क में हारे हुए हम लोग हैं जो पन्ने पे लिख लिके जीत जाना चाहते हैं जाते जाते जाते उसने कहा अब महीने बाद मिलना होगा मेरा भी रहा है यार काफी कोई लड़की जीवन में आती है बैठे हैं बड़े कोई लड़की जीवन में आ
04:52आप होती तो हम कभी नहीं होते
04:54तो
04:56जाते जाते उसने कहा
05:00अब महीने बाद मिलना होगा
05:02जाते जाते उसने कहा
05:04अब महीने बाद मिलना होगा
05:06महीने ने सिमट के कहा
05:08मैं दस दिन का हो जाओं क्या है
05:09और
05:12मुझे कोई राय दे दे
05:14मुझे कोई
05:16हमने जो जवाब दिया था मुझे कोई राय दे दे मुझे कोई उपाय दे दे
05:20मुझे कोई राय दे दे मुझे कोई उपाय दे दे तुस्ते जुदा होके मिट जाऊं
05:26मुझे अपनी हाय दे दे तो सुनिये कि यहां बिछडते हैं वहां मिलते
05:32बहुत सारी फ्रेम कहानिया हैं जो कोचिंग सेंटर में, स्कूल में, कॉलेज में, कैंटीन पे आधे एक कप चाय, थोड़ी सी बची कोल ड्रिंक और टूटे समूसे के साथ खतम हो जाती है
05:44पर उसकी कसक रहती है, कहते हैं हमारे गलत फैसल अची कहानियों को जनम देते हैं
05:51तो जीवन में जो गलत फैसली लिये हैं उसका भी शुकरी आदा करना चाहिए, अची कहानिया मिली है
05:55तो यहां बिछड़ते हैं, वहां मिलते
05:59एक बचपन में कोल्टरिंग आती थी, शीशी वाली बोतल में
06:03मीठी होती थी थोड़ी, याद है
06:05याद है न, मीठी होती थी थोड़ी
06:08तो जब कोल्टरिंग पीने के बाद बोतल खाली हो जाती थी, तो उसमें हम पानी भर के पिया करते थे
06:13याद है किसको किसको याद है
06:16उसे पानी भर के पिया करते थे
06:18पानी का रंग लगभग वैसा था
06:20पानी में खुश्बू लगभग वैसी थी
06:22पानी का स्वाद लगभग वैसा था
06:24क्या है न मेरे भाई
06:25पहला प्यार वो ओरिजिनल कोल रिंग है
06:28और दूसरा- तीसरा उस बोतल में भरके पियागया पानी है
06:32जो लगभभग वैसा है
06:33हम में से बहुत सारे लोग हैं
06:36जो प्रेम के नाम पे लगभग में जी रहे हैं
06:40तो यहाँ बिचड़ते हैं वहाँ मिलते
06:42जैसे बिचड़ते हैं वैसे कहां मिलते
06:45पीजे कोई चरस कर रहा है ना ये भी तो है सुनोगे ना टिका के सुनोगे ना सुनिए एक्चली मैं अपने खांदान में तीसरा वेक्टी हूँ जो प्रेम ट्राई कर रहा है इसे पहले दो लोग खर्च हो गए एक मेरे बाबा थे वो डिलीट हो गए इतने आशिक किसम के आ
07:15प्रिलीवा और बहुत मार पड़ी क्योंकि हर बार की दादी किसी और कि थी उसके बाद मेरे खांदान में आशिक हुए
07:25मेरे चाचा मेरे खांदान में पहला जो लょब लेटर लिखा गया लुए चाचा ने लिखा नहीं हो सकने
07:31वाली चाची के लिए तो चाची को देने गए लेकिन नहीं हो सकने वाली चाची नहीं मिली उनके हो चुके पापा मिले उन्होंने चिट्ठी ले ली हाथ समेत
07:45अब मेरे चाचा का एक ही हाथ है किसी से जगड़ा होता है सिर्फ कॉलर पकड़ते मार नहीं पाते हैं
07:52किरिकेटर बनना चाहते थे बॉल लेके भाग रहें दूसरे हाल का बैलेंस नहीं बनता कि फेख पाएं एक दिन साइके चला रहे थे भैंस में लड़ा दिया क्योंकि जिदर घंटी होती उधर का ही कटा हुआ था
08:04एक दिन बारिश में चात्रा लेके खड़े थे मुझे बोले यहाओ मैंने का क्या है बोले यहाँ हाथ रखना हमको कुछ सोचना है
08:12मुंबई ले गए थे हैं उनको कुछ दिन बच्चन साथ से लाद खा के आ गए क्योंकि आटोग्राफ लेने गए तो कागस था नहीं ऐसे मांग रहे थे उनको लगा हमारी मिमिकरी कर रहा है
08:23उनको सलमान खान जैसे हैं बिलकुल जो जो सलमान खान करते हैं मेरे चाचा वो करते हैं
08:29मेरा चाचा का लड़का बता रहा था कि पापा ने अब भी शादी नहीं किये तो
08:33ध्यान से सुनो कभी कुछ मज़दार कहे दूगा
08:38तो जो जो सलमान खन करते हैं सब चाचा करते हैं
08:42और उनका फेवरेट गाना है वो वाला ये
08:43जवानी फिरना आए
08:47और जो चीज मिल जाए
08:49कुशन हो, तौलिया हो, गमचा हो
08:51जो मिल जाए कोई गाना बजा दे
08:53लगते हैं हुक्स्टेप करने
08:54एक दिन आरी चला रहे थे
08:58आरी बहुत भारी पड़ी
09:03छाती तक चीरा लग गया
09:06साइकल चलाते हैं यहां सीट आती है
09:08फायदा बहुत है
09:13नाला कितना भी चोड़ा वाराम से पार कर जाते हैं
09:16अच्छा ऐसा नहीं कि उनका इलाज नहीं किया गया
09:18यह जो है ना अपना मेरी दादी थी
09:20उनको भरवा करेला बांदना आता था
09:22तो उन्होंने चाचा को छे महिना इसे बांद के रखा
09:24अब मेरे चाचा ठीक हो गया है
09:26लेकिन जहां खौलता तेल देखते हैं
09:28कपड़े उतार के खुदने का मन करता है उनका
09:29तो मेरे दादा और मेरे चाचा के लिए
09:32जोरदार तालियां दो लोग खर्च हो गया है
09:33अब बचे हम आशी की जो हो पाएगी हम करेंगे
09:37सुनिए
09:37यहां बिचडते हैं वहां मिलते
09:42जैसे बिचडते हैं वैसे कहां मिलते
09:44यह कहां से कम हो सकता है
09:47थोड़ा इसका बढ़ा दो या तो
09:51यहां बिचडते हैं वहां मिलते
09:54जैसे बिचडते हैं वैसे कहां मिलते
09:56इंतजार में बेचैनी थी शायद
09:59वरना हम कहां कहां मिलते
10:01इंतजार में बेचैनी थी शायद
10:04वरना हम कहां कहां मिलते
10:05और कैसी जिद है उफ कैसा है बच्पना
10:08कैसी जिद है उफ कैसा है बच्पना
10:11वो मिलते तो हैं पर तबियत से ना मिलते
10:14वो मिलते तो हैं पर तबियत से ना मिलते
10:17और सर्द मौसम में कहां नेकी रादे मिलते
10:20समझें न, वही बाद
10:23सर्द मौसम में कहां नेकी रादे मिलते
10:27छोड़ दी उडानी हमने महबबत की पतंग
10:29वरना छटों पे सबूत में धागे मिलते
10:31छोड़ दी उडानी हमने महबबत की पतंग
10:35वरना छतों पे सबूत में धागे मिलते
10:38और हमने शराफ़त दिखलाई तो गुरूर आया उनमे
10:41वरना छतों पे सबूत में धागे मिलते
10:45और हमने शराफ़त दिखलाई तो गुरूर आया उनमे
10:48वरना हमारी तरह हरकत करते उनके सहबजादे मिलते
10:52थोड़ी तालिया और
10:56बजा तेरे बजा तेरे ठंड के लिए अच्छा है
11:04चलते महफिल से चार लोग अचानक पैंगवीन हो गए
11:11दूसरी दिशा में चले गए
11:14सुनिए
11:16चीटिया वाला सुनाओं चीटिया वाला किसको उसे आदे
11:19सुनिए
11:20सीख तो लेने तो मनाने का हुनर
11:24इतनी जल्दी खफा हुआ ना करो
11:26सीख तो लेने तो मनाने का हुनर
11:29इतनी जल्दी खफा हुआ ना करो
11:32जलती नहीं है सिगरेट
11:33जलता है कलेजा
11:35यह सुनना यार मेरा बहुत पसंदा है
11:37दादा बैठ जाएं
11:38सीख तो लेने तो मनाने का हुनर
11:42इतनी जल्दी खफा हुआ ना करो
11:44जल्ती नहीं है सिग्रेट
11:46जल्ता है कलेजा
11:48सुर्खोटों को ऐसे धुआ ना करो
11:50जल्ती नहीं है सिग्रेट
11:53जल्ता है कलेजा
11:54सुर्खोटों को ऐसे धुआ ना करो
11:56और रोज उतारती है नजर मा मेरी
11:59तुम मेरी सलामती की दुआ ना करो
12:02लाइना बारी है समालना
12:05रोज उतारती है नजर
12:07सीख तो लेने तो मनाने का हुनर
12:09इतनी जल्दी खफा हुआ ना करो
12:11जल्दी नहीं है सिगरेट
12:13जलता है कलेजा
12:15सुर्खोटों को ऐसे धुआ ना करो
12:17और रोज उतारती है नजर मा मेरी
12:21तुम मेरी सलामती की
12:23धुआ ना करो
12:24और चीटियां लग गई है नमक के डिबे पे
12:27मैंने तुम से कहा था कुछ भी छुआ ना करो
12:35दिरे दिरे
12:36जहां मज़ा आए ताली बजा देना
12:38और जहां ताली बजा दोगे मज़ा आ जाएगा
12:41पानी है हाँ
12:44क्या भरोसा
12:47बिहार में बैन है ना
12:48मैं देवरिया कहूँ आपको बता है बिहार से लॉंडे
12:51हमारे वाँ के दारूपी के चले जाते हैं बिहार
12:52अब पेट कैचक करोगे
12:53परिशाँ वो देखनी पाती किसी को
13:01खराब हमने भी अपना हाल रखा है
13:04परिशाँ वो देखनी पाती
13:07जिदने हो यार बहुत मुहबबत वाले लोग हो
13:09सच में बहुत नतमस्तख शुक्रिया
13:10सुपर टांसर की शूटिंग चल रही है
13:13मास्टर शेफ की शूटिंग चल रही और तीन फिल्में
13:16उसमें से समय निकाल के
13:17आदेश हुआ है जब प्रकाश विया का
13:19तो साही ताज तक मैं आ हूँ और अपने शहर लखना हूँ
13:22तो एक मुहबबत की उम्मीद के साथ
13:24आया हूँ समालना है
13:25परेशाँ वो देख नहीं पाती किसी को
13:29खराब हमने भी अपना हाल रखा है
13:32खर्च करता हूँ पर कम नहीं होता
13:35उसकी यादों का पूरा टकसाल रखा है
13:38खर्च करता हूँ पर कम नहीं होता
13:41उसकी यादों का पूरा टकसाल रखा है
13:44बद्दुआ मैं उसे दे नहीं सकता
13:47उसने खुदा के नाम पे अपना नाम रखा है
13:50और ना फेको प्यार के जाल यहां
13:58हम पे किसी ने इश्क औरुमाल रखा है
14:01सुनिए गर्मा गर्मिसी गोतर का दो तीन
14:05कि तु क्यों डरती है बदनामी से
14:08मैं तुझे बस दोस्ट बताया करता हूँ
14:11जो चल रहा है न हैश्टेग जस्ट फ्रेंड्स
14:13तू क्यों डरती
14:15एक सुनो कि प्यार में OTP
14:17बना रखा है उसने हमें
14:18OTP पता है ना
14:20वन टाइम प्रेमी
14:21प्यार में
14:25OTP बना रखा है उसने हमें
14:27उससे कह दो एक बार से ज़्यादा
14:29मैं भी इस्तेमाल नहीं होता
14:30एक बार कट चुका है बिटा
14:32तो सुनिये की
14:35तू क्यों डरती है बनामी से
14:37मैं तुझे बस दोस्ट बताया करता हूँ
14:40तू क्यों डरती है
14:41बनामी से मैं तुझे बस दोस्ट
14:43पताया करता हूँ, हो नजाए मुहबबत कहीं फिर, मैं शाम घर में बिताया करता हूँ और जाती नहीं है लाली तेरे होटों की मेरे होटों से, मैं मजबूरी में पांच अवाया करता हूँ
15:08मिठता ही नहीं है तेरे नाम बदन से, मैं टैटू को टैटू से चुपाया करता हूँ
15:19और दिपिका दिदी ने आरके लिखवाया था फिर बाद में फूल बनवा लिया होता रहता है
15:24सुनिए कि एक यार तेवर का मज़ा लेना कि जब से हुए है बेघर हम सब अपना अपना शहर छोड़के कहीं न कहीं जाते हैं
15:36एक घर से दूसरे घर में जाना भी पलाएन ही है गाउं से शहर तक आना भी पलाएन है मुझे आद है
15:43बिहार का काउं छोड़के हम लोग आ रहे थे यूपी शिफ्ट हो रहे थे क्योंकि 90's बहुत क्राइम का दौर था
15:48तो सब लोग सब समान ले किया है मेरे पिता जी थोड़ी से मिट्टी ले किया है
15:52बस वही मिट्टी बची रहनी चाहिए मैं मुंबई रहता हूं और मैं कोशिश करता हूं कि समंदर के शहर में अपने हिस्से की कुछ नदियां भी हो
16:01वो नदियां दुआएं हैं कि जब से हुए हैं बेघर हर तरफ अपना ही घर लगता है डर हमें कैसे लगे डरने वाले को डर लगता है
16:19हर करवट में आद उसी की है वो तो अब भी मेरा हम बिस्तर लगता है
16:24हर करवट में आद उसी की है वो तो अब भी मेरा हम बिस्तर लगता है चाहलू नफरत करना कर ही नहीं पाता
16:32कमबखत प्यारा इसकदर लगता है चाहलू नफरत करना कर ही नहीं पाता
16:38कम भखत प्यारा इसकदर लगता है
16:40और बहादुरी की नहीं मौके की बात है
16:43जीतता वही है हाथ जिसके खंजर लगता है
16:56मुझे कर गया था बदनाम सर बाजार उस दिन
16:59हाथ जिसके खंजर लगता है
17:01मुझे कर गया था
17:02बदनाम सरे बाजार उस दिन
17:04कभी सामने पढ़ जाओं तो जुकने उसका सर लगता है
17:07वो थोड़ा जिम्मेदार सा लगता है
17:11तो जमाने को गमार सा लगता है
17:13मुझे याद है
17:17पंकस्तिर पाठी जी के साथ बैठे थे एक दिन
17:20तो बात हो रही थी तो बोले यार चीनी खर इतने चार पांच दोस्त गए
17:24तो उन्होंने कहा
17:25मोटा दाना वाला लोग थोड़ा ज्यादा रहता है
17:28तो तो किसी से कोई बहुत बेसिक बात कहिए न
17:42कि यार ये होता है चावल ये होता है काला नमक चावल ये होता है दाल पॉलिश वार नहीं खाना चाहिए
17:47तो जैंजी किसम के जो गोत्र लोग है उनको लगता है बहिया कमार आदमी है
17:52वो थोड़ा जिम्मेदार सा लगता है
17:54जिम्मेदारी का ऐसास 30-40 के बाद तो आई जाती है
17:58उसके बाद तो आप मुहबबत ने जब साथ छोड़ा तो हमने कसम खाई थी
18:03कि जब बिटिया होगी तो उसके नाम पे नाम रखोंगा
18:06बिटिया जब पैदा होई सबसे पहले उसने उसको भुलवाया है
18:10सुनिये कि वो थोड़ा जिम्मेदार सा लगता है तो जमाने को गमार सा लगता है
18:25और जबसे हुई है माई रिटाइड मेरी, हर दिन उसे इतवार सा लगता है, कोई मान बेचता है, कोई इमान बेचता है, हर शक्त खुद में बाजार सा लगता है,
18:42धीरे धीरे चुपता था रिष्टों का खंजर, आजकल तो आरपार सा लगता है, और बिजी हैं कंधे अपनों के, मैं पेड तले रो लेता हूँ,
19:08ये पास का जंगल मुझे परिवार सा लगता है, क्या सुनाएं, थोड़ा सा नया कुछ यंग टाइप का, ये सुनाएं, इस कविता में पूरी कहानी है, कितने लोग हैं, जो सिंगल हैं,
19:25ओ सुरी, सिंगल नहीं होते हैं, तो यहां क्या करते हैं, होना भी नहीं चाहते, वर दाड़ी जी से आप से बढ़ाए हो तुम, लग रहा है चलता ब्रेक अप छोड़ के आए हो तुम,
19:37पर देखो मेरे भाई सुनो, क्या है कि अगर आप सिंगल हैं, तो साहित आज तक ही सहारा है, यहां यह लोग जखमों को और कुद रहते हैं, और दर्द काथ से पड़ जाना ही दबा है, पर हम जखमों को कुरे देंगे नहीं, हम कोशिश करेंगे चुटकुलों का मरहम लग
20:07ऐसे थोड़ी कोई आदमी निर्भाय गुजर जैसा लुक लेके गोम रहा है, कोई दिल का चंबल उजड़ कुजार गया है, पर भाई क्या पॉजिटिवी सतालिया, ऐसी कि तैसी, एक सुना भाई, तेवर का मजा लेना, करता हूं तो दिल से अलविदा करता, सिर्फ दिख
20:37वो सेंद मार के हसी लूट लेता है, मैं फिर मुस्कुराने से बाज आता नहीं, नाकामी ही सही, मुझ में इजहार का दम है, क्या करूं, अगर की डगर में जाता नहीं, और सच्चा फलाइट रास आता है हमें,
21:06यू जूटी मुहबबद से दिल बहलाता नहीं, सच्चा फलाइट रास आता है हमें, जूटी मुहबबद से दिल बहलाता नहीं, और धोखा फित्रत है तुम्हारी, आओ जिंदगी में।
21:36सुनी एक बहुत पसंदिदा कविता है मेरी, दादा बैठ जाएं, आराम से बैठें, लडखड़ाएं नहीं, अगर लडखड़ा रहें तो हमें भी बताएं कहां मिल रहा हैं।
21:54किस तरह का सुनाओ बताओ, हुकम करो आप लोग, आशिकी सुनाओ, हाँ सुनो, हाँ जैंजी वाला सुनो, एक ये सुनना भाई कि भैलते काजल की फिक्र है, आजकल चल रहा है कि आदमी अपनी पसंदीदा औरत से,
22:12तो अपनी अपनी पसंदा औरतों के लिए सोच लेना, बेटा, इस धमाकी किसे में दाट लेने वालोग हैं, हाँ न, समाल ये, उसका पिन निकल गया है, हाँ, ओडियंस बढ़ती है तो मजा तो आता है, यूपी हमारा कोई क्या बेकाड लेगा, और क्या, यूपी आपको �
22:42हीरा नहीं, क्योंकि क्या है, सरो फिल्मों तक नहीं है, अरी, उसके बाद संसद होना पड़ता है, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, इस शग मैंने बोला भिया, पॉलिक्स जोईन करना चाहता हूँ, कर लो, मैंने कर रो, सूशू, थोड़ी है, कर लो, कुछ बताएये, पॉल
23:12खर्च हो गया मैंने का पॉलिटिक्स के बारे में कुछ बताईए तो बोले पॉलिटिक्स में न राजनीती बहुत है
23:20मैंने का ये क्या बात हुई फालतू फालतू बोलना सीख लो जोईन कर लो
23:28बट वी लव हिम भोजपुरी सिनेमा को तो खेर छोड़िये बोजपुरी गानों को और भोजपुरी कल्चर को उन्होंने बहुत उपर तक पहुँचाए है
23:37मनोज जी के लिए बजा है तो हमारे लिए नहीं बजाओगे क्या पगलू हाँ हमाने वाले थे भावू हमारा अभी नेता पहुँच गया नेता गोरगपुर जाना पड़ा भावू क्योंकि वहाँ योगी जी धीरे धीरे नहीं हो देश देश है
23:57है जुरदर्तालिया हमारे हमारी मिट्टी से निकले हमारे सुपर स्टार्स के लिए चाहे मनोज जी हो चाहे रवी भिया हो चाहे पंकर जी हो चाहे मनोज बाजपई हो चाहे इस लखनव शहर से एक से धुरंदर निकले है जुरदर्तालिया हमसे पहले उनके गर में लाइ�
24:27तुमको पता एक मीम आया था
24:33एक बाज ने द्रोन को पकड़ा था
24:36तो बोला जादा उपर नहीं होना चाहिए
24:37तुम्हारा को भी कोई बाप हो सकता है
24:39तो सुनिए कि
24:42एक बहुत अच्छी बात आई है कह देता हूँ
24:4414 फरवरी हमारे लिए प्रेम दिवस नहीं है
24:48हमारे लिए प्रेम दिवस है जनमाष्टनी
24:52क्योंकि अगर प्रेम मर्यादा के साथ करो
24:55तो दुनिया आपको भगवान बना के पूछती है
24:57हमारे लिए प्रेम का दिन
25:01हमारे लिए प्रेम की जगे ताज महल नहीं है
25:04कि शेहनशाने गरीबों का मजाग बनाए है
25:06ताज महल बना के
25:07हमारे लिए प्रेम का प्रतीक
25:10हमारे लिए प्रेम की निशानी
25:12हमारे लिए प्रेम का धरोहर
25:14अयोध्या है
25:15पिता की आग्याँ पे एक बेटा
25:18वनवाज चला जाता है
25:19पत्नी साथ देने आ जाती है, एक भाई साथ चला जाता है बिना किसी सवाल के, और एक भाई 14 वर्ष तक सिंहासन पे बैठता नहीं है, खड़ा हूं रखता है, ये है प्रेम, क्योंकि प्रेम की एक ही शर्त है, देना, देना, त्यागना, त्याग, त्याग बलिदान ही प्रे
25:49आखें फिर से सुनामी नहीं होंगी, मुझे मेरे को याद है, टीवी पे बाप अली कविता आई थी, तो एक लड़की ने मैसेज किया था, मेरे वाइफ देख रही, ये शादी से बहुत पहले की बात है, उसको मैं दीदी भी बोलता हूं, हाँ, डिस्क्लेमर जरूरी है, �
26:19कुछ बच्चे, क्या, है हिम्मत तो उनके जूते में पाउं डाल के दिखाओ, दुम सिंगल घूम रहे हो न, जो आम का टीशट पहने हो न, चीकू हो जाता है, जीवन बाबू, गन्ने के तरह पिराना पढ़ता है, बाई, सिंगल हो, मैरेज हो, जो भी हो, लब मैरेज करन
26:49पहलते काजल की फिक्र है, आँखें फिर से सुनामी नहीं होंगी, नजर उठा के देखूंगा नहीं गैर को, फिर इश्क की निलामी नहीं होगी, दोनों सीख गए है जूट बोलना,
27:17अब किसी में कोई खामी नहीं होगी, दोनों सीख गए है जूट बोलना, अब किसी में कोई खामी नहीं होगी, और उसकी बहती आँखों को चूमा है, इश्क में नमक हरामी नहीं होगी, थड़ी तालियां और वज्जाएं, पनी फिक्यातों,
27:34इसके बाद गाउज शेहर सुनाओंगा, मजदूर वाली सुनाओंगा, बाप वाली कविता भी सुनाओंगा, और एक तीसरी किताब आई है घंगोर इश्क,
27:46उससे भी तिन्चार कविताएं नहीं सुनाऊंगा
27:48समय आप लोग देखते रहेगा
27:50सुनिये की
27:55जैंजी समाज
27:59इस कविताएं पुरी कहानी हुआ क्या क्या था
28:02पहली मुहबद थी हमारी भी तुम्हारी भी
28:07पहली मुहबद थी हमारी भी तुम्हारी भी
28:11पहली हिम्मत थी हमारी भी तुमारी भी पहली बार धड़कन बढ़ी हमारी भी तुमारी भी पहली बार तड़पन बढ़ी हमारी भी तुमारी भी
28:21बदन की सिकाई हुई हमारी भी तुमारी भी रंगीन परचाई हुई हमारी भी तुमारी भी
28:30रात थी नहाई हुई
28:33हमारी भी तुमारी भी
28:35सुबह थी अलसाई हुई
28:37हमारी भी तुमारी भी
28:40फोटो की चाहत बुरी
28:42हमारी भी तुमारी भी
28:44विडियो की आदत बुरी
28:46हमारी भी तुमारी भी
28:48फिर जगहसाई हुई
28:50हमारी भी तुमारी भी
28:51कोट में सुनवाई हुई हमारी भी तुमारी भी इश्क में छुप छुप आखे रोई हमारी भी तुमारी भी इश्क में थी कच्ची लोई हमारी भी तुमारी भी
29:06कटम हो गया इतना ही था सुनिये की एक कविता है पास बुला लेना ये बहुत पहले का है जब ओयों नहीं बना था
29:21हम लोग पीसियो सेंटर पे जाके कोड के साथ उसका लैंड लाइन का नंबर याद करना जीरो पचपन अड़सद देवरिया कोड था उसके बाद चार अंका लैंड लाइन का नंबर रट्टा मारे रहते थे तक टक टक टक डायल करके दो घंटी बजा के फोन काट दे थे और �
29:51यह देखा ही किसी ने सुनिए छोटे शेर अपने से दूर रख दो मोबाइल को बेचैनी को और दुनियाधारी को और मेरे साथ चलो कुछ साल पीछे
30:10याद करो जब सहेलिया डाकिया होती थी याद करो जब काड आर्चीज का नहीं हाथों का बना के दिया करते थे
30:21याद करो जब कैसेट में साइड भी में उपर से तीसरा गाना नहीं दिल का हाल भेजा करते थे
30:26याद करो जब तुम घर से सिर्फ काजल लगा के निकलती थी और रास्ते में तयार होती थी
30:33याद करो जब अकेले मिलने पे कलेजा मुँ को आ जाता था
30:38गर जूल या एक दूसरे को तो सिहरन घर पहुचने तक रहती थी याद करो जब मैं लैंड लाइन पे दो घंटी बजा के फोन काट देता था और तुम समझ जाती थी वही होगा
30:50फोन के घंटी तो वैसी ही थी जैसी हुआ करती थी पर शायद दिल के तार जुड़ने से मन में बजा करती थी
30:56याद करो जब हम साल के सारे मौसम साथ देखते थे याद करो जब बारिश होने पे या शाम होने पे हम भाग के चटों पे चड़ा करते थे
31:04मुंबई की बात है
31:06उस शहर में बारिश बहुत होती है
31:09बस भाग के चढ़ने के लिए चछत नहीं है
31:12उस शहर में बारिश बहुत होती है
31:15बस भाग के चढ़ने के लिए चछत नहीं है
31:18और बड़े शहरों में शाम होती ही नहीं है
31:20वहाँ पे सिर्फ दिन होता है और रात होती है
31:23सुनिए की
31:27एक सुनिए चुरंच आप
31:32हर तरह का रखने चे ना हर तरह की ओडियन से
31:36कल देखा उसे तक्या खरिदते हुए
31:39ये डालना स्टेटस हाँ
31:40कल देखा उसे तक्या खरिदते हुए
31:44कल देखा उसे तक्या खरिदते हुए जी मैं आया पूछ लूँ मेरे हाथ में क्या परिशानी थी
31:54और सुनिए कि पास बुला लेना कभी घर खाली हो तो पास ओ यो नहीं था तब वाली कभी था
32:05पर सुनना इसमें मज़धार एक चीज़ ये है कि ये बदन से निकल के ये कविता रूह के तरफ चली जाएगी
32:16मुझे लगता है हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है हर उमर के इसाथ से हम लोग चीज़ें समझते हैं और उसके बाद विरक्ती के तरफ चले जाते हैं फिर समझता है कि प्रेम हो है
32:25शब बिरकुमर जी आ चुके हां परवतों से याद में टकरा गया तो नीचे देखके चलिए हां
32:33पास बुला लेना दस बंदर में टॉर है हां पास बुला लेना कभी घर खाली हो तो पास बुला लेना कभी दिल सवाली हो तो पास बुला लेना
32:45कभी जुबा डरी हो तो पास बुला लेना
32:47कभी आखें भरी हो तो पास बुला लेना
32:50कभी शाम कट्टी नहो तो पास बुला लेना
32:53कभी तकलीफ घट्टी नहो तो पास बुला लेना
32:56सुना है तेरे दिल में कईयों का आना जाना हुआ है
32:59सुना है हॉरर फिल्मे देखे तुझे जमाना हुआ है
33:02सुना है तेरे दिल में कईयों का आना जाना हुआ है
33:05सुना है हॉरर फिल्मे देखे तुझे जमाना हुआ है
33:08कभी चीख के अपना सर मेरी टीशर्ट में घुसाना हो तो पास बुला लेना
33:12कभी नेट न चले गाड़ी की चाभी न मिले
33:16कभी नेट न चले गाड़ी की चाभी न मिले
33:19आधी रात को सडकों पे चिलाना हो तो पास पुला लेना
33:22कभी बदन पे मिट गया कोई मार्क हो
33:25कभी आँखों के नीचे सरकल डार्क हो
33:27कभी शादी का प्रेशर बढ़ाती कोई बुआ हो
33:31कभी दाहिने गाल पे छोटू सा पिंपल हुआ हो
33:33कभी तेरे होट सारी रात धुमे का छला बनाए
33:37कभी डॉक्टर तेरा इलाज बस नीन बताए
33:40कभी तेरे होट सारी रात धुमे का छला बनाए
33:44कभी डॉक्टर तेरा इलाज बस नीन बताए
33:46कभी लिपट के अपने आशू बहाना हो
33:49तो पास बुला लेना
33:50और सुनो
33:51तुम्हें लगे जब आँखों के पास जुर्यों का डेरा है
33:55उम्र के आखरी पड़ाओने तुम्हें घेरा है
33:58तुम्हें लगे जब आँखों के पास जुर्यों का डेरा है
34:01उम्र के आखरी पड़ाओने तुम्हें घेरा है
34:04हम साथ जिये तो नहीं कभी
34:06पर साथ मर जाना है तो पास बुला लेना
34:09दो चार कविता हैं और समय हो रहा है
34:17बिच्ड़न सुनिए पसंदिदा कविता है तीसरी किताब से बिच्ड़न
34:21हम बिच्ड़े तुम्हें घम बिच्ड़ने का हम बिच्ड़े गम से
34:41हम बिछड़े तुम से तुम बिछड़े हम से तुम्हें गम बिछड़ने का हम बिछड़े गम से
34:48प्यार का पहला डर है बिछड़ना प्यार का अंतिम सच है बिछड़ना
34:52कभी-कभी प्यार में डूब जाते हैं कभी-कभी प्यार से उब जाते हैं
35:06प्यार में पढ़ने से, प्यार में पढ़े रहने से, उब गए थे दोनों, कुछ नया नहीं था, तो बिछड़ना हुआ,
35:13कुछ नया नहीं था तो बिछड़ना हुआ
35:16हम प्यार से बिछड़े
35:17या प्यार बिछड़ा हम से याद नहीं
35:20बस इतना याद है
35:21मिली तो पलट के रोई
35:23बिछडी तो लिपट के रोई
35:25लास दो कविता हैं
35:36क्योंकि समय और आवाज दोनों
35:39डिस्टर्ब कर रहा है
35:39आवाज जादा कौन बोला पंदर मेर
35:42कर जखा हैं तुम्हाँ पापा का
35:44सुनिए
35:50जिन्दा रखना इसकी हर
35:53लाइन यहां बैटे हर आदमी के लिए
35:55है अपने अपने हिस्से की लाइने
35:56आप लोग समहाल लेना
35:58यह
35:59कुछ
36:02पंदरह साल से लेके पैंतिस साल तक की
36:04जर्नी है जितनी बाते समझ में आई है
36:06कि क्या-क्या जिन्दा रखना जरूरी है
36:08हमारे भीतर
36:09तो इसकविता का नाम है जिन्दा रखना
36:12अपने भीतर गाउं
36:14जिन्दा रखना
36:16अपने भीतर गाउं जिन्दा रखना
36:19नीम, पीपल, बरगद की चाउं जिन्दा रखना
36:23अपने भीतर नानिया जिन्दा रखना
36:26बच्पन की कहानिया जिन्दा रखना
36:28नए कपड़े में पुराना नोट जिन्दा रखना
36:33नए कपड़े में पुराना नोट जिन्दा रखना, साइंस की किताब में छुपा के पढ़ते थे वो लोड़ पोर्ट जिन्दा रखना, छुटी की चहक जिन्दा रखना, मिटी की महक जिन्दा रखना, क्रिकेट का चौका जिन्दा रखना, और उससे मिले थे पहली बार छ�
37:03जोडती थी वो पगडंडी जिन्दा रखना हो सके तो पहला प्यार जिन्दा रखना हो सके तो पहला प्यार जिन्दा रखना जिससे बाचित बंध है वो यार जिन्दा रखना हो सके तो पहला प्यार जिन्दा रखना जिससे बाचित बंध है वो यार जिन्दा रखना प्रे
37:33नमक जिन्दा रखना
37:35प्रेमिगा के चेहरे की चमक जिन्दा रखना
37:38गर कभी दुश्मन ने भी खिलाई है
37:40वो नमक जिन्दा रखना
37:42कविताओं ने जो सिखाया
37:44वो इल्म जिन्दा रखना
37:46संडे को चार बजे आती थी
37:47वो फिल्म जिन्दा रखना
37:49कविताओं ने जो सिखाया वो इल्म जिन्दा रखना
37:52संडे को चार बजे आती थी
37:54वो फिल्म जिन्दा रखना
37:56बुज़र्गों की दुआउं का उजाला जिन्दा रखना
37:59बुज़र्गों की दुआउं का उजाला जिन्दा रखना
38:06दुआओं का उजाला जिन्दा रहा
38:09तो अंधेरे से डरोगे नहीं
38:11और इतना सब कुछ जिन्दा रखोगे
38:13तो मर के भी मरोगे नहीं
38:15थैंक यू थैंक यू थैंक यू
38:18दो कविताएं
38:21एक तो
38:23फादर वाली दोनों बहुत वाइरल है
38:25एक ओमजी वाली पिता रोटी है कपड़ा है मकान है
38:27और एक हमने लिखी थी
38:29जो बिन आसू बिन आवाज के रोता है
38:31वाप होता है
38:31पर उससे पहले एक कविता और सुना देता हूँ
38:34लड़कियां यहाँ कितनी लड़कियां है
38:36गर्ल्स इन आउस
38:37एक कविता सुनना लड़कियां है
38:40कविता का नाम लड़कियां है पर है लड़कों के लिए
38:43जैसे लड़कियों से पूछा जाता है कि बेटा कितने बजे शाम को घर लोट जाओगी
38:51जिस दिन हम लड़कों से पूछना
38:55शुरू करेंगे कि बेटे कितने बज़े घर को लोटोगे
38:57तो समुझो कि लड़किया सडकों पे
38:59सुरक्षित हैं
39:00लड़कियां
39:03सोसाइटी की सोजसे
39:05तालियां बज़ा नहीं पढ़ेगी दौस्तों
39:07सोसाइटी की सोच से वो बाहर निकलती रहे
39:11पिछड़े पन के सीने पे सेंडल पहन के टहलती रहे
39:15सोसाइटी की सोच से वो बाहर निकलती रहे
39:18पिछड़े पन के सीने पे सेंडल पहन के टहलती रहे
39:21कमजोर बनाए जो आसू वो ना आखों से बहे
39:25कमजोर बनाए जो आसू वो ना आखों से बहे
39:28खुद को बचाने के लिए वो लड़कों को न भईया कहे
39:31स्कूटी नहीं
39:38बाइक पे भी उनका अधिकार हो
39:40ओपन जिप पे डेनिंग पहन के वो भी सवार हो
39:44हर मोड पे उनको क्यों आजमाते हो
39:47पहनावे से परसेप्शन क्यों बनाते हो
39:50हर मोड पे उनको क्यों आजमाते हो
39:54पहनावे से परसेप्शन क्यों बनाते हो
39:56सुबह कॉल सेंटर की जॉब से आती है
39:59किसी और धंदे से नहीं
40:00बराबरी करनी है तो सोच में करो
40:02सिर्फ कंदे से नहीं
40:04सुबा कॉल सेंटर की जौब से आती है किसी और धंदे से नहीं बराबरी करनी है तो सोच में करो सिर्फ कंदे से नहीं तुम्हारी रयासी का बिचोशना नहीं है गुडिया गुडिया है खिलोवना नहीं है
40:16एक मजदूर कविता बहुत वाइरल हुई थी
40:22आपकी महंगी गाड़ी चलाने वाला अकसर पैदल घर जाता है
40:27करोडों की रखवाली करने वाला वक्त पैसे नहीं पाता है
40:35एक वक्त भूखा रहता है जो आधे घंटे में पीजा पहुचाता है
40:39और बारिश में चछट तपकती है उसके घर की जो आपके लिए बड़ी बड़ी इमारते बनाता है
40:45बारिश में चछट तपकती है उसके घर की जो बड़ी बड़ी इमारते बनाता है
40:50पूरे कपड़े में देखा ही नहीं है उसे
40:53पूरे कपड़े में देखा ही नहीं है उसे
40:57समाज में जो बुनकर कहलाता है
40:59पूरे कपड़े में देखा ही नहीं है उसे
41:02समाज में जो बुनकर कहलाता है
41:04बेटी को पितल की बालियां नहीं दे पाया
41:07जो खुद को सोने के ख़दान में तपाता है
41:10बेटी को पितल की बालिया नहीं दे पाया
41:13जो खुद को सोने के ख़दान में तपाता है
41:16हर मुसीबत में वो सड़क पे आ जाता है
41:19क्या इसी दिन के लिए वो सड़के बनाता है
41:22हर मुसीबत में वो सड़क पे आ जाता है
41:25क्या इसी दिन के लिए वो सड़के बनाता है
41:27एक काम करते हैं
41:29चार रोटी बनाते हैं
41:30दो खाते हैं
41:32दो जरुतमन को दे आते हैं
41:34कल उसने हमारे घर बनाये थे
41:35आज हम उसके घर बनाते हैं
41:38वेलेंटाइन का तेवार आप लों को लेगा
41:42कि गंभीर सुनाने लगा
41:43गौतम से ज़्यादा गंभीर ये सुना रहा है
41:45तो आशिकी का क्या सुना दू मैं
41:48बताओ न
41:49किस तरह का सुना दू
41:51किसी हो कोई कविता मुझे है
41:56मेरी याद है कोई कविता किसी को
41:57बहुत अच्छे मरवा दूँग मैं तुम लों को
42:00एक मदर पह सुन लो
42:04वेलेंटाइन्स दे है तो
42:07लोग बोलते हैं ब्लाइंड लव ब्लाइंड लव
42:08मैं ये कहता हूँ दुनिया में
42:10ब्लाइंड लव सिर्फ मा करती है
42:12क्योंकि जब हम कोख में होते हमें देखनी पाती है
42:15बगैर देखे प्यार करना
42:17वही शुरू करती है न
42:18देट इस ब्लाइंड लव
42:19मेरे हिस्से का जगती है
42:22मेरे हिस्से का सोजाती है मा
42:24मेरे हिस्से का जगती है
42:26मेरे हिस्से का सोजाती है मा
42:28सारे बच्चे लगते हैं एक से
42:30सबकी हो जाती है मा
42:32सारे बच्चे लगते हैं एक से
42:34सबकी हो जाती है मा, नकरती दिखावा इबादत का, बस भूखों को खाना खिलाती है मा, ये दुनिया होगी दुनिया के लिए, मेरे लिए मेरी दुनिया बनाती है मा
42:50आखरी दो कविताएं लखनव से खटी मीठी यादें जुड़ी हुई है मेरी एक तो ये है कि एक ट्रेन चलती है बिहार से दिल्ली जाती है उसका नाम है गोरकदाम तो जिन से हमारा बहुत तगड़ा वाला प्रेम था और ऐसा लगता था कि उनको भी है
43:16चकर ये था कि मुझे एक्टिंग से प्रेम है वो हमारे साथ प्रेम की एक्टिंग कर गई तो गोरकदाम गोरकपुर में मिलती है उसके बाद एक स्टॉपे जाता है खलीलाबाद उसके बाद 12 बंकी रुखती है और उसके बाद लखनव
43:34तो हमने उनको देखा एक ट्रेन में और वो भी इधर ही जाने वाली ट्रेन थी
43:43तो इसी लखनव स्टेशन पे हम गोरगधाम से उतर गए अकेला बच्चा ग्रेजुशन फस्टियर का
43:48और उस ट्रेन में वो उतरी उसी स्टेशन पे किसी और से मिलने
43:54तो लखनव कि बस एक ही बात मैं मनने को तयार नहीं हूँ कि लखनव तुम्हें मालूम नहीं है
44:02वरना तुम हमसे कहते नहीं कि मुस्कुराई आप लखनव में है
44:06और एक याद है वो बहुत गहरी है
44:12पीजियाई लखनव में पिताजी अडमिट थे
44:14और आई वाज शूटिंग फॉर सुपर डांसर सीजन वन
44:17और टीवी जो मीडियम है बहुत बुरूटल है
44:21जितने चुटकुले जितने जोग दिखते हैं उसके पीछे तरस्दी है
44:25तो हमें छुट्टी नहीं मिली कि हम यहाँ पे आ पाएं
44:28तो मेरी माताजी यहाँ थी बड़े भाई यहाँ पे थे पापा एडमिट थे पीजियाई में
44:31उस दिन बाप बेटे का कोई एक्ट हुआ
44:35और चुकि मैं आ नहीं पाय था तो मैं बहुत जादा उस इमोशन में था
44:40और मैंने ओम जी की चार पंक्तियां रिसाइट की थी
44:43वो 34 सेकंड का विडियो उसी ने मुझे मेरा करियर दिया है
44:48उसकी पहली लाइन थी पिता रोटी है कपड़ा है मकान है
44:54ये कविता सुना के मेरे पास रोटी कपड़ा मकान तीनों आ गया पिता नहीं रहे
45:01तो इस शेहर में बिमार रहे हैं इस शेहर में बहुत महंगे होटल में ठहरा हूँ
45:07बहुत महंगे टिकट से बुलाया गया हूँ सही तयाज तक के मंच पे
45:11तो मुझे लगता है
45:13दुआएं ही है
45:14और
45:15He is here
45:16Love your parents
45:20जितना ज्यादा वक्त बिताओगे
45:22उतना कम लगेगा
45:24मैं बता रहा हूँ
45:27अभी मेरी बिटी आठ महिने की हुई है
45:30मैं शूटिंग से भाग के आता हूँ
45:31हलाकि हमारी कोई बात नहीं होती है
45:33मुझे देखती है मैं उसको देखता हूँ
45:35बात हमारी खतम हो जाती है
45:36अब मुझे समझ में आता है कि जब मैं नाटक करके आता था
45:39रात को तो हमारी माता जी चाभी फेग देती
45:41क्योंकि पापा है भागा नचनिया बनी
45:43तो मम्मी चाभी फेग देती थी
45:46कि खोल के आ जाना तुम पीछे की दरवाय से
45:47पर जैसे खट करके खोलता था
45:49पापा आ गई ला
45:50हो गिलना टक
45:52वो
45:54उसके विरोध में नहीं थे
45:57ये मुझे बहुत बाद में पता चला
46:00विरोध में होते तो मैं उस घर में जा ही नहीं पाता
46:02ना
46:02जा ही नहीं पाता
46:04तो अपने पेरेंट्स का सम्मान करो
46:06दुनिया में सब कुछ खतम हो जाएगा
46:08बस माबाप रहेंगे और दुनिया में
46:10जब कुछ नहीं था तो माबाप थे
46:12सुनिये
46:14देखो मेरे लिए
46:16बहुत आसान है चार चुटकुले सुना के
46:18दो मिमिकरी करके मैं चला जाऊंगा
46:20पर ठीक है
46:22माहल बना है
46:23बहुत मज़ा आ रहा है
46:25सुनाओ न
46:26पिता रोटी है कपड़ा है
46:30मकान है
46:31पिता रोटी है कपड़ा है
46:34मकान है
46:34पिता नन्य से परिंदे का बड़ा आस्मान है
46:38पिता है तो घर में
46:40प्रतिपल राग है पिता से मा की चूड़ी बिंदी और सुहाग है पिता से घर में प्रतिपल राग है पिता से मा की चूड़ी बिंदी और सुहाग है पिता है तो बच्चों के सारे सपने हैं पिता है तो बाजार के सब खिलोने होने हैं और पिता जी के जाने के बाद एक अ�
47:10मैं सब कुर्बान करने को तयार हूँ
47:12बस ये कविता रहेगी
47:13जो बिना आसू बिना आवाज के रोता है
47:19बाप वो किरदार है जो कहानी से काट दिया जाता है
47:22फिर बाद में समझ में आता है कि कहानी का रचैता ही बाप है
47:26उसे दूर रहना है
47:27वो नहीं लाइम लाइट में नहीं रहना है
47:30वो है
47:31दर्वाजे दिखते हैं
47:34दिवारें दिखती हैं
47:37कलर दिखता है
47:38टेबल, चेयर, कुरसी, पलंग सब दिखता है हमारे आई लेवल पे
47:42छट नहीं दिखती है छट बाप है
47:44उसको देखने के लिए आपको देखना पड़ेगा तो देखेगा
47:48पर वो हमें देख रहा है
47:49जो बिना आसू बिना आवाज के रोता है वो बाप होता है
47:53जो बच्चों के किस्मत के छेथ अपनी बनियान में पहन लेता है
47:57वो बाप होता है
47:59जो बिना आसू बिना आवाज के रोता है वो बाप होता है जो बच्चों के किस्मत के छेट अपनी बनियान में पहन लेता है वो बाप होता है
48:08घर में जब सब के नए जूते आते हैं, बाप के तलवे घिश जाते हैं, जो अपनी आँखों में दूसरों के सपने सजोता है, वो बाप होता है
48:22बाप रखवाला होता है, बाप निवाला होता है, बाप करता है, कहता नहीं
48:44जब बाप समझ में आए, तब तक वो पास रहता नहीं
48:49झाल झाल
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