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लोक संगीत में प्रेम का क्या है आधार? आजतक के मंच पर मालिनी अवस्थी ने बताया
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00:00मालनी जी ने पहचान लिया था कि आज प्रेम पर बात होनी है लाल पैन के आई है और सोफे से एकदम मर्ज हो गई है और मालनी जी क्योंकि बात प्रेम पर ही करनी है आपके बहुत लोग गीत होंगे जिसमें प्रेम पर बहुत चर्चा हुई होगी लेकिन हम तोड़ा सा धार
00:30अगर हम कृष्न के बात करें शिव पार्वती के प्रेम की बात करें उस यूग में चले जाए तो वो प्रेम उसको कैसे
00:46सब से पह concealer तो आप सभी को बहुत-बहुत बधाईं है आज बसंत में प्रेमदिवस में हम सब यहां पर एकत्रित हैं और लकनों थो मुझे लगता है वैसे ही
00:58प्रेम का नगर है
01:00जहां पर कितना
01:02जो एक आधर्ष प्रतिमान
01:04प्रेम का हो सकता है वो मुझे लगता है
01:06आवध में ही रचा गया
01:08और एक चीज मुझे लगता है करेक्षन यहां पर
01:10यह होना चाहिए कि रामचरित मानस
01:12या
01:13भगवान कृष्ण की भागवत हो
01:16या राधा कृष्ण के कोई प्रसंग हो
01:18यह धार्मिक है यह सांस्कृतिक रचनाय है
01:20यह भारत की संस्कृति है
01:22रामचरित मानस हो
01:23या भागवत हो या महाभारत है
01:26और संस्कृति में भारत वर्ष में निया
01:29हमारे आपर
01:29प्रेम सबसे
01:33प्रमुक रस
01:34प्रेम का है
01:36प्रभू भी अपने भग्तों के प्रेम के ही
01:39वश में खिचे चले आते हैं
01:41और प्रेम के ऐसे हमारे अप्रतिमान
01:43है कि चुकứ आपने रामचरिश
01:45मानत स्यारमब किया और हम सब अवद में बैठे हैं
01:47मुझे लगता है कि
01:49एक ऐसे युग में
01:50त्रेता योग में और पश्चमी सभ्यताओं में तो अभी सो पूर्व तक
01:56मुरालिटी जिसको कहते हम नेतिकता के कोई आयाम निश्चित नहीं थे
02:01उस समय प्रभुराम ने जिनके पिता की स्वयम तीन रानिया थी
02:07अपनी पत्नी माता जानकी को विवाह में वचन दिया एक पत्नी वरत का
02:17और एक मर्यादा खीची प्रेम की कि यदि मैं तुमसे एक निश्च प्रेम करता हूँ
02:21तो मेरे मन में मेरे वचन में कर में जीवन में कोई दूसरी स्त्रियब नहीं आएगी
02:26मुझे लगता है प्रेम की सबसे सुन्दर लकीर या प्रेम का सबसे सुन्दर प्रतीक बनके सियावर रामचंदर आते हैं जहां पर माता जान की जी बिल्कुल तालियां मुझे लड़किया बजाती दिख रहे हैं अच्छा लग रहा है क्योंकि बहुत हमें अपने प्रेम के �
02:56कि स्वेंबर में नजाती नधर्म नवर्ग सिफ योग जिता ही पैमाना था जो उठा लेगा शिव का धनुष वही विभाग करेगा और यह जब आते हैं तो यह तो बटुक वेश में आते हैं वनवासी वेश में होते हैं यानि इनको देख कर कोई नहीं समझ पाता ही राज
03:26यह जो दोनों युवक आये हैं गुरु वशिष्ट के संग यही उठा लें यही प्रेम है और वो प्रभु राम उठा लेते हैं और बात में उन्हें परिचे देते हैं कि यह तो दशरतनंदन प्रभु अध्या नरेश राजा राम है जो जिन्होंने आपका वर किया तो मु
03:56वन में जितने भी कष्ठ हैं उसको जीवन साथी का संगर्ष और सुख मान करके जीती हैं और राम का प्रेम यह है कि जब माता जानकी को मर्यादा के कारण एक राजा की कारण राजधर्म को आगे रखने कारण जब माता जानकी को निर्वासित होना पड़ता है तो प्रभ�
04:26यां पर
04:37प्रेम सिर्फ और मन कीबात है। तो रॉद्धा क्रिश्ण से उस समय के समाज के दाएरे या
04:45उस समय के बंधनों से इतनी रितर होकर के इसलिए प्रेम करते हैं। कि वह चाहती नहीं है।
04:51क्रिष्न को बंधन में नहीं बांधना चाहती है यह ऐसा प्रेम है जो किसी बंधन में यह बंधन मुक्त प्रेम ही ऐसा है कि
04:57तो उर्क्मणी से ब्याहे कृष्ञका कैसे से विवा हो लेकिन वू राधा कृष्ञ है आज भी वो
05:04कृष्ञ hp लाधा कही माने जाते हैं, कहा है ना उनोंने
05:07मन का
05:11प्रेम किया और राधा में बट गए दोनों अधे अधे अधे
05:18तो राधा के प्रेम में दोनों आधे आधे बट गए और कृष्ण न इसे लिए जीवन भर जहां भी विच्रन किया
05:24जो भी उन्होंने नीती अपनाई लेकिन कहीं भी गए राधा शरीर कृप से रही कि नहीं अध्यात्मिक रूप से सदा उनके संजु की रही
05:33और ने जूह हम थामने अध्यात्ये चई कि तुमने धार्मिक उसकी बात करी में बात कर रहां थी कि संफ्कृतिक है यविच्ठयों नही हैं उंने सबसे अप्रतिम प्रेम श्यूपरवतिक है जहां पारवति को पाने के मत्या करते हैं और यह आजल के बच्चों के लिए ज़
06:03करते हैं उसमें व्रत रखते हैं और हम उत्सव मनाते हैं पार्वती के उस एक निष्ठ प्रेम का जहां पे पिता की बात न मान करके विश्नु से विवा तो पिता से कहती नहीं मैं शिव से विवा करूंगे उसके लिए वे व्रत करते हैं क्योंकि शिव अगोरी हैं किसी बं�
06:33होती हैं तो शिव लुट करते हो परलय आ जाती हो सारे देवता जाकर करneti
06:39हम अपना कहते हैं कि आपना कहते है कि शिव के उन्ही नेतनों से जो शुख में ढłąंस बहा हु deadlines faster बन गया तो यह
06:47तो मुझे लगता है हमारे आपर जब हम उमाप महिश्वर कहते हैं उमापति शिव को कहते हैं जब हम कृष्ण को राधा वल्लब कहते हैं जब हम भगवान राम के जैजैकार भी सियावर रामचंदर जी कहते हैं तो मुझे लगता है प्रेम हमारे आप उच्छव के रूप मे
07:17रूप में माता पिता का अपने शिशु की रूप में हो या मित्रों के बीच में हमारा आपकी साथ हो
07:21बहुत बहुत शुक्रिया मैंने आपको कई घंटों तक परफॉर्म करते
07:51चीज से प्रेम करते हैं तो आपको महसूस नहीं होता कोई काम कर रहे हैं मुझे गाने से प्रेम है मुझे अपने श्रोताओं की साथ एक संबंध एक तादात्न स्थापित करने से प्रेम है आप सब बैठे हैं आप सब से प्रेम है तो मैं चाहते हूं मैं जो बोलू जो कहूं
08:21लेकिन उसके पहले देड़ वर्श सें दोनों एक दूसरे को जानते थे तो अधी से जादा जिन्दगी यह कर दी है तो मुझे लगता है की निश्चित रूप से वो प्रेम बहुत बड़ी प्रेम यह आपका अपना तरीका है अपी वालेंटाइन्स जेए लेकिन बहुत अच
08:51मुझे लगता है प्रेम इतना परिपक वो हो गया है कि आप सामने बैठ करके कारिकरम देखते हैं तो मेरे लिए यह बहुत बड़ी एक प्रेम की चाशनी है कि वो सामने बैठ कर देखते हैं तो यह मुझे लगता है कि यह तालमेल होता है जो वक्त के साथ आजाता है और मा
09:21और पतनियां पती की रहा देखती हैं, पतनियां प्रतीक्षा करती रहते कि पती एक तरफ देख तो ले, लेकिन पती पतनी की प्रतीक्षा करे असली प्रेम भही है, तो मुझे लगता हमारा प्रेम तो बहुत परिपकवता का एक हमारे गाना गाते हैं, जब मुझे आजकल ज
09:51नजर भर के देखिला चलती बेरिया नजर भर के देखिला चलती बेरिया ना मैं गोरी ना मैं सावरी लाज की मारी नजर भर के देखिला
10:14चलती बेरिया नजर भर के देखिला
10:19अरे ना मैं चुपी ना मैं बातूनी
10:25ना मैं चुपी आजी ना मैं चुपी ना मैं बातूनी
10:32रस भरी बतिया नजर भर के देखिला
10:37चलती बेरिया
10:40बहुत खूब और यह देखो गानों का आड इसले लेनी पड़ते ही संयुक्त परिवार है जब हम नए नए ब्याहे थे तो साथ सुर सब साथ में रहते थे तो उनके सामने तो यह भी सोचना लगता था कि लडाई जगडा भी जोर से नहों कि कोई सुन नले दीरे दीरे बोल क
11:10पहले चुगली करते हैं प्रेम की और साथ साथ चुकि यह प्रशासनिक सेवाओं में थे तो अधिकतर ऐसा रहना होता था कि जीवन बहुत सार्वजनिक होता है
11:19में बाड़ी है तो गाड़ी में आपके साथ कोई न आपका वाहन चालक सारती है तो वहां पर नैनों में लडाई जगडा प्रेम मनुहार सब नैनों में हो जाती थी क्योंकि जब जीवन है तो बहुत कुछ साथ चले गाही तो मुझे लगता है कि जब आप जजव करना सी�
11:49करें नहीं युदे आज भी लगता है आप अनित्हुन जै तो अभी भी लगता है कि
11:5512 बरस की तब गाती थी दढ़ गाती ती तब गाती थी और आप साठ बरस की होगे मुझे लगता है
12:10सभी आप सबके लंगर कई आई अभर आम मारें घर पर हम लोग
12:16कि 20 बिरयस के में साथ बचों कह सकते हूं, साथ बच्राश की मैं होन Bacon
12:22वाई और अभी वी सभी कि आपका रहो मैं आमया मैं करूं सभी आम एम टॉल
12:29लेकिन जो पतनिया एक विवाज संबन्द में इतनी समझदार होती है कि वो ये समझें कि यह दी मा का जिस घर में इतना प्रेम है, मा के प्रती जो प्रेम और सम्मान है, तो सोचें आपका पती आपको कितना प्रेम करेगा, ये जो भावना है, वो नई लड़कियों के लिए �
12:59प्रेम बाजता है वो परिवार हो, मित्र हो, आपस करिष्टा हो, आपस करिष्टा हो, आप देखेना जब लड़के लड़कियों में प्रेम होता है, तो वो कहते हैं, आजकल हमने वो कर लिया है, एक हथे के लिए उसको क्या टर्मनालोलजी आप लोगों कि ए गोस्टिंग, �
13:29आप इचेदर का मतलब यह होता है कि और समझने के लिए समय चेए, नहीं,
13:33वी नीड टाइम इचेदर मतलब कि अब दस मिनट बात नहीं हो कि ग्याराइब दिन सोचेंगे बात करना है कि नहीं करना है,
13:38तो मुझे लगता है यह तो इतना जान लेते हैं आजकल के बच्चे कि मैं तो एक बात कहने लगी हूँ आजकल कि इतने भी लड़कों से लड़कियों से मिलो आजकल 30 बरस के लड़के, 35 बरस के लड़के और कन्याय भी लगता है कि महा निर्वान को प्राप्त कर चुके हैं,
14:08जितने आगे बैठे ते ना ये सब 20s औ 30s वाले सारे हस पड़े एक सास यहां पर कौन कौन है देखो पीछे हाथ उठा रहे किसका किसका ब्या हुईगा, और कौन करे नहीं चाहिए ते यहू वो ताव हाथ उठाई के, देखो इतने सम्हात हैं, नहीं वाले काहे इतना सब
14:38सब्सक्राइब हैं, और जीवन के जौन सुखभोग को सब पहले कर लिया तब इनको ब्या कर जरूवत का, अभी अभी मारे कहीत है कि भईया अभ निर्वाण, अभ जो बुड़ापे हम लोगन के लगत है, कि भईयाब सब देख लिए वानपरस्त के टाइम लोगों के जव
15:08खबरदार जो इधर देखा, अमाबाब हास के कहते हैं, बेटा कोई अपने संग का हो, तो देख लिए हमारी भी छुटी हो, आपके समय में अभी व्यक्ति कैसे होती थी, कोई गीत के माध्यम से बताई, कैसे अभी व्यक्ति आती थी, क्योंकि तब ना सोशल मीडिया था, �
15:38खून से पत्र लिखे जाते था, आपको लगता है, यह सब किताबी बाते नहीं है, यह होता था, हम लोगों ने स्कूल, कॉलेज़, यूरिवसिटीज ने खुद देखाया, कि और लड़के कुछ नहीं बस एक दिदार के लिए पता चला बाहर खडें, आवो एक निष्ठ �
16:08क्या गाते हैं, बहुत पुराना गाना है, इसको आप इससे, इसके शब्द समझ सकते हैं,
16:38शब्द समन में आ रहे हैं कि नहीं, मैं चंपे की कलिया और तुम गुलाब के फूलो, मैं मान लो के जंगल की हिरनी हो, तुम मान लो के तुम छत्री के पूलत हो, मैं जंगल की हिरनी, तुम पिया छत्री के पूलत, उठाय तिंजाल, अरी फासत का है नागिरे, मैं चंपे
17:08पिया भूल गुलब तुम मैं जमना की मच्छी रे तुम पिया मच्छुआ के पूत उठाए जाल अरी फासत का है नाही रे
17:26जहां नाइका ये कामना करे कि मेरा प्रेमी आकर मुझे फशाए तो मैं जंगल की हिरनी हूँ
17:33तुम बधिक बन करके आजाओ मैं जंगल के जमना की मच्छी हूँ तुम मच्छुआरे बन के आजाओ लेकिन मेरा प्रेम तुमारे लिए प्रतीक्षा कर रहा है तो ये जो उन्मुक्त ये लोगी थे मतलब जिसको कि आप क्या लिखे वाचिक उस साहित में नहीं वाचिक पर
18:03प्रेम की बात मुझे लगा कि लखनू में हमें तो मैं आपको गजल का एक दो शेर सुनाओ अजाज़त तो लखनू के अंदाज में बताएं कि कहें इर्शाद इर्शाद किसी का नाम नहीं इर्शाद मनें कि बिलकुल सुनाएं सुनाओ एक बड़ी पुरानी सबाव गानी
18:33कि मुझे लगता है बया किया जा सकता है है मेरे हम नशी चल कहीं और चल इस चमन में अब पेना गुजारा नहीं बात होती गुलों तक तो सह लेते हम लेकि साज नहीं इसका मतलब आपके हाथ बेकार हैं आईए
18:57ए मेरे हम नशी चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं बात होती गुलों तक तो सह लेते हम बात होती गुलों तक तो सह लेते हम अब तो काटों पे भी हक हमारा नहीं ए मेरे दिल कहीं
19:27शेर मुलाइजा हो
19:30ऐ मेरे दिल किसी से भी शिकवा न कर
19:35अब बुलंदी पे तेरा सितारा नहीं
19:40गयर का जिक्र क्या गयर तो गयर है
19:45जो हमारा था वो भी हमारा नहीं
19:50अब हम नशीन से क्या कहा जा रहा है
20:06है जो तुम पे फिदा हम है उन पे फिदा है जो तुम से जुदा हम है उन से जुदा
20:16है जो तुम पे फिदा हम है उन पे फिदा है जो तुम से जुदा हम है उन से जुबा
20:26है हमारी मुहबत का ये फैसला
20:31जो तुम्हारा नहीं वो हमारा नहीं
20:40है हमारी मुहबत का ये फैसला जो तुम्हारा नहीं वो हमारा नहीं
20:54आई मेरे हम नशीन
20:56अब आप से कोई क्या गिला शिक्वा करेगा नाराज भी निरे सकता आप इतना मीथा गा कि जो है
21:02क्या क्या बाते हैं
21:04आज आए हो कल फिर चले जाओगा ये मुहबबत में हमको गवारा नहीं
21:08उम्र भर का साहरा बनो तो बनो
21:10चार दिन का सहरा
21:12सहरा नहीं इसलिए निर्वान की स्थीति से बाहर आईये
21:16और जीवन को इस तरह से देखना आरंब करिये कि प्रेम
21:20पाना नहीं
21:22प्रेम छूड़ना है
21:24दस साल के बच्चे आलको प्रपोस करने लगें
21:27और 11 में नहीं महतारी बड़ा हसास के बताई था
21:31कि इनका ब्रेक अप हुई गा इनके गर्ल्फरंड के संग
21:33अब बहुत खुश होई थे
21:35अब जब ब्रेक अप प्रपोस दस ग्यारा बरस में हुई रहा है
21:38तो भाई विवाह तक तो नजाने कितने ब्रेक अप हो चुके हैं
21:42और विवाह तक आते आते बच्चा कहता क्या भूई का
21:44सब कुल देख लिया माया मो है संसार सबब
21:47अब चलो कैवल ये ज्यान प्राप्त करने वानप्रस्त को चलते हैं
21:50मुझे लगता है
21:52पहले जो थोड़ी मर्यादा थी
21:54जिजग थी
21:55जब मिलने में भी थोड़ा सा कहीं न कहीं संकोच था
21:59और इसलिए जब मिलते थे
22:02तो इतना आनंद था
22:03आप देखें जितने सारे शेर हैं
22:05वो हिज्र पर विसाल पे नहीं
22:07यनि जुदाई पे गाने हैं
22:08मिलने पे कहां गाने हैं
22:10सारा मजा
22:11सारा असर
22:13उस वक्त का है
22:15जो आप एक दूसरे के बिना गुसारते हैं
22:18जब मिली लिए तो बात क्या
22:19खतम इसलिए राधा कृष्ण
22:21अमर है क्योंकि दोनों
22:23मिलते नहीं हैं दोनों अलग-अलग है
22:25पाने की कामना है
22:27जब तक पाने की कामना है
22:28तब तक प्रेम बना रहेगा
22:30पा लिया वही प्रेम समाप
22:32पिशली बार माली जी आपकी किताब पर चर्चा हो रही थी
22:36समय थोड़ा लिम्टेट रहता है तो ज़्यादा बातचीद भी नहीं पाई
22:40उसमें प्रेम का कहां-कहां जिक्र है और कैसे है?
22:43पूरी किताब ही दरसल चंदन किवान चुकी लोग गीतों के
22:48जो मुझे लगता है समाजिक शास्त रहे लोग गीतों का
22:52वो कौन से परिस्थेतियां जिनके करण कोई लोग गीत जन्मा होगा
22:56उसी पर किताब लिखे
23:10कि अंडी से चौक पालकी जाती थी तो सिर्फ उनका दीदार करता था यही प्रेम था और जब अचानक एक दिन वो बिखना बंध हो जाते हूं
23:18उनको खबर होती है कि बनारस से वो अंग्रेजों ने क्योंकि वो अक्रांतिकारी थे मुखबरी कर दी तो वो गाती है
23:26सेजिया पर लोटाय काला नाग हो कचवडी गली सून कैला बलमू मिर्जापुर कैला गुलजार हो कचवडी गली सून कैला बलमू अब देखे प्रेम यही है कि आजकल तो जो लिंगो है वो इतनी छोटी और बड़ी मता शौट हैंड में चली गई है जैसे आजकल आप दे
23:56अब किसी से गली नी मिलें उसके बाद हाल अचाल क्या उसो भी कहते हैं गोस्ताप डूड अल गोट कूल ऐस्वाट साप डूड जो वह तो यह जब अभी व्यक्ती नहीं रहेगी प्रेम प्रदर्शित करने की तो याद रखे बहाशा में ही स्वर्क है जो प्रेम को प्रद
24:26मिलना चाह रहे थे
24:27तो यह जब सोलॉंग हम बोलते हैं
24:30वो कुछ बातों में अपनी भात्रभाशा
24:33उस प्रेम को
24:34इस प्रेम में बलमू
24:35बलम है लेकिन
24:37सेजिया पे लोटाय काला नाग हो
24:40कचवडी गली सुन काईला बलमू
24:42बलमू अपने आप में प्रेम का
24:44और जब में नहीं मिलते हैं
24:46प्रेम में आपने पूछा इसी गाने में आता है
24:49पनवा से पातर भाइलमू अरदेहिया
24:59अरदेहिया गलेला जैसे नून हो
25:03कचवडी गली सुन काईला बलमू
25:07अब आज कल I missed you कहकर काम चल जाता है
25:11अब गाने में आरहा है
25:12आप तुमारे बिना पान का जो पत्ता हमारे हैं सबसे कूमल पान का पत्ता
25:18पता है आपको क्यों विवाह में इसलिए पान का पत्ता भेजा जाता था
25:22जो लगन चड़ती थी तो इधर से हल्दी जाती थी हल्दी की गाठ
25:26कि बेटी हमारी हल्दी की गाट जैसे पिस करके शुबता लाती है, मंगल लाती है, ऐसी बेटी आपके घर में शुबता लाएगी, और लड़के के घर से पान जाता था, साले बैनों भी पान खिलाते हैं, कि पान की तरह, जैसे पान को रोज न फेरो तो पान गल जाता है, आ�
25:56आप लोग तो सब टाटा सॉल्ट वाले बच्चे हैं, लोगों नहीं देखा हुआ हम लोग धेली वाला नमक, खाने वाली हमारी पीडी है, जब आप लोग तो जानते हैं, वो नमक की धेली पिस्ती थी, तो वो जब मॉनसून का जो टाइम आता है, उस समय वो यह पानी के �
26:26तो सबसे बड़ा प्रेम का जलसा है, नक्टवरा हमारे आज जैसे जो ब्या होता है, तो रात की जब लड़के लड़कियां, जब यह बरात लेकर के चले जाते थे सब लोग, तो आज लोग बहुत लोग कहते हैं कि पहले औरतों को अलाउड नहीं था, कि वो अपने बेट
26:56प्रेवर, धन, और स्त्री को लेकर के आना है, सुरक्षा के कारण से स्त्रियानी जाती थे, आत देखिए, सारी बाते खाता है, लिकिन उस समय ऐसा नहीं था क्यों बोर होती थे, उनका भी दिन को वो तो रह देख ती का भी सब जाएं, और फिर उसके बाद जो मुझे लग
27:26भी olduğu किसे चल रहा है, किसका देवर भूत ज्यादा आक से देख रहा है किसके इसकी का शोशन औरा किसकी सास बहुत तेज वह सारे गानी और किसम répondre पत्नी पे तने लक्तू है कि अपनी पत्नी का दामन नहीं छोडते उन्पर सब रह गाने बने कितने गाने कहां कहें बताएं
27:56बलम्सिस्की लेलंडूरूर महें अरे कुईयंपरो मे जगतिया परो'RE अरे शेजियां पैसर रड़ाइदाइमार हे बलम्सिस्की लेलई रोव हे
28:12गोरिया चली नई हारवा, बलम सिसकी लई लई रोवें, रेलिया बईरन, पिया को लिये जाएरे, इस सब प्रेम के गाने हैं कि पती को लेकर के जो रेल चली गई, उस रेल को गाना यदे एक समर्पित हो गया, और मुझे लगता है फिर वही बात, कमाई करने के लिए गया ह�
28:42अगनी में जिस तरह से जल रही थी, यह वही प्रेम है जो हम कहीं न कहीं जाईसी की नागमती में पाते हैं, जिन दोहों को हम रहीम के सहित्य मां पाते हैं, जिसका वर्णन हम सूरदास के उद्धव प्रसंग में पाते हैं कि जब बगवाज शी कृष्ण चोड़ के चले �
29:12तिपल गुनना और आज के बच्चों को यही मंत्र दे के जा रही हूं कि अपने प्रिय को दी पाना है, तो उसे मुक्त करना आपको आना चाहिए, बहुत पाने की लालसा किसी को भी, कोई भी आप यह प्रेमिक भाव है, यह कोई भौतक चीज नहीं, जैसे आपने टीवी �
29:42अहीं रहेगा, कहीं जाता नहीं.
30:12सबसे बड़ी संत मीरा बाई को मानते हैं क्योंकि विरा का प्रेम है जहां पर उनको वो देह नहीं पानी है उन्हें भगवान श्री कृष्ण नहीं चाहने उन्हें अध्यात्मिक रूप से जो स्वरूप की कल्पना कर ली उन्हें वो चाहिये ता और अंत में लोग कहते भी ह
30:42आ रही है ऐसा नहोता तो आज वरंदावन में संबोधन राधे राधे नहीं होता वहां पर राधे की व्यापती है कि कन्हिया अद्रिश्य होकर के भी राधे जो मैं उनका पहले सुमे रहने के राधे के हो गए तब कृष्ण को पाओगे राधे को जानो तब बगवान कृ
31:12अपने नायक नायकाओं को ठीक से सेलिबरेट नहीं किया कितने हम जो माओं का क्योंकि प्रेम की जब बात है कितने माओं ने राष्ण से प्रेम किया और अपने पुत्र को उसी तरह से बनाया जीजा भाई का आप देख ले अहिल्या भाई को देखें संस्कृति से प्रेम �
31:42संस्कृति से ऐसा प्रेम किया,
31:44धर्म और अपने राष्ट से ऐसा प्रेम किया,
31:46द्वादास जोतिर लिंगों का पुनर निर्मान कराया उनोंने,
31:49आज लोग कहते हैं, यहां से वहां कैसे पत्थर गए होंगे,
31:52कैसे किया होगा, उस जमाने में महेश्वर में रह करके,
31:57केदार नाच से लेकर के रामिश्वरम कैसे उनोंने,
32:00और राजकोट से नहीं, राजकोष से नहीं,
32:02अपनी निजी, अपनी निज संपदा से उनोंने,
32:05द्वादश जोतिर लिंगों का निर्मान करा,
32:07यह प्रेम है, किस प्रकार कर राष्टर का प्रती प्रेम है,
32:10करांतिकारी हस्ते हस्ते जब राष्टर के लिए फांसी के फंदे पे जूल जाते ही राष्टर,
32:15यह पाना नहीं है, हम मर जाएंगे लेकिन उस प्रेम के लिए मरेंगे,
32:19कि हमारी शहादत दूसरों को
32:21कम सकम जगा आ जाए कि भारत के लिए भी लड़ना है
32:23तो मुझे लगता प्रेम के बड़े
32:25हमारे रक्षा बंदन भाई बेनों का प्रेम
32:27है भाई दूज भाई बेनों के लिए मनाया जाता है
32:29और हमारे लोग गीतों में
32:31तो नेहा
32:32देवर भावी, ननद भावी, देवरानी जिठानी, सास बहु और खटे मीठे संबंदों के रूप में उस प्रेम का प्रदर्शन है।
33:02भावी दिलाल हुए, लल्ली हुई, जो भी हुई तो मैं बेदा लूँगी। अब इनी सबसे आतंकित हो करके भावी न गाने गाने कैसे बनी।
33:32बलमुवा, कैसे सपरी। अरे जिठनी आवे, चरुआ चणावे, मांगे अपना नेग। तो यहां पती से उसाब बता रही है।
33:41अरे चच्छे की ओट से जच्चा कूदी पिया गए परदेश, चाभी लई गए रे बलमुवा, कैसे सपरी। अरे घर में न बलमुवा, कैसे सपरी।
33:53पती से पतनी शिकायत कर ले रही है, कि तो बच्चा है ज़नों उपर सबको नेग देऊ, हजद कुदत सबको नेग मांग रही है।
33:59तो यह भी प्रेम है जहां पर संबंदों में इतना अधिकार है कि यदि कोई मंगल उतसब हुआ है तो हमारा इतना अधिकार है कि हम आप से कुछ मांगे और यह लेना देना वी रहें इसको व्यापार कहते है, प्रेम का सबसे बड़ा व्यापार है, और यह भी मैं आज़ �
34:29शुरू कर दिया, जहां पर बच्चे को सहज संसकार से पहले एटिकेट सिखाने लगे, एटिकेट यह सिखाने लगे कि क्या नहीं करना है, उससे क्या हुआ सहज अभिवेक्ती, बीछे छूटती चलीगी, अब हम लोग तो उस पीडी के कोई दिखा, हाई, कितने दिनों ब
34:59वो कम होता जाता है, तभी आप देखिए कोई देखते हैं, आजकल बड़े दूनर से फ्रेंड्स तो कि एकदम शांत निर्विकार्द होता है, वाट सब दूट, लोंग टाइम, नोसी, कोई भाव नहीं है, जबकि हम लोग संगीत में जीने वाली पीडी है, हम जब तक उ�
35:29अपार्ट डंग से कहना शुरूर कर देते हैं, तो ये प्रेम में शिकायत वहीं पर लेने का भी अधिकार, जब वो कोई कहता है कि कुछ प्रेम में कुछ को गिफ्ट दे, तो सब कहते हैं यार प्लीज को इसकी क्या जरूरत थी, या कहते हैं कि यार फॉर्मालिटी के जर�
35:59कोई कहें या यह आना आना नहीं माना जाएगा, अगली बार आएंगे तो खाना खाके जाएंगे, आपको अच्छा लगता है कि कोई आपको इस तरह बुलाना चाह रहा है, जब मुझे याद है, एक बार एक बच्चे का स्कूल में हमारे भतीजे का एडमिशन हुआ, मैं �
36:29भंबारा सगया, बतीजा जबबे से उठाया, तीन-चार ले ली, और लेकर चलता भीना, चार दिन बाद, पताचला एडमिशन सुची में बच्चे का नाम नहीं था, तो जो हमारे परिचित उनसे कहलाया गया, तो उस विद्याले के फादर, इतना तो हिंट दे दे रही ह�
36:59तीन साल के बच्चे का अधिकार नहीं है, तो क्या तीन साल के बच्चे का होगा, आप अभी भी तीन साल के बच्चे को आप तीन साल का बुड़ा बनाना चाहते हैं, कहीं तो उसका अधिकार हो, कि बच्चे को टौफी दी जा रही है, इस पर एडमिशन तय होगा, कि बच
37:29तुम भी खाओ, जानतानी घर में सिखा दिया गए, नहीं, नहीं, हम नहीं, मन पो इतना कर रहा है कि अंगूर लपकलने चाटो, लेकिन घर में बताया गए, नहीं, नहीं, नहीं, प्रेम यही है, कि आप जितना स्वभाविक रहें, जितना नैसर्गिक रहें, बच्चे का प
37:59अब आजकल क्या बढ़िया से गिफ्ट रैपिंग करा कर के टैग है कि संग हम के अच्छे से टैगिंग होई यह इसमें बड़ी चिंता, अब पहले क्या होता था हमको याद है, कि हमारी शादी ब्या के घरो में तो बहुत होता था कि जब गई कि चलो यार साड़ी आड़ि
38:29कि नहीं इसकी क्या जरूरती, प्लीज इसको अपनी वो क्याबलरी से हटा दीजे, आप कहिए कि मा यार हम तो सोग रहते तुम कब दोगा यार, अगली बार अम भी रखेंगे तुमारे लुपार, ये बड़ा सुन्दर इसको सूर्दाजी ने बताया और रस्खान ने कि य
38:59कि आपने नक तौरा भी बताया, अब तो लोग भूल से गए हैं माली जी की बिचिया दबाई, नक तौरा, दौार चार, और कुमा पूजन, और भात, ये होता क्या है, क्योंकि आप तो स्टेज सर जाता है, वर्माला हो गई डीजे की धुन पर, अब शादी एक दिन की शा
39:29कि आपने में होता था, जब मौले की ओरते आती, ने, ने, हमने त अपनी बिटिया का विवाह किया, बेटे का विवाह किया कुछी बरस पूर, वो सब कुछ वैसे ही किया, आज भी कितने लोग मुझ से कहते हैं कि आपने एक एक रीती वैसे ही अपनाई, जैसे होता है वि�
39:59हमेशा दबता है लड़के वालों के पाँ, ये एक बड़ा एक विकार सा है, आज गल तो खेर उल्टा हो गया, लेकिन बहले पहले ये मानते थे, कि कान्या का पक्ष जो है, वहमेशा दबा रहता है, लेकिन आप जानते हैं, जब विवाह की बाते होती थी आपस में, आप �
40:29जी इसको कुरूडली नहीं देखना चाहिए, पहले कन्या के पक्ष के जो कन्या के बाता पिता थे, वह अधिकार पूर्वक लड़के के पिता को कहते थे, भाया, हमारे आपे पांच पर्जे आएंगे, यानि इन आरे जो सहायके घर के, जो सेवक हैं, जो हमारा पूरा घर
40:59आते थे, और वह बेस्ट कपड़े भेजे जाते थे, लड़की वाला कहता था, उसके बाद साली का भी हमाने आतो होता है, सिंदूर भराई लड़की की बहन पहले भरती, तो उसकी सबसे अची उसका वस्तराता था, बिचिया दवाई भावजाई होती थी, उसकी साड़ी �
41:29जब धोबन हमारे आपर धोबन सुहाग देती है, क्योंकि अवद में हम आज भी मानते हैं कि धोबन की टोक प्रवुराम जान की मया को लगी, तो हम आज भी धोबन का सुहाग देते हैं, और धोबन जब सुहाग देती है तो उसको कोई देख नहीं सकता, अपनी मांग से मा
41:59तक और समाज को बातने की इस समय ऐसी ऐसी बाते हो रही है मैं तो देखती हूं चाहे ट्विटर हो या लोगों को मैं देखती हूं मुझे लगता है लोक संगीत और लोक साहित तो हमारी जो परमपनाई वो इतना सब को जोडती है एक गीत है जिसमें सब पूछते है कि राम क�
42:29बनाया ब्याक अचे रहिया नहीं बनाई जो मंडप में बढ़ती मेरा राम कैसे ब्या करे माली नहीं नहीं फूलों को बेला का उसने सहरा नहीं सरा मेरा राम कैसे दुला बने या बज जाके गयो बज जाना मिलो जामा बनक्वारे रामा रगे जहां पर सुन राके गयो सु
42:59राम रहे
43:00राम का ब्या इसलिए नहीं हो पा रहा है
43:04क्योंकि बढ़ाई
43:05माली, बजाज
43:08सुनार और फिर
43:09अंतिम यह है कि
43:11गलियन में गयो यारन न मिले
43:13यारन बेन कुवारे राम रहे
43:15यानि कि समाज भी जरूरी
43:17मित्र नहीं मिले इसलिए राम का ब्या
43:19नहीं हुआ, यह कौशल्या कह रही है
43:21यह हमारे हैं सिखाया गया
43:22कि तुम यह याद रखो कि तुमारा कोई भी
43:25उत्सव तभी पूरा होगा
43:26जब समाज के सारे अंग जुडेंगे
43:29एक हमारे हैं
43:30कृष्णी के
43:32जन्मका, कनया के जन्मका गीत
43:35गया जाता है
43:35जिसमें
43:37किसको किसको पता
43:55तमोली किसे कहते हैं
43:56आप तो जानते ही होंगे
43:58तमोलन हाँ, पान वाले
44:01मालन लाई फुलवारे तमोलन बीडवारे तमोलन बीडवारे अरी अच्छा सलर पटोर लैयाई पट हारनिया
44:17मालन देत आसिस वारे तमोलन नाचे भरे आंगनवा अरिंग पिली हरी लाई पटोर अरी नाचे पट हारनिया
44:30जए सोधा के भएनन देलाला
44:33कृष्ण और राम के एक कजन्म का एक के विवा के मंगल गीत गाने के पीछे अभी प्राय सिर्फ यह
44:39कि इन गीतों को मारी दादियां गागा की यही बताती थी कि हम ही हम है
44:43तो क्या हम है और तुम ही तुम हो तो क्या तुम हूँ हम ठीके ऐसी रहे हैं क्योंकि हमारे आपे एक बहुत समावेशी समाज को देखने की नेती रही है
44:53सब एक रहे हो और प्रेम से रहे हैं
44:56सब की अपनी उपियोगिता है
44:58ये प्रेम का धागा तूटे नहीं
45:00आज तो बस यही में मानते हूं
45:03क्योंकि आपको लोग गीत में ही
45:05नहीं महारत हासल है
45:07लेकिन जादे जाते मैं मालनी जी हमेशा से
45:09आपसे सवाल करना चाहती थी कि
45:11भजन में और सूफी संगीत में
45:14आपका पसंदीदा गीत कौन सा है
45:16जाहिर भजन
45:17नहीं दोनों जॉनर में
45:20क्योंकि आपसे तो हमेशा लोग गीती सुने
45:24और आज मैं चाहती हूं कि आप एक भजन
45:27और एक सूफी
45:29वो सुना के
45:31इस सेशन का सवापल कर
45:33बहुत चॉइस बड़ी वो हो जाती
45:34क्योंकि भजन में भी इतना
45:36वास्थ है कि इंसान
45:39क्या चुने और क्यानी और सूफियाना भी इसी तरह से है
45:41किसका भजन सुनना चाहेंगे आप बताएं
45:45किनका किस
45:46कुछते होगा पादी चॉइस
45:51कल शिवरात्री है
45:53कल मुझे लगता है आपका दिन भी
45:58शिवरात्री ये कारिक्रमें में बेस रहे हैँ
46:00कैल का दिन
46:04तो दरसल गवरा और शिव
46:05के विवाह का
46:06दिन है तो मुझे लगता है कि
46:08एक स्थाई कंज केल फlagen
46:10मसाने में मगा देतीनैं क्योंकि अब
46:12बसंद 5 प्質 टोШ years, िागना है। लोगाा हुँछा है।
46:16और ताली बजा बजा करके साथ जादो में थोड़ा सस लाए। बढ़ेगा।
46:22होरी खेले मसाने में
46:25होरी केले मसाने में
46:33होरी केले मसाने में
46:36काषी में केले घाट में केले
46:39काशी में खेलाएं घाट में खेलाएं केले ओगण मसाने में होरी केलाएं मसाने में
47:01बोला संकर धातूरा तो दिखाए रहे चौसटःयोग निनाचत अगावत डम डम डम रूब जावत रहे
47:13डम डम डम रूब जावत रहे मसान की रांख से खेलाए हो री हा री खेलाए बाबा मसान की रांख
47:26से खेल होरी होरी खेलाय मसाने में तन में भसम लगाए शंकर वेश बड़ा अड़ भंगारे
47:45माथे पर चंद्रमा बिराजे जटा में सोगे गंगारे
47:52खोल दिया है नयन तीसरा
48:02खोल दिया है नयन तीसरा
48:06काम देव संघारे रे
48:10होरी खेलाय मसाने में
48:17होरी खेलाय मसाने में
48:24रंग से खेले अरे भंग से खेले
48:35भंग से खेले अरी राग से खेले अरी आँचे खेले अरी रेचे खेले प्रेचे खेले
48:44रंग से खेले भंग से खेले आँचे खेले राग से खेले रेचे खेले प्रेचे खेले रंग से भंग से रंग से भंग से भोले
48:52जय भोले होरी खेलै मसाने में तव तत्वम न जाना मी की द्रिशो असी महेश्वर या द्रिशो असी महादेव
49:13ताद्रिशाय नमो नमह तव तत्वम न जाना मी की द्रिशो असी महेश्वर या द्रिशो असी महादेव
49:26ताद्रिशाय नमो नमह ओम नमस्षिवाई साथ में गाईए कल शुवरात्रिये
49:36ओम नमस्षिवाई ओम नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्षिवाई नमस्ष
50:06बहुत खूब
50:12सुर्यास्थ थो रहा है और आप यहां गारें थी
50:15मैं खुद को रोक नहीं पाई वीडियो बनाने क्योंकि इतना अधुद्रिश लग रहा था
50:19वावावाव ओम नमशिवाय गारें थी बहुत बहुत बहुत शुक्रिया माली जी
50:22सुफी तो दो पंक्ती नहीं हो भी बिल्कुल अमें जी लगा कि आप
50:26ने ने हमें ने बोले नात
50:28असल में सुफियाना में अब हजरत अमीर खुसरो की बहुत सारी चीज़ें है
50:36नजीर साहब का भी कलाम है
50:38तेरी सरकार है आली मेरे हजरत मेरे वाली
50:56बेगम शाह वारसी साब का कलाम है
50:58तेरी सरकार है आली मेरे हजरत मेरे वाली
51:09तेरी सरकार है हाँ उसकी आखों में दीदार करता हूँ
51:22मेरे दामन में न रख दामन मेरा हाली मेरे हजरत मेरे वाली
51:45तेरी सरकार हाली मेरे हजरत मेरे वाली
52:15तो कली जी खुद ही मुझसे कह रही थी कह रही थी कि मैंने आपको कभी इमेजन नहीं कहता क्या गजले गाती है तो दरसल होता क्या है कि जब आपको
52:24शोरत जिस चीज़ में मिल जाए
52:26नाम हो जाए तो फिर इंसान कुछ और
52:28तरह सोचता नहीं लेकिन
52:30मेरी जो तालीम है वो तो घजलों
52:32की और सुफियाना अब लखनव जिसकी
52:34जमीन हो तो वो चीज़ें खुब
52:36गाई हैं और खुब तबियत में हैं
52:39तो वो इसलिए सुभाविक रूप से आती है
52:40लेकिन अगली बार करें तो
52:41जम कर गाना मिलाना हो बिल्कुल
52:43जोर्दार तान्या हो जाए माली जी के लिए
52:46एक बेहद
52:47ऐसी शाम जो
52:50लखनव वासियों को याद भी रहेगी
52:52और अगले वर्ष फिर
52:54अगर
52:55भगवार ने चाहा तो यहीं मिलेंगे
52:58इसी मंच पर
53:00बहुत बहुत शुक्रिया माली जी
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