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अवध की संस्कृति और विरासत पर बात, वहीं के लेखक-लेखिकाओं के साथ
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00:00बहुत स्वागत है आप चारों ही महमानों का बहुत बहुत वेलकम आप चारों का और क्यूंकि अवद आज कल के बारे में हम बात करने वाले हैं और बहुत सारे लोगों के मन में सवाल रहते हैं अवद को लेकर तो शुरूआत एक एक करके कर लेते हैं
00:15बगुण जी आपकी तो किताब भी लांच होने वादी है, आप लेकर आए अपनी किताब? आचा ठीक है, अम मानित में उसको लांच करेंगे, तो बहुत स्वागत है आपका, मुझे आप अपनी नजरीए से बताइए कि अगर एक लेखक होने के नाते और एक युवाल लेखक
00:45और जो भी साहित का लेखक समाज के बारे में सोचता नहीं है तो फिर मतलब जो है ना लेखक नहीं है, दूसरी चीज़, जदि मैं अपनी किताब बावनी इमली की बात है करूं, जो यह नई किताब है, तो जावध के बारे की बात है, कि जावध में क्या चेंजिज हुए �
01:15आंती लाने का भरपूर काम किया, तीन बड़े नाम आप देखेंगे ना, तो रानी हजल अचमी बाई हो गई, नाना राव पेशवा हो गई, और तिसरे हजल मंगल पंडे मेरत से, लेकिन अजावाद में और भी बहुत सारी जाने गई, लाखो जाने गई, जिनके बारे में �
01:45और चीजें देख रहे हैं, स्वतनताश अब कुछ तो ये कई लाखो लोगों के हाया कारण से, एक फतेपुर में बाउनी, एक जिमली का पेंड है, जिमली का, वहां 1857 में बावन लोगों को, ये पासी जो है, ने दे दी गई थी, पासी ही नहीं दे दी गई थी, साथ में ह
02:15कि हाँ, जब बिटिस के लोगों ने बोला था, कोई भी ये सव वो ले करके नहीं जाएगा, दाहा हज संसकारन नहीं करेगा, और 37 दिनों तक वे सव एक पेंड में हज लटकते रहे, गाओं के लोग, जिले के लोग, किसी की हिम्मत नहीं होई, कि सव को हज ले जाए, जब
02:45हैना, भाग गए, फिर था, मतलब हुआ था, संसकार, कहने का, हैना, ये मतलब है, कि लखों लोगों ने जान दी तो हमई आजादी हामिली, कि या आज हम स्टेज में है बैठकर किसी को भी गाली दे सकते हैं, बरा हम कुछ भी बोल सकते हैं, एक एक दाएरे में रहकर आप �
03:15तो करी सकते हैं, मर्यादा में रहकर आप अपनी तमाम बातों को रख सकते हैं, तो आजादी के लिए हमने बहुत कुछ खोया है, आप ये कह रहा है, और ये हमने अपने इतिहास से देखा है, और समझा है कि बहुत सार ऐसे बलिदानी रहें, जिनका नाम बेशक हम न जानत
03:45सबाहत आफरीन है, और इसके पीछे एक स्टोरी है, मुझे ये बताते हूँ, अच्छा लगेगा, कि मैं जब इस दुनिया में नहीं आई थी, तो मेरी माँ वो पढ़ाई लिखाई की बड़ी शोकीन थी, बहुत सारी किताबे पढ़ती थी, तो मेरे नाना की जो लाइबर
04:15संघर्ष करके फिर वो जब उसने अपनी राह बनाई, तो मेरी माँ ने गहा कि काश मुझे बेटी होती, तो मैं उसका नाम सबाहत रखती, तो जब मैं पैदा हुई, तो मेरा नाम सबाहत आफरीन रखा गया, और सबाहत का मतलब बताते हुए थोड़ा सा मुझे लग रहा
04:45पलवी सामने बेटी हैं, बहुत ही खुबसूरत हैं, मैं उनको देख रही हूँ, उनका नम सबाहत होना चाहिए
04:51बहुत शुक्रिया, वैसे भी कहा जाता हैं एक फ्रेज है कि आदो लड़किया सुन्दर होती हैं, बहुत सुन्दर होती हैं, तो ठीक है, मुझे अब अगर हम अब आद दास्ताने अवद की बात करते हैं, सभाजी तो आपके हिसाब से, मेरे मन में हमेशा एक सवाल आता है
05:21अवद सिर्फ कबाब और नवाब का नाम नहीं, आपने सच कहा, बिल्कु लेतनी समर्द इसकी संस्कृति हैं, आप देखेंगे कि अपने देश से बाहर बहुत सारे ऐसी कंट्रीज हैं, जो कि लखनवु को जानती हैं, वो लखनवु को मतलब लखनवु का शहर नाम सुना
05:51ऐसे सुन्दर शहर में हम लोग रह रहे हैं, और लखनवु को पता नहीं क्यों सही बात है, खाली-खाली नवाब और कबाब से जोड़ दिया गया है, जबकि आप सोचिए कि जब 1870 की जो लड़ाई भी थी जैसा कि इनों ने अनमोल ने कहा, तो वो एक साल तक तक तक तक �
06:21खाली-खाली कबाब और नवाब की बात नहीं है, एक बहुत ही सुन्दर कल्चर रहा है हमारा शुरू से, बेगम आलिया की 200 साल पुरानी बनवाई मंदिर है, जिसे कि आप सब जानते होंगे अली गंच का चास सितारा मंदिर, मुझे ये कहते हूं, कितना सुन्दर ये ल�
06:51बात समझेंगे कि एक पढाईन का मस्जिद है, अब आप ये सब चीज़ें आप और कहीं नहीं पाएंगे, आप यहीं इसी शहर में आपको मिलेगा कि एक पढाईन का मस्जिद है, एक बेगमालिया का बनवाया हुआ मंदिर है, और एक जाउलाल वो कायस थे, जाउलाल का �
07:21जो अभी रमजान आने वाला है, तो रमजान की जो अलविदा जुमे की नमाज थी, और आपकी जो होली है, मतला हम सब की, वो सेम डेगो पड़ी, अब क्या होता है, कि होली में मान के चलते हैं, कि भई हुडदंगी हैं अपना चीज़ें हैं, तो बात बिगड़ने का डर ह
07:51को रोकना, अब और किसी भी आप पूरे देश में उठा लीजिए, और किसी जगह ये बात नहीं हुई है, सिर्फ लखनों में ये बात हुई, कि हमारे मुस्लिम भाईयों ने और हिंदू भाईयों ने मिल करके, इसका हल निकाला, कि होली का जो जुलूस है, वो बारा बजे
08:21जिसमें आप धर्म नहीं देखते हैं, जहां पर आप बहुत एक जुटा के साथ हर त्योहार को मना रहे होते हैं, जहां मेरा और आपका जैसा कुछ बचता ही नहीं है, कितनी बार हम कितने सारे त्योहार एक साथ मिल कर मना रहे होते हैं, बलेंदू जी, बहुत स्वागत है
08:51देखिए ये उपन्यास जो एक वहसी नवाब के चरित्र पर केंद्रत है
08:58लेकिन अगर हम ये कहने चलें कि किसी खास चरित्र को ध्यान में रखकर ये उपन्यास लिखा गया है
09:04तो कते इस विसे के साथ या इसके टाइटर के साथ नया संगत नहीं होगा
09:10बासा सलामत हाजिर हों हम जानते हैं कि जब बासा अपने दरबार में उपस्तित होता था
09:18तो दरबारी या बाकी लोग उसके स्वागत के लिए सब का इस्तेमाल करते थी
09:22जो हमारी कथा है वो एक नवाब के इर्ध गेंद्रत है
09:28नवाब थोड़ा वहसी मिजाज है और धेर सारे ऐसे फैंसले लेता है जिसकी कोई तारकिकता नहीं होती
09:38तो इसकी एक वरतमान समय में भी और अतीत में भी एक प्रासिंग इकता है
09:45कि ऐसे किसी भी देशकाल परिस्तिती में यदि कोई ऐसा नवाब या ऐसा कोई बास्ता या ऐसा कोई सासक होता होगा
09:51तो अगर वो अपने अतारकिक डंग से वसी फैंसले ले तो रियाया को क्या-क्या मुश्किलात से रूबरू होना पड़ता है
10:02यह दिखाने की मैंने के उस कोशिस की है यह जरूर हो सकता है क्योंकि जब कोई लेखक लिखता है तो ऐसा नहीं है कि बिल्कुल कल्पना से ही सब कुछ रचता है उसमें अथार्त का भी बहुत सारा पुट होता है
10:14इस सुपन्यास को लिखने के दवरान मैंने धेर सारी अवत से जुड़ी कहानियों का किताबों का अध्यान किया इसके अत्रिक जो देश के दूसरे हिस्सों में जो ऐसे सासक हुए
10:26सब को पढ़ा तो मैंने सब जगह से कुछ न कुछ निचोड़ा और सब को निचोड़ के एक चरित में संकेंद्रत किया और इसका जो नवाब है नकबुला नवाब जिसको जिसका नाम है वो इस टाइटिल का आधार बना
10:45आधार करें कि इसरी के आपने इतनी साथ चीज़ों को पढ़ने के बा Adam मतलब एक इफ एक oke चिस लेकर के फिर आप इसी होता है यहpes
10:58को सीछे सीधे अगर हम आधार में लेकर Under कराई तो यथी हासी को परनियास बहीं है और अगर
11:05कि इस सभाइ हैं और सबस्क्राइब करने हैं तो हमारी मजबूरी या हमारी बाधिता है
11:11या एक लेक की सतरकता कह सकते हैं, सजगता कह सकते हैं,
11:16कि हम कुछ न कुछ ऐसा रचे हैं, जिसमें अथार्थ तो हो,
11:19किसी चरित्र के आस्वास भी हो,
11:21लेकिन उसमें कलपना के वैभो से हम उसको ऐसा रूप दे सकें,
11:25ताकि पाठख को नया रस मिले, आनंदित हो पढ़ना के अब आम रजनी जी आप से समझना चाहेंगे,
11:34कि बहुत स्वागत है आपका, इस्त्री परिपेक्षे से अगर देखा जाए,
11:38इस्त्री परस्पेक्टिव से अगर देखा जाए,
11:40तो कितने बदलाव आप देख रही हैं जो कि मैंने सभाहाजी से भी पूछा,
11:48जो चेंजिस हैं और जो एक्सेप्टेंस हैं, वो किस नजरिये से उससे आप देखते हैं?
11:54बहुत धन्यबाद, सबसे पहले तो मैं यह कहूँगी कि यह जो सवाल है,
12:00यह बहुत जरूरी सवाल है जो आपने पूछा है,
12:04मैं 1990 में शहर में आई, और जितना सुना था,
12:09नजाकत, नफासत, तहजीब, संस्कृति, जीवन शैली,
12:13और जितनी खुबसूर्ती से लोग कथायां, जन्शूरुतियां, किम्विन दंतियां,
12:19आवध छेत्र को लेके, बच्पन से लेके बड़े होने तक,
12:22मैंने महसूस किया कि साहित की जहां तक,
12:25मैं साहित की तरफ भी जाओंगी,
12:27कि जिस तरह से जाईसी ने, प्रेमचन ने,
12:30या प्रगतिशी लेखक संग की स्थापना,
12:33पहला संबेलन, 1936 में लखनों में हुआ,
12:36तो इस सारी परस्तितियां जो लखनों की नजाकत,
12:39नफासत, बास्तुकला, कत्थक, साहित, संस्कृति, जीवन शैले,
12:43ये आज के संदव में, मैं ये तो नहीं कहूंगी कि महस किताबी रह गया है,
12:51लेकिन 35 सालों से मैं शहर से जुड़ी हूँ,
12:54और मैं महसूस कर रही हूँ, कि आज नहीं तो कल, ए चीजें इतिहास की थाती बन कर रह जाएगे,
13:01और इसलिए क्योंकि जो इधर कॉर्परेट कल्चर की नई पीड़ी है,
13:06युबा पीड़ी है, साहित ते संस्कृति में रुची है,
13:09मैं नहीं कहूँगी कि उनको रुची नहीं है, वो अपनाते भी है, लिकिन जो ताहजी इसके लिए पहले आप,
13:16लखनो का मतलब था पहले आप, जो मैं शहर में आई तो मैं मूह लूप से जहासी बुंदिलखंड की हूँ,
13:23और खुर्दरेपन के लिए जानी जाती है, और बहादुरी के लिए भी, और हमारे यहां के लड़कियां बहुत तेवर वालियों बहुत बहादुर होती हैं,
13:35मतलब यह उस तरह से नहीं हम लोगों को करमठता, महनत, श्रम यह बुंदिलखंड की परंपरा है, और यहां पर जब मैं आई उनिस और नबय में कुछ हाद तक लगबग 30 से 40 प्रतिशत, जो मैं आज इस मृती की तरफ देख रही हूँ, उतना ही नजर आया, पुराना ल�
14:05सबाब और नबाब और और इविन बास्तुकला का जो वेजोड नमुना है, गंगा जमुनी संस्कृति का जो समनबर है, अवध परांत का, यह हमेशा रहे हूँ, उनों ने वही काना कि यह जो खुबसूरती है जो फैब्रिक है वो यहां पर अभी भी बहुत अच्छे तरी
14:35तो सोचिए वहां से चलके संस्कृति यहां तक आई तो दौनों का समनबर तो दौनों का मिला जुलापन तो आना ही था, हिंदू मुस्लिम संस्कृति का जो एक सबसे खुबसूरत पहलू है, वो यही है कि दौनों लोग मिलके तयोहार मनाते हैं, दौनों लोग मिलके दू
15:05जमीन है जहां पर उन्होंने एक महा काब लिखा है पद्माबत और जहां से चलके आगे चलके अमरतलाल नागर ने बूंद और समुद्र में पूरे चौक को उतार दिया है और इस तरह से जो रचनाकार आगे चलके राम भादुर मिशेर और भारतेंदु मिश्रे इधर जो न
15:35के इर्दगिर्द गुज्रा है तो एक नफासत, नजाकत, तहजीव, संस्कृति वो तो लड़कियों के जीवन इस्तरियों के जीवन में मैंने देखा है आप किसी के घर जाएए तो बहुत कायदे से आपको अगर बिना भुलाए भी आप जाएंगे बिना फोन किये भी जा
16:05कितनी है नहीं कह नहीं सकते लेकिन ये खूबसूरती ये चीज यहां बनी रहेगी और आने वाले समय में जो आज की बात करें तो जो मैंने पहले कहा था कि कॉर्परेट कल्चर ने, मॉल संस्कृती ने, पब संस्कृती ने, आधुनिकता अबाद ने, जैसे पूरे देश म
16:35कोजनी है जो उनका इता ही रिए ईनसान के लिए कोई भी है कोई अ आघ और के लिए तो उनका जो बहुत सेलफ्लैस होगर के प्यार था वो छाइद हमारें धर उनके बरावट तो नहीं है वह है क्ई। के उनके पास था लेकिन बेरे बेरे कम हो ए है
16:53तो वो पीडी तर पीडी हमें लग रहा है कि शायद हम धीरे धीरे धीरे कम तर और कम की तरफ चले जा रहे हैं कुछ अलग लग वजहों से
17:00सामुहिक्ता की जगए बैक्तिबाद दे तेजी से कदम बढ़ा है एक सामुहिक संस्कृति में पल्ले वड़े हम सब लोग हैं
17:07कि महले में किसी का सार और ये मिस्टर फलाना मिस्टर धिमकाना की जगह चाचा चाची ताउ ताई और कोई भी रिस्ते के विना कोई संबोधन होता ही नहीं था
17:18और कोई भी किसी को महले में अगर बिना बताए आप जा रहे हैं वोग कोई भी आपको डाट सकता था कि कहां जा रही है लड़की है बिना बताए कहां जा रही है।
17:48उसे वो करा दिया गया, कहां जा रहा है, सब की नजर में हैं, पहले आपने देखा हुआ, स्मोक करते हुए, सौ बार कोई पुरुष भी सोचेगा, कि अगर गली का है, महले का है, कोई इंसान, अभी चीज़े बहुत बदली हैं, तो जो आप कह रही हैं, वो बिल्कुल सच ब
18:18गलत हो रहा है, ट्रेन में हो रहा है, रास्ते में हो रहा है, बस में चलता है, यह हर व्यक्ति की निजी नयतिक जिमेदारी में महिसूश करती हूँ, आप कैसे देख सकते हैं, कुछ भी गलत होते हूँ, मैं अगर आप इंसान है, तो आपके मन में भी बहुत दुख होना च
18:48ये सोचती है, ये भी बात सेच है, ये जो है, ये ठीक नहीं कर रहा है, हमारी चीज़ें सही थी, ऐसा होता है, आपने जो कहा कि जो माएं हमसे पहले की माएं थी, वो ज्यादा बहतर तरीके से, वो selfless उनका सब कुछ, वो बहुत अच्छी माँ थी, हम उतने अच्छी माँ इ
19:18टीनेजर हैं, आप लोगों के घर में भी होंगे बच्चे, बच्चियां, क्या वो उस तरह की बच्चियां हैं, जिस तरह की हम थे, हमें तो किसी से बात करते हुए भी डर लगता था, क्योंकि हमें वो सिखा या समझाया जाता था, ने, समार्जी, मेरा जो कहने का मतलब हो
19:48सुभिधाये हैं जैसे कि अपना वो है ये पीजी आई है और मतलब जितने है रामनोहर लोहिया है जितने अस्पताल है हर तरह के
19:57कॉलेजेज हैं हर तरह की उनिवर्सटीज हैं मौल है इसके साथ सारी पुरानी चीजे तो हैं आपको देखने का नजरिया आप क्या देखना चाहते हैं अगर आप अपने बच्चों के साथ किसी मौल में जाएंगे बैठेंगे तो बच्चों को वही अच्छा लगेगा ना आ
20:27पुरानी वास्तुकला के कमी है सब कुछ है क्या देख रहें क्या चुन रहें अपने बच्चों के सामने क्या हम इमेश प्रसतुत कर रहें यह सारी हमारी जिम्हेदारी कर जाता है कि आप जो जो ग्यान देने की कोशश करते हैं दूसरों को वह तब-दश दब तक वो लों
20:57बहुत सम्मान करना है, वो कभी भी उन्होंने डिस्रिस्पेक्ट नहीं किया, तो यह आप भी बुनता है, कि आप कैसे बच्चों को कर रहे हो, और उन्हें बहुत ही हाई-टेक बनाना है, उन्हें इस दुनिया में सर्वाइब करना है, तो चीज़ें तो करनी ही पड़ेंगे
21:27मेरी जो सबसे जादा बिकने वाली किताब है, जिन्दगी 50-50, सबसे अचा होगी है, सबने नाम सुना होगा, लेकिन गेरबाज मेरी तकिज़ेंगे, क्योंकि मेरे जीवन से निकले, मेरी समस्य आती है, बोलने की, बोलने की बोल पाता है नहीं था, और फिर मैंने हां कैसे
21:57जिन्दगी 50-50 से ही जाना है, जाता है, लेकिन याज जो टॉपिक था, यावद के याज आवद, आज की बात है कि मैंने, मैं थोड़ा सा ये कल की बात है करना है, जाता हूँ,
22:27जे, क्या था कि याज की डेट में ये बच्चो को ये मोटीवेसनल वक्ताओं की बड़ी हाँ, ये ज़रूरत रहती है, लेकिन आप गाव़ोंमे जाएं, कोई जानता हो की ये場 जानता हो, ये ना जानता हो ये जानता हो ये जान्यावद में, कि याल्ःा बड़ा सुना जा
22:57हम दो चंद सुना रहे हैं, आपको पुरा मोटिवेशना है, बारह बरस ले कुकुर जीए, तेरह बरस ले जीए सिया, बरस जठारा ले छत्री जीए, बाकी जीवन को दिख्का,
23:12ये सब लखनव का ही है, यवद का ही है, लोग जानते ही नहीं होंगे, क्यों, मोटिवेशनल, रील्स देख रहा है, ये संदीप, ये महेंस्वरी, इसी बुखेडा, मतलब आप भी देख रहे हैं, रील्स इसका मतलब, दूसरा सुना रहा हूँ, बड़े लड़या द्वाबा
23:42ये मोटिवेशन तागाओं का, ये कौन देगा मोटिवेशनल, कोई नहीं देगा, ये हाई लखनव में ही मिलता था, मिलता रहेगा, आप जड़ों से रहें, तो होता रहें, बहुत शुक्रिया, और ये वाकिए में बहुत खूबसूरत है, सभाजी, सेम सवाल आपके लि�
24:12बहुत जादा उसको प्यार मिला है जनता का भी
24:15ऐसे तो मैं कहानियां ही लिखती हूँ, और मेरा कहानी संग्रे आया था, मुझे जुगनो के देश जाना है, उसे काफी पसंद किया गया, और चुकि मैं संख्यक समुदाय से हूँ, जो एक middle class families होती है, उनमें क्या-क्या issues होते हैं, और धर्म के नाम पर किस तरह से लड़क
24:45हैं, और फिर मैं बराबर कहानियां लिखती रहती हूँ, भी हाल फिल हाल मैंने एक कहानी लिखी जो वनमाली में आई, और उसका topic बाकी लोगों को भी पसंद आया, तो मुझे भी बहुत पसंद आया, कि किस तरह से जब रिष्टे होते हैं जो, उसको, उस कहानी में ऐसा है
25:15में रह सकते हो, लेकिन आपस में कोई रिष्टा नहीं रखना, तो किस किस तरह की जटिलताएं आती हैं, और बहुत ही गरीबी के दिनों में, वो किस तरह से उनका रिष्टा जुड़ता है एक पल के लिए, ये बहुत, मुझे बहुत पसंद आया था, लिखते हुए मैं का
25:45म даunts और से दिखती हैं, सारे निद आपकी बस यही नहीं होती हैं कि एक कप्डा मिल गया, एक छट मिल गई, और खाना मिल गया, उसके अलाबा सारा भी बहुतлож में बहुत सारी चीजें होती हैं, तो लेकर लिखाय है, तो हो सकता है लोगों ने पढ़ा भी हो, पसंद लिए
26:15कुछ फेवरेट जो आप हमारे दर्शोकों को बताना चाहें जो आपके अपने दिल के बहुत करीब हो कोई ऐसी कोई किसा कोई ऐसी चीज जो आपको लगता है कि रचनाकार के तौर पर यू कम अक्रॉस जो आपके दिल को छूगई हो अद देखिए मुझे तो लगता है कि मै
26:45आपके नीजी जीवन के साथ गटित हुआ हो या आपके सामने गटित हुआ हो आप उसके प्रत्यक्षि दर्सी रहे हो बहुत सारी गटनाय है मुझे मैं मदारिपूर जंग्षन का उधारन देना चाहूंगा जो कि मदारिपूर जंग्षन की जो प्रिष्ट भूमी है वो �
27:15बढ़ते हुए उम्र में देखा था, तो उसके धेर सारे चरित्र, उसकी धेर सारी घटना है, मैं तो कहूंगा कि लगभग वास्तविक हैं, बले वो किसी और चरित्र अलग घटना के रूप में आई हो, या दो चरित्रों को जोड़कर कोई तीसरा चरित्र हो गया हो, इस तर
27:45मठ के स्वामी हैं, और सामने एक तालाब है बड़ा सा जहां महिलाएं असनान करने आती हैं हर रोज सुबह, और असनान करने के बाद वो जल चड़ाती है, भालू बाबा का जो चरित्र हो हमारे गाओं के मठ के ही एक सादू से प्रेरित है, और उसमें हुआ ये था कि वो �
28:15अब वो किस मंसा से बैठते होंगे, आप समझ सकते हैं, तो एक बार ऐसा उसर आया कि उनको महिलाओं ने तो पहले टालरेट किया, और फिर बाद में उनको पकड़ के बकायदा उनकी पिटाई भी की, और पूरी की पूरी गटना मेरे सुपन्यास के दूसरे दीसरे बंद म
28:45लोगों से सुना कि जाब आज वहां मंदिर के पास ऐसी ऐसी गटना हो गई, तो वो कहीं न कहीं से वो इस तरह की बहुत सारी गटना है मेरे उपन्यासों में, खासकर मदारीपूर जंक्सन में, वाया फुरसत गंज में आई हैं, बास्ता सलामत हाजिर में तो मैं 200 साल पहल
29:15किताबों से पढ़ी या आवद मेरा के जो सीखा समझा जाना, उसी को उपरने के कोशिस की, आप से मैं जरूर समझना चाओंगी आपर रजनी जी कि आपके जो दिल के बहुत करीब कोई ऐसी रचना जो जिसे आप बहुत दिल से महसूस करती हो, कई बार ऐसा होता है कि जो �
29:45बट उनके बहुत करीब है वो, उनके बहुत दिल के पास है, मेरा एक छोटा उपन्यास है, यह आम रास्ता नहीं, और यह राजनीती में महिलाओं की इस्थिती के ऊपर आधारित है, मुझे यह बहुत तकलीफ दे ऐसास, आज भी है, पहले भी था, कि लड़कियों के, इस
30:15जो कभी बड़ी बड़ी पदों पर हैं, बड़ी जगों पर तैनात हैं, उनके निजी जीवन के विरोधावास और विसंगतियों से भरपूर पन्यास मेरा, यह आम रास्ता नहीं है, और खास तोर पर यथार्थ पर आधारित घटना हैं, और राजनीती में जब कोई लड�
30:45तब आपका संगर्स और सरोकार कितना पेचीदा हो सकता है, और कितना बढ़ जाता है, यह उपन्यास एक बैगजीन में चापा था पहले अंतरा करके, और उसके बाद यह पूरा उपन्यास बारी प्रकासन ने चापा था, जिसका तीसरा संस्क्रेण आ चुका है, और यह ब
31:15मुझे दिल के करीब इसलिए लगता है कि उस इस तरीका संगर्स, उसका वजूद और उसकी जटिलता है, रिष्टों की जटिलता है, रिष्टों के चक्रव्यू और बड़े बड़े नामधारी राज नेता, जो कि रुक्मणी जी गुपता, मैं नाम शायद भूल रही हू
31:45मैं राजनीती मैं जाती थी, काम आम करती थी, तो मुझे जब उन्होंने भीतर की सचाई वदाई तो मैं लिखे विना, उसके बाद मैंने उसकी अकेली एकल यात्रा परिवार का बिरोध, बच्चों का बिरोध, और जब सहूलियते सुविधाय मिलने लगती है, उसके प्र
32:15कि वही मद्वर के जो नैतिक अदर्सों की बड़ी-बड़ी बातें करता है, जब उसको मौका मिलता है, तो वो स्वार्थ परता का और अफसर बादिता का खेल खेलने से कता ही नहीं चूपता, वहां सारे रिस्ते दाव पर लग जाते हैं, तो इस कहानी को, इसी तरह, जब
32:45आप सभी मैमानों का, बहुत-बहुत शुक्री आप सबसे बात करके बहुत अच्छा लगा, और हम उम्मीद करते हैं कि आप ऐसी लिखते रहेंगे, और यंग्स्टर तक और जादा पहुंचते रहेंगे, बेशक वो किंडल पर पढ़ें आपको, कुछ-कुछ चीजे, प्
33:15लखनौ मेरे शहर, मेरे शहर, मेरे शहर, तेरी मुम्ताज रौनके निहार लू तो चलू, शीशे हर्फ में तुझको उतार लू तो चलू, चंद लमहे सुकूं से गुजार लू तो चलू, ए मुहबत तुझे दिल से पुकार लू तो चलू, लखनौ मेरे शहर, मेरे शहर,
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