Skip to playerSkip to main content
  • 6 hours ago
हिंदू होने का बोध 2014 के बाद कितना बदला? देखें साहित्य आजतक के मंच पर गहन चर्चा

Category

🗞
News
Transcript
00:01साहित याज तक में इस गंभीर विमर्ष के दवरान गर्व से कहो हम मिंदू हैं
00:06पर चर्चा के लिए जो भी स्टोता उपसी था और जो लोग हम आनलाइन हमारे कारेक्टरम को लाइब देख रहे हैं
00:15तमाम माध्यमों पर आज तक .in पर आज तक सोसल मिडिया पर साहित यत्तक पर और आज तक निउस पर उन सभी का मैं अभिनंदन करता हूं स्वागत करता हूं
00:30और हमारे जो अतितिय हैं उनका स्वागत मैं कर चुका हूं फिर भी मैं बत और माड़ेटर मेरी आहिया है तो है कि मैं इस चर्चा की सुरुवात करूं
00:40सबसे पहले मेरा एक प्रस्न है आप दोनों से जो सामान ने प्रस्न है
00:45मुझे है मैं अपनी समृतियों में जाओ ऑँ कासी मिमें पलाबढा यिस बशवव stell解 है मेरी पध्दाओधियाले में रिखाया है कासी बशवव stell cis۔
00:58लेकिन कासी हिंदु बिस्वविध्याले की धर्ती पर भी ये बात कई बार उठती रही है कि जब कासी हिंदु बिस्वविध्याले का गठन हुआ
01:07तो हिंदु सब्द नहीं था कासी बिस्वविध्याले था, कुछ लोग कहते रहे हैं
01:12महामना की वापावन भूमी रही है
01:15और मुझे लगता नहीं कि पूरे भारत में
01:19हिंदुत्व की जो पहचान
01:22हिंदुत्व का जो प्रदर्शन
01:24और हिंदुत्व की जो आत्मस्विक्रिती है
01:28और हिंदू होने का जो आत्मबोध और गौरबोध है
01:32वह जिस तरह से परिलक्षित हो रहा है वर्स 2014 के बाद से
01:38मैं यह चाहूंगा कि उसको आप किस दृष्ट से देखते हैं
01:43क्योंकि इस पर बहुत सारे मतमतांतर हैं
01:46बहुत सारे लोगों का कहना है कि यह जो बात होती है आज कल यह जो पहचान है जो प्रतीक है उससे लोग भैवीत होते हैं
01:54बहुत सारे लोगों का कहना है कि नहीं यह बहुत आवस्यक था या आत्मबोध या गवरोबोध हर उस धर्म को, हर उस परंपरा को, हर उस सभ्यता को होना चाहिए जो अपने अतीच से प्रेड़ा पाती है
02:11मैं चाहूंगा कि आप दोनों इस बदलाव को किस द्रिष्ट से देखते हैं
02:16देखे सबसे पहले तो ये समझने की आवशकता है कि हम ये हिंदू राष्ट्रिया हिंदू सभ्यता संसुर्ति के रूप में आज नहीं आए हजारों वर्षों से थे
02:27ये संपूर्ण भारतिय राष्ट्रिय आंदोलन हिंदू शब्द केंद्रित रहा और वह केवल राजनिती क्षेत्र में नहीं कला संगीत के क्षेत्र में भी साहित्य के क्षेत्र में भी और विद्या के क्षेत्र में भी
02:42बहुत सारे लोगों ने काशिपसाज जाइसवाल ने उस समय हिंदू पॉलिटी लिखी इनकुमार सरकार ने हिंदू सश्यालोजी लिखी तो हिंदू शब्द से परहेज स्वाधिनता आंदोलन तक किसी को नहीं था
02:53दुरभाग्य हुआ कि स्वतंतरता के बाद अनेक वर्ष तक हमारे अनेक राजनितिक कारणों से हिंदू शब्द से कुछ लोगों ने अपनी दूरी बना कर रखी और वो समाज जीवन में भी आ गई
03:04पहला तो यह है दूसरा 2014 के बाद जिसकी और आप संकेत कर रहे हैं निश्चित रूप से भारतिय समाज में यह तो हुआ कि हम बहुसंख्यक होना कोई अपराध नहीं है बहुसंख्यक होना हमारे लिए गर्व का विशह भी हो सकता है यदि हम बहुसंख्या में हैं तो किसी
03:34करा एक धर्म है और वह धर्म केवल पुजा पदतिका नहीं है हमारी पहचान है हमारी अस्मिता है तो अस्मिता के रूप में हिंदू को पहचानना प्रारंब हुआ और वह भी केवल धार्मिक विश्वासों तक सीमित नहीं रहा वह हमारे सभी कारियों में अब आने लगा �
04:04अभी वर्गों में ये भाव, ये स्वीकृति, ये मान्यता दिखाई पड़ रही है,
04:09के हम हिंदु है, और वो हिंदु होना इस रूप में निश्चित रूप से राजनितिक वातावरन की अनकूलता का परणाम भी है, वह भी एक अंश है, लेकिन मूल रूप में एक मात्रव है, कारण मुझे नहीं लगता है, जी, धन्यवाद आज तक, संज्यू जी और जैप्र
04:39पढ़ाई बहुत हुई, क्योंकि मैं इंटर करते ही विद्या निवास मिश्र के शिश्वत्यों में आ गया था, सल्स्कृत के और प्राच्य विद्या और तमाम चीजों के प्रकांड विद्वान, वहरारसी के, मैं अपने स्ट्रगल फेस की बात कर सकता हूं, कि जो मैं ले
05:09उज्वल नील मड़ी एक ग्रंथ है, जो उसका भक्ती का सबसे महत्रपूर ग्रंथ माना जाता है, तो मैं विद्या निवासी से पढ़ रहा था, तो मुझसे कोई पूछता था, तो मैं पुरभिया आदमी, जो है मन में, ओ कह दिया तो, बहुत हानक की कह देता था था कि, �
05:39कि बात करते हैं, आप हिंदी की बात करते हैं, आप भारतियता की बात करते हैं, आप परंपरा की बात करते हैं, तो यूर सैफरन, आप दक्षन पन थी हैं, मताब एक बिलकुल डिमाक्रिशन लाइन थी कि, अगर आप आप प्रोग्रेसिव हैं, तो आप इन सब पे मिटी ड
06:09मुझे लगता था कि मैं यही लिख पढ़ सकता हूँ तो मैं करूँगा
06:12लेकिन 14 आते आते जब वो सारी बाते हुई
06:15जिसमें एक बहुत बड़ा योगदान इस राजनिती का भी है
06:19जो एक राश्वादी सोच के साथ आगे बढ़ती है
06:22तो उसमें एक चीज़ जो मुझे बहुत मज़दार लगती है
06:26जिसका जियो पॉलिटिकल सोशो पॉलिटिकल अनलेसिस होनी चाहिए
06:29कि मेरे जैसे तमाम लोग जो किसी से बज़ते नहीं हैं
06:33लडते नहीं हैं कोई बत्तमीजी कर गया सोशल मीडिया पर
06:36तो चुप लगा के इग्नोर करके निकल जाते हैं
06:38ऐसे तमाम सारी आवाजों को एक मंच मिल गया
06:42उनको लगा नहीं भाई ये भी सही है
06:44आप बार बार हमको बताते हो ये चीज़
06:47तो हम भी तो बताएंगे ये मीरा भाई भी कम महान नहीं थी
06:50एक बहुत मज़िदार घटना मेरे साथ घटी
06:53कि जो मैंने लता जी पर किताब लिखी
06:54तो IGNC ने मुझे वहाँ पर एक सोलो लेक्चर
06:57और बच्चों के साथ इंटरेक्शन के लिए बुलाया
06:59तमाम सारे इस उनिवर्स्टीज के बच्चे थे
07:02नाम नहीं लूँगा किसी पर्टिकुलर उसका लेकिन
07:04एक लड़की खड़ी हुई है उसने का
07:06सर सब कुछ बच समझ में आ रही है आपकी
07:08लेकिन लता जी तो
07:10मोदी जी का समर्थन करती है
07:12और अटल भिहारी बाजबई का समर्थन करती है
07:14तो मेरे मूँ से अचानक निकल गया
07:16प्रत्युत्तर में
07:19कि वो उनकी अपनी व्यक्तिगत
07:20राजनितिक विचारधारा है वो किसी के साथ
07:23भी खड़ी हो सकती है लोक्तंत का सबसे
07:24सुन्दर मामला है तो उसने
07:26तुरंट तपाक से होके कहा कि और मेरा
07:28सारा फोकेस था कि कितनी बड़ी वो
07:30गाईका है कैसे उनका संगर्श
07:32और कैसे वो इतनी बड़ी पाशव गाईका
07:34भारत की आवाज बनी
07:35उन्होंने उसने कहा कि सर सब ठीक है
07:38लेकिन है तो दक्षण पंती
07:40तो मुझे गुस्सा आया और मैंने मन से कहा
07:42कि यह किसने लिखा है
07:44कि महानता सिर्व वामपंत की चेरी है
07:47दक्षण पंती होना
07:49कहीं से कम बहतर होना है
07:51या कम अच्छा वनुष्य होना है
07:52तो यह तो कोई बात नहीं होती है
07:54कि आप वामपंती है कि दक्षण पंती है
07:56कि आप अच्चे है कि बुरे है
07:57तो जो बात है वो यह है कि वो आवाजें जो कुछ पढ़ती थी, लिखती थी, परंपरा, ज्यान, संस्कृती, प्राच्च विद्या, स्कॉलर्शिप और भारतिय धंग से करती थी, वो चुप रहती थी, वो धकी चुपी थी, उनको एक एक आवाज मिल गई, दिली के बड़
08:27राजनीती करण करके उसको जनरलाइज किया जाए, मैं इसके पक्ष में नहीं हूँ, तो जो सर ने कहा कि भारतियता, धर्म या संस्कृती, और जैसे वो दो तरफ चलता है मामला, कि एक जो अतिरेक का दूसरे अतिरेक के साथ काउंटर किया जाता, वो तो गलत है, हिंदु
08:57से तालुक रखते हैं, हर धर्म का साममान है भाई, मुझे लोग बहुत कहते हैं कि आपने साथ राम मदिर के लिए काम किया, आपने ये लिखा, आप तो अजोध्या की बात करते हैं, तो मैंने का मेरी किताब आपने कोई नहीं पढ़ी है, क्योंकि अगर आप पढ़े होते
09:27नहीं थे, तो उन्होंने अनन्त विजय से फोन करके कहा, कि ये बर्खुरदार कौने भाई, इन्होंने तो इतना बढ़िया इसलाम ता कल्चर डिपिक्ट कर दिया, जो हमें, तो उन्होंने कहा, ये उमारे मित्र हैं, इन्होंने आप से मिलाएंगे, तो आप पढ़ते लि
09:57अगर मुझे शिव अभिशेक करने में, आपको कोई अधिकार नहीं करना, कि साहब ये तो आपके फैशन को सूट नहीं करता, आपको सूट नहीं करता हो, मुझे करता है, प्रोफेसर संजीव कुमार सर्मा जी, यतिन्रजी ने आपकी बात को बहुत ही सुंदर डंग से अ�
10:27राजनिती विज्ञानी है, राजनितिक समाज सास्त्र में आपकी परियाप्त गती है, पिछले चार दसकों से और उससे भी अधिक, मैं कह सकता हूं कि पांच दसकों से जो राजनिती विज्ञान के तन्तु हैं, जो हर बदलाव को उस दृष्टि से विज्ञानी कसोटी प
10:57नरेंद्र मोदी जी की अगवाई में जो सरकारवनी भारत में, उसके बाद जो बदलाव हुआ है, हिंदू गर्वबोध जो हुआ है और जो समाज के हर अस्तर पर दिखता है, आप यात्राएं कर रहे हूं, घरों पर के सरीया जंडा दिखते हैं, कोई पर्वते ओहर होता ह
11:27गाडियों पर जंडे भी दिखते हैं, जो पहले नहीं दिखते थे, अगर मैं गलत हूंगा तो आप संसोधित कर सकते हैं, पहले जो बातें केवल धर्म विशेषग्यों तक सिमित्थी या जो कटर धार्मिक लोग हैं, उन तक जो बातें सिमित्थी जैसे मेरी मा कर्म कांड
11:57उलेख भी करते हैं और उत्सा के साथ इसको अट्सों के रूप में मनाते भी, मैं यह फ्रसमेरा यह है कि इस बदलाव को बतोर राजनीती सास्त्री, राजनीती विज्यानी आप किस रूप में देखते हैं, और क्या यह बदलाव अस्थाई है, यह बदलते सियासि, परिव
12:27यह तो निश्चित है अब यह बद्लाव स्थाई है यह केवल राजनीती कारणों से नहीं हुआ इस लिए ही स्थाई भी है राजनीती ने इसकी सहयता की है जैसा इत LIKE बात यह है कि ऐसे समझने की आवश्कता है
12:44कि अब से पहले यह 2014 से पहले हिंदु शब्द के साथ हमने क्या जोड़ा हुआ था
12:51सामाने ते जोड़ा हुआ था कि यदि हम हिंदु कहेंगे तो उससे कुछ खत्रे हैं
12:56एक वर्ग नालाज हो जाएगा, चिंतित हो जाएगा, परिशान हो जाएगा, इसलिए उनको परिशान ना करना है, इसलिए हमें अपने हिंदू पहचान को बोलना नहीं है, दूसरा हिंदु शब्द कहते ही हमें लगेगा, जैसा इनोंने काहा कि उसे संप्रदाइक बनना जा
13:26परिशन से जोड़ना है और अपराधी के रूप में खड़े कर देना है एक तीसरी बात ये कि हिंदू होने का अर्थ पिछड़ा होना प्रगती विरोधी होना आदुनिक्ता विरोधी होना स्त्री विरोधी होना समाज में भेदभाव करना ऐसी विमर्ष बना दिया गया
13:422014 के बाद एक साहस भी खड़ा हुआ उससे पहले साहस भी नहीं हो पाता इसलिए साहस भी बना कि हम अपनी पहचान को इस समिता को बता सकते हैं एक तो यह आया दूसरा उसे राजनितिक प्रश्रे भी मिला ही निश्चित रूप से राजनितिक प्रश्रे भी मिला है इसमें को
14:12तो अब समयाज के बहुत सारे वर्ग को विशिश नूप से युवा वर्ग को ये विश्वास होने लगा धीरे-धीरे
14:17कि आधुनिकता और हिंदुत्वका कोई विरोध नहीं है एक तो आपस में
14:21हिंदु होते हुए आधुनिक भी रहा जा सकता और आधुनिक होते हुए अपनी हिंदु असमिता को बताया जा सकता है
14:26एक बात दूसरी बात ये निश्चित रूप से हुई कि हमें अपनी पहचान को बताने में डर क्यों लगे
14:33ये भी समझ में आने लगा जो आज का हमारा वर्ग है युवा वर्ग जिसे जैन जी भी है वो अपनी सारी आधुनिक्ता के साथ अपने इंदोत्यों के साथ चल रहे हैं आप देखिए इस बार के नए वर्ष के जो अग्रेजी नव वर्ष है उसके समय सारे अयुध्या में व
15:03उपासना पद्धर स्थानों पर उन सब पर जाने में लोगों में अभी अलगा कि हम जाएंगे और भी बताएंगे भी यह भाव आने लगा है इसलिए सामाजी कुरूप से मैं इसा समझता हूं कि यह स्थाई है यह चलेगा आगे बढ़ेगा और राजनितिक सामाजीक संस्
15:33हाँ तब दक्षिनपंद को गाली देने के लिए भी हम इन तो इरोधी होगे बहुत सारे लोग इसलिए भी अब दक्षिनपंदी ना भी हो किसी भी राजनितिक दल में विश्वास रखते हो कोई भी प्रकार का काम करते हो आप रते किस्थान में देखेंगे संख्या बढ�
16:03धार्मिक परियाठन कहते हैं उसके लिए भी कारक बन गए तो उसका भी लाभ मिला है हमको और एक और बात जिसकी और भी अतीन जी ने संकेत किया मैं ऐसा परिहास में कहता हूं कि दोजार चौदे से पहले कोई अंग्रेजी बोलता था तो ही विद्वान माना जाता था अक
16:33परिदार बात जुस्तर ने कहीं इस तरफ इशारा करूंगा कि हमारे खात करके हाला कि एक खतरनाक बात करूंगा कि फेस्बुक पे और इस्टाग्राम पे गालिया पढ़ने लगेंगी तुरत
16:43साहित की दुनिया में मैं कहूं कि जैसे बड़े विद्वान है और हमें पता है कि ये प्रगतिशील है ये वामपंती है इन्होंने बहुत अच्छी किताबे लिखी हैं उनके काम से उनके विचार से प्रभावित है गलती से उनकी कोई फोटो अगर मीडिया पर पड़ी है �
17:13तो गरबड है क्योंकि आपने तो कलावा बाल लिया और आप तो व्यक्तिशील थे एक किस सम्विधान में लिखा है कि विचारों से प्रगतिशील होने वाला व्यक्ति गायत्री मंतर नहीं पड़ सकता हवन नहीं कर सकता मंदिर में दरशन नहीं कर सकता तो ये इस इस भे�
17:43उसको भी पढ़ेगी गूगल करेगी मंठ मंदरों में जाएगी और जाकर के क्लब और पब में पाटी भी करेगी उसको कोई प्राब्लम नहीं है ये जो बीच में फसी हुई पीढ़ी है जैसे मध्यवर्ग फसता है वैसे जो बीच की जनरेशन है उसी को नहीं समझ में आ �
18:13सकते हैं श्रामराग सेवा की मैंने राम मंदिर युद्या में 45 दिन चली उसमें साड़े 400 कलाकार होने स्कुल जोड़ करके अपना सेवा दी और 1500 कलाकार में कलाकार थे एक पैसा ट्रस्ट ने नहीं दिया कि ये क्राउट फंड़िट मामला है तो हम सेवा की भाव से आपको
18:43अपर में नहीं रहते या अपने प्रदेश के गवर्मेंट में बहुत इंटरेस्ट नहीं लेते और हमेशा नो टॉक डिसेंट करते हैं वो सब भक्ति भाव से आये और सबने परफॉर्मेंस दी और जब मैंने उनसे पूछा कि आप आए बोले ये तो हमारा धर्म है ये तो
19:13आप राम मंदिर के लिए जब बुलाएंगे तो हम परफॉर्म करने आएंगे अब चिलाते रहो बड़ी-बड़ी बात करते रहो किसी को उसके जड़ों से काट कर आप नहीं देख सकते प्रगतिशील भी भूल जाते हैं कि यही डॉक्टर राम मनोहल लोईया है जो राम श
19:43यह कहां से पिछड़े पन की निशानी हो गया 20 साल पहले भी मैं प्रगति मैदान में जाता था पुस्तक मेले में तो शमा करिएगा किसी हिंदी अंग्रेजी के प्रकाशक के भीर नहीं लगती थी भीर गीता अप्रेस में लगती थी भीर बेंकटेश्वर प्रेस में लगत
20:13प्रिष्टा है महाभारत दीता सब बच्चे खरीते हैं पढ़ते हैं महाबाप चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ें समझें अपने भारत की कम से कम जो ज्यान परंपरा है उसको समझें ज्यान परंपरा को समझना कहां पिछडापन हो गया पिछडापन तो यह है कि हम कुछ
20:43जीवन में ही अपने ही माबाप को खारिच करना है
20:47जितने बढ़के बढ़के लोग हैं
20:50और जो धर्म और आस्था और विश्वास की बात करते हैं
20:54उसको गाली देते हैं
20:56वो जो राजा के पता करें कि उनके अम्मा पे उनका असर हुआ है
20:58वो राम चित्मानस पूजा करब छोड़ दीने कि सुबा तुलसी चोरम पानी डालब छोड़ दी
21:03यह तुग्या उसाली ग्राम के बटिया पे चंदल लंगाना छोड़ दी
21:06आप नहीं कर सकते हैं
21:09आप उनकी विचारधारा उनके आस्था को नहीं बदल सकते हैं
21:12और इसके साथ यह कहीं नहीं है कि आप हिंदुत्यों के प्रति समर्पित व्यक्ति हैं
21:17तो आप इस्लाम के प्रति आप क्रिश्यानिटी के प्रति आज्यानिजम के प्रति आप अनुदार हैं
21:22वहाँ आप अनुदार होंगे तब आप गलत हिंदुत्यों का प्रतिन दित्तों कर रहे हैं ऐसा मुझे लगता है
21:28यतिन्दर जी ने बहुत अच्छे डंक से अपनी बात कहीं
21:32दो गटनाएं मुझे दिमाग में आपके उत्तर के समय आ रही थी
21:36आप दोनों जब बात कर रहे थे संजीव सर्मा जी और यतिन्दर जी बाराणसी की धरती से उस समझ अब चंदोली हो गया
21:46उस समय बाराणसी था पंडित कमलापती तृपाथी जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे बहुत बड़ा टीका लगाते थे
21:55पंडित जी और सुभ पूजा बिना किये और नौराथ्र में बाकाइदा दुरगा सब्तस्वती का पाठ करती और राजनितिक उठापटक ऐसा नहीं है कि उस जमाने में नहीं होती थी
22:07प्रतिपक्ष में आ चुके थे और उन्होंने एक बार यह प्रस्ण किया कि इतना बड़ा टीका लगाते हैं पंडित जी और बनते हैं अपने को बहुत आधुनिक और पूजा पाठ करते हैं तो इनको सरकार चलानी की फुरसत क्या मेलेगी
22:26मुझे यादे कमलापती जी ने उसका उत्तर दिया कि हमारे परिवार में जिस जमाने में आप लोग मलेच समझते थे मुसल्मानों को अपने घर में रख के हमने संस्कृत की सुख्षा दे थी
22:39मेरी वहें बधेस्याई रहें क्रिषियन हैं दर्म से तो आधुनिक्ता का पाठ था मुझे मत पढ़ाईए मैं टीका लगाता हूं मेरी परंपरा मेरी सभड़ा का हिससा ए मैं पूजा करता हूं क्योंकि मैं आस्था वानूं उससे मेरा कर्म प्रभावित नहीं होता जिस त
23:09से ऐसे व्यक्ति नहीं है जो प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के समर्थक हूं लेकिन उन्होंने बाकाइदा राम मंदिर के लिए जब पर्ची कटवाई तो उस पर्ची की तस्वीर लगाई और एक ऐसे कारेक्रम में वो थे जहां योगी जी उनको सम्मानित नहीं कि भी कर �
23:39जो सोचल मिडिया पर ये जो ट्रोल है और जो ये बार-बार कहता है जो मुझे लगता है कि सायद या तो हताशा का प्रतिक है या उगरता और भाय का प्रतिक है जो भी हो क्या कारण है मैं नहीं जानता एक बड़ा वर्ग है जो लगातार इन बातों को अलग अर्थों में �
24:09आपने भी कहा और आप दोनों के अनुभो लगभग समान हैं हम सभी एक ही प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं और यह चर्चा इसलिए हो रही है कि हमारी युवा पीड़ी यह समझ सके कि जिसको हम हिंदू काते हैं दरसल वह परंपरा वह विरासत कितनी महान रही है और कैसे कैसे क
24:39दाइत तो बोध है युवाओं के बीच में उन्होंने स्विकार तो लिया युद्या का जो बदलाव है यह तिंद्र जी का जब आपके बाद जब नंबर आएगा तो मैं चाहूंगा कि वो बचपन से जो देखते रहें राम मंदिर निर्मान की प्रक्रिया की बात मैं नही
25:09का गवरो तो कभी बिसमृत नहीं हुआ लेकि और वो कभी किसी की शासित भी नहीं रहें लेकिन आयुद्या में जो मानस में बदलाव हुआ है युद्या को लेकर मैं उन पर जाओंगा मैं आप से मेरा ये प्रस्न है आप दोनों इस प्रस्न को देखिए गाई सुत्तर को क
25:39प्रदर्शन तक सिमित है या उनके अंदर उसी तरह से जा रहा है जिस तरह से पंडित कमलापती त्रिपाथी या गंगोर वामपंथी जिनों ने और सहिस्कृता का नाम लेकर पुरस्कार वापसी के जो करता धरता थे उद्वय प्रकास जो वामपंथी होते हुए भी ये क
26:09जहराई को समझ पा रही है कि मैं एक छोटी पुरानी कथा सुनाता हूं एक बड़े वामपंथी साहित्यकार थे वो एक विश्व विद्याले में आचारी भी थे उनके बिटिया का विवा हुआ तो उन्होंने कार्ड चबवाया और कार्ड में बाहर गनेज जी चपे हुए
26:39अपनी पिटिया के विवा में रिस्क नहीं ले सकता मैं है क्या कि दो महत्वपूर्ण तत्व मुझे लगते हैं एक तो यतीन जी उस पर अधिक अधिकार से बोल सकते हैं लेकिन राममंदिर के निर्मान के बाद ये जो हजारों वर्षों का आक्रमन का और पद्दलित होने
27:092014 का जहां पुलिक कर रहें मैं फिर से एक बार वहीं चलू सामाजनी रूप से सोशल मीडिया में अख़पारों में टी वी चैनल्स में किताबों में जर्नल्स में मैगजीन्स में भाषनों में सेमिनारों में एक पक्ष बिल्कुल अनुपस्थित था उसका स्वर सुना नही
27:39उनके भी देखने वाले बहुत बड़ी मात्रा में हो गए हैं
27:48जो हिंदु शास्टर परमपरा को सामने ला रहे हैं।
27:52उसके भी हो रहे हैं।
27:53जो देश भरके बिहदा, जो बिहदीश्वर मंदिर से लेकर
28:00उधारने जो उनको प्रस्तुत कर रहे हैं उनके भी हैं।
28:02तो सोशल मीडिया में ये पक्ष भी अब विस्तार से शक्तिक से और साहस के साथ आ रहा है, दूसरा पक्ष ये है, और तीसरा पक्ष मुझे लगता है,
28:10कि दीरे दीरे इस सब से सोशल मीडिया अपने सारी नकारात्मक्ताओं के साथ कम से कम सूचना की व्यापती को बढ़ाता तो ही, उसे बहुत मात्रा में बढ़ाता है, जब वो बढ़ा रहा है तो वो ऐसा भी बहुत लोगों तक पहुच रहा है, जो अब तक जाना नहीं गया
28:40का कंसेप्ट है आज के समय में, वईग्यानिकता, उसके विरोध में भी हम नहीं थे, ये बात आने से अपनी हिंदू पहचान को लोग ला रहे हैं, मुझे लगता है, कि ये अपने आपने एक सकारात्मक्त संकेत है इस बात को समझने का, कि भारत का जो सामान नागरिक है, �
29:10को शक्ती मिल रही है, तो कम से कम जो बहु संक्या है, उसके मन में अच्छे विचार अपने बारे में आ रहे हैं, और ये मुझे लगता है, कि निश्चित रूप से अच्छा संकेत है, मैं आयोध्या के अनुबह से बात करूंगा, पहला तो ये, कि जैसे आपने कहा कि,
29:24दोहजार चौदा से पहले तो कोई नरेंद्र मोदी जी का प्रभाव नहीं था, हिंदुत को ले करके भारतिय समाज पर, या जो सो कॉल्ड थियोरी निगेटिव ढंग से पचारित की जाती है, मैं तो वहीं जन्मा, वहीं पला बढ़ा, मैंने बाबरी मस्जिद भी देखी
29:54कमीटी के प्लेंटिफ, आपके हाशिमनसारी और दूसरा रामजनभूमी की तरफ से रामचंदरदास परमहंस जी मुकदमा लड़ने जाते थे, तो फैजाबाद के कचेरी में एक ही रिक्षे पर वैट के जाते थे, मित्र थे, और किसी आयोध्यावासी, किसी हिंदू, किस
30:24चाचा करके ही वो समाध्यत रहे, हर हिंदू घर में पूजे गए, हर जगा बुलाए गए, इस से बड़ा सेकुलरिटी का उधारान आयोध्या क्या देगा, आपको पूरी आयोध्या जान रही है कि वो वेक्ति है, जो राममंद्र नहीं बनने देना चाहता, और वो चाहता
30:54नहीं थी लोगों के परती, एक दूसरे के परती, आदर का भाव नहीं था, आज जब मंद्र बन रहा है, कोई भी चीज होती है, सबसे पहले उनी के बेटे इकबाल अंसारी आते हैं फूल बरसाने के लिए, ये बहुतों को नहीं पता होगा, क्योंकि ये खुबसूरत और �
31:24तजिया निकलता ऐसाब होता है, तो सारे हिंदु दुकानदार बाहर निकलके पानी पिलाते हैं, मीठा किलाते हैं, या आस तखाही मैं ने सिकुलर सरकार ने, हम तो उसी सैकूलर्टी में पैदा हुए देख रहे हैं, मेरे को सौभा के दिया गया कि मैं राम मंदर ट्रस्�
31:54हो चाहे वो टिफेंथलर हो
31:56चाहे वो आपका हजबेकर हो
31:58पिंसेप हो कोई हो
32:00किसी ने उसको मस्जिद के तरह
32:02नहीं कहा उसने कहा कि there was a
32:04Hindu मंदिर
32:06तो
32:07ये कब कब ठीओरी बदल गई
32:10ये तो आप खंगा लिएगा तो सारा दूद का दूद
32:12पानी का पानी मिलेगा
32:13तो लडाने का खेल अलग है
32:16राजनीती अलग है
32:17अगर यूवा बच्चे बैठे हैं
32:19पड़ा लिख रहे हैं तो उससे बस यही अपील करओंगा
32:21अपने अनबहों से राजनीती का मोहरा
32:23न बनिए राजनी तिक टूल मत
32:25बनिए अपने दिल और दिमाग से
32:27खुल कर सब चीज पढ़िए
32:29सारे पक्षों को जान लिजे
32:30आप स्वतन्त हैं उसके बाद नास्तिक रहने के लिए
32:33आस्तिक होने के लिए
32:35कुछ भी होने के लिए
32:36लेकिन सुनी सुनाई बातों पर कि कवा कान ले गया
32:39तो पीछे दौड़े चले जाओ तो फिर काहे को
32:42पढ़े लिखे हो अपने बाबाब का पैसा बरबाद की हो
32:44जुकेशन लिए हो पढ़ो
32:46समझो और उसके बाद आपको लगता है
32:48कि नहीं साब हम तो
32:50नास्तिक बन के ठीक हैं तो
32:52सर्वथा उचित निर्णे होगा
32:53लेकिन अगर आपकी मानिता बदलती है
32:56आपको लगता है कि नहीं
32:57हम तो भ्रमित थे हमें तो इतिहास ठीक से पता नहीं था
33:00हम इस पक्ष को भी समझेंगे
33:02तो एक अच्छी बात है
33:04गांधी जी जिसको
33:06जिसके उपर तो कोई question नहीं है
33:08हमारे देश का सबसे बड़ा
33:10हिंसा का सबसे बड़ा
33:12जिसे कहें मनुशत्यो का प्रती
33:14उनकी आउधाना में भी तो रामराज्य था
33:17तो अगर राम होना
33:19और रामराज्य के आउधाना
33:20non-secular होती
33:22तो गांधी जी उसको क्यों adopt करते
33:24तो जब पढ़ने लिखने पे आएंगे
33:26जब तरकों से मिलेंगे
33:28तो आपके बहुत सारे भ्रह्म और जाले साफ होंगे
33:31कबसे कब मेरे भ्रह्म और जाले साफ है
33:33और मुझे अपने किसी मुसलिम मित्र को लेकर कि
33:35कोई दुचित्ता पर नहीं है
33:36मैंने आयोध्या में एक छोटा सा समारोग शुड़ो किया
33:39टाइमलेस आयोध्या
33:40तो मैंने उसकी नजीर बनाई कि मैं और मेरा
33:43एक मुसलिम मित्र है मिनाल हसन हम दोनों
33:45मिलके करेंगे कि पूरे देश को ये संदेश
33:47जाए कि एक हिंदू एक मुसल्मान मिलके समारोग कर रहे हम तो कोई दूसर
33:51पंडित जी नहीं पकड़े गए क्योंकि हमको लगा कि ये राइट टाइम है
33:55उद्ध्या से मैसेज देने का और वो बहुत ही शांदार व्यक्तित्यू का मालिक है
33:59जिसने मिनाल ने किया
34:01तो कहने का मतलब यह है कि जब जीवन में अंगिकार करेंगे
34:04तो आप बड़े बनेंगे तो रामकार्थ भी समझ में आएगा
34:08तो फिर आपको रामायन भी समझ में आएगी तो गांधी जी भी समझ में आएगे
34:11और जब आप भागेंगे और मीडिया का ट्राइल होने लगेगा आपके साथ और लाइक में फसेंगे, फालोवर में फसेंगे, किसी के चेले बनेंगे, किसी के गले का पट्टा पहन लेंगे, तो फिर गरबढ़ होगा
34:22बहुत बहुत धन्यवाद यतिनर जी और संजी कुमार सर्मा जी, मैं समझता हूँ कि गरव सिखा हो हम हिंदू हैं, कि पीछे जो भाव है और जिसकी बड़ी सुन्दर ब्याक्या आंतता हुई कि आप स्वैंग को पहचानिये, कहीं कोई ब्यतिक्रम नहीं है, आप प्रगत्स
34:52हैं, उसका मान करिए, बहुत बहुत आभार, यह इतना महतुपूर्ण बहुत बहुत धन्यवाद ये प्रकाश जी, बस में एक लाइन कहूंगा, कि बस इस बात को ध्यान में रखिए, कि अगर आप आस्थावान हैं, धार्मिक हैं, इसका कता ही मतलब नहीं हैं, कि आप आ�
Comments

Recommended