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  • 2 weeks ago
ओडिशा के खोरदा के 87 साल के रिटायर्ड इंजीनियर अक्षय पटनायक ने करीब करीब विलुप्त हो चुके इन सामान से इंजीनियरिंग म्यूजियम तैयार किया है. उनके म्यूजियम में एक तरफ पुराने रेडियो की कतारें हैं तो दूसरी तरफ बीते जमाने के टेलीफोन. यहां जापान और फ्रांस की बनी हुई हारमोनियम भी है तो किरोसिन तेल से चलने वाली रेफ्रिजरेटर भी. एक जगह 35 कैटेगरी के 30 हजार से भी ज्यादा सामान मिल जाएंगे. 70 के दशक में अक्षय पटनायक तत्कालीन मद्रास म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में काम करते थे. तभी से वो इन दुर्लभ चीजों को इकट्ठा कर उन्हें संरक्षित कर रहे हैं.  अक्षय पटनायक के इंजीनियरिंग म्यूजियम में कई तरह के घड़े, पोस्टकार्ड, डाक टिकट, विदेशों के पुराने नोट और सिक्के भी मौजूद हैं. इस म्यूजियम पर वो अब तक एक करोड़ से ज्यादा खर्च कर चुके हैं.. इसके लिए 20 एकड़ पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी. इस म्यूजियम की देखभाल उन्हें खुद करनी पड़ती है, क्योंकि उन्हें सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलती है.  इस इंजीनियरिंग म्यूजियम का नाम घनश्याम पिंडिकी श्रीचंदन कलेक्शन है और बोलगढ़ ब्लॉक के सामने कम्युनिटी सेंटर में इसे चलाया जा रहा है. स्थानीय लोग अक्षय पटनायक के काम की तारीफ कर रहे हैं और सरकारी मदद की जरूरत बता रहे हैं.  

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00:19पुराने ग्रामोफोन, पुराने तीवी, ओल्ड मॉडल के कैमरे, टाइपिंग मेशीन, 35 कटेगरी के 30,000 से भी ज्यादा सामान
00:29ओरिशा के खोरदा के 87 साल के रिटाइड इंजीनियर अक्षय पतनायक ने करीब करीब बिलप्त हो चुके इन सामान से
00:38इंजीनियरिंग म्यूजियम तयार किया है
00:40सत्तर के दशक में अक्षय पतनायक ततकालिन मद्रास मिनिशिपल कॉर्परेशन में काम करते थे
00:47तब ही से वे इन दोड़लब चीजों को इकठा कर उन्हें संडक्षित कर रहे है
00:55ओडिसा में इंजीनियरिंग म्यूजियम बनाना मेरा लच्छ था
00:58मुझे गर्व है कि मैंने इसे इस्ठापित किया
01:00जब मैं मद्रास में रह रहा था तब मैंने दच्छिन भारत के कई स्थानों का दोरा गी
01:05तब ही मैंने सीखा कि नीजी मूजियम को कैसे चलाया जाता है
01:09फिर मेरे दिमाग में मूजियम बनाने का आईडिया है
01:13अक्षे पतनायक के इंजीनियरिंग मूजियम में कई तरह के घड़े, पोस्ट कार्ड, डाक टेकट, विदेशी सामान, विदेशों के पुराने नोट
01:23और सिक्के भी मौजूद है
01:25इस मूजियम में वो अब तक एक कडोर से भी ज्यादा रुपे खर्च कर चुके हैं
01:31इसके लिए बीश एकर पुष्टेनी जमीन भी बेचनी पड़ी
01:34इस मीजियम की देखवाल उन्हें खुद करनी पड़ती है
01:38क्योंकि उन्हें सरकार की ओर चे कोई मदद नहीं मिलती
01:57अगर सरकार मुझे घर मुहया कराती है
02:00तो मैं जमीन बेचने और इस मूजियम को आगे भी चलाने के लिए तैयार हूँ
02:05इस इंजिनियरिंग मूजियम का नाम घंस्याम पिंड की स्रीचंदन कलेक्शन है
02:11और इसे बोलगर बलॉक के सामने कम्यूनिटी सेंटर में चलाय जा रहा है
02:17अस्थानिये लोग अक्षय पतनायक के काम की तारीफ कर रहे हैं
02:20और सरकारी मदद की जरुरत बता रहे हैं
02:25अच्छय पतनायक अपने पैसे से इस मूजियम पर खर्च कर रहे हैं
02:32यहां करोडों के सामान हैं लिहाजा फरकार को मदद करनी चाहिए
02:4187 साल की उम्र में भी अक्षय पतनायक दूर दूर तक सफर करते हैं
02:46और जहां कहीं पुराना सामान मिलता है वो यहां लाकर रखते हैं
02:51लेकिन बिना मदद यह मूजियम कितने दिनों तक चलेगा यह कहना मुश्किल है
02:58ETV भारत के लिए और इशा के खोरदा से गोबिंद चंदर पांडा की रिपोर्ट
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