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00:00भारत शायद इकलोता देश होगा जिसने एक पूरा शहर बसा दिया है कोचिंग के नाम पर
00:06वहाँ और कुछ नहीं होता है कोचिंग कोचिंग कोचिंग
00:10और हम जानते हैं कि आये दिन वहाँ आत्मत्याई होती रहती है
00:13मैंने आइटी में देखा है कि स्टूडेंट्स काउंसलिंग के लिए जाते हैं
00:18और आइटी भी काफी पैसे स्पेंड कर रहे हैं काउंसलिंग सर्वेसिस के लिए
00:22मतलब स्टूडेंट को कैसे अप्रोच करना चीए जब उनको मेंडल स्टेस होता है
00:27यहां इंट्रेंस एक्जाम्स की तैयारी लोग करते नहीं उनसे करवाई जाती है
00:32भीतर आम आदमी के आज भी घोर दहशत बैठी हुई है
00:37कि मेरा क्या होगा कहीं मैं बिरोजगार तो नहीं मरूँगा भूखा तो नहीं मरूँगा
00:42हम अगर किसी ने बता दिया कि IIT आ करके आपका बच्चा अब बेरोजगार नहीं मरेगा
00:47तो हम उसकी जान के पीछे पढ़ जाएंगे कि घुशेड़ो इसको IIT में
00:51अगर यहां घुश गया आपका लड़का तो नौकरी नहीं पक्की है
00:55बढ़ियां वाली कंपनी में नौकरी लगेगी और यह भी हो सकता है कि
00:58विदेशी किसी उनिवर्सिटी में उसको दाखिला मिल जाए IIT के नाम से
01:02चानबूच के लड़का बोल रहा हूँ लड़की नहीं भिछते थे
01:04बहुत भारी बूट के तले रौंदा गया यह राश्ट्र और वही भूख वही हार वही चोट और उसकी पीला से अभी भी उबर नहीं पारा
01:34नमस्ते आचारी जी
01:58I am a second year PhD student here so many IITs में देखा है कि students
02:06counselling के लिए जाते हैं और IIT भी काफी पैसे spend कर रहे है
02:10counselling services के लिए और student को short term में relief भी मिलता है
02:14short term में relief हां mental stress कम होता है but my question is what is the
02:20like how should student को कैसे approach करना चाहिए जब उनको mental stress होता है
02:25and institute किस वे से like long term solution की तरफ student को motivate कर सते है
02:32देखिये सबसे पहले तो जो पूरा सवाल है ना उसमें student शब्द आया तीन बार चार बार आया
02:52student है student को counselling की जरूरत है student जाता है
02:59इससे हमें ये ब्रहम हो जाता है कि समस्या student में इस्थित है
03:08कि दस स्टूडेंट है उसमें से एक या दो को ही इतना stress हो रहा है कि उनने
03:14काउंसलिंग की जरूरत पड़ रही है तो ये जो एक दो है यही अपवाद है तो दोश इनहीं में होगा
03:21इसा है नहीं शायद और आप जैसा कह रही है student पर ही ध्यान दोगे तो
03:35relief तो दे पाओगे आपने relief कहा था student पर ध्यान दोगे तो relief तो दे पाओगे
03:44समाधान नहीं दे पाओगे क्योंकि समस्या सचमुच उस स्टूडेंट के अंदर नहीं है जो में गेट से प्रवेश करता है
03:55किसी डिपार्टमेंट में एड्मिशन ले करके उसमें नहीं है हम ऐसा प्रदर्शित करना चाहते हैं जैसे कि
04:05कि जिस दिन वो यहां आया बीटेक या किसी भीने प्रोग्राम में उस दिन समस्या शुरू होती है क्योंकि स्टूडेंट तो उसी दिन बनता है जिस दिन केंपस में आ जाता है
04:15नहीं ऐसे नहीं है दो व्यवस्थाएं है दो व्यवस्थाएं है और स्टूडेंट उन दोनों व्यवस्थाओं का उत्पाद भी है शिकार भी है
04:32एक व्यवस्था है कैंपस गेट से बाहर वाली और एक व्यवस्था है कैंपस के अंदर वाली
04:42स्टूडेंट का वास्ता उन दोनों से है और यह दोनों व्यवस्थाएं आपस में प्रतिक्रिया करके
04:54student को पैदा कर रही है
04:57यह दोनों ना हो तो आप जिसको student कहते है उस तरह की कोई चीज होगी नहीं
05:04मैं यह नहीं कह रहागी श्टूडलन का शरीर पैदा करती है
05:07पर भीतर से जो student है, मानसिक रूप से
05:11जिसको हम student कहते हैं
05:14वो पैदा होता है
05:15बाहरी विवस्था और भीतरी विवस्था
05:18के
05:20dialectical engagement से
05:22कुछ बाहर वाली विवस्था है
05:24कुछ भीतर विवस्था है ये दोनों आपस में
05:26रगडा-रगडी करते हैं
05:27तो उससे वो चीज तयार होती है जिसको हम कहते हैं
05:30the mind of the student
05:32the mind of the student
05:33कैसे तयार होता है
05:35तो
05:38हम
05:40बड़ी गरीबी से गुजरे
05:43पिछले
05:45दो-ड़ाईसो सालों में
05:47ठीक है
05:48उच्च वर्गिय होना तो छोड़िये
05:52मध्धम वर्गिय होना भी
05:53हमारे लिए सपना हो गया
05:55अब जाकर के भारत में
05:57एक
05:59बड़ी
06:02मिडल क्लास खड़ी हुई है
06:03नहीं तो
06:05मिडल क्लास भी बड़ी छोटी हुआ करती थी
06:09आज से तीस चालिस साल पहले
06:11तो कुल मिला करके
06:15जिन्दगी में यही बहुत बड़ी बात हो गई
06:17कि किसी तरह से खाना पीना
06:19रोटी कपड़ा चलता रहे
06:20यह भी हम कैंपस के अंदर की बात नहीं कर रहे हैं
06:25हम कैंपस के
06:26बहार की बात कर रहे हैं
06:29गरीब है देश
06:34बहुत गरीब है देश
06:36और उसमें स्वतंत्रता के ठीक बाद
06:42सरकार तै करती है
06:46विशेशकर उसमें प्रधान मंत्री हैं नहरू
06:49कि हमें अंतर राष्ट्रिये इस्तर के
06:54उच्छ शिक्षा के संस्थान खड़े करने हैं
06:57इनको मंदिर कहा करते हैं
07:01मंदिर
07:02अब यह जो आपने संस्थान खड़े कर दिये
07:07यह द्वीप हैं
07:09यह आईलेंड्स हैं
07:11किस चीज के?
07:13क्वालिटी के
07:14और द्वार हैं
07:18किस चीज के?
07:20प्रॉस्पेरिटी के
07:21क्वालिटी के द्वीप हैं
07:25छुटे छुटे छुटे छुटे छुटे
07:26और प्रॉस्पेरिटी के द्वार है
07:29वरना देश में कहीं भी
07:33कहां कुछ बहुत उच गुणवत्ता का है
07:37कुछ भी नहीं
07:37हमारी कोई भी विवस्था
07:39आर्थेक, सामाजेक
07:42राजनेतेक
07:44कुछ भी ऐसा नहीं है
07:46जिसको हम कह सके हाई क्लास, हाई कॉलिटी
07:49इंटरनेशनल स्टेंडर्ड्स, कुछ नहीं ऐसा
07:53अब पूरा भारत
07:58कैसे देखेगा इंद्वीपों को
08:01दो भाव रहेंगे
08:07पहला विस्मय
08:10और दूसरा लोब
08:12विस्मय किस बात का
08:14ऐसी टेकनोलोजी पढ़ाई जा रही है
08:17जो पूरे देश में क्या
08:19पूरे एशिया में कहीं नहीं है
08:21जब शुरुवाती दौर था
08:25आईटी इसका
08:26तो एशिया में इनके जैसे कोई संस्थान नहीं थे
08:31अब तो चीन, जापान, कोरिया
08:33हैं, सिंगापूर भी है
08:35पर उस समय पर
08:38वो भी पिषड़े हुए थे, क्योंकि जब हमें आजादी मिली
08:40लगभग तभी वो सब भी आजाद हुए थे
08:41और उच्च शिक्षा पर
08:44भारत ने जितना महत तो दिया
08:46उतना उन देशों नहीं दिया
08:48और
08:49प्राथमिक शिक्षा पर
08:51जितना महत उनने दिया
08:53भारत ने ज़रा भी नहीं दिया
08:55ये दो अलग-अलग दिशाएं थी
08:58भारत ने कहा कि हमें
09:01हेवी मशीनरी
09:03वाले इंडस्ट्रीज चाहिए
09:06और उन हेवी मशीन्स को
09:08डिजाइन और ऑपरेट करने वाले
09:09इंजीनियर और मैनेजर चाहिए
09:11तो भारत ने जो इनीशियल इंडस्ट्री लगाई
09:15वो हेवी मशीन्स की थी
09:17बड़े-बड़े बांध बनाए
09:18बड़ी PSU's बनाई
09:20और उन PSU's को
09:23कौलिफाइड परसेनेल मिल सकें
09:25इसके लिए IAT बनाए
09:27IAC बनाया, IAM बनाया
09:29और भी कई संस्थान हैं
09:31जो उसी समय लगभग बनाए गए
09:32वो विजन था
09:36विजन तो ठीक है
09:38प्रात्मिक शिक्षा पर जोर दिया नहीं गया
09:41देश निन्यानवे प्रशमलाव नौ प्रतिशत बदहाल का बदहाल रहा
09:46देखिए आप आज के स्टूडेंट की बात कर रहे हो
09:49कहानी कितनी पीछे देशूरू हो रही है
09:50उतना पीछे नहीं जाएंगे तो आज की समस्या भी नहीं सुल जावाएंगे
09:53तो जो बाहर के लोग हैं
09:59वो जब एक IAT की तरफ देख रहे हैं
10:01और तब इतनी IAT नहीं होती थे
10:02आज 23 IAT हैं शुरुवाती दौरें पहले
10:05दो फिर चार फिर पांच बस इतनी था
10:07अभी 30 साल पहले तक भी इतनी था
10:11चार पांच IAT बस
10:12वो देख रहे हैं तो एक तो विसमे हो रहा है
10:17कि बाप रे बाप
10:19यह high quality जहां कुछ भी high quality
10:23नहीं है railway reservation तक नहीं होता जहां
10:25वहां computer science पढ़ाया जा रहा है उसी देश में
10:29जहां पर एक ये काम
10:31कागस कलम घिस करके और
10:33कतार लगा करके होता है
10:35वहां systems पढ़ाये जा रहे हैं
10:38बाप रे बाप तो यह तो विसमे की बात हो गई
10:40और विसमें से ज्यादा बड़ा गया था लालच
10:42क्योंकि एक्सिलेंस के आइलेंड्स थे
10:46और प्रोस्पेरिटी की एंट्रेंस थे
10:49अगर यहां घुस गया आपका लड़का
10:53जानबूच के लड़का बोल रहा हूँ, लड़की नहीं भीचते थे
10:55अगर यहां पर घुस गया आपका लड़का
10:59तो नौकरी नहीं पकी है, बढ़ियां वाली कंपनी में नौकरी लगेगी
11:03और यह भी हो सकता है कि विदेशी नौकरी लग जाए
11:06या कि विदेशी किसी उनिवर्सिटी में उसको दाखिला मिल जाए आइटी के नाम से
11:10इस पूरे में कहीं आपको ग्यान या प्रेम सुनाई दे रहा है
11:17कुछ भी सुनाई दे रहा है क्या
11:19सुनाई दे रहा है, इसमें आपको नैशनल प्राइड दिखाई दे रहा होगा
11:24इसमें आपको ग्रीड दिखाई दे रही होगी
11:28इसमें आपको ओ दिखाई दे रही होगी विसमे
11:32चकेत हो जाना
11:33ये सब दिखाई दे रहा होगा
11:36इसमें कहीं भी
11:38ग्यान के प्रति प्रेम जैसा तो कुछ नहीं है न
11:42नहीं है न
11:45ये वो बाहरी विवस्था है जो कैंपस के भीतर
11:52उसको भेजती है जिसको आप कह रहे हैं
11:55अधर स्ट्रेस डाउट स्टूडंट
11:57कल आईटी पटना में था
12:00वहाँ पर नहीं उससे पहले जो पटना में जो
12:04खुला सत्र हुआ उपन सेशन उसमें किसी ने सवाल पूछा
12:08और वो भी शायद आईटी नहीं थे
12:10बिहार के कोचिंग माफिया के बारे में
12:14बोले यहां एंटरंस एक्जाम्स की तयारी
12:19लोग करते नहीं उनसे करवाई जाती है
12:21यह बाहरी वेवस्था है
12:22स्टूडंट
12:27से
12:30एंटरंस की तयारी करवाई जा रही है
12:33तू कर
12:35उसके मावाब दौरा जिसको वो कोचिंग माफिया बोल रहे थे उसके दौरा
12:43और कोचिंग माफिया कोई ऐसा नहीं कि सिर्फ जेए की तैयारी में ही है
12:47यह उन्होंने सवाल पूछा हो बोले चाहें जेए की तैयारी हो
12:51यूपिएस्सी की तैयारी हो
12:52वो माफिया ही है
12:55न भीतर का कुछ पता है कि मैं कौन हूँ मुझे चाहिए क्या
13:06और नहीं ग्यान से कोई प्रेम है कि मुझे सच मुच
13:13मेकैनिकल, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रिकल, केमिकल कुछ बहुत अच्छा लगता है
13:17कुछ नहीं ऐसा
13:18एक दबाव है बस
13:21और वो दबाव एतिहासिक है
13:24धाई सो साल की गरीबी और गुलामी से आ रहा है
13:28और ऐसी ऐसी गरीबी कि अभी सो साल भी नहीं बीते
13:33दुनिया के सबसे बड़े अकालों में से एक से हम गुजर चुके हैं
13:38अभी जब दुतिय विश्युद हुआ था
13:40और वो कोई अकेला नहीं था
13:45हर दूसरे तीसरे साल हिंदुस्तान में अकाल पढ़ रहे थे
13:49कहीं न कहीं बड़े बड़े अकाल भी दुर्भिक्च
13:52दुर्भिक्च समझते हो कि भिक्चा मिलनी भी मुश्किल हो जाए
13:55खाना कमाना तो छोड़ दो भीक भी नहीं देगा कोई
13:58ऐसा अकाल
13:59यह हमारी हालत थी
14:03हमारी हालत ऐसी थी कि पूरा हिंदुस्तान
14:06सिर्फ मानसिक तोर पर नहीं
14:09शारीरिक तोर पर भी स्टंटेड हो गया
14:11आज जो हम कहते हैं ने कि हिंदुस्तानी ऐसे छोटे-छोटे होते हैं
14:16और तगड़े नहीं होते हैं
14:17और स्पोर्ट्स में कॉम्पीट नहीं कर पाते
14:20उसकी बहुत बड़ी वजह है
14:24200 साल की गुलामी भी है
14:25हमारा मन ही नहीं तूटा था
14:28हमारा शरीर भी तूट गया था
14:29यह जो हमारी शरीरिक कमजोरी है
14:34यह काफी हद तक अनुआशिक है
14:36नहीं तो जो हमारा डीने है
14:40वही डीने घर आपको मिलेगा
14:42सेंटरल एशिया में मिलेगा
14:43उसी से मिलता जलता यूरोप में मिलेगा
14:45एरान की तरफ मिलेगा
14:47और लंबे चोड़े तगड़े हम इतने तूटे हुए लोग है चूकि हमारा वर्तमान मुक्त नहीं है वो अतीद से आ रहा है इसलिए वर्तमान को समझने के लिए अतीद को समझना पड़ेगा
15:03भीतर आम आदमी के आज भी घोर दहशत बैठी हुई है घोर दहशत कि मेरा क्या होगा कहीं मैं बिरोजगार तो नहीं मरूँगा भूखा तो नहीं मरूँगा
15:18और ये दहशत वो अपने बच्चों को भी पिला देता है
15:23खेल कूदरा होगा बच्चा तो तुरंद उसको हो जाएगा
15:28ये जो तो ऐसे खेल कूदरा है ना
15:30भूखा मरेगा भूखा
15:31सुनाईए
15:32ये वो विवस्ता है
15:35जो इंस्टिट्ट के में गेट के बाहर की है
15:40अभी इंस्टिट्ट तो शुरू भी नहीं हुआ
15:42इस तरीके से वो जो बाहर वाला लड़का या लड़की है
15:47वो इंस्टिट्ट में प्रवेश करता है
15:51हमारी बदहाली ऐसी थी
15:53कि खाने की साधारण चीजें भी
15:59बस गिरेच उने एक, दो, पांच प्रतिशत लोगों को नसीब होती थी
16:04उत्तर भारत में विशेशकर उत्तर पूर्व की तरफ आप चले जाओ तो
16:10ये एक साधारण मुहावरा है कि खाने की कोई चीज जब अच्छी होती है न तो उसको बोलते हैं कि बहुत मीठा है
16:16उधारण के लिए बगेली में कोई खाना अगर स्वादिश्ट होगा तो कहेंगे बहुत मीठ लागत है
16:25अब वो नमकीन वेंजन भी हो सकता है पर अगर वो स्वादिश्ट है अच्छा है तो उसो गएंगे बहुत मीठ लागत है
16:32क्यों क्यों क्योंकि शक्कर तो छोड़ दो गुड़ भी नसीब नहीं होता था
16:38तो मिठास परियाय बन गई सिनॉनिम बन गई डिजायर फुल्फिल्मेंट का
16:49यह जो हम मीठे शब्द पो इतना वजन देते हैं अब नहीं देते हैं अब तो ठीक है अभी एक मेट्रोपॉलिटन कॉंटेक्स्ट हैं जिसमें बात कर रहे हैं इसमें बात शायद आपको समझ में भी ना है
17:00पर आप थोड़ा अगर गाउं देहाद की तरफ जाएंगे तो आप आज भी वही महावरा पाएंगे
17:05ये हमारी इस्थिति रही है हम इतनी दुर्दशा से गुजरे हैं और वो एक अलग कहानी है कि उतनी दुर्दशा में हम पढ़े क्यों उसका कारण मैं सीधे सीधे लोगधर्म को मानता हूं
17:18साफ दिखाई देता है कि भारत की जो दुर्दशा हुई है उसका सीधा सीधा जिम्मेदार लोगधर्म है और लोगधर्म आज भी भूत की तरह चिपका हुआ हुआ हट नहीं राठीक से
17:27खेर वो अलग कहानी है
17:31जा पढ़ाई कर जा पढ़ाई कर भारत शायद इकलौता देश होगा जिसने एक पूरा शहर बसा दिया है कोचिंग के नाम पर
17:48जानते हैं कौन सा शहर वहां और कुछ नहीं होता यहीं होता है कोचिंग कोचिंग कोचिंग
17:53और हम जानते हैं कि आए दिन हो आत्मत्याई होती रहती है आपने स्ट्रेस का नाम लिया
17:58जोड़ के देख लीजिए
18:00क्या स्ट्रेस इस कैंपस में आने के बाद शुरू हो रहा है
18:04अगर campus में आने से stress हो रहा है
18:08तो उस शहर में इतनी आत्मत्याएं क्यों होती है
18:09डरे हुए माबाब जिन्होंने अपने डरे हुए माबाब देखे हैं
18:21क्योंकि उन्होंने भूख ही नहीं भूख मरी देखी है
18:26जो पेट पर कपड़ा बांध कर सोए हैं ताकि किसी कदर नींद आ जाए
18:32हम वहां से आ रहे हैं और यह बहुत पीछे की नहीं यह तीन-चार पीड़ी पीछे की बात है
18:37अच्छा आप सब यहां बैठे हुए हो दिल्ली में बहुत सारे आप आईटियन भी हो बाकी लोग भी बहुत सारे दिल्ली कही रहने वाले होंगे
18:44आप में से कितने लोग हैं जो 3-4 पीड़ी पहले ही गाउं में रहते थे
18:48तीन-चार पीडियां पीछे जो गाओं से आ रहे हैं ये लोग सब कि ये हम है
18:53हमें उस ग्रामीन भुखमरी से निकले बहुत समय अभी नहीं हुआ है
19:03हम वहाँ से बाहर निकल आए हैं
19:07लेकिन वो भूख हम से बाहर नहीं निकली है
19:11हम आज भी भूखे हैं
19:13और हम आज भी डरे हुए हैं
19:18बहुत डरे हुए हैं
19:20क्योंकि अंग्रेजों ने तो दो-ढ़ाई सो साल की गरीबी दी
19:25उस गरीबी से भी कहीं पुरानी हमारी गुलामी है
19:29तो भूख अगर हमारी दो-सो साल पुरानी है
19:33तो डर हमारा एक हजार साल पुराना है
19:35और यह डर वो सीधे सीधे अपने बच्चों को विरासत में दे देता है
19:51बच्चा नहीं डर रहा हो तो मा डर जाती ऑगर इडरेगा नहीं तो जिएगा कैसे
19:55तो डरना सीख, तो दबना सीख
19:58तो वही सब कुछ करना सीख, जो हर कोई और करता है
20:02Heidegger वापस आ गए ना, आ गए ना, दस मैन, जो सब लोग करते हैं, वो जो हिंदी में मुहावरा चलता है कि वो काम करो जो चार लोग करते हैं, तो हिंदी में बोल देते हैं कि भाईया, चार लोग को देख के काम करा जाता है, Heidegger नुसों गा था,
20:20कि that one faceless anonymous man, जिसका आप नाम भी नहीं जानते हैं, पर आप बिलकुल उसी का अनुकरन करना चाहते हो, हम वैसे ही जी रहे हैं, हमरे राश्ट्री एमान को थोड़ा धक्का लगेगा, लेकर मुझे कह लेने दीजिए, Indians are among the least creative people in the world, क्योंकि creativity और डर एक साथ नहीं चल सकते,
20:47हम जब विदेशों में भी जाते हैं, जो हम success stories और बताते हैं, IIT की विदेश में गई, उसको ये मिल गया, वो मिल गया, वो भी ज्यादातर operational roles हैं, वो भी ज्यादातर managerial roles हैं, वो भी ज्यादातर roles हैं, जिसमें status quo को बना कर रखने का काम भारती लोग अच्छे से कर लेते ह
21:17top level design पहले ही बनाया जा चुका है, अब जा करके coding कर दो, वो कर देगा, पर कोई disruptive innovation करने में भारतिये विदेशों में भी नहीं कहीं आते, क्योंकि भले ही वो भारत से निकल गए हो, पर भारत की भुखमरी उनके भीतर से नहीं निकली, भले वो अमेरिका पहुँच गए हो,
21:47क्योंकि कुछ भी disrupt नहीं करते हैं, क्योंकि जहां भी जाते हैं, बस कहते हैं, बताओ, बताओ, कैसे जीना है, आप जो बोलोगे, तो हाल तक दुनिया के सब देश भारतियों को बड़े प्यार से बुला लेते हैं, आजाओ, इनको बुला लो, ये बिलकुल गाये, जो बोल
22:17मुझे मालू मैं, मैं थोड़ा सा कैरिकेचर जैसा कुछ बना रहा हूँ, मुझे मालू मैं कि नुएंसेद इस से अलग हो सकती हैं, पर मोटे तोर पर जो मैं बात बोल रहा हूँ, वो बिलकुल निशाने पर है, उसको समझ ये, हम बहुत डरे हुए हैं, हम कुछ नया नही
22:47में, और ये बात शायद आज से चालिस साल पहले थोड़ी सी वैद भी रही हो, क्योंकि तब दुनिया में भारत में रोजगार के इतने अलग-अलग साधन नहीं थे, इतनी शाखाई नहीं थी, आज तो ऐसा कुछ है भी नहीं, बिलकुल ऐसा कुछ नहीं है, आप जिस भी
23:17और साथी साथ एक चीज और हुई है, आएटी में 20,000 सीटे कर दी हैं, तो इसका मतलब यह है कि आएटी आके भी आप कमाखा लोग, इसकी कोई गारंटी नहीं है, मैं जब गुसा था तो 2,000 सीटे थी, 2,000 सीटे के लिए प्रतिसपरधा होती थी, अब 20,000 सीटे हैं, मैं ज
23:47बहुत होते हैं, 20,000, पर आज भी यह है, घुस, घुस, चार-चार साल कोचिंग कर और कोचिंग वाले कुछ हजारों में नहीं, लाखों में भी नहीं, बिग लाक्स में वसूलते हैं, बिग लाक्स में, चाहे वो इटी की कोचिंग हो, यूपेसी की कोचिंग हो, और कितनी
24:17I am cat होता है
24:18जिस भी चीज़ की कोचिंग हो
24:20वो अब ऐसा नहीं होता कि आपका
24:22दस बीस पचास दार में काम हो जाएगा
24:24पांच लाग दस लाग और शायद कुछ
24:26सकसस गारंटी प्रोग्राम सोते हैं
24:28जो बीस चालिस लाग भी मांगते हैं
24:30कहते हैं इतना पैसा दे दो तो निश्चित रूप से
24:32हम तुमारे लड़के को घुसर देंगे अंदर
24:35लड़का जान बूच के बोल रहा हूं
24:36लड़की के लिए कोई चालिस लाग नहीं देता
24:37देता है दहेश में देता है
24:40ये सब अभी गेट से बाहर चल रहा है अभी तो गेट के अंदर भी नहीं आया
24:49और आप कह रहे हैं कि स्ट्रेस गेट के अंदर होता है
24:52ये सब तो गेट के बाहर चल रहा है और उसके पैदा होने से चल रहा है
24:57अब क्या करें
25:04वो डर वो खौफ हमारे चेहरे हमारी आँखों से निकल ही नहीं रहा
25:10हम सिर्फ यह करना जानते हैं सब के सामने बस यह करना है
25:15कोई मिल जाए उसके सामने रीड जुका दो और हाथ ऐसे जोड़ के खड़े हो जाओ
25:21कोई भी हो
25:27चाहे वो तुम्हारे यहां प्रचलेत कोई स्थानी है इस तरका कुल देवता हो
25:38और चाहे प्लेस्मेंट में आ रही कोई कमपनी हो फरक नहीं पड़ता
25:43सब के सामने हम बस क्या करना जानते है
25:45बहुत भारी बूट के तले रौंदा गया यह राश्ट्र
25:56और उसकी पीला से अभी भी उबर नहीं पा रहा
26:01कहानी बहुत पीछे से शुरू हुई है
26:07कहानी वहां से शुरू हुई है जहां से धर्म को विक्रत करके लोगधर्म बनाया गया
26:13उस विक्रत की वजय से भारत को हरक्षेतर में पराभव और पराजय जहलनी पड़ी
26:18वही पराभव वही पराजय फिर भूख बन गए, महामारी बन गए, अकाल बन गए
26:25और वही भूख, वही हार, वही चोट
26:30आज एक एक अभिभावक, एक एक माँ की छाती में बैठी हुई है
26:37और वो कहते हैं अपने बच्चेयों किसी तरह बचाना है, उसको बचाने के लिए उसको IIT भेज दो ना
26:41यह जो कोचिंग नाम का फिनॉमेना है, यह भारत जैसा दुनिया की किसी देश में नहीं होता
26:48दूसरे देशों में भी होता है, उस वो test prep industry बोलते हैं
26:54क्या बोलते हैं? test prep industry
26:55उसका एक साधारन सा आकार होता है, वो एक साधारन formal सी चीज होती है
27:00पर भारत में जो हो रहा है, यह unique है, यह phenomenal है
27:05और जिस शहर में पिछड़ा पन और बेरोजगारी जितना ज़्यादा होते हैं
27:10वहाँ आप उतने ज़्यादा कोचिंग के होल्डिंग पाएंगे
27:13मैं कोचिंग को जमेदार बिल्कुल नहीं ठेहरा रहा हूँ
27:22कोचिंग फंडमेंटल नहीं है
27:24अगर यह जो बीमारी है इस बीमारी में फंडमेंटल कोचिंग नहीं है
27:27इस बीमारी में जो फंडमेंटल है वो इतिहास है
27:30वो बहुत पीछे तक जाता है
27:31लेकिन क्या इतिहास की बात करके हम इस बीमारी को जस्टिफाई कर सकते हैं?
27:42पूछ रहा हूँ
27:42बोलो हम क्या ही कह सकते हैं हम क्या करें हमारा तो इतिहास ही बेचारगी का है
27:49तो इस कारण हम डरते हैं अपने बच्चों के लिए
27:51बोलो कर सकते हैं क्या इतिहास जो होगा सो होगा
27:55हम आज क्यों इतने अजीब तरीके से वेवहार कर रहे हैं
28:01इतिहास तो वो ना जो बीत गया
28:04तो जो बीत गया वो
28:06बीतने क्यों नहीं देते
28:08उसको पकड़ के ढोग क्यों रहे है
28:11जेनिटिकली जो भारत में बच्चा पैदा होता है
28:20वो इन्फिरियर है गया
28:21वो वैसे ही है जैसा कहीं भी कोई और बच्चा पैदा होता है
28:26पर उसके ओपर चड़ बैठ होगे तो वो दब्बू, कमजोर, लालची, अंधविश्वासी सब बनी जाएगा
28:34फिर बोलोगे हम इंडियन्स तो होते ही ऐसे हैं ना
28:38कैसे ऐसे ही होते हैं बताओ ना
28:40जेनेटिकल ही ऐसे होते हैं
28:42जेनेटिकल में तो कोई अंतर है नहीं
28:44हम अपने बच्चों को दब्बू बनाते हैं
28:49उनके अंदर तनाव डालते हैं
28:54पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब
29:01सही बात तो यह है कि जिसका पढ़ाई से रिष्टा खेलने का हो गया
29:06वही बड़े-बड़े अविश्कार करता है
29:09पढ़ाई और खेलकूत दो अलग-अलग चीजे हैं ही नहीं
29:12जो पढ़ाई के अंदर खेलने लग गया
29:14वो अब अविश्कारक बन जाता है
29:16पर हमने विभाचन कर दिया
29:25हमने दो फाड बना दिये
29:27तू खेलने नहीं जाएगा बिल्कुल
29:28तू खेलने नहीं जाएगा तू पढ़ाई कर
29:30मेरी दिन्दिगी में भी लग-बग चार साल का समय ऐसा था
29:36जब मैं बिल्कुल नहीं खेला
29:38क्योंकि हवाएं ऐसी थी
29:42कि दिमाग में भी नहीं आता था
29:44कि खेला जा सकता है
29:4510th का बोर्ड है 12th का बोर्ड है
29:48और J-E entrance है ये टाइम खेलने का थोड़ी है
29:50और मेरी फितरत
29:57sports person की है बिल्कुल हो सकता है
30:00कि मैं खेला होता तो मैं शायद किसी
30:02खेल में निकल गया होता
30:03हाथ में माईक की जगे रैकेट होता
30:06पता नहीं अच्छा होता बुरा होता
30:10अच्छा बुरा का फैसला करने वाले हम कौन होते हैं
30:12अब पीछे की बात
30:13लेकिन
30:14लेकिन एक
30:17conveyor belt है
30:19उस पर आप डले हुए और उस पर आपको चलना है
30:22कोई जानने पूछने वाला नहीं है कि
30:25तुम्हारे भीतर
30:27उस पर चलने वाली प्रक्रति है भी कि नहीं है
30:38अब बाहरी प्रतिसपर्धा किसी कदर जेल करके ओ भीतर आ गया
30:42इसकूल की प्रतिसपर्धा फिर
30:46कोचिंग इंडस्ट्री की प्रतिस पर्धा जेल करके आ गया भीतर
30:49चलो आ गए
30:51अब हम गेट के अंदर आ गए है
30:53बहार की उस्था से भीतर की उस्था में आ गए है
30:55उनने रहात की सांस ली
31:00Finally I have arrived
31:01मैं कोई हूँ
31:05मेरी इतनी जैई रैंक है
31:07और मैं स्कूल का टॉपर हो गया रहा हूँ
31:09जो भी हूँ
31:09अब वो यहां अंदर आता है अपनी डिपार्टमने जाता है
31:13डिपार्टमने 240 लोग है
31:14मेरे समय में 60 हुआ करते थे
31:17अब कितने हैं 240
31:19और 240 के 240 उसी के जैसे है
31:23समझ आ रही यह बात
31:29तुबे जी इसे वो जीत कर आ गया
31:35क्योंकि वो चौबे जी है
31:37यहां भीतार आता है तो पाता है कि यहां जितने हैं सब छबे जी हैं
31:42उसको पहले इसी बात का खूब स्ट्रेस होता था
31:47कि यह जो कोचिंग वाले इनसे कैसे कॉम्पीट करूं
31:51जो जनरल क्राउड है उससे कैसे कॉम्पीट करूं
31:53टॉप वन परसेंटाइल में कैसे आऊं
31:55जेही कैसे कॉलिफाई करूं
31:57इसी बात का उसको बड़ा भारी स्ट्रेस था और इतना भारी स्ट्रेस था कि
32:01इसुसाइड हो जाती है
32:02तो यह जो टॉप 1% टाइलर है
32:06बाहर किस से यह compete कर रहा था
32:08जो बाकी 99% थे
32:11अब भीतर आया है तो यह जो 1% टाइल वाला है
32:14अब यह किस से compete कर रहा है
32:15जो बाकी 1% टाइल वाले है
32:17अब यह बैठ जाता है
32:20अब यह दोस्त हो जाता है
32:23आसमान से गिरे
32:27खजूर मेट के
32:29क्योंकि अगर
32:31240 लोग हैं किसी डिपार्टमेंट में
32:33तो 240 के
32:36240 अल्ट्रा कॉम्पेटिटिव है
32:38बहुत सारी
32:41intellectual बाधाएं
32:44पार करके यहां पर आई है
32:45आई है ना
32:47लेकिन अगर 240 लोगों का
32:49डिपार्टमेंट है तो उसमें किसी
32:51कि तो रैंक 240 भी होगी ना
32:53हो नी पड़ेगी
32:55और भीतर का जो
32:58system है वो रूथलेस है
33:00वो बात में रैंकिंग निकाल देता है
33:03निकल गई रैंकिंग और
33:06बार से अंदर घुसे थे
33:08कि मैं तो कुछ हूँ
33:10मैंने यह कर दिया, मैंने वो कर दिया
33:12मेरे इतनी J rank है
33:13और यह डिपार्टमेंटल लिस्ट लगी और इसमें तुम्हारा नाम कहां पर है
33:16दोसो चालीसमें नमबर पर
33:19कॉलाप्स
33:22दोसो चालीस तो एक है
33:27यहां पर जो सौ के बाद होगा वो भी रो पड़ेगा
33:30क्योंकि उसने कभी सोचा नहीं होगा
33:32किसी भी list में उसका नाम इतने नीचे आएगा
33:35कभी नहीं सोचा होगा
33:36क्योंकि अभी जो department है उसके लिए
33:38क्लास्रोम की तरह है
33:39क्लास में तो हमेशा फस्ट आता था
33:40ऋसकेंद आता था इतनी रहता था उसका
33:42अभ यहां पर आ रहा है तो उसका नाम सबसे नीचे
33:45या बीच में गई बीच में हो तो भी रोएगा
33:47कि मेरा नाम बीच में क्यों आ रहा है
33:49अब ये यहां का सिस्टम है
33:52फिर चुकि सब के सब
33:58एक ही मिट्टी से उठकर आ रहे है
34:01हमारा कोई इंटरनेशनल कॉमपोजिशन तो है नहीं
34:04जैसे जो विदेशी उनिवरस्टीज होती है
34:06उसमें बहुत डाइवर्स मिकसिंग होती है
34:11अलग-अलग नेशनलिटीज होती है
34:12बैगराउंड होते है
34:13और अगर पोस्ट ग्रेजुट प्रोग्रामस है
34:15तो उसमें अलग-अलग उमर के लोग भी होते है
34:18यहां पर क्या होता है
34:21कि सब एक ही जैसी
34:23एकोनॉमिक और साइकोलोजिकल बैगराउंड से उठकर आ जाते है
34:27जो एक की कंडिशनिंग है वही दूसरे की है
34:31और जो आपकी कंडिशनिंग है वही आपके सीनियर बैच की है
34:36और उनकी उनसे senior उनकी उनसे senior ले देके फिर से हम history में पहुँच गए
34:41तो जो संदेश आता है वो यही आता है
34:46भाई जान लगा दे देख ले
34:48यही चार साल है तुने फोड़ दिया तो फोड़ दिया
34:50life set हो जाएगी
34:53यही चार साल है
34:56अब वो चार साल में फोड़ने निकलता हो कितनी भी जान लगा ले
35:00240 की लिस्ट में कुछ पक्का नहीं है उसका नाम कहां पर आएगा
35:06कुछ पक्का नहीं है क्योंकि ये 240 के 240
35:10पुराने शिकारी है
35:14अब वो क्या करेगा
35:20वो क्या करेगा
35:23फिर वो जितना ज्यादा कंपयटिटिव होना चाहेगा वो उतना ज्यादा को करिकूलर्स को इगनौर करेगा
35:31और को करिक।लर्स के लिए बहुत वेवस्थथा प्रिष्ण के मैदान है बहुत अच्छा केंपस हे
35:36पर आप जितना उस पर प्रेशर बनाओगे पर्फॉर्मेंस और प्लेस्मेंट का, वो को करिकुलर से उतना दूर होता जाएगा.
35:49कई बार तो यहां तक होता है कि एक ही परिवार है दो भाई है, मेरे भी बैच में था, मैंने देखा हुआ है.
35:54जो बड़ा भाई है, वो हाई अचीवर है, कम्पिटर साइन्स में है, किसी प्रिवियस बैच का है, और अच्छी स्कॉलर्शिप लेकर कि किसी यूएस यूनिव में पहुंच गया है, और यह कर रहा है, और फिर छोटा भाई है, थोड़ा मस्तमलंगे वो आया है, और उस पर
36:24कि तो तो तो जब था तो उसके फर्स सेमेस्टर में इतनी आई थी, SGPA तेरी के त्नी आई है, तेरा भाई इतना बड़ा पैकेज लेकर निकला, तू क्या कर रहा है, तो तो डिपार्टमेंट भी नीचे वाला है, तू क्या कर रहा है, तू बेकार है बिल्कुल,
36:39समझ में आ रही है बात
36:47हम चाहते हैं कि हम
36:50बाहरी भीतरी विवस्थाएं वैसे ही रखते हुए
36:54सारा दोश स्टूडेंट में निकाल दें
36:58हम यह नहीं कहते हैं कि दोशी है
37:00पर हम ऐसे कहते हैं कि
37:01the problem is in the student
37:03or the student is problemed
37:06ऐसे कह देते हैं
37:09student a closed system नहीं है
37:15student a open system है
37:17interacting continuously with the universe
37:20और उसका universe भी वड़ा
37:23localized ने बेचारेगा
37:24universe उसका क्या होता है
37:25फोन पे पास्ताद उसके number है
37:27वह ही universe है उसका
37:28मम्मी का number, पापा का number, बड़े भाईया का number
37:31इसका number, उसका number, यह ही उसका universe है
37:33और साथ में जो peer group है यही उसका universe है
37:41बात आ रही है, समझ में है
37:43psychologically यह बात गलत है, वो तो अपनी जगे ही है
37:53इस तरह के व्यवहार का अब कोई economic rationale भी नहीं है
37:59IIT में घुसना
38:07कोई उतनी नहीं बड़ी बात रह गई ना उतना जरूरी रह गया है
38:12ढंकी जिन्दगी जीने के लिए, कमाने खाने के लिए
38:16कहीं भी खुसना नहीं जरूरी है
38:26मूल सिधानत यह है, एकदम fundamental principle
38:31कि अगर तुम सचमुछ कुछ ऐसा कर रहे हो
38:36जो creative है
38:39तो उससे तुम्हें ही नहीं दूसरों को भी फायदा होगा
38:43क्योंकि creativity सब के दिल को अच्छी लगती है
38:46और अगर दूसरों को फायदा होगा
38:50तो दूसरे तुम्हें कुछ पैसे भी दे देंगे
38:52तु भूखा नहीं मरेगा
38:53creative होकर के कोई भूखा नहीं मरता
38:55आरे यह बात समझे मैं
39:08जब तक केंपस के भीतर academic performance को ही जो
39:20prime weightage दी जाती है
39:23उसको diffuse नहीं करेंगे
39:25तब तक stress बना रहेगा
39:29जब तक हम
39:31Indian Institute of Technology का मतलब यह सोचते रहेंगे
39:36कि हाँ technology ही पढ़ाई जाएगी
39:38तब तक यह tension बना रहेगा
39:39second specialization क्यों नहीं हो सकती
39:46double majoring क्यों नहीं हो सकती
39:48किसी बच्चे को उसके दिल की नहीं सुनने दी गई
39:54उस पर दबाव डाला गया
39:56उस दबाव के चलते वो जई क्लियर करके किसी कदर
39:59campus में आ भी गया
40:00तो अब campus उसको दिली जिन्दगी जीने का दुबारा मौका क्यों नहीं देता
40:04campus क्यों नहीं बुलता कि ठीक है यार
40:07तू civil engineering और sociology दोनों में parallel major कर सकता है
40:11कर ले
40:12अब उसका tension diffuse होगा न
40:17और IIT जैसे संस्थान निश्चित रूप से यह कर सकते है
40:21कर सकते हैं
40:22यह double major नहीं हो सकता तो कम से कम minor specialization दे दो
40:28लगबग 180-190 credit होते हैं जो आपको चार साल में B.Tech program में करने होते हैं
40:34हम क्यों नहीं उसमें से 40-50 credit
40:38arts और humanities को devote कर सकते
40:41या कि credit बढ़ा दो
40:4420 credit बढ़ा दो लेकिन 20 credit बढ़ाने के बाद
40:5050 credit को मिला करके
40:52अभी हम 16 credit देते हैं
40:53optional humanities courses होते हैं
40:55चार semester में होते हैं
40:56चार-चार credit के
40:5716 credit देते हैं
40:59इस 16 को बढ़ा करके
41:0040 या 50 कर दो फिर देखो
41:02campus में stress level कितना कम होता है
41:04और students को choice के दौरा empower करो
41:10कि वो एक wide variety में से
41:13अपने लिए optional courses चुन सकें
41:15history, philosophy, psychology
41:19psychology
41:20जो कुछ भी दुनिया में होता है
41:22क्योंकि innovation के frontier
41:30अक्सर intersectional होते हैं
41:33वो ऐसी जगह होगी उदारण के लिए
41:37कि जहां
41:39neuroscience
41:40नियूरो साइंस
41:41मेकैनिकल इंजिनरिंग से मिल रही होगी
41:44जहां
41:45नियूरो साइंस
41:46मेकैनिकल इंजिनरिंग से
41:47इंटरसेक्ट कर रही होगी
41:48उस जगह पर एक जबरदस्त
41:50innovation होगा
41:53उदारण के लिए आपको एक
41:55artificial arm बनानी है
41:57तो उसके लिए आपको
41:59mechanical engineering चाहिए और neuroscience चाहिए
42:01क्यों नहीं हम ऐसे students पैदा कर सकते
42:03जो mechanical engineer है
42:05जिसने minor कर रखा है neuroscience में
42:15देश
42:17की हालत खराब है क्योंकि
42:19लोग भीतर से उथले होते जा रहे हैं
42:21हम अलग अलग
42:23तरह की philosophies
42:25के options क्यों नहीं दे सकते
42:27students को पढ़ने के लिए
42:29हम tension की बात कर रहे हैं
42:33tension psychology
42:35के दाएरे में आता है
42:37हम campus के भीतर psychology
42:39के courses ही क्यों नहीं float कर देते
42:41यही कमी
42:47देख करके 2006 में
42:49sweat life education
42:51शुरू करी थी मैंने
42:53और वो
42:55करिकुलम बना करके जितने ज्यादा
42:57institutions हो सकते थे उनके पास गया था
42:59यह कहकर कि आप जो भी पढ़ा रहें उसमें यह नहीं है
43:01मुझे पढ़ाने दो
43:03आइटी दिल्ली में भी मुझे मौका मिला था
43:052011-12 में
43:07दो समेस्टर तक पढ़ाया उसके बाद वो चीज बंदो गई
43:09और जो मैं बात कह रहा था
43:11उससे कोई
43:13उससे कोई institution इंकार नहीं कर पाता था
43:17हाँ उनको समझ में आ जाता था कि यह चीज अगर हम नहीं पढ़ा रहे हैं
43:21तो कमी रह जा रहे हैं बड़ी कमी
43:23बिग होल
43:25लेकिन फिर कभी logistics आड़े आ जाता था
43:29कभी consensus आड़े आ जाता था
43:33कभी अलग-अलग stakeholder constituencies आड़े आ जाती थी
43:36parents ऐसा कह रहे हैं यह ऐसा कह रहा है
43:39department कह रहे हैं time कहां से निकालें
43:41we are already choked
43:43बाहर की उस्था हम नहीं भी बदल सकते
43:53तो भीतर तो हम उसको कह सकते ना कि तू यहां आ गया है
43:57जैसे भी आया है
43:59now relax and breathe
44:03खुल के सांस ले
44:05हम sports में भी credits क्यों नहीं दे सकते पूछ रहा हूं
44:10कोई अगर
44:16अलग-अलग तरह की competitions हैं उसमें वो सचमुच
44:20perform करके दिखा देता है कि मैं कर सकता हूं
44:22मालिज इंटर IIT में इंटर IIT sports meets होती हैं
44:25उसको इस बात के लिए भी credits क्यों नहीं मिल सकते
44:29dramatics, elocution
44:36क्यों नहीं उसको credit दे जा सकते इस बात के
44:40how can you have technology
44:45without empowering the user of the technology
44:50मैं भी चार साल campus में था
45:02लटकार दिया था कि जहां कहीं भी co-curriculars कुछ भी हो रहा होगा जाओंगा जरूर
45:09लेकिन मुझे फिर class miss करके जाना पड़ता था
45:12system के खिलाफ जाकर जाना पड़ता था
45:18debating, extremity, dramatics, poetry
45:28हर चीज में जाकर के हिस्सा लिया
45:30लेकिन फिर उसी कीमत भी चुगानी पड़ी
45:32कि आप वहाँ पर सब कुछ करके आओ
45:35और आत में देर से आओ
45:36और उसके बाद कोई support system नहीं है
45:38system इस बात को acknowledge नहीं कर रहा है
45:42कि इस लड़के ने genuinely अपना
45:46creative time कहीं पर लगाया है
45:48system के लिए मैं एक absentie हूँ
45:51कि ये तो class ठोड़के कहीं और गायब था
45:54और अगर मैं बाहर जाकर के वो सब नहीं कर रहा होता
46:07जो मैंने यहां के चार सालों में करा
46:09तो शायद जैसे मैं आपके सामने अभी माईक लेके खड़ा हूँ ऐसे खड़ा भी नहीं रह पाता
46:15इतना महत तो होता है holistic education का, diversified learning का
46:34समझ में आ रही है बात यह है
46:36इतना stress विदेशी campuses में देखने को नहीं मिलता है
46:44क्योंकि न वहां पर parents कह रहे हैं कि तु भूखा मरेगा इसलिए b.tech कर
46:49और न वहां पर campus आपको एक unidirectional flow में पुश कर रहा है
46:57एक जो बहुत बढ़ा अंतर होता है Indian premier institutions और बहार होता है
47:07the sheer number of elective optionals
47:10वहां आप सब को चुनते ही हो
47:13कुछ core courses उसके लाव सब आप चुनते हो
47:16और second courses होते हैं इसमें से ये चुनना ये चुनना अपने हिसाब से अपना portfolio बना लो
47:21जो तुम पढ़ना चाहते हो तुम बताओ तुम क्या पढ़ना चाहते हो
47:24कर लो एन्रोल
47:25जाहिर है कि अब stress levels कम रहेंगे
47:33सुने में बहुत दूर की बात लगेगी पर मैं पूछ रहा हूँ
47:40हमारे जो dance forms हैं क्या वो learning में नहीं आते हैं
47:45एक दो credit का course इसी बात का नहीं हो सकता है
47:50कि जिंदगी भर तो वो रखता ही मारता रहा बोड़ी त्यारी करता रहा जेई की त्यारी करता रहा अब वो यहां आया है तो उसको जी लेने दो
47:58वो कुछ सीखना जाता है कथा कुछी पुड़ी सालसा कुछ भी
48:02वो भी यह course है campus के अंदर क्यों नहीं हो सकता ये
48:15यूनिवर्सिटि का और क्या मतलब होता हैวिश्य विद्याले का और क्या मतलब होता है
48:24हम भी deemed university और ला इए तो विश्य विद्याले का क्या मतलब होता है
48:29holistic education
48:33पूरी दुनिया के छात्रों का स्वागत है
48:38और पूरी दुनिया के विशे यहां पढ़ाए जाएंगे
48:41तब हम कहते हैं विश्य विद्याल है
48:42foreign languages के courses क्यों नहीं हो सकते
48:51और मुझे पता है कि कुछ हद तक उस दिशा में प्रयास हो भी रहा है
48:59जितने diverse options हमें उपलब्द थे
49:04आज के students को उससे कहीं ज़्यादा उपलब्द है
49:07लेकिन फिर भी अगर stress levels हैं तो इसका मतलब बहुत कुछ और किया जाना बाकी है
49:12यह तमना लेकर के मैं चला ही जाओंगा लेकिन
49:29चाहता यही था कि एक ऐसी जगह हो जिसको एक कोड़ से देखो
49:40तो कहो मंदिर है और दूसरे कोड़ से देखो तो कहो विश्यविद्याला है बनाना चाहता था
49:47ताली की कोई बात नहीं है अफसोस की बात है कोई कभी बनेगा नहीं नहीं हो पाएगा
49:56पूछा है क्यूँ छोड़ो तो कैसा होता वो संस्थान कुछ नाम देते उसको मद्वाइद संस्थान जहां
50:18जहां आप सुबह कंप्यूटर साइंस पढ़ रहे और शाम को उपनिशद सोचो कैसा होता वही बनाना चाहता था
50:29बनेगा नहीं शयद
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