00:00यहाँ गोवा आए हो, यहाँ के अबादी बहुत कम है, जानते हो खुल इतनी अबादी है, गोवा के अबादी इतनी कम है, जितनी अबादी है उतने हर साल यहाँ टूरिस्ट आते हैं, इतनी कम अबादी है, मिरे खाल दस लाग क्या सबस, बस इतनी, और यह प्रदेश है प�
00:30आज भी आप जिन जगह पर शहरों से भाग कर जाते हो वही जगह होती है जा इनसान नहीं होता और कौन सा होता है टूरिजम इनसान नहीं हो आपके पैसा बहुत आ जाता है तो आप जानते हो अपने लिए क्या खरीदते हो इस पेस
00:45स्पेस माने क्या वहां मैं हूँ और इनसान नहीं है आप होटल में अपने लिए बड़ा कमरा ले पाते हो कि आपका पैसा आ गया है उसका मतलब क्या है यहां मैं हूँ पर जनसंख्या नहीं है आप बड़ी गाड़ी ले पाते हो उसका मतलब क्या है आप प्राइवेट ट्रा
01:15होंगे और चार खडए होते हैं वो सिर्फ आपके शरीर के आपके मन में प्रवेश कर जाते
01:21है कि और बड़ी सदा है कोई आपके निजता बचती नहीं स्मझत हाता ना करना पड़े
01:39ये अर्थविवस्था का लक्षे होना चाहिए
01:42ये आर्थे कुथान का भी लक्षे होना चाहिए
01:45ये नहीं कि तुम्हारे पास बेंतहां दौलत है लुटाने के लिए और लक्जरी के लिए
01:49पर इतना पैसा होना चाहिए
01:51कि कोई तुम्हारे कंधे से कंधा मार के ना चल रहा हो
01:55कि तुम खड़े हो बस में या मेट्रो में या लोकल में
01:59तो तुम्हें दूसरे को सूहना न पड़े
02:01यही अर्थविवस्था का लक्ष है
02:03इससे ज्यादा भी अगर है तो वो भी प्रदूशन करेगा
02:06एक आदमी अकेला लिमुजीन पर बैठ के जा रहा
02:09और अपने लिए इतनी प्राइवेट स्पेस निकाल ली है
02:11और लिमुजीन धुआ ही धुआ मार रही है
02:12और उसकी मैनुफैक्चरिंग में भी खुब प्रदूशन हुआ है
02:15ना हमें वो गरीबी चाहिए
02:17जिसमें एक ऐसे आठ बाई आठ के क्षित्र में चार लोग रह रहे हो
02:23ना हमें वो अमीरी चाहिए
02:24कि एक आदमी चल रहा है कार में जो वहां से वहां तक की है
02:28और दुनिया भर पर धुआ छोड़ता हुआ चल रहा है
02:31सस्टेनिबिलिटी चाहिए
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