00:00आपने ऐसी माई देखी होंगी, बच्चा साथवी आठवी में पहुंच गया, दसवी में पहुंच गया तो नहला रही हैं, देखा हैं, आप मेंसे कितनी ऐसी खुदी हैं, बताईएगा, बोलो, और देखी कितनों नहीं, इतने बड़ बड़े बच्चे हो गए, उनको भी क्
00:30ये काम पाथ-छे साल के बच्चे तक तो समझ में आता है, कि वो नहीं अपनी नोटबुक्स और चीजें रखेगा अपने बैग में, पर आप और बड़े बच्चे का बैग तयार कर रहे हो, ये कहां-कहा होता है, कौन-कौन कर रहा है भई, खड़े कर दो हाथ प्यार सु�
01:00क्योंकि करने को और कुछ ही नहीं, तो घर में बच्चे हैं, उन्हीं को पकड़ गर बैठो, जहां जरूरत नहीं है, वहां भी दखन करो, हस्तक शेप करो, तुमसे आपकी ममता और प्रगाड होती जाती है, वो ममता आधी तो मजबूरी है, जो कामकाजी महिला है, वो बच
01:30होगे, कोई चनोती नहीं उठाओगे, बाहर निगलने के लिए साहस आई है, सबकों की धूल फांगनी पड़ती है, धूल गर्द, धूप, अंजान, अपरिचित, लोग और इस्थितियां, इनका मुकाबला करना पड़ता है, इससे भीतर लोहा का यार होता है,
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