00:00फिर जो वो कुछ अरसा तुम्हारे साथ ठीक हो गई थी इसके पीछे बाबा की कोश्चों से जादा मेरा हाथ था
00:06मैं हर वक्त तुम्हारे लिए उनका तिर्साफ
00:09अगली किस्प में कहानी मजीद शिदत इख्तियार करती लिखाई देगी
00:13जहां वलीद अपनी मां के सामने डट कर खड़ा होने का फैसला करेगा
00:17और साफ रफजों में कहेगा कि अब दानिया के साथ ज्याती बरदाश नहीं की जाएगी
00:22मगर मां का रद्यामल वलीद के अंदाजों से कहीं ज्यादा सक्त होगा
00:27जिससे गर का माहौल मजीद खराब हो जाएगा
00:29दानिया एक तरफ वलीद की बदली हुई सोच से उमीद बांदेगी
00:33तो दूसरी तरफ उसे खाफ होगा के कहीं यह हमायत वक्ती थाबित ना हो
00:37उदर इतजा के वालिद की नाजों कालत सब को इलाकर रख रख देगी
00:57सवाल यह है कि क्या वलीद अपनी बात पर कायम रह पाएगा
01:00और क्या सब विकम इस टूटते हुए रिच्टों के बीच खुद को सभाल पाएगी
01:03या सब कुछ उसके हाथ से निकल देगा