00:00थोड़ा सा मैजरा इतिहास में चला जाता हूं 1974 में आपको याद होगा कि भारत में जो हम कहते हैं पीस्फूल नुक्लियर एक्स्प्लोशन किया था च्विमर्दी इंद्रगांदी के टाइम में और आपको ये भी याद होगा कि अमेरिका इतना बिकड़ गया था हम कि हमने �
00:30लोग कहते हैं तो कहीं उस पे हमला ना हो जाए तो ये नुक्लियर वेपन्स ये हमेशा एक बुरा शब्द रहा है उसके बाद आपको पता होगा कि नॉर्थ कोरिया ने अपना प्रोग्रेम शुरू कर दिया और फिर बाकी देश मिलके कहने लगे उसको किम पुंक पुंक �
01:00बनाया वो बनाया फिर नहीं काम चला उसक्यूबर तो और पर सिरिया का आपको बता देता हूँ आपको पढ़िएगा मैं इस तार से आपको बताओंगा कि सिरिया में एक ट्रेन पे हमला हुआ था और बहुत से लोग शुरू मचाने हैं कि ट्रेन को आग कैसे लगी है वो �
01:30अब ग्रेट निउक्लियर पार दो था अब एडरान अबजिकिटिव क्या है एरान का एरान ने अभी तक सपष्ट किया है कि इसरैल और यहुथियों को जीने का हक नहीं है रस्ट और किसी मिड्ल इस्टन कंट्री ने ये नहीं का ये तो उनके संविधान में होता था अब �
02:00रखे जबकि एरान जो है वो मिडल इस्ट का मेंबर नहीं है वो खारी का मेंबर नहीं है वो अरब देश नहीं है वो तो शिया है जबकि ये सब बाकी सुनी है तो एरान चाहता है कि उसकी एहमियत रहे और एहमियत वो देख रहा है क्योंकि एराक बीसा दस साल एरान उससे ल
02:30पहले अर्ली फिफ्टीज में उससे में एक डेमोक्राइटिकली इलेक्टिड प्राइमिनिस्टर मैं तो मिला था उनसे एरान का जिसका नाम तो मुहम्मद मुसाद्यक उसको हटा दिया था अंदर से एक रिवोल्ट शुरू हुआ, लोग साल कौंट उतरा है, फिर शाव एरा
03:00में क्या हुआ, मैंने देख लिए, सिरिया में क्या, उनको तो चबा गए, और हड़ी भी बाहर थुप की, तो ये उसका पहला लगए, और दूसरा, ये साबिट करना की, ताइगर लोग, मिडल इस में जो तुम बात कर रहे हो, इसके साथ बात करता है, उसके साथ दोस्ती क
03:30द्रमा में करिये चाहे, बेजिंग में करिये, जहां आप चाहें बात करिये, इरान इस लक्ष से दूर नहीं जाएगा, तो नहीं समता, नहीं तो उसकी एहमियत कातम हो जाएगा, बिल्कुल वहरा सर, आप बंसल सर के पास चलेंगे, बंसल सर जो तीनों अपडेट आई है,
04:00इनका कोई डियरेक्ट मतलल नहीं होता, यह तो कहने के लिए होते हैं, पोउशन के लिए होते हैं, तो उस से कोई, अब जैसे हैं कि करह रहा है, उनके प्रेजिडेंट भी और खामनी भी और यह कर दिनेंगे, वह तो पहले दिन से ही है, कोई उन्होंने कभी कहा कियह हो कु
04:30एक बाचीत होती है तो माहूल अच्छा बनाया जाता है बयानों को नहीं दिया जाता को अटेक नहीं किया जाता लेकिन आजकल जो पूरे वर्ड में ऐसा चल रहा है कि चाहे आप यूक्रेन और रश्या की बात ले लीजे कि जब कोई एक बात होती है एग्रिमेंट या पीस �
05:00लगता और वोर ने बिल्कुल सही कहा है कि चाहे उपर से एरान कुछ भी कि अपना नूप्लियर प्रोग्राम नहीं छोड़ेगा और वह इसलिए नहीं छोड़ेगा कि आज मान भी जाता है तो कल जो है जो अभी यह प्रैसर बना रहा है बना हुआ है उसके उपर उसके उ�
05:30यह वो एक कोरिया की तरह से जैसे वो धंकी देता रहता है उससे सब दूर रहते हैं इसी प्रकार से इरान भी नुक्रियन वावर बन करके जो वो अपने आपको चाहता है कि उसकी एक वैल्यू जो कुछ देशों में से हैं कि जो अपने आपको एक रेस्पोंसिबिल स्टेट �
06:00सारा क्यों हो राज? जो एरान के ओपो को compound कुछ क्यों देखना पड़ रहा हुआ वह से देखना पड़ रहा है कि इन्हों ने हमास को अकसाया
06:30हानिया थे जो हामास की इनको सब को खतम कर दिया गया तो इस प्रकार से जो अफरत अफ्री का जो महौल है वो इरान ने बनाया है और जो अपने
06:40एंबैशनर मोरा कह रहे हैं कि जो इरान का यह कहना है कि इसराइल को यहुद्यों का जीने का कोई हक नहीं है जो इतनी
06:47intolerance और रणा है वो जो की मन से कभी चानी सकती आप कितने
06:51समझोते कर लीजे कुछ भी कर लीजे वो दिमाग से नहीं जा सकता
06:54है जो एक मान सिकता है और जिस तरह से हमास जो है इनने
06:57पाला है और हमास अब पाकिस्तान के आके भी मीटिंग करता है
07:01उनके जितने भी जिहादियों रातंक वादियां और एक वार जो है पीओके
07:04में भी की तो इस परकार से अला कि जो है इरान हमारा मित रह लेकिन
07:09एक तरह की जो इस परकार की जो मान सिकता है उसको खतम करना जब
07:14थर दियार तो बढ़ाता जाज़ और है, आवह रहे हो रहा है। पहले
07:18भी अमेरिका पूरिका द्रहए दियार, नहीं था, वो देख रहता
07:20मोके की, अब जितनी देर होती जाती है, अमेरिका भी
07:23बढ़ाता जा रहा है, उसी प्रकार से, जहा, इड़ fulfilैंजियल।
07:27को बढ़ाता जा रहा है चाइना ने जो अपना एक जहाद भीज़ दिया उनकी उनको जो है इंटेलिजन्स देने के लिए इसी प्रकार से जो रॉस्या से काफी
07:39चाहता है और अमेरिका चाहता है वो बिलकुल कामियाम हूं अपने मिसंद्ट किसी तरह की कोई कोटाही कमी नहीं रहें चाहिए विलकुल बंसल सर हमारे साथ अर्विं सिंग के जावद सर भी जुड़े हुए हैं उनके पास चलते हैं उनसे इस बाचीत की पहली टिपड़ी �
08:09लेकिन ये मानसिक्ता शायद इस्राईलियों में भी है जब हम West Bank की बात करते हैं जो अहां से अलग-अलग सेक्टर्स बन चुके हैं और वहां से से इस्राईली सेटलर्स घुसते जा रहे हैं तो जो मानसिक्ता है वो तो दोनों तरफ है और हम जानते हैं कि इस्राईल एक छो�
08:39तो ये जो है हमारा महौल जो है और जो लड़ाई की भावना है वो तो दोनो धर्मों की है तो तिजावत साब आप भी थोड़ा इस पर बताए
08:46तेंक यू नगिन साब इस डिएट को एक डारेक्शन देने के लिए पर मैं जो मेरे दोनों ही सूपर सीनियर्स है उन्होंने बहुत भी ब्यूटियुफुली चीज़ को बताया है और बहुत ही ब्यूटियुफुली चीज़ को कहा है जो वस्तु इस तती है उसको बताया कि हा
09:16लिए एक्जिस्टेंस की लड़ाई है और भारत के लिए क्या है यह अगर जैसा कि बिल्कुल बहुरा साब में बिल्कुल ब्यूटीफुली बताये कि अगर यह नहीं करता है तो उसके लिए बहुत ही मुश्किल हो जाएगा और धीरे धीरे अगर उसके पास पर्मानू ताकत
09:46पूरी जो इन्टरनेशनल पॉलिटिक्स का कहीं हिस्टा है कोल वर्के खत्म होने के बाद में लड़ाई खत्म नहीं हुई है तो यह हैं और आप देखें कि सीरिया में बसरोल असथ साप के जाने के बाद में जो कि राशह से सपोर्टेट थे एके करके पूरा का पूरा जि
10:16पर ये पूरे के पूरे सब वर्चसु बनाना चाहता है अमेरिका,
10:21और इसी वर्चसु की लड़ाई के कारण,
10:24ये हो रहा है कि इरान अपने existence के लिए लड़ रहा है,
10:27और इसमें चिंतित ये हैं,
10:29कि एक एक अगर वेस्ट इशिया के कंट्री अगर अमेरिका के वर्चसु से खिसकते गए,
10:34तो यहाँ चीन और रूस के लिए भी हालत खराब करने वाला होगा,
10:39हलाकि आज की तारीख में यहाँ सच बात है,
10:43कि चीन का भी अगर हम करें,
10:45तो अमेरिका की ताकत चीन की दुगनी है,
10:47और न तो चीन में मुकाबला करने की ख्रमता है,
10:51नहीं रूस से मुकाबला करने की ख्रमता है,
10:53आर्थिक तोर पे देखे, सामरिक तोर पे अगर नेवी की ही बात करें,
10:57तब तो चीन और रूस दोनों ही मिल पाए,
10:59तब भी अमेरिकन नहीं का मुखाबला नहीं कर सकता है
11:02तो एक तरफ जहां वर्चरस की लड़ाई है
11:04दूसरी तरफ हाँ ये बात सच है
11:07कि इरान दरसल उस पूरे ही जो जितने भी मुस्लिम देश है
11:11उनकी लीडर्शिप चाहता है
11:13पर यह भी देखना होगा कि बाकी जितने भी मुश्लिम देश है
11:17वो सारे पपेट हैं
11:19वो बेसिकले कटपुतली है अमेरिका की
11:21चाहे वो साओधी अरिबिया के किंग हो
11:23या तमाम और जो उधर के जो जितने भी देश हो
11:27तो वहां स्तामन्तवाद है
11:29जो वहां के लोग चाहते हैं वैसी सरकार नहीं है
11:34उन सरकारों के खिलाफ उन लोगों में जन बावना है
11:36पर इरान में ऐसा नहीं है
11:3879 के इसलामिक रेवलेशन के बाद में
11:41वहां पर अलग तरीके की सरकार है
11:44और एक कईन कईन यह जो पूरा
11:46मैं इसको शंक्षेप में करने की कोशिश करता हूँ, वो पूरा का पूरा जो मुस्लिन देशों का और जो खास कर जो मुस्लिन नेशनलिजन टाइप का जो कि अभी ठीक से फॉर्मूलेट नहीं हो पाया है, वो चीज जब यह आती है तो उनको कोई रिप्रेजेंटेटिव कर
12:16और उस वर्चस के खिलाफ एक तरीके का प्रतिरोध हैं, तो हमें मुझे लगता है कि इसे ददर में देखना चाहिए, मैं अपनी बात को बस एक लाइन के साथ खतम करना चाहता हूँ, भारत के लिए अगर अमेरिकी वर्चस से उस पूरे इलाके में बढ़ता है, तो यह को
12:46तो उसको ज़्यादा से ज़्यादा एनरजी की जिवरत चाहिए, इरान में वो हमने वहां से बार किया, इरान के साथ अमेरिका ने कभी हमें comfortable नहीं होने दिया, मनमोन सिंगे साथ के टाइम में हम जानते हैं, उन्हाने कितना pressure बनाया था कि हम वहां से पूरा जो gas pipeline का जो प
13:16इस नहीं करना चाहिए
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