00:00कोई कोई मात्रे करती है गुरुजी भगवान तो हमारी सुनता ही नहीं है हम तो भगवान को रोज जल्वी चड़ाते हैं अराधना भी करते हैं साधना भी करते हैं पूजन भी करते हैं तो भी शिव हमारी बात नहीं सुनता है हमारा निवेदा नहीं है
00:25शिव ने कितनी सुंदर संसार की रचना करी है ये विचार करी
00:34शंकर भगवान ने जो स्रश्टी की रचना करी शिव जी ने जो स्रश्टी का निर्मान किया
00:45फूलों में परमात्मा कीड़े देता है देखिए उस परमात्मा की लीला कितनी विचित रहे
01:01कि फूलों में परमात्मा कीड़े दे देता है और पत्थर में परमात्मा हीरे दे देता है
01:10ये उस परमत्मा की कृपड़ ये उस परमत्मा की दया है
01:19जिसने ज़्यादा संगर्ष किया है बहुत मेहनत करी है बहुत परिश्रम किया है
01:29परिश्रम में लीन है संगर्ष में लीन है पत्थर जैसा मजबूत हो गया है
01:40तो एक ना एक दिन मेरा भोले नाथ उसकी जिन्दगी में एसी तरक्की कराता है कि हीरा जैसा उसको बना देता है
01:50बस उसके लिए एक सबसे बड़ी बात है
01:59कि जब परमत्मा आपको हीरे जैसा बनाया तो आपके भीतर अभी मानना अहंकार मानना
02:10आपके भोजन करने से अगर आपके भोजन से किसी के मुख में पानी आ रहा है तो आपका भोजन करना बेकार
02:28आपका भोजन करना बेकार है
02:42आपके भोजन करने से यदि किसी के मुख में पानी आ रहा है तो आपका भोजन करना बेकार है और यदि आपके बोलने से किसी की आँख में पानी आ रहा है तो आपका भोलना भी बेकार है
03:00भोजन करते समय
03:09भोजन की थाली में जो पकवान है
03:13उस पकवान को देखकर अगर किसी के मुख में पानी आ गया
03:16तो आपका जो भोजन आपके रहन कर रहे है
03:19वो आपके शरीर को नहीं लगता
03:21आपके शरीर को नहीं लगता
03:25भोजन करते समय यदि किसी के मुख में अगर पानी आ गया तो आपका भोजन करना बेकार है
03:34और बोलते समय यदि किसी की आँखों में पानी आ गया आपके बोलने से तो आपका बोलना भी
03:41फिर बोलना आपका बेकार है कि आपने क्या बोल दिया
03:49क्या इसा प्रसंकर दिया, क्या आपने कह दिया, कि उसकी आख में असुआ गया, उसके नेनों में जल भर गया, उसके नेनों में अश्रुआ गया, आपका वो बोल नहीं देखा गया
04:03शुमाहपुराण की कथा में भगवाण संकर के पवित्र चरीतर में, शिवजी की पवित्र कथा में परसंग आता है, भगवाण संकर की कथा में बड़ा सुंदर परसंग आता है
04:19पार्वती जी भोजन का जब निर्मान करती है, पार्वती जी जब भोजन बनाती है, भोजन का निर्मान करती है, तो सबसे पहला भोजन पार्वती जी बनाकर अपने जितने गण है, उन सभी गणों को भोजन करती है
04:43सभी गणों को भोजन करती है
04:45प्रभ्राइ।
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