00:00तमीन नाइडू में एक भक्त हुए मरार, क्या नाम था? मरार, शुद्र थे, शिव के भक्त थे, शंकर के भक्त, मरार के पास में धन नहीं था, पैसा नहीं था,
00:22तो मरार ने विचार करा कि भोले बाबा, एक भर मंदिर बनाना है तुमारा, कुछ भी हो जाए, तुमारा मंदिर बनाना है, और याद रखना, भाव होगा, तो भवन भी जरूर बनेगा,
00:40और भाव होगा, तो भवन भी जरूर बनेगा, और भाव होगा, तो भगवान भी जरूर आएगा, निश्चित, मरार, तमिल्नाईडू के एक ऐसे भक्त हुए, शंकर के शुद्र थे, नहीं था धन, सेवा करते थे, एक गुरु के पास पहुच गए, मन है, शिवजी का मं�
01:10मैं तुझको दे दूं पैसा, ले जाकर बना ले, नहीं, आपका भी नहीं चाहिए, मैं तो मेरा बनाना चाहता हूँ, ठीक है, तो एक काम कर, धन नहीं पैसा नहीं, तो मन में मंदिर बना, मन में मंदिर कैसे,
01:29कहीं से इंट ला, कहीं से मिटी ला, कहीं से ओडला बना, सिबलिंग ले करा, नंदी ले करा, मन में बिढ़ाते जे
01:38अपने मन को ऐसा बना लेकि मैंने सिखर की डिजाइन ऐसी करी है, उसका दरवाजा इतना बड़ा रखा है, सुतार से बात करी थी
01:46बात सबसे करकिया, सुतार के पास जाके ना दरवाजा लगाना है मंदिर में, कितना बड़ा लगाऊंगे यसा ऐसा, मन में मंदिर बनाते चलिए, उसने अपने मन में मंदिर बना लिया, भक्त का नाम है मरार भक्त, कोई तुमसे कहे कि सीवर वाले महराज जी ने कहे दिया कि
02:16पंडी जी के पास गया प्रान परतिष्ठा की मोरत दे दो पंडी जी ने का तुने मंदिर का बना लिया मेरे मन में बना लिया तो मन में बना लिया तो कभी परतिष्ठा ने ने ने तुम मोरत दो मैंने सब पूच पूच के बनाया तुम मोरत दो पंडी जी ने मोरत निकाला �
02:46वहां से 100 किलोमीटर की दुरी पर,
02:49राजा ने मंदिर की प्रान प्रतिष्ठा का मोहरत भी भी निकाला,
02:54जो मरार में निकाला था.
02:59गारार्ँ के राजा शिव का इतना बड़ा भक्त था,
03:02कि हवन यग्जे से शंकर जी को परसन कर ले दा था.
03:06आज शिव जी के पास में उसने भी मोहरत निकाला और प्राण परतिष्ठा दोनों जगा चालू हो गई
03:14राजा प्राण प्रतिष्ठा कर रहा है बड़े-बड़े बिद्वानों को वुला कर बड़े-बड़े यग्य करा कर अनुष्ठान करा कर सब्दान कर कर प्राण प्रतिष्ठा चल रही थी और मरार बेड़ गया था आज का मोहरत है इत्ती वजे से यग्य चालू हो गया है ब
03:44राजा ने शिव जी को सामने से जाते हुए देखा
03:50राजा कने लगा भोले बाबा आज मेरे मंदिर की प्राणपरतिष्ठा तुम्हें बेठना है
03:56संकर जी बोले आज भी बेठ सकता कोई दूसरा मोरत निकाल ले
03:59आज तो मरार के दिल में जाकर बेठना है उसने जो मंदिर बनाया
04:04उसने जो हिर्दय में मंदिर बनाया है भाव होगा तो भवन बनेगा और भवन में भगवान तब आता है
04:13जब भाव मिर्मित हो जाता है
04:16मेरे भक्त के हरदाय में
04:18जो मंदिर बना है
04:19उसकी प्राण प्रतिष्था है
04:21कहा वो मरार के
04:24दिल में तुम बेटोगे
04:25हाँ
04:26राजा का प्राण प्रतिष्था
04:30छोड़कर संकर भगवान
04:32मरार के दिल में जाकर बेट गए
04:34एक दिन मरार के मन में जाकर बेड़ गए तो मरार के मन में आया अब प्राणपतिष्टा पे भंडारा कराना चाहिए हलवाई नहीं मिल रहा भोजन कैसे कराऊ किसको संकर भगवान ने कहा मेरी धरम-पत्नी से जोरदार कोई हलवाई नहीं है
04:59पूरी कासी को भोजन करा रही अनपुर्णा आखे बन करकर बोला अनपुर्णा माता भोजन कराना है अनपुर्णा जी ने हरदय में आकर पूछा कितनो को कराना पूरे गाओं को जिमाना है इस्ते तो सोचा ही था अनपुर्णा ने पूरे गाओं को निमंत्रन दे दिया जह
05:29लोगों ने पूछा मंदिर का हैं तो के भीतर प्रतिष्ठा हो गई भगवान बेड़ गया हो
05:58कोई तुमसे पूछे किसी और वाला बाबा कह दिया कि दियान बाती भी नहीं हो तो टार्च तो है ना दिल भाव होगा तो भवन बनेगा
06:16वो प्रिक्टिकल करके देखो मरार की कथा का मरार की कथा का प्रिक्टिकल करके देखना कई माता कहती है हमारे मंदिर नहीं है कोई माता कहती है हमारे बंदिर दूरे कोई माता कहती है हम मंदिर नहीं बना सकते कोई माता कहती है हमारे पास पैसा नहीं है हम मंदिर कैसे बनाए
06:46बनकर ही रहेगा, मंदिर बनकर ही रहेगा
06:49चड़ाते रहो
06:52एक बार अयोध्या में मेरे भगवान राम
06:59टेंट में आकर बेट गए
07:00वो टेंट में बेटे रहे
07:03तो लोगों का भाव बढ़ता रहा
07:05भाव बढ़ता रहा, भाव बढ़ता रहा
07:06बहाव बढ़तरा एसा बहाव बन गया कि आज वो टेंट की जगापर अयुद्या में मेरे भगवान श्री राम मंदिर में जाकर विराज़मान हो गए
07:17भाव है तो भवन है भाव है तो भगवान है और भाव ही नहीं तो मंदिर कितने भी बना कर रख दो भाव नहीं है तो भगवान भी नहीं
07:28कई-कई मंदिरे से बने बहुत बड़े-बड़े हैं पर कोई जाता ही नहीं है भाव ही नहीं है मां तो लोग सोचते हैं कि कमाने के लिए बना ली आंदो धन्दोलत संपदा तो भाव भी तो होना चाहिए भाव अच्छा होगा तो भगवाना आएगा
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