00:00कितनी सुन्दर एक प्रसंग आता है काथा में, एक बड़ा सुन्दर एक प्रसंग है, तमिल नाइटू में एक पुनितावती नाम की एक शिव भक्त हुए।
00:30बहुत पुरानी कथा नहीं है, छट्विस सदी की ही एक कथा।
00:38उनितावती नाम की एक महिला, एक कन्या ने जनम लिया, तमिल नाइटू के कराई कला नगर में, एक धनिक सेट के घर में, बहुत पेसे वाले व्यक्ती के घर में एक लड़की ने जनम लिया,
00:59जिसका नाम पुनीतावती थी, पुनीतावती थी, सेट जी, प्रती दिन संध्या होते से ही, प्रदोश काल में, शंकर भगवान का अभिशेक पूजन करते थी, प्रती दिन नियम थाओं का, प्रदोश काल हुआ, शिवको यादि,
01:25हम आपसे भी करते हैं, प्रती दिन जब सूरिड दूब रहा हो, चंद्र उधित हो रहा हो, प्रदोश का जब समय हो, उस प्रदोश काल में, आप भी शिवका इस्मरण करो, अभिशेक नहीं कर सकते हैं, तो इस्मरण करो, इस्मरण कैसे?
01:47बस, तुम्हें लग रहा है कि मेरे घर में धन की कमी है, संपदा की कमी है, मेरे घर में वेभव की कमी है, मेरे घर में लच्मी की कमी है, मेरा वेपार नहीं हो रहा, भगवान मेरे बच्चों की लाइन नहीं बेठ रही, ना विवा हो रहा, ना उनकी कोई नोकरी लग रही ह
02:17निकलते हैं वो प्रदोश काल के समय पर दर्वाजे की ओर मुख करकर भगवान शंकर के के या तो पंचा क्षर मंत्र नमस शिवाय गा स्धुम्
02:31शिवाय नमस्त उभ्यम बस दर्वाजे की और देखते हुए पाँच बार या साथ बार शिव के नाम का उचारण करकर
02:41हे कुबेर भंडारी, हे कुबर इश्वर महादेव, आपने लच्मी को भी लच्मी दी है, आपने कुबेर को भी लच्मी दी है, कृपा करो, मेरे घर में भी लच्मी और वेभों दीजिए
02:57जोली पसार कर, नमस शिवाय श्री शिवाय नमस तुभ्यम कहकर, वो जोली को वापिस अपनी और गिराओ, आप लगातार दो महिना, तीन महिना आप प्रदोश काल में, प्रदोश काल में शाम के समय भगवान शंकर, जब रोज प्रती दिन पारवती और शिवजी निकलते है
03:27अब इसमें तुम्हारा धन लगा क्या, जम के बोलो जरा, इसमें तुम्हारा पैसा लगा क्या, इसके लिए तुम्हें कहीं जाना पड़ा क्या, इसके लिए तुम्हें कहीं जाना पड़ा क्या, नहीं, इसमें केवल समय का ज्यान करना है, कि शाम का समय, प्रदोश काल का �
03:57में लगी थी उसमें प्रते दिन नी अमना प्रते दिन
04:00श्री शिवाय नमस्तु प्रते दिन प्रदोश काल में भगवान शिव के नाम का उच्छानन करना
04:26प्रारम पर्दो
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