00:00और यहां तक कहेंगे महाराजी कि बन सकते कभी कोई डॉक्टर बोल दिया कि बहुत रोग तुमारे शरीर में फेल चुका है और शरीर का रोग ठीक नहीं हो रहा तुमने पूरा बल लगा लिया पूरा दम लगा दिया
00:28परम्तु तुमारा वो रोग समाप्त ही नहीं हो रहा है तुमारा रोग समाप्त ही ना हो अगर तुमारा रोग समाप्ती पर ना जा रहा हो बिमारी बढ़ती चली जा रही हो बहुत ज्यादा कश्ट भी हो रहा हो
00:45सरसो के फूल तीला कलर का होता है सरसो का फूल किसी नदी तलाब बावडी उआ सरोवर के तड़ पर एकांत में कोई शिव्बन मंदिर हो या शंकर जी का कोई शिवलिंग रख एकांत कभी तुम नहाने गए और तुम्हें दिख गया कि यहां एकांते कोई है नहीं और संकर ज
01:15कि शिव को समर्पित करो और जिस नदी के तड़ पर अपने शिवलिंग को सरसो का फूल चड़ाया है उसी जलासय का जल लेकर अपने उपर प्रुक्षण साथ बर करो पुंद कष्वर महर्यों का नाम लें डॉक्तर का इलाज कराते रहो जाज कराते रहो दवाईयां लेते
01:45इस जलासय जो नदी तला बावरी खुआ जहां पर भी वह शिवलिंग रखा है उसका जलासय का जल यदि अपने उपर पांस साथ वार प्रुक्षण कर लिया तो जो बीमारी शरीर में है उसको समाप्त होना ही पड़ेगा धीरे धीरे वह समाप्ति पर जाएगी
02:03कि तो कि सर्चों का फूल शिव को सम्रत गातों कि संकत हहां सर्चों डॉक्तर कर दिये कंठ पर की रोग है बक्षिस्थल पर कोई रोग
02:25छाती में कोई गठा ना गया है रोग आगया तो वो रोग धीरे धीरे मिट्रा लगरा है समय लगरा है पर्णकु आप दॉक्तर की दवाई लो जाचे कराओ और ओशदी लो दिखाओ जाच कराओ परफाथ में क्योंकि हमने पहले भी का डॉक्तर संकर का रूप होता है
02:41डॉक्तर शिव का एक डॉक्तर जेसा कई वेसा पर उपरसांत में श्यूपर भरूर का करकर संकर का विश्व एक पत्र अच्छा है
02:50कर दो
02:53कर दो
02:56कर दो
03:00कर
03:02कर
03:04कर
03:06कर
03:10में
03:35सुमन मोदन मोदन वाल मेरे पती का नाम रमे रुपेश मोदन वाल कहीं बेठे हों पहात इला सकते हैं रुपेश मोदन वाल सुमन मोदन वाल कहीं बेठे हों पहात इला सकते हैं और बेल पत्र लेने के लिए आ सकते हैं
03:56में सुमान मोधनवाल, जिला जोन्टूर, मच्छी शहर, सुमान मोधनवाल मेरे पती का नाम हो, रुपेश मोधनवाल मेरे मुबाईल नमबर यह, मेरे पती को कैंसर रोग हो गया,
04:11फॉर्थ स्टेज का केंसर हो गया डॉक्टर ने जवाब दे दिया डॉक्टर ने कहा इनका आपरिशन भी नहीं कर सकते क्योंकि ये शरीर इसा नहीं गर लेगा हमने उत्तर प्रदेश के हॉस्पिटलों में दिखाने के बाद हम उनको बंबे ले गया बंबई में उनका इला�
04:41तब मेरी बहु बोली कि मा बाबा करते हैं अगर विश्वास के साथ संकर जी पर चड़ा हुआ जल पिया जाए कुबरेश्वर धाम से लाए हुए उद्राक्ष को पानी में गला कर शिव को चड़ा कर पिया जाए और जो बाबा ने पूर्म में सरसो के फूल का जो उपाई
05:11और मेरे बाबा की कृफा च bulbs सब्थवाइआ पंद हैं और मेरे पति मेरे साथ आज में सुभाघ्यवति होकर कथा श्रमनकर
05:19गुरुदेव मेरी बहु को भी पास साल हो गए थे संतान नहीं थी और बाबा से प्राथना करी और बाबा की कृपा से मेरी बहु को संतान हो गुरुदेव
05:32है कि बाबा की कृपा का मैं क्या गुंद हम करूं शिव शिवश्व शंकर्षा थुजट अके षीव पुरान करें जब हम कोई मन से भाव से
05:51ھर्दय में रक्कर कर ुजब को अपने मन की कोई बात करते हैं टो शिव उसको स्विकार करते है
05:58शंकरुस के सुड़ाइब
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