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  • 16 hours ago

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00:00Non-Vegetarian कोई food नहीं होता, किसी का मास होता है
00:03Non-Vegetarian food होता ही नहीं
00:09वो किसी का शरीर है
00:11उसको food आप तभी बोल सकते हैं
00:16जब आपने कभी किसी प्राणी से, जीव से, जानवर से मुहबबत की ही न हो
00:25नहीं तो ये क्या ही नहीं पाएंगे Non-Vegetarian food
00:28फिर आप सीधे कहेंगे flesh
00:30एक तो ये
00:35शब्द बड़े धोखे बाजी का है
00:38non-vegetarian food
00:40non-vegetarian क्यों बोल रहे हो
00:43सीधे animal flesh क्यों नहीं बोलते
00:45I am an animal flesh eater
00:46क्योंकि ऐसे बोलोगे तो तुम्हारी बरबरता
00:49तुम्हारी कुरूरता, निशनसता
00:51साफ दिख जाएगी
00:52क्यों पूछे क्या खाते हो, I eat animal flesh
00:56साफ दिख जाएगा कि कितने
00:59बरबर हो तुम
01:02तो तुम बात को जरा सब्भे तरीके से बोलते हो
01:05कहते हो non-vegetarian
01:08तो फिर vegetarian food को
01:12non-flesh food क्यों नहीं कहा जा सकता
01:14अगर non की ही भाशा में बात करनी है
01:16अगर non ही
01:20लगा के बात करनी है तो ऐसा क्यों नहीं करते
01:22कि मास को कहो
01:24animal flesh
01:25और जो शाकाहारी है उनको कहो
01:27कि ये non-flesh eaters है
01:29ऐसे क्यों नहीं करते
01:31पर ये शब्दों की धोखा धड़ी है
01:34इस से कहीं ज्यादा
01:39इमांदार
01:42तरीके से
01:43हिंदी में, संस्कृत में कहते हैं
01:50उसका उपयोग तुम करते नहीं
01:51हिंदी भाशी भी रामिश रामिश नहीं बोलेंगे
01:53वो बोलेंगे non-vegetarian
01:55आज ज़रा non-veg खाने का मन था
01:59अरे non-veg क्या होता है
02:01सीधे बोलो आज किसी की जान लेने का मन था
02:04आज किसी की गरदन पर शुरी चलाने का मन था
02:10पर ये बात बोलोगे तो तुम्हें ही अच्छा नहीं लगेगा
02:12तो कहते हो चलो जी थोड़ा non-veg खा के आए
02:17कतल को बड़ी आसानी से छिपा गए क्या खूबी है
02:22कतल भी कर डाला और गुना भी नहीं हुआ
02:32ये सिर्फ इस लिए है
03:02क्योंकि जिंदगी में प्रेम नहीं है अंते
03:05बहुत कमी है प्रेम की
03:08पश्वों से गया इंसानों से भी प्रेम नहीं है
03:12तुम्हें कभी किसी से भी सच्ची महबबत हो जाए
03:15उसके बाद मास नहीं खा पाऊगे
03:17महबबत छोड़ दो तुम्हें मोह भी हो जाए
03:27तो भी मास खाना मुश्किल हो जाएगा
03:29यही कारण है कि
03:31दुनिया का कोई भी देश हो
03:33वहाँ इस्त्रियां मास कम खाती है
03:35पुरुष ज़्यादा खाते है
03:36इस्त्रियां प्रेम
03:39जानती हो न जानती हो
03:40मोह ममता तो जानती है
03:42मोह ममता तक में इतनी
03:45ताकत होती है कि तुम्हें मास नहीं खाने देती
03:48तो सोचो प्रेम में कितनी ताकत होगी
03:52भारत की नहीं दुनिया की किसी भी देश में जाकि सर्वेक्षन कर लो
04:02कई मामले तुम ऐसे पाओगे एक अच्छा खासा नुपात ऐसा पाओगे
04:06जहां पर पुरुष मास खाता होगा इस तरी नहीं खाती होगी
04:09कभी किसी मुर्गे से या बकरे से दोस्ती करके देखो
04:29उसके बाद किसी भी मुर्गे को खाना तुम्हारे लिए असमभव हो जाएगा
04:36एक मुर्गे थे दोस्ती करके देख लो
04:39उसके बाद मुर्गा हो बकरी हो हिरन हो बतक हो
04:53सब एक से लगेंगे किसी का मास नहीं खापा होगे
04:56रही अदरक प्यास की बात
05:19तो तुम शाकाहार में भी जितनी चीजे खाते हो
05:25उन सब की अलग अलग प्रक्रते होती है
05:28उन सब की अलग अलग गुण होते है
05:30किसी तरह प्याज लह सुन के भी कुछ गुण होते है
05:35वो गुण तुम्हारे लिए कभी विलाप्रद हो सकते है
05:40कभी हानिकारक
05:41तुम्हारी क्या स्थित है
05:44इस पे निर्भर करता है कि तुम कौन सा फल या सबजी
05:50या शाक या पत्ता खाओगे
05:53इस बारे में तुमको अध्यान कर लेना चाहिए
05:58पढ़ लेना चाहिए
05:59कि अधरक शरीर के साथ क्या करती है
06:02केला क्या करता है
06:03आम क्या करता है
06:04और प्याज क्या करती है
06:06और तदानुसार तुम्हें अपने लिए खाना
06:08चुन लेना चाहिए
06:10रितुओं के अनुसार भी भोजन बदलता है
06:17किसी रुत्य में कोई चीज लावप्रद होती है
06:20दूसरी रुत्य में वही चीज आनिप्रद हो जाती है
06:25तो वो सब देखना पड़ता है
06:28वीगनिज्म क्या है?
06:35वो इस बात का सुईकार है
06:38कि जीने के लिए दूसरे की खाल उतारना जरूरी नहीं है
06:44कि दूसरे का शोषण कि ये विना भी जिया जा सकता है
06:49और जिया जाना चाहिए
06:50वीगनिज्म का मतलब इतना ही नहीं होता
06:54कि मास नहीं खाऊंगा ये दूध नहीं पियोंगा
06:56वीगनिजम कोई नकारात्मक सिध्धान्त नहीं है
07:00कि ये मत करो और ये मत करो और ये मत करो
07:03वीगनिजम डोंट की एक सूची नहीं है
07:08कि ये ये ये ये ये नहीं करना है
07:10वीगनिजम एक सकारात्मक बात है
07:14एक positive affirmation है
07:17किसका मुहबबत का
07:19बात समझ में आ रही है
07:24विगनिजम का सिर्फ निगेटिव वर्थ ही नहीं होता
07:28कि ये नहीं खाना है और ये नहीं पहनना है
07:30और ऐसा नहीं करना है
07:31विगनिजम का मतलब है प्रेम
07:36तुमारी बच्ची होती है
07:45और उसके लंबे बाल है
07:51तो तुम उसके बाल काट करके
07:52अपने लिए टोपा बनाते हो क्या
07:55क्यों नहीं बनाते हैं
07:57ऐसा खयाल भी क्यों नहीं आता
07:58बात ही अचिंत है
08:02तुम ऐसी कलपना ही नहीं करोगे
08:04कि अपनी बिटिया के बाल काट के
08:05अपने लिए टोपा बना ले
08:06क्यों
08:07प्रेम है
08:10तो इसी तरीके से
08:13वीगनिजम कहता है कि क्या जरूरी है
08:17कि किसी का शोशन करके ही जिया जाए
08:22हो सकता है तोपा तुम्हें बहुत अच्छा लगता हो
08:26बड़ा आकरशा क्या उप्योगी लगता हो पर क्या जरूरी है कि
08:29बिटिया के बाल कटे है फिर तोपा बने
08:34तो विगनिजम कोई कोरी बातचीत नहीं है
08:46सिध्धान्त भर नहीं है
08:49हार्दिक प्रेम है
08:52को ऐसी मुभबत है जिसका दाइरा बहुत व्यापक है
09:02सब जीवों को अपने आगोश में ले लेता है
09:06इतना व्यापक है
09:08आदमी की कर्तूते देखो न
09:24एक मादा के अंडे लिये जा रहा है
09:27ये घिनानी हरकत नहीं है
09:31किसी स्त्री को तुम पाली इसकी ले रहोगे
09:36इसकी अंडे खाऊंगा
09:39कितनी अशोभनी ये बात है
09:43इसमें प्रेम तो है ही नहीं
09:48जरासी सभ्यता भी नहीं है
09:57एक मादा के अंडे
10:05एक मादा के अंडे
10:17निकाल रहे हो फिर गिन रहे हो फिर तॉल रहे हो ये कर क्या रहे हो
10:24लजास्पद नहीं बात है ये
10:31और फिर थोड़ी देर में उसके सभ अंडे ले लूके
10:39उसके गले पर छूरी चला दोगे
10:54कवीर साहब के उद्गार है
10:58मासाहारी मानवा
11:00प्रत्यक्ष राक्षस अंग
11:03उसकी संगत मत करो
11:06पड़त भजन में भंग
11:08कि मासाहारी की संगत भी कर ली
11:16तो भूल जाओ अध्यात्म को
11:20ये भी मत कह देना कि नहीं
11:23मेरा दोस्त तो मासाहारी है
11:25मैं नहीं हूँ
11:25मासाहारी की दोस्ती भी तुम्हें भारी पड़ेगी
11:29ये मत कहा देना कि हम आमने सामने बैटके खाते हैं
11:33जो उसका मन होता है वो खाता है
11:35जो मेरा मन होता है मैं खाता हूँ
11:36वो चिकन खाता है मैं डोसा खाता हूँ
11:38तुम्हारा ये लिबरल दरश्टिकोण
11:49तुम्हें कहीं कर नहीं छोड़ेगा
12:06पीर सबन की एक सी
12:18जो जाने सो पीर
12:22दूजी पीर न जान सी ते काफिर बे पीर
12:36कि पीड़ा होती है ना
12:40कभी किसी पशो को दर्द में तड़पते देखा है
12:42उसकी तड़प और तुम्हारी तड़प क्या अलग-अलग है
12:46पीर सबन की एक सी
12:48पीड़ा तो सब की एक सी है ना
12:55और जो दूसरों की पीड़ा को पीड़ा नहीं मानता वही काफिर है
13:01और वो बेपीर है, निगुरा है, उसका कोई गुरु नहीं होगा
13:24अपनी पीडा पर तो सभीर हो लेते हैं
13:29इनसान तुम तब हुए जब दूसरों की पीडा पर भी रो सको
13:34अपनी पीडा है
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