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00:00अच्छा आई टी गया था ने अच्छा अच्छा
00:05कानवे की बात है तो सब बैठे हुए आप उसमें बात कर रहे थे कि तुम
00:10कौन सी खुबी थी कि तुम जेए क्लियर कर पाए जो टॉप बन परसेंटाइल होता है
00:15क्लियर करता है उस साल भी यह हुआ था तो कोई अपनी कोई खुबी बता रहे को अपनी कोई बात बता रहा है
00:20कोई अपना टैलेंट बोल रहा है कोई बोल रहा है तैलेंट कुछ नहीं था मैं तो स्लागिंग करता है दिन में 14 गंटे पढ़ता है
00:25कोई कुछ बोल रहा है कोई कुछ बोल रहा है तो मैंने भी कुछ बाते बोली फिर मुझे
00:30मुझे एक और ख्याल आया तो सबके सामने मैंने रखा मैंने का देखो मुश्किल से डेढ़ दो लाख लोगों
00:35इस साल आयटी एंट्रेंस जे जो होता है वह लिखा होगा जबकि अगर तुम देखो
00:40कि भारत में कितने किशोर हैं टीनेजर्स हैं
00:45जिनें इस साल बारहमी पास करनी चाहिए थी और मैं अज्यूम कर रहा हूं कि वो
00:50साइन्स ट्रीम से होते हैं तो एलिजिबल होते हैं जे लिखने के लिए तुम देखो वो कितने हैं
00:55तो वो जो संख्या है वो दो लाग की अपेक्षा कई कई कई गुना निकल करके आई कि साब ये तो इतने
01:00होने चाहिए थे मैंने का इतने होने चाहिए थे लेकिन उतनों ने तो
01:05बारवी का एक्जाम भी नहीं लिखा और जिन्होंने बारवी का एक्जाम लिखा साइन्स ट्रीम से उनमें
01:10से कितने लोगों थे जिन्होंने लिखा तो वहां भी आपने पाया कि कई गुने का अंतर है तुमने का
01:15यानि कि हम यहां पर है इसमें यह बात तो ठीक है कि हम अनुशासित थे हमने महनत करी और
01:20बहुत जोर लगाया तो हम सफलो करके यहां पहुँचे हैं पर बहुत बड़ा योगदान इस बात का भी है
01:25कि भारत की एक बहुत बड़ी आबादी है जिसके पास वो रिसोर्स
01:30वो संसाधन वो क्षमता वो एक्सपोजर ही नहीं है वो अवसर ही नहीं है वो अवसर ही नहीं है
01:35कि वो जैसा एक्जाम लिख भी सके तो हमारा तुम्हारा इस वक्त पर आएटी के कैम
01:40में होना वी ओव इट इन सम मेजर तो दोस पिपल वो कुट
01:45नोट इवन राइट दजेए लेट अलोन क्लिर इट तो भापर सबने माना है
01:50कि हाँ ये बात तो बिलकुल सही है तो देखिए
01:55जरूरत नहीं पढ़नी चाहिए कि कोई लेजिसलेशन मुझे मजबूर करे कि मैं कुछ सीटे
02:00किसी को दे दूँ मेरी बात बहुत लोगों को अखर रही होगी
02:02और अखर है ये भी क्योंकि गवर्न्मेंट जाब्स के लिए बहुत मारा मारी है
02:05और बड़ा बुरा लगता है जब आप पाते हो कि जनरल केटिगरी के नंबर
02:10ज्यादा थे पर वहां कट ओफ जादा था तो आपका सेलेक्शन नहीं हुआ पर रिजर्व क्रेटिगरी में
02:15लोवर कट ओफ पर किसी का सेलेक्शन हो रहा है उसे हार्ट बर्न होता है दिल जलता है और मैं समझ सकता हूँ
02:20और इसलिए मैं भी सुझ रहा हूँ कि जो जिनके साथ ऐसा हुआ उगा उनको मेरी बात बुरी लग रही होगी लेकिन
02:25फिर भी अपना स्वार्थ या अपना हित अन्हित थोड़ा परे करके जब
02:30हम एक व्यापक दृष्टिकोंड से बिगर पिक्चर देखते हैं तो देखिए इमांदारी की बात यह
02:35कि मैं मानना पड़ेगा कि अन्याय तो हुआ है और अन्याय मात्र नहीं हुआ
02:40हुआ है उस अन्याय से जो उचे वर्ण
02:45रहे हैं उन्हें फाइदा भी हुआ है और जब उन्हें फाइदा हुआ है तो यह बात
02:50हमारी सेल्फ रिस्पेक्ट की है कि अगर हमारा फाइदा हुआ है तो अब हम स्वेक्षा से
02:55तुम्हारा हाथ थाम कर तुमको उपर उठाना चाते हैं क्योंकि हम उपर उठे थे उसमें
03:00एक एक एक एक एक अंश एक हिस्सा इस बात का भी था कि तुम नहीं नहीं
03:05नीचे रह गए तुम इतना नीचे न रहते तुम इतना उपर नहीं होते अब हम उपर आएं तो तुम भाई हो हमारे हम
03:10आद देंगे तुम भी उपर आजाओ जैसे आपने कहा कि कुछ लोग को बात बुरी लेगेगी
03:15मैं उसी पर एक मेरा जुड़ा हुआ एक सवाल है लोग कहेंगे आचारे जी बैवारे
03:20एक बात नहीं कर रहे हैं देखिए मैंनत मैंने करी इसी में फिर वह कहेंगे आर्ग्यूमेंट
03:25पर मेरिट का क्या होगा अगर मैंने मेहनत करी और मैं आ गया और किसी और को जाए
03:30जैसे आपने बताया उसके नंबर कमते फिर भी उसको वही और कुछता हूँ
03:35ये भी फिर वही अपने कैंपस हों आपस जाता हूँ
03:38तो दिल्ली
03:40का लड़का है दिल्ली का और लड़का दिल्ली का और लड़का यही प्रिब्लेज है
03:45यही प्रिब्लेज है अब यहां पर सौ तरह की कोचिंग उन दिन भी मौझूद थी
03:50एक विद्या मंदिर कोचेंग होती थी एक फिट जी होती थी और भी दोचार होती थी
03:55एक उरीसा का लड़का है यह बिहार का लड़का है हैंहां
04:00उसके पास ना तो घर में पैसा है, ना कुछ है, ना कोचिंग जैसी कोई चीज़ है, स्कूल के चीज़ है,
04:05जो टीचर्स हैं, वो भी बहुत औसत किसम के हैं, यह जो दिल्ली वाला लड़का है,
04:10यह जैई रैंक दस निकालता है, और वो जो वहां पर वो उडिसा या बिहार के,
04:15किसी पिछड़े गाओं का लड़का है, वो अपने तीसरे अप्टेम्ट में जैई रैंक दो हजाए,
04:20निकाल लेता है, आप बताईए, ज्यादा बड़ा श्रेय आप किसको देंगे,
04:25मैं तो मेरा अलग है, लेकि मैं समझे, मैं तो
04:30इसको दूँगा जो सबसे मुश्किल कंडिशन में जिसने वो हासिल किया,
04:33Your merit has,
04:35to be measured in relation to the odds you face.
04:40मेरिट कोई absolute नहीं होता है,
04:41मेरिट इस सब्जेक्टिव थेंग,
04:42तो हम क्या मेरिट की बात करते हैं?
04:45जिसको सुविधाएं ही नहीं मिली हैं,
04:47आप उसकी मेरिट क्या नाप रहे हो?
04:50वो तो,
04:51He is swimming upstream.
04:53वो बिचारा तो बहुत चाहिए है,
04:55प्रितिकूल परिस्थितियों में संघर्ष कर रहा है ना?
04:57अब यहाँ जो दिल्ली वाला है,
04:59उसको गाड़ी छोड़ा है,
05:00जोड़ने जा रही है कोचिंग तक,
05:01और गाड़ी,
05:03पिता जी की गाड़ी है,
05:04पिता जी की ही गाड़ी,
05:05गाड़ी कई बारो सरकारी गाड़ी भी हो सकती है,
05:07और पिता जी की ही गाड़ी उसको वापस ला रही है,
05:09घार,
05:10आ रहा है तो माँ उसको घोट करके दूध में बादाम और अखरोट और काजू,
05:15सब पिला रही है,
05:16उसका छोटा सा छोटा काम करने के लिए नौकर मौजूद है,
05:18अब उसकी जेई रैंक,
05:20आप कहोगे यह तो मेरिटोरियस है,
05:22इस दिस मेरिट,
05:25मेरिट क्या चीज़ है,
05:26समझना पड़ेगा न,
05:27और वहाँ पे वो बिहार का लणका है,
05:30आप कहोगे उसके पास तो मेरिटी नहीं है,
05:32तीसरे टेंट में उसकी 2000 रैंक आई है,
05:34उसकी तो मेरिटी नहीं है,
05:35उसने जिन हालातों में संगहर्श करा है,
05:38और 2000 रैंक निकार ली है,
05:40पली वाले भाई साब हैं,
05:41जो रुई के फाहे में पले बढ़े हैं,
05:44इनको आपने वहाँ डाल,
05:45दिया होता है, तो इनकी सारी मेरिट मिछोड़ जाती,
05:47तो मेरिट कोई एपसलिट चीज नहीं होती है,
05:50समझो कि इसके जीवन में क्या रहा है,
05:52उसके हिसाब से उसकी मेरिट देखी जाएगी,
05:54अब मुले मालूम है,
05:55मैं बोल करके बहुत गालियां आमंतरित कर रहा हूँ,
05:57पर कोई बात नहीं, सच्चा ही बोली जानी ज़रूरी है,
06:00और ज़रूरी नहीं कि सच्चा हमेशा आपको पसंदिया है,
06:02सच्चा ही होती है, ज़रूरी नहीं आपको हमेशा पसंदिया है,
06:05लेकिन इसको मैं थोड़ा सा और एक और इसमें जवाल जोड़ देता हूँ,
06:10फिर बहुत लोग ये भी कहेंगे कि देखिये, जवाब ये संख्या की बात करते हैं,
06:15आप ये बात करते हैं कि रेजर्वेशन की बात भी उसके साथ जोड़ देते हैं,
06:19और फिर मेरिट की भी आप लात करते हैं,
06:20आप ने जो अभ्याख्या इसमें की है,
06:21कि भाई अब तो डिसद्वांटेज हमको है,
06:24क्योंकि हमारी साथ जोड़ देते हैं,
06:25दंख्या भी कम है, उस तो जो जो जोने बावजर्वेशन मिल रहा है,
06:29अल्रेडी उनकी साथ जोड़ देते हैं,
06:30संख्या वैसे भी बढ़ते जा रही है,
06:31तो हम सिर्फ इस नोशन से कि हम अपने जोड़ देते हैं,
06:35अपर जात में हम पैदा हुए या उंची जात में हम पैदा हुए,
06:37अब हम डिसड्वांटेज में हैं, ऐसा कहने वाले,
06:40बहुत लोग मिलते हैं, इसलिए मैं आपसे सवाल पूछ रहा हुए,
06:41बढ़िया बहुत अच्छा सवाल है,
06:44जो कहते हूं कि,
06:45संख्या कम हैं, और फिर अब कोटा भी कम हैं,
06:48मैं उनके लिए खुश्खबरी लाएं,
06:50हूँ, गौवर्नमेंट जाब्स भी कम हैं,
06:55इतने कम हो गए हैं,
06:57कि उसमें इतना इतने कम होते जा रहे हैं,
06:59पॉपले,
07:00कुछ सौ नौकरियों के लिए कई करोड आवेदान आते हैं,
07:03तो हैं कि,
07:05कि इतने गौवर्नमेंट जाब्स भी उतनी छोटी सी पाई के लिए,
07:08उतने उतने छोटे इसे,
07:10चीज के लिए आप क्यों जान लगा रहे हो,
07:13आप अगर सचमुच मेरी टोरी,
07:15तो आप जाओ ना, आप जॉप क्रियेटर बनो,
07:18भई सारा जो आरक्षन,
07:20का मामला है, वो गौवर्नमेंट जाब्स के लिए ही तो है मारा-मारी,
07:23गौवर्नमेंट जाब्स बचे ही कितने हैं,
07:25तो मारा-मारी करके मिल भी क्या जाएगा,
07:28दस नौकरियां हैं और दस लाक लोगों,
07:30वो ने आवेदन दिया है,
07:31उसे 50 प्रतिश्यत अगर रिजर्वट सीट्स हैं,
07:34तो जनर्वर्नमेंट जाएगा,
07:35क्लास को पांच मिल जाएँगी,
07:37वो कोटा बढ़ गया,
07:3860% दर्व सीट्स हो गई,
07:40तो जनर्वर्नमेंट क्लास को चार मिल जाएँगी,
07:42अरे दस लाक अप्लिकेंट्स हैं,
07:43सीटें अब पांच होगी,
07:45चार हों, क्या फरक पड़ता है,
07:47इससे अच्छा ये एक ये चक्कर ही छोड़ो ना,
07:50बाहर निकलो, जॉब क्रियेटर वनो,
07:51और बोलो, मैं हर केटेगरी को नौकरी दूँगा,
07:55बोलो,
07:57खुद को गाली देने वालों से,
07:58कि तुम लोग यही बोलते थे न,
08:00कि मैं प्रिविलेश्ट हूँ,
08:01तो देखो मैंने अपनी प्रिविलेश्ट का कर्ज उतार दिया,
08:03अगर मैं प्रिविलेश्ट था,
08:05तो अब मैं नेशन के लिए जॉब क्रियेटर बन रहा हूँ,
08:08और अब मैं सब को दे रहा हूँ,
08:10मेरे उपर यही इलजाम था न,
08:12कि शताब्दियों से मेरे पुर्खों ने,
08:14जाते के,
08:15नाम पर लिया है,
08:16यही तो तोहमत लगाई जाती है,
08:18कि सहाब आप सवर्ण हों, आपने लिया,
08:20तो लिया है तो लो अब मैं दे रहा हूँ,
08:22अब मैं जाबस दे रहा हूँ,
08:24जाबस दे रहा हूँ,
08:25गौर्न्मेंट जॉब का भ्यार्थी बनूँ मैं क्यों कहूं कि मैं भी कतार में लगाऊं मुझे भी सरकारी नौगरी मिल जाए
08:30और फिर मुझे शोर मचाओं की रिजर्वेशन हो गया मुझे नहीं मिल रही मैं दूंगा ना मैं सचमत में रिटोरिया
08:35तो अब मैं अपनी मेरे डिस्प्ले करूंगा है मेरे करेंगे डिस्प्ले
08:40देखाओ अपनी मेरे डिखानी चाहिए ये कोई कोरी में चनाती नहीं दे रहा
08:45ना मैं व्यंगा कर रहा हूँ मैं चाहता हूँ ऐसा हो एक चैलेंज के तौर पे लोग लें इसे एक चैलेंज
08:50एक दाइत तो जिम्मेदारी बलकि प्रेम के तौर पर लें क्योंकि भारत राश्ट्र को आज ऐसे लोग की जरूरत
08:55है जो बस नौकरी मांगना रहे हो वो नौकरियां दे रहे हो सरकार
09:00सरकार बहुत कम नौकरियां देती है और सारी मारा मारी चल रही है
09:05कि नौकरियों के भीतर हमें रिजर्वेशन मिल जाए उन नौकरियां है यह बहुत कम उसमें रिजर्वेशन मिले कि ना मिले
09:10बहुत फरक नहीं पड़ता आपकी किताब से मैं एक कोट
09:15करना चाहता हूं ऐसे विच्चतर ये लोग कि सबसे पहले
09:20तो तुमने सद्यों तक किया है गलत आचरन किया है
09:25दुर्वेहवार किया है शोशन मानो ना इस बात को
09:30पहले तो मानने को तयार नहीं है और दूसरी बात जो अतीत में करते आए हो
09:35इच्छा तुमारी यही है कि तुम आज भी वही काम करो
09:40यह कैसे लोग है और आत्मिश्वास कूट कूट कर भरा हुआ है कि जो हम कर
09:45रहे हैं वो बिल्कुल ठीक कर रहे हैं समझाने जाओ सुधारने जाओ तो सुन
09:50सुनते नहीं हैं सुनते हैं पर बड़ा विरोध करते हैं सिर मार मार कर
09:55दिवारों को तोड़ना है इतना विरोध करते हैं अब दिवारे तो टूट
10:00लेकिन उसमें धार दिखाई देती है लहू की
10:05यह मेरी आप बीती है तो मैं यह मैं इसको थोड़ा सा
10:10समझना चाहता हूँ कि किस पर का तक्षा और क्या कह रहे हैं
10:15अरे उनी से जिनसे वो सब बाते करता हूँ जो भी कर रहा हूँ
10:18वही दिवार बनके खड़े होगे
10:20जाते हैं तो दिवारे तो मैं तोड़ रहा हूँ लेकिन अपना सर मार मार के तोड़ रहा हूँ तो टूटती दिवार
10:25कारों पर लहू की धार दिखाई देती है नहीं मानना चाहते लोग की अन्यायत्याचार हुआ है
10:30लोग कहते हैं ऐसा कुछ हुआ नहीं था कभी ना तो इत्हास पढ़ रहे ना आज़ा
10:35कड़ों पर जा रहे न तथ्यों पर जा रहे अरे इत्हास की नहीं जुननी तो आज
10:40अलग अलग जातिगत वर्गों का जो स्टेंडर ओफ लिविंग है वही देख लो ना उनका
10:45स्टेंडर्ट देख लो सब कुछ जो जो उनको सोचल एमेनिटी
10:50चीज मिल सकती हैं वह देख लो कुछ नहीं सुनना चाहते कुछ नहीं सुनना चाहते और मैं
10:55मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी से कुछ वसूल ना है मैं यह कह रहा हूं यह बात
11:00मेरी अपनी डिग्निटी मेरी अपनी गर्मा की है कि अगर मुझे मिला है ती
11:05से तो आज मैं बाटूंगा वरना पांच लोगों की रोटी
11:10चीन करके अगर मैं खा रहा हूं तो मुझे पचेगी कैसे यह बात मेरी अपनी संदगी की यह बात
11:15यह भी नहीं है कि मुझे सोशल जस्टिस करना है सोशल जस्टिस भी नंबर दो पर आता है नंब
11:20नंबर एक पर जो चीज आती है वह बहुत इंटिमेट है निजी है मेरी अपनी है वह यह कि मैं किसी करना है
11:25का हक मारकर नहीं खा सकता भले दूसरों को बाटने में मुझे भूखा रहना पड़े
11:30बिलकुल हो सकता है मैं भूखा चला जाओं पर मेरी अपनी डिक्निटी मुझे नहीं अनुमति देती
11:35कि पांच लोग भूखे हैं और शायद मेरी वज़ा से भूखे हैं और मैं पेड़ भर के खालू नहीं कर सकता है
11:40और यह बाट सिर्फ इनसानों में नहीं बाट जानवरों पर भी लागव होती है
11:43मैं किसी जानवर को भी नहीं मार के खालू है
11:45सकता भले मुझे भूखा सोना पड़े भले भूख से मर जाना पड़े यह बात मेरी अपनी है बात यह नहीं कि मुझे
11:50उन पर करोना दिखानी है उन पर करोना नंबर दो की बात है
11:52यह यह बात नहीं
11:55समझ रहे लोग सौझने को तयार नहीं है क्योंकि सबको सस्ती सुधाओं का लालच है
12:00पर इसके लिए क्या अपने आपको आध्यात्मिक तौर पर मस्मूत नहीं करना पड़ेगा
12:05है वही समाधान है और उसी के लिए तो यह है बहुत गीता
12:10मैं एक और जिस चीज सोच रहा है कि बार बार लोग बात करते हैं हम जिस तरह के दौर में
12:15में अभी गहें दोजार पच्चिस चब्विस के भारत में क्या
12:20धर्म जाती लिंक से उपर उठके
12:25भारत को आगे बढ़ाने की कोशिश करनी होगी या हम फिर गुम फिर के कौन जात हो में फस जाएंगे दोजार पर
12:30चीज की बात नहीं है दो हजार पच्चिस चब्विस दो हजार पिच्च्यासी
12:35तीन हजार पिच्च्च्यासी कुछ बाते समय के आगे बढ़ने के दो हैं
12:40इससे बदल नहीं जाती है समय आगे बढ़ता है इनसान आवश्यक नहीं है
12:45है कि समय के साथ आगे बढ़ जाए समय बढ़ा आगे इनसान आगे बढ़ा जरूरी नहीं है बिल्कुल भी
12:50जरूरी नहीं हर बच्चा जो पैदा होता है ना आज की सताब्दी में
12:55आज से 5000 साल पहले आज से 500 साल बाद हर बच्चा समझ लिए
13:00कि एक प्राकरतिक पशु पैदा हुआ है और उसके भीतर सब व्रित्तियां होते हैं कि दो
13:05दूसरों का नोच का सोटके खा लूँ यह कर लूँ आपने देखा इनसान के बच्चे और जानवर के बच्चे में कोई
13:10बहुत अंतर होता नहीं है इसलिए इनसान के बच्चे को पचीज साल तक शिक्षा देते हैं
13:15कुछ तो बात होगी न कि उसे इतना एजुगेट करना पड़ता है किसी को पचीज साल तक अगर दवाई देनी पड़ता है
13:20तो माने बड़े गहरी बीमारी रही होगी इनसान के बच्चे को पचीज साल तक शिक्षा माने दवाई
13:25देनी पड़ती है हम इतनी गहरी बीमारी लेकर पैदा होते हैं तो वो
13:30वो वो चीज हमें हमेशा चाहिए होगी कि यह जो टेंडेंसीज हैं
13:35भेदभाव की शोशन की किसी को दबा लेने की किसी से जूट बोल देने की
13:40किसी का हक मार लेने की इन सब के साथ हमेशा संहर्ष करना पड़ेगा
13:45बात आज की नहीं है और वो जो संहर्ष है सिर्फ अध्यात्मिक तल पर हो सकता है नीतिया
13:50बनाना एक तरह का समाधान है पर वोई गहरा समाधान नहीं है वर्नाथ
13:55क्या करोगे कि जो नीति निर्धारक हैं आप उनको इस सरकार से हटा दोगे
14:00लोगतंत्र है तो वोट से हटा दोगे लोगतंत्र नहीं है तो बंदूक से हटा दोगे
14:05बहुत अच्छा समधान है तो आप बोल दोगे नहीं हमें समधान ही नहीं चाहिए
14:07कॉंस्टिटूशन अमेंडमेंट कर दो यह कर दो वह कर दो
14:10नया समधान ले आदो आप यह सब करना शुरू कर दोगे आखरी बात तो यह है कि
14:15आपके भीतर जो शोशन और भेदभाव का जन्मगत बीज
14:20होता है उसको ही निकाल फेका जाए और उसके लिए होता है
14:25में उसके लिए दर्शन होता है उसके लिए विदान्त है उसके लिए बहुत धर्म है उसके लिए भगवत
14:30गीता है मेरा अन्तिम सवाल इस पर आपसे है आप
14:35कुछ पंक्तियों में आप जाती को समाजी करें तो
14:40चात्मक प्रेम और प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन भी बता रहे हैं
14:45तो क्या जाती को मजबूत करना भारत को या किसी भी देश को
14:50रशनात्मक वज्ञानिक और प्रेम में समाज बनने से रोकता है और अगर ऐसा
14:55करता है तो उसका सिलूशन क्या है
15:00रोकता है यह आज के भी जो यंग कपल्स हैं यह रोमांस शुरू करने से
15:05पहले जाती fix कर लेते हैं
15:10इसे के तो प्रेम विवा करने जा रहे हैं पर प्रेम भी इनको
15:15अपनी जाती और गोत रेजब देखके होता है
15:17कहां से प्रेम आ जाएगा आप
15:20एक बहुत fictitious चीज को जिन्दगी के center पर रख रहे हो
15:25ऐसी falseness ऐसे fiction के साथ प्रेम जैसी असली चीज कहां से
15:30का से आ जाएगी कि विदान की अभी मैंने बात करी हमारे उपनी शुर्ण
15:35वालू में वह क्या वोलते हैं तो वहां पर शिश है गुरू से प्रश्न कर रहा है बताओ जाती क्या है
15:40पताओ जाती क्या है तो गुरू कहते तीन बाते होती है भाई
15:45करीर होता है मन होता है और सक्ते होता है जिसको
15:50आत्म बोलते हैं आत्म बोले आत्म तो अजात है तो उसकी तो कोई
15:55जाती होगी नहीं वहीं जो किताब के शीरशक में आजात की क्या आजात जी आजात वो जो
16:00आत्म है उसका कभी जन्म ही नहीं होता है नम्रित्य होती हो आजात है जब वह आजात है तो उसकी तो कोई जाती
16:05यह गुरू का उत्तर है उसी तरह शरीर है शरीर सबका एक जैसा है एक आदमी का खून
16:10दूसरे को चड़ा देते हो एक मर जाता उसकी आँख निकाल के दूसरे को लगा देते हो एक का क्लिवर एक की किड़नी दूसरे
16:15में लगा देते हो तो शरीर की भी कोई जात नहीं है नहीं तो ब्लड ट्रांस्प्लांट ही नहों पाता हूं
16:20आत्मा का जन्म ही नहीं है तो जात कैसी और शरीर की कोई जात होती नहीं
16:25तो यानि जाते फिर चीज क्या है बोले जाते मन की चीज है और मन माने मान से
16:30कलपना जाते कालपनिक है हमारा धर्म स्वें बोलता है कि जाती है
16:35कलपनिक बात है अब जो इस कलपना में जीएगा वह असली जीवन कैसे जीएगा इमेगा
16:40आजिनेशन और रियालिटी साथ साथ तो चल नहीं सकते ना अब मैं आपको आप सामने बैट
16:45हो आप इनसान कैसे हो मुझे दिखाई ना दे मैंने पहली चीज यही पता कर ली कि आपकी जात
16:50क्या है मुझे कुछ नहीं दिखाई देगा कुछ भी दिखाई नहीं देगा जिसकी आख में इन सब
16:55कुर्वा ग्रहों का परदा आ गया उसे सचाई कभी दिखाई नहीं देगी वह बड़ा एक आधा धूरा
17:00दुन्धलके में जीवन जीएगा और दूसरों को भी बहुत कश्ट देगा वो तो
17:05यह जो डिसकाशन हमारा रहा इसमें दो चीज़े कम से कम मुझे समझ में आई
17:10एक जो एफर्मिटिव आक्शन या जिसको सुधार की हम जो बात करते हैं क्योंकि
17:15कुछ जातियों के आधार पर लोगों को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ा है वो अपमी जगा चलेगा दूरे
17:20दूसरा आपको अध्यात्म के अंदर जाके अपने अंदर सोचने के कम से कम जातियों के बंदर
17:25संधन से मुक्त होना पड़ेगा शायद तब ही जाकर पूरी तरीके से हम किसी भी लोगों को किसी भी जातिके लोगों को
17:30खटा एक जगा ला पाएंगे और इसमें एक बात मैं और जोड़ना चाहूंगा अध्यात्म की जरूरत
17:35सिर्फ उनकों नहीं हैं जिनकों हम कह रहे हैं कि इनको जातिकत भेद से लाब हुआ है
17:40अध्यात्म की जरूरत उनको भी है बराबरी की और ज्यादा है
17:45जो कहते हैं कि या जिनके साथ सचमुच दुर्वेवार हुआ है और जिनका नुक्सान हुआ है
17:50हुआ है क्यों दो वजहों से एक तो उनके मन में कई बार हीन भावना आ जाती है
17:55तो तुम हीन नहीं हो यह बात तुमको विदान तुम
18:00बताएगा और गीता बताएगी किसी हालत में तुम हीन नहीं हो तुम्हारे वर्ण से रंग से
18:05जन्म से जात से तुम हीन नहीं हो गए लिंग से तुम हीन नहीं हो गए पहली बात और
18:10एक नई चीद और आई है विक्टिम हुड मैं विक्टिम रहा हूं
18:15अब मैं विक्टिम रहा हूं तो मुझे कॉंपेंसेशन चाहिए जो वंचित वर्ग रहा है
18:20दलित वर्ग रहा है उसमें भी अब एक हिस्सा ऐसा उभर के आ रहा है जो एग्रेसिव हो रहा है
18:25यह बोलके कि मैं विक्टिम हूं तो मुझे एग्रेशन का हक है
18:27तो अध्या तो
18:30वहां भी बहुत जरूरी है ताकि तुमको पता चले कि अगर तुमने विक्टिम होने को अपनी पहचान बना ली
18:35तुम अपनी जिन्दगी खराब कर रहे हो अपनी तो इसलिए अध्या तो सबके लिए जरूरी है उनके लिए भी जनको
18:40प्रिविलेश क्लास कहते हैं उनके लिए भी जो अप्रेस्ट रहें और जिनमें भावना
18:45इंफिरारिटी आ गई है और उनके लिए भी जो ब्रेडिकलाइज हो रहे हैं अपने आपको विक्टिम बोल
18:50होते हैं और अब अगर से होना चाहते हैं अध्यात उनके लिए बहुत जरूरी है अध्यात में सबके लिए बहुत जरूरी है
18:55यही मार्ग है और हर तरह की जाती की बेडियां चाहे आपने उन्हें पहनाया हो चाहे आप उन्हें तोड़ना चाहिए
19:00दोनों के लिए यही आवश्यक होगा बहुत बहुत शुक्रिया हमसे बात करने के लिए धन्यवाद
19:05कि झाल यही आपने के लिए
19:10झाल
19:15झाल
19:16झाल
19:16कर थार
19:19कि अँए वडना
19:20कर दो
19:23कि अँए
19:27रिक एंदिया
19:29झाल
19:30कि अजए
19:32घुए
19:34कि अजए
19:36झाल
19:39झाल
19:41से विप
19:42का झाल
19:43झाल
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