00:00प्रणा महाचार जी, मेरा प्रस्थन है, एक तरीके का जो आरोप है, जो संस्था कोपर और आपको उपर में बार बार लगते हुए देखता हूँ कि
00:09आप भी एक तरीके का कल्ट है जो बिल्ड कर रहे हो
00:13और उसके पीछे जो वो तर्क दे रहे होते हैं
00:16उसमें यह होता है कि जैसे भी हाली में
00:19पूने लिट फेस्ट था तो वहाँ पे किलोमीटर से लंबी लाइन लग गई
00:22इसको प्रमाड के रूप में प्रस्तूत करते हैं कि
00:25संसा भी तो यह जो काम कर रही है एक तरीके का कल्ट ही तो है
00:29कल्ट चलाने के लिए जो चीज़ें चाहिए होती है
00:33वो मेरे पास है ही नहीं
00:35धर्म के क्षेत्र में कल्ट बनता है चमतकार से
00:39सिद्धी से मनो कामना पूर्ती से
00:42ना मेरे पास कोई इनलाइटनमेंट है
00:45ना सिद्धी है ना चमतकार है
00:46ना आपकी कामनाई यहां पूरी हो रही है
00:48मैं आपको परलोग का लालज दिखा रहा हूँ
00:51मैं आपकी स्वर की टिकेट काट रहा हूँ
00:53मैं आपकी भूदबाता उधार रहा हूँ
00:55अल्ट कहां से बन जाएगा
00:58वो किलोमीटर लंबी लाइन पुने में इसलिए नहीं लगी थी
01:02कि मैं वहाँ पर उनको पैसे बाट रहा था
01:04इसलिए नहीं लगी थी कि मैं कोई फिल्म स्टार हूँ
01:07और मैं बहुत अच्छा दिखता हूँ
01:09और जबरदस्त बॉड़ी है और क्या एक्षन करता हूँ
01:12वो इसलिए लगी थी क्योंकि उनको वास्तव में जिन्दगी में कोई फायदा हुआ है
01:18वो उसका थेंक्यू बोलने के लिए खड़े हुए थे
01:20इसको कल्ट नहीं बोलते इसको ग्रैटिच्यूट बोलते है
01:24एक छोटा वच्चा होता उसको भी सिखाते हैं
01:27कि कोई पानी का एक ग्लास भी दे दे तो उसको थेंक्यू बोलो
01:30मैं तो फिर भी जिन्दा खड़ा हूँ तुमारे सामने
01:32दस साल से अपने सर के उपर जहां सोता हूँ
01:36कभीर साहब का इतना बड़ा पोर्ट्रेट लगा रखा है
01:39वो तो जिन्दा भी नहीं थे
01:41मुझे उनके बस वचन मिले उनकी बात मिली है
01:44और तब भी मैं कितना भी शुक्रियादा करूं नाकाफी है
01:47कितनी भी मैं कृतक्यता व्यक्त कर लूँ
01:50पूरी नहीं पढ़नी
01:51कल्ट माने होता है परस्नालिटी वर्षिप
01:53जहां सारी सीखी यही है कि परस्नालिटी मिथ्या है
01:57और आत्मा सत्य है
01:58वहां परस्नालिटी वर्षिप कहां से आ जाएगी
02:01मैं खुद नहीं चाहता कि आकर के सर जुकाओ, कोई पाउच होता है, जितना संभभ होता है, मैं उसको पगड़ करके रोक लेता हूँ
02:07लेकिन मेरा आपसे एक रिष्टा है, इंसान का इंसान से एक रिष्टा है, उस रिष्टे में किसी से कुछ मिल रहा है, किसी के प्रति प्रेम दिख रहा है, तो क्यों नहीं जाकर के उससे गले मिल सकते हो, ये कल्ट कैसे हो गया, ये अंधभक्ति कैसे हो गई?
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