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00:00कर दो
00:05कर दो
00:10कर दो
00:11कि अरुद सोगाद या जालिये कि इसमस सामें नाख़े हैं
00:15नहीं तो अर्जुन में तो निर्ड़ा कर लिया था, दनुष नीचे रख दिया था, मैं नहीं लड़रा, और कृष्ण से नो ते नहीं माज़ा था।
00:20अर्जुन करेती नहीं लड़रा, कि क्रिश्ल को अपना मेरने घोशित कर रहे थेया, सुना रहे थे, मैं नहीं नहीं तो नहीं नहीं तो नहीं तो नहीं तो.
00:25अरजिन ने बस एक काम कराया
00:27जब कृष्ण बोल रहे थे
00:30अरजिन को कुल श्रे बस इस बात का है
00:35नहीं तो अरजिन ने तो बाजी को निरने करी दिया था अपनी तरफ से
00:38हम सब अपनी बाजी का
00:40कर चुके हैं अपनी तरफ से और हम स्वेम हकमी बाजी नहीं पलट पाएंगे समझेए
00:45इस बात को तो सब को कृष्ण चाहिए जीवन में और ठीक अपने सामने चाहिए
00:50उतने सामने चाहिए जितना सामने सारत ही होता है रथी के
00:55क्रते हैं
01:00हम सारत कुपक शेम्भर कर चता हता हम आगले पहन कर भंपने
01:06मैं जितना सामनी जंपना से हमी है
01:07को थेיד, गो यदेमना सान्धक्त, वितना सामना से कुछ चाहिए
01:12कर दो擁द, क्सलितना से
01:17अभर के हैं अभर के जामनो।
01:20तरत रम चेखशना से
01:22मेरा सवाल ये है कि बहुत सारी कहानियों में फ़र एक्जम्पल जैसे राम और कृश्ट
01:27रिश्ट की कहानी हम पढ़ते हैं या कोई और भी इन
01:32अवतारों को बच्पन से ही बहुत ऐसे दिखाए हैं
01:37जाता है कि इन में बच्पन से ही सारे गुण थे या यह बच्पन से ही
01:42अच्छे थे निपुन थे हर कार्य में तो कहीं न कहीं जब हम इनकी
01:47पूजा करते हैं तो मुझे ऐसा लगता है कि हम वो गुण अपने में
01:52धारण करने से कहीं न कहीं वंचित रह जाते हैं क्योंकि हमें लगता है कि यह
01:57पहले से ऐसे थे फ़र एक्जाम्पल आपका भी जब मैं डिस्क्रिप्शन
02:02पढ़ रही थी तो उसमें लिखा हुआ था था यह एक्ष्टर ओडिनरी
02:07चाइल राइट राइट विग्निंग तो मुझ ऐसा लगता है दाइट
02:12मतलब मेरा क्वेशन यह है कि क्या
02:17एक एक्ष्टर ओडिनरी स्टेट डेवलाप की जा सकता है
02:22ती है बिकर्स इन मॉस्ट अफ दे केसे जैसे हम
02:27दूसरों के बारे में भी पड़ते हैं तो बच्चपन से ही इन में बहुत सारे ऐसे
02:32गुर्ण दिखाये जाते हैं तो वट वर्ट वर्ट वर्ट यह लाइए
02:37आपी लाइएं डियु रव झालिए मॉस्ट विलाब टे
02:42या राम या माहा भारत के बारे में पढ़ते हैं तो
02:47क्या इनका कोई एतिहास से डजिट है वसम हिस्टॉरिकल से
02:52सकतर्स किपार अलुकर से ऑनलने तो से अले से प्राइब प्राइब तो
02:57यह प्राइब प्राइब ड्यान तो
02:57तेंक यू देखिए दोनों तरह की बाते मिलती हैं कताओं में
03:02ये तो मिलता है कि बच्पन से ही विशेश थे
03:07लेकिन साथी साथ जो साधारण मानवी एक गुण है
03:12हैं वो भी अवतारों के वर्णन में खूब देखने को मिलते हैं
03:17तो आप नहीं कह सकते कि आपको अवतारों के वर्णन वर्णन में खूब लगर एक भी बाते हैं
03:22में बस विशिष्टताएं ही मिलती हैं.
03:27सीता खो गई है, राम रो रहे हैं.
03:32इसमें आपको मानुएता नहीं दिख रही है, यह तो कोई भी साधारन पतिया प्रेमी करेगा.
03:37कुछ जान नहीं पा रहे हैं, तो इसमें दिख रहे हैं.
03:42हिसानों को तो छोड़ दो, पेड़, पौधों, पक्षियों से पूछ रहे हैं.
03:47तुम देखी सिता मरिगननी, इसमें आपको प्रेशन दिख रहे हैं.
03:52कौन सी सिद्धी दिखाई दे रही है?
03:55कोई विशेश सिद्धी और गयरा होती, तो आँख बंद करें.
03:57करते पता चल जाता रावन्डे क्या है?
04:02यहां तो उनको पूरी तरह मानविय ही दिखाया गया है ना, अगर मानविय नहीं दिखाएंगे
04:07तो अवतार की जो
04:12पूरी प्रक्रिया है वो बाधित हो जाएगी
04:15अवतार क्या होता है
04:17अवतार वो होता है जो बहुत कुछ आपके जैसा है
04:21लेकिन आपके जैसा
04:22होते हुए भी वो संकल पर सहस करता है
04:25आत्मा जैसा हो
04:27होने का उसको अवतार बोलते है
04:29उसमें दोनों चीज़े पाई जाती है एक साथ
04:32अवतार आदर्श नहीं हो सकता
04:34आदर्श का क्या मतलब होता है
04:36आदर्श का मतलब होता है कि एक विचार
04:37है कल्पना है और उसी कल्पना के तलप उसका निर्मादा
04:42कर दिया गया है नहीं विचार कोई तभी हो सकता है जब उसमें आप
04:47को कुछ मानव सुलब गुण और दुर्बलताएं भी देखने को मिला
04:52अगर आपको कोई ऐसा उतार मिलता है जिसमें आपको कोई कमिया कोई खामिया
04:57नजर नहीं आ रही है तो अवतार है यह नहीं अवतार का मत्राइब
05:02मतलब है कि एक साधारन मनुष्य में जो भी गुण होते हैं
05:07दोश होते हैं विकार होते हैं सीमाएं होती हैं वो सब उसमें थी
05:12उनके होते हुए भी देखो वो कैसे जीए जीए जीए जीए जीए जीए जीए जीए जीए जीए
05:17जीए जीए क्या कर गया तो अवतार का स्रिजन ही किया जाता है आपको
05:22को प्रेरणा देने के लिए क्या आप ही के जैसे थे आप ही के जैसे थे लेकिन दो कितनी दूश
05:27तक निगल गए क्रिश्ण युद्ध में पराजित होने को तो
05:32तैयार खड़े हैं यह साधारण मानवियता नहीं है क्या
05:37बोलो क्रिश्ण उस छेत्र की
05:42जितनी गोपियां हैं महिलाएं हैं उन सब के साथ
05:47प्रसन होकर के प्रमोद कर रहे हैं क्लिडा कर रहे हैं
05:52इसाधारण मानवियता नहीं है क्या पौरानिक कथा यह कि गोपियां
05:57नहीं होपियां नहां रहे हैं वो पेड़ पर चड़ गए हैं या फिर उनका वस्त्र इधर उदर चुपा रहे हैं
06:02इसमें आपको दिविता क्या दिख रही है यह तो आपको साफ साफ बताया जाए है
06:07कि जैसे कोई भी आम व्यक्ति होता है उनमें वो सब भी था लेकर उसके बाद
06:12भी वो गीता तक पहुच गए क्या आप भी कर सकते हो तो क्रिष्ण
06:17का चरित्र फिर एक चनौती की तरह आपके सामने रखा जाता है
06:20भारत
06:22साथ में यह कभी करा ही नहीं गया कि बोल दिया जाए कि हो तो भचपन से अनूठे थे हाँ उनके अनूठे पन की भी कुछ
06:27प्रहानिया मिलती हैं जैसे कि यह कि छोटे थे तभी ऐसे उठा लिया गोवर्धन को
06:32को उंगली पर जब वैसी कहानिया मिलती हैं तो
06:37में कहता हूं भाई उसका प्रतीक समझो अर्थ समझो तीन चार साल पांच साल
06:42पहले भागवत की कहानियों पर पूरा कोर्स करा था जिसमें सारी कहानिया ली थी
06:47और एक एक का क्या प्रतिकात्मक अर्थ होता है वो खोल करके समझाया था
06:52कालिया नाग है कोई भी साप ऐसा तो होता नहीं जिसके इतने
06:57सारे सर हो ना कोई साप ऐसा होता है जिसने समराज बसा रखा हो जमुना के भीतर तो
07:02कालिया कहें का प्रतिक है कालिया दहन की पूरी क्या है तो यह सब
07:07लिकिन अगर आप यह कहेंगी कि सनातन धारा में आवतारों को
07:12बिलकुल पूर्ण और सब विकारों से परेदाए तो
07:17दिखाया गया है तो यह बात तो तथ्यात्मक नहीं है एक्दम नहीं है
07:23आपके आवतार तो क्रोधित भी होते हैं
07:26रोते हैं
07:27मोहगरस्त भी होते हैं
07:29जितनी चीजें एक आम आदमी को परहावित करते हैं
07:32वो सारी बातें एक आवतार को भी प्रभावित करती हैं
07:36राव
07:37जानते हैं नहीं थे
07:38क्या कि सुर्णमर्ग नहीं होता
07:40तो कैसे चल दिये
07:42अगर राम त्रिकाल दर्शी ही दिखाए जाते तो फिर ये भी नहीं होते हैं
07:47ही दिखाए जाता ना कि सीताने का कि ले आओ और चल दिये
07:51और रहे हैं
07:52कोई यदि किसी को आप यदि तरिकाल दर्शी दिखाना चाहेंगे
07:57हाँ तो क्या आप यह दिखाएंगे तो क्या आप यह दिखाएंगे
08:02कि स्वर्ण मुर्ग लाने के लिए चल दिया ये तरिकाल दर्शी का काम तो नहीं है ये तो एक साधारन
08:07मानविये कृत्य है कि पत्नी ने कुछ आगरह करा और पति उसको लाने के लिए निकल पड़ा
08:12सी ताओ़ा
08:17तक आभी फिर वैसे ही है पहले तो वह पती को वहां भीज रही है फिर लक्षमन ने
08:22मेरे खावी खीच दी है तो जान नहीं पा रही है कि वह सामने जो खड़ा है वह भिक्षू नहीं है
08:27रावण है तो वह रिखा का उलंगन कर गई है तो वह रिखा का उलंगन कर गई है
08:32तो सबका चरित्र ऐसे ही दिखाया जाता है
08:37लक्षमन को शक्ति लग गई है राम क्या कर रहे है राम को अगर आप
08:42यही बोलोगे सीधे कि विश्णों ही तो है राम तो फिर तो यह भी दिखाया जा सकता था कि राम ने क्या करा
08:47आसी लक्षमन को ठीक कर दिया
08:52ठीक कर दिया क्या ठीक नहीं कर रहे हैं वो तो रो रहे हैं वो कह रहे हैं अब मैं वापस जा कर दिखाया
08:57कि माताओं को क्या मुख दिखाऊंगा यह भावना कि मैं वापस जाके माओं को
09:02क्या मुख दिखाऊंगा कि लक्षमन कहा है लक्षमन को कहा छोड़ा है यह तो एक साधरन मानविय भावना
09:07है ना हर बड़े भाई में होती है आप घर के किसी छोटे को साथ ले करके चलो और उसको
09:12को चोट लग जाए कुछ हो जाए तो यह भाव आता है ना कि अब घर पर क्या जवाब दूँगा राम में भी भाव
09:17आ रहा है तो सनातन धारा ने अपने आउतारों को
09:22अपने वड़े पास का रखा है वही प्रेम की बात दूर का रखा नहीं है
09:27नहीं बहुत ज्यादा कि सीता राम से क्या मांगती है कि ती
09:32और राम भी क्या देते हैं उनको वचन
09:37सीता एक तुम ही रहोगी दूसरी नहीं यह तो एक साधार
09:42पति-पत्नी में भी होता है ना पत्नी हमेशा क्या चाहती है एक ही रहे
09:47सीता वी एक है रहे
09:52और राम
09:57आप कितने यह धारन खोज लोगे आप खोजने निकलो ना आपको दिख जाएगा कि यहां वो
10:02आधर्श कथा वाला मामला है ही नहीं
10:05कि एक सुपर
10:07सुपर हीरो पैदा हुआ और वो जिन्दगी भर बस सुपर हीरो वाले ही काम करता रहा
10:11ऐसा कुछ भी नहीं है
10:12बलकि इसी लिए इतने विवाद होता है
10:17होते हैं अवतारों के चरित्र पर इतने विवाद इसी लिए होते हैं
10:21अगर उनको आधर्शी दिख लिए
10:22इतने दिखाया गया होता तो फिर कोई विवाद होई नहीं सकता था
10:24पर चूँकि उनमें जान बूजकर इतनी तॉप
10:27तुटियां दिखाई गई है इसी लिए उंगली उठाने वालों को मौका मिल जाता है
10:32उंगली उठाने वाले कहते हैं देखो राम के चरितर में ये तुरूटी है भाई वो तुरूटी अकस्माद
10:37नहीं है उस तुरूटी का हुना आवश्यक है तुरूटी का हुना आवश्यक है
10:42तभी तो राम आपके निकट आप आएंगे न तभी तो आप कह पाओगे कि अच्छा मेरी
10:47यही जैसे हैं फिर भी महान है तो मैं भी महान बन सकता हूं
10:52क्या आप कहते हैं अरे धोबी की बात पर सीता को घर से निकाल दिया
10:57कि बेशक हम इस बात पर चर्चा कर सकते हैं
11:02बहस कर सकते हैं कि ऐसा करना ठीक नहीं था सीता गर्वती थी धोबी ने का रहे धोबी को बुला के बात चीत कर ले
11:07थे दो भी ही तो है कुछ समझा दो उस बचारे को
11:12बात मान जाता वो बैचारा भी तो वस वो भी रुष्ट था क्यों कि उसकी अपनी पत्नी का
11:17कहीं पर आ गई थी
11:22कृष्ण की मृत्यों कैसे दिखाईए
11:26एक साधारण कोई अखेटक है
11:31वो मारता है तीर उनके पाउं में लगता है मर जाता है
11:34मृत्यों भी अत्य साधारण दिखाईए
11:36जैसे एक आम आदमी की मौत होती है वैसे दिखा दिया इनकी भी हो गई
11:39अब इस बात से
11:41आपको उर्जा मिलनी चाहिए
11:46समझ रहे हो बात को
11:51हनुमान जा रहे हैं संजीव नी लाने
11:53वो खोश ले रहे हैं तुरंट कहां है कहां है
11:56उन्हें कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है
11:58तो क्या कर रहे हैं फिर कह रहे हैं चलो सब कुछ ही लें
12:01चलते हैं जो कुछ होगा वहाँ पर वैद जी खुदी देख लेंगे
12:06हर चरित्र गल्तियों पर गल्तियां कर रहा है
12:10और वो जब जा रहे हैं तो
12:11नीचे से भरत देखते हैं कहते हैं यह देखो
12:13यह कुछ चमकता हुआ कुछ बड़ा भारी पत्थर लेके जा रहा है जरूर
12:16यह राक्षा से और लंका की तरफ जा रहा है तो यह जरूर
12:20लाम लखन को मारने के लिए
12:21जा रहा है तो मैं इसका काम ही तमाम कर देता हूँ वो नीचे से उसको मार देते हैं बान
12:26हर चरित्र गलतियां कर रहा है सब गलतियां कर रहे हैं क्यक्यी गलती कर रही है
12:31जशरत गलती कर रहे हैं सब गलतियां कर रहे हैं
12:36भारत को ये इनसेक्योरिटी असुरक्षा कभी रही ही नहीं
12:41कि अपने महानायकों को परफेक्ट दिखाओ
12:46दिखाने की जरूरत अभी पड़ती है जब तुम भीतर से डरे हुए हो यहां उनको पूरा
12:51मानवी यह दिखाया गया है सब मानवी है हनुमान जी भी मानवी है लक्षमण जी भी मानवी है उनको गुस्ता बहुत आज
12:56जाता है राम मानवी है सीता मानवी है सब मानवी है को
13:01कौन नहीं मानवी है कृष्ण मानवी है और बता कौन से होतायर की बात करनी है यह तो यहां तक हुआ है कि
13:06आवतारों को शराब भी जहिलना पड़ा है आवतार है जा करके कोई रिशी बैठे हुए थे उनको
13:11को परिशान कर दिया रिशी बोल रहा है मुझे को परिशान कर रहा है जा तो 200 साल तक भटकेगा
13:16कि अब उतार हैं भटक रहे हैं कि देवताओं को तो तो
13:21पुराणों में हर चौथे पन्ने पे शराब मिल रहा होता है
13:26अब है देवता लेकिन कहीं कि अब है देवता लेकिन कहीं
13:31कोशिश नहीं कहीं है यह उनको दूज का धुला दिखाने की रिशी बैठे हुए हैं देवताओं
13:36लोग घुज गए उनकी पत्नियों के साथ मज़े कर रहे हैं
13:41यह दिखाने के लिए बहुत मजबूत चाहिए
13:46बहुत सेक्योरिटी चाहिए भीतर नहीं तो आपको यह बात तो आधाओं
13:51अगर ऐसा कुछ है भी तो छुपा देते
13:56क्यों नहीं छुपाया क्योंकि छुपाने कोई जरूरत नहीं है क्या छुपाएं
14:01मानव ऐसा ही है छुपाएं क्या छुपा करके तो बेवानी हो जाएगी इसलिए नहीं छुपाया
14:06अगर नहीं है
14:11देवी पारोती जाती हैं, देवी लक्षमी का महल देखती हैं, उनको इरिशा हो जाती है
14:16उनको इरिशा हो जाती है, उनको इरिशा हो जाती है
14:19यों कहती है अरे इसका इतना बड़ा महल है तो मुझे
14:21वहाँ पत्थर पे पहाड पे बैठाए रहते हो महादेव यह तुमारा ठीक नहीं बिलकुल
14:26वो देखो वो मिसेज विश्णू
14:31जजए पे वो मिसेज बिलकुल
14:36उनका सब कुछ कितना सुंदर है और कितना भव्य है कितना अलंकृत है
14:41वहां सब कुछ बढ़ियां बढ़ियां है और तुम मुझे बढ़ियां है
14:46पत्थरों पर बिठाने के लिए तो फिर क्या करते हैं
14:51शिव शिव बड़ा भारी सोने का महत्ता है
14:56देहल बनाते हैं कि लो और पारोथी एकदम प्रस्ट वोगाज़ां आशी बढ़ियां
15:01सन्न हो जाती है कि देख लक्षमी यह साथ
15:06साधारन मानवी साधारन इस्त्रयान भाव नहीं है सब इस्त्रयान भाव नहीं है
15:11पुरियों में होता है पुरिशों में भी होता है छुपाया नहीं गया दिखा दिया गया फिर कहानी
15:16यह जोड दी गई कि वही जो महल बनाया गया था वो सोने की लंका हो गई और फिर रावण
15:21को मिल गई एक दिन एक ब्राहमन आया जब सब हो गया तो मांगने आया वो
15:26इतना बढ़ी आपने बनाया है कुछ हम मांगेंगे तो देंगे शिव से बोला शिव बोले हाँ
15:31बताओ आज तो अच्छा दिन है पारुती बहुत प्रसंद है बहुत दिनों के बाद बताओ क्या मांग रहे हो
15:36तो बोला है
15:41करिए यह जो आपने पूरा इतना विशाल महल बनाया है सोने का यह हम को दे दीजिए
15:46तो पारो ती फिर
15:51वो लिए देखो यह दानवीर
15:56बड़ी मुश्किल से तो भी बनाया वो भी अबदान कर दिया वो लेकर चला गया वो रावन का पिता था
16:01वो फिर रावन को मिल गई हो लंका तो इस तरही के से कहानिया आपस में एक
16:06एक पूरे नेटवर्क की तरह एक जाल की तरह गुत्थम गुत्था हैं
16:11वो बनी ही इस तरीके से गई है कि एक चीज को याद करो तो दूसरी चीज आ जाती है
16:14दूसरी को याद करो
16:16तो चौथी आ जाती है इरादा क्या इरादा ये कि तुम भूलने नहीं पाओ
16:21एक चीज से दूसरी चीज जादा जाए दूसरी से तीसरी तीस जादा जाए अब हनुआन मिलते हैं रामायन में
16:26यहाँ अभी हम गीता पड़ रहे हैं तो वहाँ पर बोल रहे हैं कपी धोज
16:31अर्जुन के रत पे भी उपर हन्वान बैठे हुएं कपी धोजे
16:36हर चीज को दूसरी से जोड़ दिया गया है बड़ी मेहनत की गई
16:41ही है मेहनत यह की गई है कि इनसान कभी भूलने न पाए चप्पे चप्पे पर भगण
16:46भगवान को बैठा दो प्रकृति के हर तत्तों में भगवत
16:51करता को स्थापित कर दो ताकि तुम भूलने न पाओ कुछ नहीं भूल सकते तो
16:56पीपल के पेंड का ये दैवी महत्तो है बर्गत का दूसरा है नहीं का तीसरा है
17:01आम का चौता है जामून का पांचवाँ इमली का भी है
17:06तो है ये नारियल का तो पका है
17:11भूलने न पाए आदमी भूलने न पाए कोई पेड़ो कोई पौधाओ कोई जानवरो कोई जगाओ तुम जगाओ
17:16जहाँ जाओ वाँ तुम्हें भगवाने आदा जाए
17:21यह है जो पूरी तरकीव विखसित की गई यह पूरी प्रणाली बनाई गई यह विवस्था है
17:26ताकि आम आदमी अध्यात में स्थापित रह सकें
17:31तुम्हें आदिए
17:36दूसरी बात क्या पूची थी
17:41हाँ कि रामान महां भारत और अधिहासिक कुछ है कि नहीं देखो यह
17:46कि जो चरित रहें यह इतिहास में निश्चित रूप से हुए थे
17:50कि
17:51लेकिन किया क्या जाता है तो समझो
17:55आवतारवाद क्याता है
17:56क्या है
17:57आवतारवाद यह है
18:00आवतारवाद क्याता है
18:01कि जो शेष्ठतम है उसको प्रतीक बना दिया है।
18:06कि जाता है किसी समय पर जो शेष्ठतम है मनुशियों में जो शेष्ठतम है।
18:11उसको प्रतीक बना दिया जाता है परम का।
18:16इसका मतलब नहीं हो परम है लेकिन उसको परम का प्रतीक बना दिया जाता है।
18:21मैं ऐसे देता हूँ कि जैसे उपर से जाता है।
18:26सेटिलाइट होता है।
18:28उपर सेटिलाइट होता है।
18:30नीचे फोन होता है।
18:31लेकिन सेटिलाइट की चीज तुमारे फोन तक है।
18:35लेकिन सेटिलाइट की चीज तुमारे फोन तक है।
18:36इसके लिए एक मुबाइल टावर चाहिए।
18:38वो मुबाइल टावर सेटिलाइट जितना उचा नहीं है।
18:41सेटिलाइट तो बहुत हुचा ही पर है।
18:43मुबाइल टावर उतना उचा नहीं है।
18:45लेकिन जमीन पर चाहिए।
18:46पर जो बाकी चीजें हैं या इमारतें हैं उन से ज्यादा उचा है वो।
18:51तो जमीन के तल पर उच्चतम है वो।
18:55और उसके उच्चतम हो।
18:56होने का लाव यह है कि वो सेटिलाइट से तुमको जोड़ पा रहा है, कनेक्ट कर पा रहा है।
19:00अवतार ऐसी चीज़ है।
19:01मुबाइल टावर।
19:03तुम अगर यह सोचोगे कि वो अनन्त उचाई का है तो उसके वो।
19:06उसकी अनन्त उचाई नहीं है। उसमें भी कमिया है।
19:08उसकी भी उचाई सीमित है।
19:10लेकिन सीमित उचाई है।
19:11चाहिए कि बावजूद उसका फाइदा बहुत है।
19:13क्या फाइदा है? कि वो तुमको उपर से जोड़ दे रहा है।
19:16तो राम और कृष्ण निसंदे है।
19:21एतिहासिक चरित्र है।
19:23उनका जन्म हुआ।
19:25वो जिये।
19:26ने काम किये।
19:27फिर उनके मृत्यू भी हुई।
19:29लेकिन उनके
19:31बारे में जो कहानिया प्रचलित हैं
19:33वो कहानिया निसंदे हैं अतिशयोगते हैं।
19:36और वो जो अतिशयोगते हैं
19:38वो अज्ञान में नहीं की गई है।
19:40वो अतिशयोगते हैं।
19:41अतिशयोगते हैं विज्ञान में की गई है।
19:44वो अतिशयोगते हैं।
19:46अतिशयोगते हैं।
19:46अतिशयोगते हैं।
19:51तुम्हें को अच्छा लगता है तो तुमने उसका पूरा गुबारा फुला दिया अंकार वश
19:56या मोह वश। उनका जो चरत्र
20:01स्रिजित किया गया है
20:03वो बहुत सोच समझ के किया गया है
20:06ताकि आने वाली पीडियां कुछ सीख ले सके
20:08तो
20:11राम है राम एक व्यक्ति है और राम ने अपने समय पर कुछ बहुत अच्छा किया है
20:16करा कोई बड़ा सुन्दर जीवन जिया
20:18अब
20:21तो इतिहास लिखना उद्देश नहीं था भारत में इतिहास कभी लिखाई नहीं गया
20:25भारत
20:26ने समय को बहुत मानने था कभी नहीं दी गई
20:30कि आपको कभी नहीं पता
20:31चल पाएगा ठीक ठीक कि कहां पर सीमा थी किस
20:36जगहे पर जनम था कहा मृत्यू थी कौन सी इस्वी थी यह सब बातें आपको नहीं पता चलेंगी
20:41आप
20:43आप
20:45आप
20:47आप
20:49आप
20:51आप
20:53आप
20:54आप
20:56आप
20:57आप
20:58आप
21:02आप
21:03आप
21:04आप
21:05आप
20:41भारत में महत तो इतिहास का नहीं था भारत में महत तो मुक्तिका था
20:46यह दो अलग-अलग केंदर हैं जीने के
20:49जो इतिहास का केंदर होता है
20:51वो किसको महत दे रहा है वो तत्थे को महत तो देता है ठीक है इतिहास में तत्थे वर्णित किये जाते हैं
20:56बिना किसी तरटीक है
20:57कि पंदरा सो चबीस इस्वी में
21:01पानी पत की लड़ाई हुई
21:02यह एतिहास एक तत्थे है
21:04यहाँ पर देखो मूल के सब्सक्राइब
21:06किसको दिया जा रहा है यहाँ पर मूल दिया रहा है तलवार को जमीन को मने इतिहास अपने आप में मिट
21:11कि रिलिस्टिक होता है वो तत्थे को देखता है भारत कभी मट
21:16कि रिलिस्टिक बहुत भौतिक रहा नहीं भारत का उद्देश सदा था
21:21मुक्ति इसले भारत ने इतिहास नहीं लिखा भारत ने पुराण लिखे अ
21:26या भारत ने महा कावे लिखे रामान महा भारत जैसे अ
21:31इनका उद्देश आपको इतिहास से परिचित कराना नहीं है इनका उद्देश आपको सीख देना है
21:36मुक्ति देना है लेकिन इससे यह भी नहीं मैं कह रहा है कि इन महा काव
21:41आवेयों में जो आपको चरित्र मिलते हैं वो कालपनिक ही है ने कालपनिक नहीं है
21:46हुए थे हुए थे फिर उनका बड़ा सुन्दर विशेश
21:51और वैज्ञानिक प्रयोग किया गया एक ऐसी कथा को रचने के लिए नहीं है
21:56के लिए जो पीड़ियों तक सबके काम आएगी इस बात समझो जो
22:01सेटिलाइट टावर याद मुबाइल टावर याद रखो वो पर
22:06परम नहीं है पर परम से तुमको जोड़ता है अवतार भी वैसा ही है
22:11तो फिर उसको ले करके कहानिया निर्मित की जाती है
22:16जो हुआ तो हुआ वो तो होता ही है जो हुआ वो तो बताया ही जाता है जो नहीं हुआ वो भी बता दिया जाता है
22:21जाता है उसको सिर्फ कल्पना नहीं किया सकते हो कर
22:26अपना नहीं है वो विधी है आप यह नहीं कह सकते कि
22:31यह सिर्फ कल्पना की बात है कि रावण की
22:36नाभी में ही उसके प्राण थे और जब तक उसकी नाभी में तीर नहीं मारा मृत्यों नहीं हुई ये कल्पन
22:41नहीं है। ये एक गूर सत्य बताने की विधि है।
22:46लोग पुछते हैं तो अचारे जो गूड सत्य सीधे-सीधे क्यों नहीं बता देते हैं इतने प्रतीकों का क्यों प्योग करते हैं
22:51क्योंकि सीधे-सीधे जब बताते हो तुम सुनते नहीं जब सीधे-सीधे बात बताई जाएगी तो अश्टा उक्रगीता
22:56जैसी हो जाएगी पढ़ते हो तुम्हें रस किसमें आता है तुम्हें रस आता है कहानी में
23:01तो वो जो सिधान्त हैं उनको फिर कहानी का रूप दे करके तुमको बताया जाता है क्योंकि
23:06सिधान्त तुमको बताया जाए तुम तुरंट सो जाओगे तुरंट सो जाओगे
23:11अभी कुछ महीने पहले तक उपनिशद जाओगे
23:16मैं पढ़ा रहा था उपनिशद समागम चलता था
23:21उसमें जितने लोग सम्मेलित है उसे पाच गुना आठ गुना ज्यादा लोग हैं हमारे साथ
23:26गीता में बताओ क्यों गीता और उपनिशद में कोई अंतर तो नहीं
23:31पर जब तक उपनिशद चल रहे थे कुछ लोग थे अब हैं अब पूरी एक बड़ी संख्या है क्यों हैं
23:36क्योंकि गीता को लेकर हमारे पास क्या है क्रिष्ण हमारे रहे पास क्या है क्रिश्ण हमारे लोग है
23:41कहानियों के केंदर हैं लोग गीता की और आ रहे हैं सीख तो बराबर किये चाहे उपनिशद पढ़ो चाहे गीता पढ़ो
23:46पर गीता की और आते हैं बताने वालों को मन का ये निए
23:51पता था मन को कहानिया बहुत पसंद है तो अगर उची से उची बात भी मन को सब्सक्राइब
23:56समझानिये तो कहानियों से समझाओ फिर मन सुनेगा तो इसलिए अश्राइब
24:01रिष्टा वक्र कभी बहुत प्रसिद्ध होई नहीं सकते रिभू का तो आपने नाम ही न सुनाओ कभी
24:04कर दो
24:06उपनिश्यद भी कभी बहुत जड़ नहीं पकड़ पाए लेकिन पौरानिक कहानियां बिलकुल फैल गए
24:11क्योंकि हमें बच्च्वन छोटा सा होता हो तो काहानी सुनाओ काहानी सुनाओ वह थोड़ी होता है
24:16कांसेप्ट बताओ यह कभी बोलता है क्या तो वह हमें चाहिए नहीं
24:21अजीब सा लगता है
24:26तो अगर आप यह कहें कि राम और कृष्ण कालपनिक है
24:31तो नहीं कालपनिक नहीं है ऐसे व्यक्ति इस जमीन पर हुए थे लेकर
24:36अगर आप यह कहें कि उनके बारे में जितनी कथाएं प्रचलित हैं क्या वह तथ्यात्मक है तो नहीं वह तथ्यात्मक है
24:41आत्मक नहीं है वह गहानिया एतिहासिक नहीं है वह कहानिया विधियां है वह कहान
24:46हैं आपको कुछ समझाने के लिए रची गई हैं तो हम के
24:51पता करें कि इतिहास कहां तक है और फिर विधि कहां पर शुरू होती है यह पता करना
24:56बड़ा मुश्किल है बड़ा मुश्किल है यह नहीं कुछ करें
25:01सकते हैं ऐसा लगता है आप उसे पूछेंगे तो अनुमा
25:06के तोर पर ऐसा लगता है कि ऐसा तो जरूर हुआ होगा कि राम को वनवास मिला था यहां तक तो इतिहां
25:11है यहां तक भी तहास लगता है कि सर्यूतर पर अध्या नगरी थी यह बात
25:16भी अतिहासिक लगती राजा दशरत थे उनके चार रानिया थे तीन रानिया थे उनके पुत्र थे यह बात भी
25:21इतिहासिक लगती है यहां सब तो इतिहास है पर उसके आगे अब जब वो यात्रा
25:26कर रहे हैं अपनी तो किन जगहों से जा रहे हैं वात इतिहासिक है या नहीं हम कुछ कह नहीं सकते हैं
25:31पकका पकका कुछ पता नहीं कि यहां से गुजरें
25:36थे नहीं गुजरे थे फलाने राक्षस कानून ने वद किया था या नहीं किया था कुछ कह नहीं सकते हैं
25:41कि अबागे आता है कि फिर शीयाग कर रहे हैं राक्षस उड़ते हुए आ रहे हैं और उनके
25:46उस पर विदी पर मास डाल रहे हैं मदेरा फेक रहे हैं ऐसा हुए
25:51हुआ था नहीं हुआ था इसमें तो यहीं लगता है कि तथ्य तो नहीं हो सकती यह बाद कि कोई उड़ता
25:56हुआ आएगा और उपर से मास डालेगा तो यह बात तो प्रतीक के तोर पर ही यहीं
26:01बताने के लिए है कि राक्षास कुछ ऐसी शक्तियां रखते हैं
26:06करते थे जो रिशियों के पास नहीं थे वह बताने के लिए कि वह उपर है रिशी बेहाल
26:11है मजबूर है कुछ कर नहीं सकते हूँ आए उपर से गंदा करके चले गए और उपर से यह बहुत
26:16तब हो सकता है कि जैसे कोई फेक के मारे तो चीज भी तो उपर से ही आती है प्रोजेक्टाइल भी तो उपर से ही आता है
26:21तो वो अरत भी हो सकता है उसका इस देश को
26:26का व्यात्मक्ता से बड़ा लगावरा है
26:31तो हर चारी चीज में काववे आ गया है कोई अगर कुछ प्रॉश्टाइज ने अगर कुछ प्रॉश्टाइज भी तो ने चाहरे प्रॉश्टाइज करते हैं
26:36फेक के मारता है जो बहुत उपर जाती है चीज और फिर वहां से नीचे आके गरती है मिसाइल की तरह है
26:41तो उसको ऐसे कह दिया जाया कि वेक्ते उड़ते हुए आया और उसने उपर से डाल दी
26:46कि यह सिर्फ अलंकरण है श्रिंगार है भारत को श्रिंगार का शौक है
26:51कर आया ना पहुत यहां जितना श्रिंगार है और जितनी तरह की विधियां श्रिंगार की दुनिया में कहीं पाई जाती है
26:56है यह श्रिंगार ही श्रिंगार है अलंकरण ही अलंकरण है गहने ही गहने दुनिया में कहीं तने गहने पाई
27:01भारत में यही हम अपने अवतारों के साथ भी करते हैं
27:06उनका श्रिंगार ही श्रिंगार कर डालते हैं उनको गहने पहना दिये उनको अभूशित कर दिया
27:11सब कुछ पहना दिया उनको लेकिन आप कहोगे कि सिर्फ अलंकरण है
27:16सिर्फ अभूशन है उसके नीचे व्यक्ति कहीं नहीं है तो ऐसा नहीं है व्यक्ति भी है इतिहाए
27:21लेकिन जो सब कुछ आप पढ़ते हो रमायन में आवा भारत में या
27:26रामचरित मानस में क्या वो एतिहासिक है नहीं वो सब कुछ एतिहासिक नहीं है
27:31तिक
27:36सीखो रसलो इस चक्कर मत पढ़ो कि एतिहासिक है या नहीं है
27:41जिन्हों ने रचा उन्हों नहीं कभी नहीं कहा कि हम तुम करें
27:46को इतिहास से खाना चाहते हैं तो तुम उसमें इतिहास क्यों ढूंड रहे हो उन्हें अगर तुम्हें इतिहास से
27:51इतिखाना होता है तो नक्षे दिये होते स्पष्ट तिथियां दी होती है
27:56उन्होंने कुछ भी दिया क्या दे सकते थे कुछ नहीं दिया जानबूज के नहीं दिया ताकि तुम इस चकर में पड़ो
28:01कोई नहीं कि वो चीज तुम को दी गई है ताकि तुम कुछ सीख पाओ जो
28:06सिखाने के लिए वो ग्रंथ या काववे रचे रहे हैं वो सीखो सीखने में साथ
28:11तुम के लिए हो जारे हैं।
28:16कर दो
28:17कर दो
28:21कर दो
28:21हुआ हुआ हुआ
28:26हुआ है
28:31हुआ west
28:37हुआ हुआ
28:39हुआ
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