00:00पैसे विलासरा देशमुक के लिए लातूर में तो हुई थी भीड़े करथा बड़ देवम मेजन
00:05कॉंग्रिस सपोर्टर्स और उनके लिए तो बड़े-बड़े कॉंग्रिस के नीता भी वहाँ दाखिल हो एतना रिमोट
00:10प्लेस होने के बाव जूद लेकिन वो एक तो चीफ मिनिस्टर रहे चुके थे पहली बार
00:15दूसरे लादूर काफी रिमोट एरिया है तो उस तरह से उस तरह
00:20तरफ के बेड़ ज्यादा थी अक्रोंस महराष्ट्रा विदाउट अ
00:25अलाइणिग अकॉदिग तो पार्टी अलगलग पार्टी एक लिए
00:30लोग अलग अलग social level के लोग अलग अलग walks of life में से
00:35आया हुए लोग यह जो हम यहाँ देख रहे हैं यह जीद दादा की मिस्स है बिश्ट कुल ही गुम्साइब
00:40कल से देख रहे हैं या तो रोए जा रहे हैं या हाथ जोड के ऐसे गुम्सुम से बैठे होता है
00:45अब यह पूरा परिवार पवार फैम्पली इकठा दिख रही है आप इंट
00:50कि पॉलिटिकल अलाइंसे जो भी हो यह आज़ा पैमिठी है वालवेज बीन तोगेधर राइड राइड
00:55और यह आप देख रहे हो यह जो सारी भीड है
01:00यह दो वाकई में इस जस्ट रेप्रेजेंटेटिव की दादा की पॉपिलारिटी कितनी जाएगा
01:05ज्यादा थी देखे राप दादा कहा करते थे कि आप यह दुरुष यह काफी
01:10सिंबॉलिक है कि दिरंगा सामने रखा हुआ है उसके पीछे सुनेत रजीटा
01:15सुनेतरा जिन्हें हमेशा से बैक सीट लेकर दादा का कारिया
01:20पूरा देखा जिस तरीकी का काम किया पार्टी तूटने के बाद जब उनको आगे लाया गया
01:25तो वो वही थी कि वो जो हो मेकर थी वो एक ब्रेंगा
01:30थी अपनी फैमिली का उन्होंने वो जो जिम्मेदारी पार्टी ने भी उनको उपर दी थी वो भी जिम्मेदारी
01:35उन्होंने अच्छी तरीके से निभाई आज यह दादा का पार्थिव आपको पार्टी आपको
01:40उस प्लाटफॉर्म पर देख रहे होंगे आखरी एक दर्शन लेने के लिए सारे नेता
01:45दीरे दीरे करकर वहाँ पर आ रहे हैं सुप्रिया सुएव
01:50वहाँ पर लोगों को सभालती होई अपनी माता को लेके वहाँ पर आ रही है प्रतिवापवार वहाँ पर आ रहे हैं
01:55कर दो आ रहे हैं
01:56प्रतिवापवार अपर आ रहे है इस तो इनका परिवाथ से इकले रहे हैं
02:00मिला जूला सा था न तो यह चचेरी बहन है इससे ज़्यादा लोग इनको दादा की
02:05च्छोटी बहन ही जानते थे और बहुत गर्व से कहते रहे हैं
02:10कि मेरी बहन है कई बार उन्हें विपक्ष्यों कुछ एतावनी भी दी थी बिनकोल कि कुछ भी उल्टा से
02:15सिद्धा बोलने से पहले आप सोच लेगा वो मेरी बहन है जी कि पवार फामिल की एक है
02:20खासियत थी कि हमेशा से प्राजमेटिक मद्वेट हो सकते हैं जिस तरीके से प्रतिपाजी है यहां
02:25पर आपको भावुक होते हुए दिख रही है देखिए कई बार शरत पवार को पुरा
02:30जाना जमाना था उस वक्त उचा जाता था अब देखिए सारी लड़ी यह एंसीपी के मिलेस की
02:35एक एक करके सारी एंसीपी के मिलेस वहाँ पर आ रहे हैं जो काफी बड़ी मंचा में
02:40होंगे कि किस तरीके से आगे के राजमी की होगी लेकिन यह पल हर एक
02:45व्यक्ति के लिए भावक करने वाला प्रतिवा जी को हमने भावक होते हुए देखा पुराना
02:50को समय था 90 में अर्ली 2000 में पूछा जाता था शरत पवार को उनकी फामिली को
02:55कि आपने सिर्फ एक पुत्री की और इसके बाद एक तरीके से
03:00से वहां तक आपने सिमित रखाओ क्योंकि यह उनका प्रत था तो वह
03:05इसके बाद जिस तरीके सुनन कहा के देखे मेरा पार्टी मेरी परिवार देपास इतनी संता
03:10है कि वह महराष्ट को आने वाले कई सालों तक महराष्ट की सेवा वो कर सकते हैं और जिसके
03:15तरीके से अब देरे-देरे करके आखरी फुल पटेल जी बिलकुत
03:20और जिता पर लकडिया लगाई जानी शुरू हो गई
03:25और कुछी छड़ों के बाद आखरी अजीत दा एक तरह से कमूतर बालंस भी जाएगी
03:30कि एस गवर्मेंट का एक करम से भी एक और शिरसे ना करो अलाइब
03:35उसमें इतना सीमलेस्ली वो जॉइन हो गए कि किसी तरह
03:40का क्लाश मैसूस नहीं हुआ जैसे आपने कही तस्वेरी दूए
03:45देखी होगी जिसमें फट्नवीज जी एक नक्षिंदे जी और दादा मिलके हस रहे हैं
03:50या मिलके जवाब दे रहे हैं कोई भी खिचा तनी नहीं थी बहुत अच्छे से
03:55अपने अपने अलग अलग गड़ समा लेते हैं देखे एक तरीके से
04:00और अजित पवार वो गलू फैक्टर थे महाराष्ट की सरकारों में चाहे वो सरकार
04:05कॉंग्रेस एंसेपी की हो चाहे वो सरकार महाविकास अग्राडी की हो
04:10अब है यह भी तो कहा जाता है कि अधिकारियों की वीच उनकी कितनी जबर्दस पकड़ थी
04:15मिर्शासनिक अमले में और ब्यूरो के सी में खाली पन महसूस होगा अभी महराष्ट में
04:20क्योंकि अधिकारियों से वो उनका बात करने का तरीका ऐसा होता था कि
04:25कि मैं जो आदेश दे रहा हूं वो करो वो आज के दौर में जानते हैं करदिकारी कितने
04:30किसी भी सरकार में कितने ताकत और हो जाते हैं और कई बार नेताओं की बात मानने से भी
04:35अगर कोई बड़ा नेता ना हो तो मना ही कर देते हैं मुख्यमंत्री से सीधे आदिश लेना पसंद करते हैं लेकिन दादेश
04:40का इसा रुत्बा था कि जो कह देते थे वह करवा के रहते थे वह देखिए
04:45जाना कहीं अन्याय हो रहा है या जान के काम रोकावट जाली जारी है
04:50तो दादा ऐसे बोलते थे एक मिनिट एक मिनिट यह जो दादा
04:55का स्टाइल काना यह तो बिल्कुल सिगनिचर बन गया था एक मिनिट बोल के वह रोक ही देते थे पूरी आर्ग्यूमेंट
05:00और वह से शुरू करते थे मुंबई के जब मैं एक मराधी चनल में काम कर रहा था उस वक्त
05:05यह किस्सा है कि मुंबई में भारी बारिश हुई थी और उस भारी बारिश के चलते
05:10पूरी मुंबई जान थी और सुवक्त अजित पवार ने एक ऐसी मीटिंग लिए
05:15थी जो रात के तीन वज़े तक चली थी सारे में नेता
05:20सारे वहा के अधिकारी वहापर मौझूद है और फिर सिर्फ तीन घंटे बाद सुवक्त
05:25अजित पवार फिर से वहाँ पर मौझूद थे तो यह किस्सा एक सीने जर्नलिस ने
05:30पताया था कि उनको पूछा गया किरदादा आप तो अभी गये थे अभी आप वापस भी आ गये
05:35तो उन्होंने यही बोला ठीक है मैं जाके घर पर रहा कैसे सकता हो कि बारिश तो रुकी नहीं है
05:40जा से यह बोला आप रुकी नहीं पर राद हो उन्हों से जातो पुकी आप?..
05:45झाल झाल
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