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प्रयागराज माघ मेले से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना गंगा स्नान किए काशी लौट गए। उनके साथ शिष्यों ने भी शिविर खाली कर दिया और सभी धार्मिक व्यवस्थाएं समेट ली गईं। शंकराचार्य का कहना है कि मेला प्रशासन ने संतों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही की, खासकर मौनी अमावस्या की घटना पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि सनातन धर्म की मर्यादा और संत समाज के सम्मान की लड़ाई है। उनका प्रण है कि ससम्मान गंगा स्नान कराए बिना वे अपना निर्णय नहीं बदलेंगे।

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati left the Prayagraj Magh Mela for Kashi without taking a Ganga bath. His disciples dismantled the camp. He accused the administration of ignoring saints’ dignity and safety, saying his stand is for Sanatan Dharma’s honor, not personal protest.

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Transcript
00:00अज़ अज़ झाल
00:05झाल
00:10जब संत मौन तोड़ते हैं तो सिर्फ शब्द नहीं निकलते हैं
00:15बलकि इतिहास की गूंच सुनाई देती है
00:17और जब कोई शंकराचार्य गंगासनान किये बनाई
00:20बिना माग मेला छोड़ दे तो सवाल सिर्फ एक नहीं कई उठते हैं
00:25आज की ये खबर सिर्फ प्रयाग राज के माग मेले से जुड़िये घटना नहीं है
00:30आस्था, सम्मान, प्रशासन और सनातन धर्म के बीच खिची उस रेकाचार्य गंगासना
00:35की कहानी है जिसने पूरे देश के साधू संतों को सोचने पर मजबूर कर दिया है
00:40प्रयाग राज के माग मेले से जोतिश पीठ के शंकराचार्य स्वामी अवि मुक्तेश्वरानन्स
00:45सरस्वती भारी मन से काशी के लिए रवाना हो चुके है और जैसे ही शंकराचार्य
00:50माग मेला छोड़ कर गए उनके शिश्यों ने भी बुद्वार को शिवर खाली कर दिये शिवर में
00:55में लगे CCTV कैमरे उतारे गए सवा लाख शिवलिंग वापस समेटे गए और वो
01:00जो कुछ दिन पहले तक श्रद्धा का केंद्र था अब खाली हो गया है
01:05श्रक्राचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन सरस्वती बिना गंगास्नान किये ही माग मेला छोड़ कर दिये शिवर में
01:10छोड़ कर चले गए उनके प्रमुक्षिश्य स्वामी मुकुंदा नंद की अनुसार ये फैसर
01:15उनका कहना है कि शंकराचार्य जी ने भारी मन से मेला छोड़ा
01:20लेकिन अपनी टेक नहीं छोड़ी स्वामी मुकुंदा नंद साफ कहते हैं गुरुजी की टेक अनुसार ये फैसर
01:25टेक महीनों या वर्षों के लिए नहीं बलकि सद्यों और पीडियों के लिए हैं उनका प्रमुक्त
01:30प्रण है कि जब तक मेला प्रशासन सरसम्मान गंगास्नान नहीं कराता तब तक ये टेक अपनी प्रणुक्त
01:35पेक जारी रहेगी। ये भी स्वष्ट किया गया कि अगले साल जब शंकराचार्य फिर माज़ा रहेगी।
01:40अग मेले में आएंगे तो वो शिवर के बाहर पालकी पर ही विराजमान रहेंगे।
01:45अग्राचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन सरस्वती ने प्रयाग राज से काशी रवाना होते से चारी आएंगे।
01:50प्रिशासन पर गंभीर आरोप लगाए उनका कहना है कि सरकारी सुविधाओं और
01:55प्रलोभनों के जरीए उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश की जा रही थी लेकिन मौनी अमावर्ण
02:00प्रिश्या को हुई मार पीट और विवाद पर कोई ठोस कारवाई नहीं हुई उन्होंने कहा
02:05हमारी अंतरात्मा को चोट पहुची है
02:10संगम की इन लाहरों में स्मान दर्मा के वले दार मित्रिया
02:15नहीं है बल्कि अंतरात्मा के संत्रित्ति का एक माश्ट पहुची है
02:20प्रांको आजमान इतना बेती तरह
02:25है कि हम गिनास नां किये इस संकल्प को
02:30यहां के वेत में अदूराज बोड़ता है
02:35यहां से विदा ले रहा है
02:37यह ब्रदे में फ्रोग और क्लाइली का जवार है
02:40यहां जया ले ड्या है
02:44यहां जया यहां यहां जया है
02:45हम प्रेश के अपने बंदों के माध्यम से
02:50सामाट विसे इसके हमारा संद तोनी समाट
02:55अंदरम के यह रही है और को मेला प्राइब
03:00अधिकरान और कुत्तर प्रदेश शाशन पकियाबात पहुंचाना चाहिए मैं
03:05कि नियाएटी प्रतिश्या कभी समानतों नहीं होगी आज हम यहां से जारे हैं
03:10से देकर अपके पीछे सत्यकी भी समानतों नहीं है
03:15और वन अनक पर प्रस्मा को छोड़ तर जा रहे हैं
03:20प्रयार की इस हवार में तो विद्यवान रहेंगे ही
03:25लेकिन पूरी विश्व में बायू अंडल में भी दिमान कहेंगे
03:30और उनके अनुसार पहले भी जिए अनुसार पहले भी जिए अनुसार पहले भी जिए
03:35जीवन में दुखाएं हैं लेकिन ये स्थिती इसलिए अधिक पीड़ा दायाक है क्योंकि ये सनातन दुखाएं
03:40धर्मियों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ी है उन्होंने ये भी कहा कि हार और जीत का
03:45फैसला समय करेगा और अंतिम निर्णे सनातन धर्म के अनुयाईयों और जनता को ही
03:50करना है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन सरस्वती का कहना है कि
03:55अब उनकी प्राथमिकता है सनातन धर्म की मर्यादा अनुयाईयों की सुरक्षा और सम्मान धर्मियुक्तेश्वरानना
04:00काशी के लिए ये प्रस्थान सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं बल्कि एक प्रस्थान धर्मियुक्तेश्वरानना
04:05एक संदेश है माग मेला खत्म नहीं हुआ है लेकिन सवाल अभी भी गंगा की
04:10अधार की तरह बह रहे हैं क्या ये सिर्फ एक संत का विरोध है या आने वाले समय में
04:15सनातन धर्म और प्रशासन के बीच ये विवाद गहराता जाएगा इन सवालों के जब
04:20सवाब आज नहीं लेकिन इतिहास जरूर देगा
04:25झाल
04:26झाल
04:27झाल
04:30झाल
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04:39झाल
04:40झाल
04:41झाल
04:42झाल
04:43झाल
04:44झाल
04:45है
04:45झाल झाल को भाल झाल
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