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  • 1 day ago
ग्वालियर से बड़ी खबर! शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, द्वारकाधीश पीठ के प्रमुख, ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के पालन पर जोर दिया और शिक्षा क्षेत्र में अनियमितताओं को रोकने की जरूरत बताई। शंकराचार्य ने कहा कि समाज में शिक्षा और आध्यात्मिक नेतृत्व के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है। उनके इस बयान ने शैक्षणिक और धार्मिक संगठनों में चर्चा का विषय बना दिया है।
 

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Transcript
00:00अब तो पृष्ण पूरा हो गया लेकिन इसनान नहीं करने दिया है ये तो
00:05ठिक नहीं बात प्रशाशन की नुक्ति होती है अनभवी अधिकारियों की नुक्ति होती है
00:10उनको ब्याय के लिए धन दिया जाता है कोई अन्याय करता है
00:15उसके लिए पहले से कानून विद्धमान है
00:17अब ये मुक्ति सुरा नंद जी की बात कर रहा है
00:20कर रहे हो ना अप उन्हीं की बात कर रहे हो ना तो वो संक्राचार जी के सिस्थ हैं और
00:25स्रंगेरी के संक्राचार जी ने उनका अभिशेक किया है और हमने भी अभिशेक किया है
00:30तो हो गया ना आप क्या चाहिए क्या प्रमार्ण चाहिए
00:35अजबाद आपके जारी आज वहा गई भी थे और वापिस दोड़ना पड़ा हो अब तो बापिस
00:40स्लोट गए ना अब तो अपर शनपूरा हो गया लेकिन इस ना
00:45नहीं करने दिया है यह तो ठीकनी बात गंगाश ना
00:50करने से किसी को नहीं रोका जा सकता यह प्रसाथन का काम नहीं है
00:55अब प्रसाथन की नक्ति दिंगा एसनान कराने के लिये हुई है जितनी भी प्रसाथन
01:00जाए जाए जब आप ये कहते हो कि करुणों लोग गए वहाँ इसनान करने ये कहते हैं कि नहीं
01:05कहते हैं कि नहीं तो महाराज के साथ कितने लोग थे सो तो करोड़ों में सो साम
01:10नहीं कर सकते थे क्या गवस्था वनाने के लिए प्रशाशन
01:15होता है शाशन प्रशाशन वहाँ जम्रेश
01:20दारी पूरबक प्रशाशन की नुक्ति होती है अनभवी अनभवी
01:25अधिकारियों की नुक्ति होती है उनको व्याय के लिए धन दिया जाता है साथ
01:30सामगरी दी जाती है ताकि सादू संतों को इसना नार्थियों को
01:35गंगा की जिनके प्रथी वक्ति है उन सब को वहाँ शुविधा प्राप्त हो शुविधा में क्या
01:40चाहिए कोई यहां रोटी कपड़ा मकान तो मांगता नहीं है के बले
01:45जाकर के त्रवेणी में डुक्ति लगाना है और शहर से बाहर नकलना है बस इतनी ही तुविधा
01:50चाहिए परसासंते तो इसकी जम्मेदारी उनकी होती है अगर
01:55आचारी ये संक्राचारी अखाड़े वहां इसना नहीं कर पाएंगे तो मांग में
02:00मांग मेला का महत्तु ही क्या रह जाएगा गंगा तो गंगा था है
02:05गंगो त्रीशे गंगा सागर तक जाती हैं कहीं भी नहा लेंगे किसी भी घाट
02:10में इसनान करने में पुन्य जनकता प्राप्त है लेकिन त्रवेणी में
02:15किसनान करने का बिशेश महत्तो है ना उसका साथ्रों में बरनन है
02:20इसलिए हम लोग सास्त्रों की आग्या का पालन करने वाले हैं
02:25प्रिशासन का काम है कि प्रजा के हित में उन्हें कारी करना चाहिए
02:30यूजी सी को लेकर ही बड़ा दिरूद है यूजी सी में तमाम साथ्रों साथ्रों के लोग सड़कों पड़ा रहा है
02:35कोई अन्याय करता है उसके लिए पहले से कानून
02:40विद्धमान है अलग से कानून बनाने की क्या विशकता है
02:45देश और बढ़ेगा आपस में रागत देश बढ़ेगा जगड़े बढ़ेंगे
02:50तो इस कानून को लाने की आवस्चका ही नहीं थी
02:52पहले से ही कानून बिद्धमान जो भी अपराद रहा है
02:55करता है आपके गॉलियर में अपरादी के लिए अलग कानून है क्या
03:00अब बताईए गॉलियर में किसी अपरादी के लिए के ब्रामण अपरादी
03:05इसके लिए कानून अलग है चत्री अपरादी इसके लिए कानून अलग है
03:10अपरादी है तो कानून अलग है इसके लिए कानून अलग है पुरुश है तो कानून अलग है
03:15बेटा है तो कानून अपरादी तो अपरादी ही है
03:20चाहिए वो किसी भी जाती का हो जो अपरादी के अपराद करें उसको दंड दीजिए अलग
03:25से जाती के आधार पर कानून बनाने की बाक्तियों कर रहे हैं आप क्या कारण है
03:30जगड़ा कराने की बात है ना आपस में
03:35तो अपरादी ने काल की सर्गार्ना सुनिया जिम्हों की सर्गार्ना सुनिया
03:40ना आपकिसी की बखति कर ट्पिड हमने
03:45करते हैं
03:50संक्राचार कौन है क्या है सुप्रीम कोड को भी सामें लाना पड़ रहा है किया सुप्री
03:55संक्राचार कौन बनाता है
04:00संक्राचार बनाती है क्या सरकार को अधिकार है संक्राचार बनाने का
04:05अगाडे का आचारी बनाने का सरकार को अधिकार है
04:10किसी भी अखाडे का आचारी महामंडलेसर बनाने का सरकार को अधिकार है
04:15और साथन को अधिकार है क्या जो संक्राचार बनाने का अधिकार उन्हें प्राप्त होगा
04:20संक्राचारी का सिसी ही संक्राचारी होगा एक दूसरा दूसरा
04:25शंक्राचारी उसका समर्थन कर दें तो और स्वर्ण में सुगंध हो जाएगी
04:30यह तो उत्राधिकार आता है ना पिता की संपत्ती पुत्र को स्वाभाविक रूप
04:35से प्राप्त होती है जीवे तयो मुक्ति पदेश अदाय भाग
04:40इसे दाय भाग कहते हैं ठीक है ना इसी तरह से जो शंक्राचारी है
04:45जो जंक्राचार जी थे जगत गुरु शंक्राचारी जो यहां आते थे हमारे
04:50गुरुदेव भगवान थे पीटद्वयाध हिश्वर उनके दो ही दंदी सन्यासी सिस्थ
04:55शर्शतों उनके हजारों थे ग्रस्तासरम बाले लाखों थे ब्रमचारी यहां थे
05:00सेक्ड़ों हैं उनके लेकं सन्यासी सिर्फ से दो ही थे जिनको उन्होंने गंड दिया
05:05तो दूसरा उत्रादिकार कहीं जाहीं नहीं सकता तो एक तो वो इसलिए दिक
05:10कारी हैं कि संक्राचार जी के सिस्से हैं स्वामी अभी मुक्ते सुरा नंद जी की बात कर रहे हो ना
05:15उन्हें की बात कर रहे हो ना तो वो संक्राचार जी के सिस्से हैं और स्रेंग
05:20संगेरी के संक्राचार जी ने उनका अभिशेक किया है और हमने भी अभिशेक किया है तो होगे
05:25क्या आप क्या चाहिए क्या प्रमार्ट चाहिए विजय सिंग्ग
05:30करे रहे हैं कि देशे में आउल खराव वह रहा है यह हम यह सबराजने तक बात हम नहीं करते हैं बस हो गया
05:35क्या है का सब्सक्राव यह जयार स काछ करते हैं denken C
05:40झाल झाल
05:45झाल
05:50झाल
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