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Transcript
00:00हम रिशिकेश से आगे जाया करते थे शिविर के लिए
00:03रास्ते में एक पढ़ता है जिल मिल ढाबा
00:05वह लड़ाई हो रहे है लड़ाई किस बात पर हो रही है समझो
00:07वहाँ बस आकर रुकी तो उसमें से निकल करके लोग पेशाब करने लग गए
00:12मैंने का देखूं क्या है सिर्फ लड़ाई ही रहे हैं अभी मारपीट क्यों नहीं शुरूगी
00:16वो ढाबे का मालिक कह रहा है कि यार तुम सब यहाँ खुले में पेशाब कर रहे हो
00:20और पूरी बस भर के उतरी है और सब तुम खुले में कर रहे हो
00:23तो मेरे लोग नहीं रुकेंगे बद्बू के मारे
00:25मैंने का इसकी बात तो सही है
00:27वो बोला कि यह बस हमेशा रुकती है मुझे पता है कि तुम लोग उतरो के पेशाब करोगे
00:31तो मैंने यहाँ पर लाइन से छे तुम्हारे लिए बनवा दिये हैं मूत्रा ले
00:36यहाँ कर लिया करो तो मैंने देखा हो छे के छे खाली थे अब तो बात रोचक हो गई कि छे खाली है
00:41तो यह सब जाकर कि खुले में क्यों पेशाब कर रहे हैं
00:44जब हाथा भाई की नौबात आ गई तो उनमें से एक बोलता है
00:47देख भाई हमारी तो खुले में उतरती है ये है कि सामने उपलब्द भी है शौचाले तो भी वहां नहीं जाएंगे आनंद है ये धरा क्यों है ये प्रत्वी है किसलिए कि हम इस पर मूते और किसलिए है भारत सरकार ने कारिकरम चलाया कि खुले में शौच नहीं होगी वो क
01:17से उठेगा वो ये नहीं कर पाएगा कि मैं गंदा हूँ और ये मुझे बुरा लग रहा है तो अब मैं जाकर कि किसी और को भी गंदा कर दूँ कहेगा नहीं रहने दो
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