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  • 58 minutes ago
70 साल की उम्र में भी अब्दुल अजीज बजाज श्रीनगर के छोटे घर में अखरोट की लकड़ी को तराशने में लगे हुए है. ठक की आवाज के बीच छोटे-छोटे आजारों से लकड़ी के टूकडें पर फूलों को बनाने में तल्लीन हैं. इनके बनाए नक्काशी के काम को देखकर हर कोई चकित रह जाता है. उम्र के इस पड़ाव में नया प्रयोग करने से ये नहीं हिचकिचाते हैं. अब्दुल अजीज पिछले 40 साल से इन लकड़ी के टुकड़ों को आकार दे रहे हैं. लकड़ी पर अक्षरों को उकरेने में महारत हासिल है. ये काम इनका खानदानी नहीं हैं. लेकिन बचपन से ही बजाज को नक्काशी से प्यार था. कभी स्कूल नहीं गए. लेकिन नक्काशी ने इनके नाम को विदेशों तक में पहचान दी.युवाओं को ट्रेनिंग देकर इस कला को जिंदा रखने की कोशिश में लगे हैं.  इनको राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुका है. जिसमें सबसे बड़ा शिल्प गुरु पुरस्कार भी शामिल है.

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00:00ुम्र के इस पड़ाओं में नया प्रियोग करने से ये नहीं हिचकिचाते है
00:30सब कार्विंग वाला है ना उसे लोटस मनाया सामझा लोटस मनाया ये चालिस साल से पहले बनती है
00:40उस वक्षता फिंशिंग उतना नही है आज ज्यादा फिंशिंग कर रहे है ये काड़िगर
00:46मैं सुझता है दूसरी चीज़ बनाओ इसको बच्चाए मुक्तलिप मैंने इंडिया गेट बनाया गाली कि इस चलती है
00:54जो तमग में आते वो बनाती हम नया नया चीज़ वो नाइफ है ना फोक्स वो उसमें डिनर सेट नया नया मोर बनाया ताजमाल बनाया
01:06अब्दूल अजीज पिछले 40 साल से इन लकड़ी के टुकड़ों को अकार दे रहे हैं इस पर अक्षरों को करने में इन्हें महारत हासिल है
01:27चोटे चोटे चोटे उसमें चोटे चोटे अफजार लगते हैं उसके बड़ा अफजार नहीं लगती
01:31ये काम इनका खांदानी नहीं है लेकिन बचपन से ही बजाज को नकासी से प्यार था
01:43कभी स्कूल नहीं गएं लेकिन नकासी ने इनके नाम को विदेसों तक में पहचान दी
01:49युवाओं को ट्रेनिंग दे कर इस कला को जिंदा रखने की कोसिस में लगे हुए हैं
01:54अरे हम अन पढ़े कुछ भी नहीं पढ़ा उस वक्त कुछ भी नहीं पढ़ा है खदा की फजल से हमने तकरीमन वह बहुत कंट्री बहार गया था
02:09अब्दूल अजीज को राष्टिय और राजस्तर पर कई पुरसकार मिल चुके हैं जिसमें सबसे बड़ा सिल्प गुरू पुरसकार भी सामिल है
02:33ETV भारत के लिए स्री नगर से परवेजुदिन की रिपोर्ट
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