00:00ुम्र के इस पड़ाओं में नया प्रियोग करने से ये नहीं हिचकिचाते है
00:30सब कार्विंग वाला है ना उसे लोटस मनाया सामझा लोटस मनाया ये चालिस साल से पहले बनती है
00:40उस वक्षता फिंशिंग उतना नही है आज ज्यादा फिंशिंग कर रहे है ये काड़िगर
00:46मैं सुझता है दूसरी चीज़ बनाओ इसको बच्चाए मुक्तलिप मैंने इंडिया गेट बनाया गाली कि इस चलती है
00:54जो तमग में आते वो बनाती हम नया नया चीज़ वो नाइफ है ना फोक्स वो उसमें डिनर सेट नया नया मोर बनाया ताजमाल बनाया
01:06अब्दूल अजीज पिछले 40 साल से इन लकड़ी के टुकड़ों को अकार दे रहे हैं इस पर अक्षरों को करने में इन्हें महारत हासिल है
01:27चोटे चोटे चोटे उसमें चोटे चोटे अफजार लगते हैं उसके बड़ा अफजार नहीं लगती
01:31ये काम इनका खांदानी नहीं है लेकिन बचपन से ही बजाज को नकासी से प्यार था
01:43कभी स्कूल नहीं गएं लेकिन नकासी ने इनके नाम को विदेसों तक में पहचान दी
01:49युवाओं को ट्रेनिंग दे कर इस कला को जिंदा रखने की कोसिस में लगे हुए हैं
01:54अरे हम अन पढ़े कुछ भी नहीं पढ़ा उस वक्त कुछ भी नहीं पढ़ा है खदा की फजल से हमने तकरीमन वह बहुत कंट्री बहार गया था
02:09अब्दूल अजीज को राष्टिय और राजस्तर पर कई पुरसकार मिल चुके हैं जिसमें सबसे बड़ा सिल्प गुरू पुरसकार भी सामिल है
02:33ETV भारत के लिए स्री नगर से परवेजुदिन की रिपोर्ट
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