70 साल की उम्र में भी अब्दुल अजीज बजाज श्रीनगर के छोटे घर में अखरोट की लकड़ी को तराशने में लगे हुए है. ठक की आवाज के बीच छोटे-छोटे आजारों से लकड़ी के टूकडें पर फूलों को बनाने में तल्लीन हैं. इनके बनाए नक्काशी के काम को देखकर हर कोई चकित रह जाता है. उम्र के इस पड़ाव में नया प्रयोग करने से ये नहीं हिचकिचाते हैं. अब्दुल अजीज पिछले 40 साल से इन लकड़ी के टुकड़ों को आकार दे रहे हैं. लकड़ी पर अक्षरों को उकरेने में महारत हासिल है. ये काम इनका खानदानी नहीं हैं. लेकिन बचपन से ही बजाज को नक्काशी से प्यार था. कभी स्कूल नहीं गए. लेकिन नक्काशी ने इनके नाम को विदेशों तक में पहचान दी.युवाओं को ट्रेनिंग देकर इस कला को जिंदा रखने की कोशिश में लगे हैं. इनको राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुका है. जिसमें सबसे बड़ा शिल्प गुरु पुरस्कार भी शामिल है.
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