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Indian Railway Reform: कैसे चुपचाप बदल रही है भारतीय रेल, क्या है सरकार का 'स्मार्ट' प्लान? भारतीय रेलवे अब सिर्फ पटरियों पर नहीं दौड़ रही, बल्कि आधुनिक बदलावों के एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है.

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~HT.178~PR.250~

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00:00तीन दशकों से भारतिय रेलवे सुधार पर लगातार विचार कर रहा है।
00:30इसमें देरी हुई है।
01:00अधिक स्वयक्तिता से काम करने की अनुमती मिलती है।
01:02समय के साथ हालांकी ये व्यवस्थाएं अस्थाई न रहकर स्थाई संरचनाएं बन गई।
01:08जबकि सरकार की व्यापक आर्थिक नीती ने प्रतिसपर्धी वानिजिक प्षेत्रों में राज्य की भूमिका कम करने पर जोर दिया है।
01:16रेल मंत्राले ने स्वामित्व बरकरार रखते हुए आंतरिक प्रणालियों और निगरानी को मजबूत करने का अधिक क्रमिक द्रिष्टिकोन अपनाया है।
01:24इस से स्थिर्ता सुनिष्चित हुई है पर कुछ संस्थाएं अधिकतर संरक्षित तंत्रों में काम करती रहती है।
01:32अधिकांश रेलवे CPSU आज भी अधिकतर सरकारी स्वामित्व में हैं। उन्हें रेलवे व्यवसाय तक सुनिष्चित पहुँच मिलती है और प्रतिसपर्धी दबाव कम होता है।
01:42इसने स्थिर प्रदर्शन दिया है परक्सर परिणाम वृद्धिशील ही रहे हैं।
01:46जहां स्वामित्व, विन्यमन और प्रमुख ग्राहक एक ही संस्थागत धांचे में मिलते हैं, वहां कड़ी जवाब देही और तेज नवाचार लाना अधिक जटिल हो जाता है।
02:15इसकी परिचालन शक्ति ने वैश्विक लॉजिस्टिक्स खिलाडियों और निवेश को दोनों को आकर्शित किया है।
02:45एक साथ बुनियादी धांचे के मालिक, नियामक, सेवा प्रदाता और शेयर धारक के रूप में कई भूमी काएने भाता है।
02:52भूमी लाइसेंसिंग शुल्क जैसे मुद्दे, 2023 के संशोधित दिशा निर्देशों के बाद भी एक ही धांचे में इन जिम्मेदारियों को संतुलित करने की कठिनाई दर्शाते हैं।
03:02ये इरादे की विफलताएं नहीं बलकि डिजाइन की चुनौतियां हैं और इसलिए रणनीतिक विनिवेश को वापसी नहीं बलकि एक प्रवर्तक के रूप में देखा जाना चाहिए।
03:32वन इंडिया से चुड़ें और अपडेट न चूटें वन इंडिया आई पले
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