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ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन सिर्फ सत्ता के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि पहचान और इतिहास की लड़ाई भी बन चुके हैं। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक ईरान का पुराना झंडा एक बार फिर नजर आने लगा है। आखिर 3000 साल पुराना यह ध्वज लोगों के लिए इतना खास क्यों है? इस वीडियो में हम ईरान के नए और पुराने झंडे का पूरा इतिहास समझेंगे, उनके रंगों और प्रतीकों का मतलब जानेंगे और यह भी देखेंगे कि मौजूदा विरोध में शेर-सूर्य वाला झंडा प्रतिरोध का प्रतीक कैसे बन गया। यह कहानी है 45 साल बनाम 3000 साल की।

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~ED.276~HT.408~

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00:0045 साल बनाम 3000 साल ये सिर्फ दो जहंडों की लडाई नहीं है ये इरान की आत्मा उसकी पहचान और उसके पिहास को लेकर छिड़ी एक गहरी जंग की कहानी है
00:12सडकों पर उतरते लोग, सोशल मीडिया पर वाइरल होते प्रतीक और दूतावास की छट पर बदला गया जंडा
00:19सब कुछ इशारा कर रहा है कि इरान में बहस अब सत्ता से आगे निकल कर प्रतीकों तक बहुत चुकी है
00:26आज का इरान दो धोजों के बीच खड़ा दिखाई देता है
00:30एक वो जो 1989 की इसलामी करांत के बाद अस्तित्त में आया और पिछले 45 सालों से देश की पहचान बना हुआ है
00:39दूसरा वो जिसकी जड़े लगभग 3000 साल पुराने इतिहास में धसी हुई है
00:45यही पुराना जंडा आज विरोध का चेहरा बन चुका है
00:48कहानी की शुरुवात मौजूदा हालात से होती है
00:51सरवोच नेता अयातुल्ला अली खामनेई के खिलाफ बढ़ते विरोध परदर्शनों के बीच
00:56अचानक इरान का राष्टिय ध्वज सुर्खियों में आ गया है
00:59सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुराने इरानी जंडे का इमोजी दिखने लगा
01:04लंदन इस्थित इरानी दूतावास पर एक व्यक्त ने मौजूदा जंडा हटा कर पुराना जंडा फैरा दिया
01:11सडकों, दिवारों और बालकनियों पर वही पुराना प्रतीक नजर आने लगा है
01:16जैसे लोग शब्दों से ज़ादा अब निशानों के जरिये अपनी बात कह रहे हों
01:21इरान के इतिहास में जंडा सिर्फ कपड़े का टुकडा मातर नहीं होता बलकि सत्ता और संस्कृती का आयना रहा है
01:29राश्चाहीकाल का पुराना जंडा हरा, सफेद और लाल रंग से बना था
01:33इसके बीच सफेद पटी पर शेर और सूर का परतीक होता था
01:38शेर के पंजे में तलवार दिखाई देती थी ये परतीक, शक्ती, साहस और न्याय का संदेश देता था
01:45सूर इरानी परंपराओं में गिव्विता और जीवन का परतीक माना जाता था
01:50शेर और सूर की ये जोड़ी सद्यों तक फार्सी सामराज की पहचान रही
01:55इस जंडे के रंग भी अपनी कहानी कहते रहे हैं
01:58हरा रंग समरिद्धी और आस्था से जुड़ा था
02:01सफेद, शांती और संतुलन का संकेत देता था
02:04जबकि लाल, साहस और बलिदान का परतीक माना जाता था
02:08ये धोज शाह मुहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल तक इरान की आधिकारिक पहचान बना रहा
02:15फिर आया साल 1989, इसलामी करांत ने ना सिर्फ सत्ता बदली बलकि परतीकों की दुनिया भी बदल डाली
02:23राजशाही का अंत हुआ और धार्मिक नित्रत ने पुराने जहंडे को सत्ता से हटा दिया
02:28शेर और सूर की जगहा नया प्रतीक आया, रंग वही रहे लेकिन अर्थ बदल गया
02:34सफेद पटी पर अल्लाहु अकबर 22 बार लिखा गया जिसंख्या इरानी केलेंडर के अंसार बहमन महीने की 22 तारीक को दर्शा की है
02:43जिस तिन इस्लामी क्रांती सफल हुई थी, जहंडा अब धर्म और क्रांती की पहचान बन चुका था
02:49आज जब लोग पुराने जहंडे को फिर से उठा रहे हैं तो उसका मतलब सिर्फ राजशाही की वापसी नहीं है
02:55प्रदर्शन कारियों के लिए ये जहंडा धार्मिक कट्टर्टा से मुक्ती, सांस्कृतिक आजादी और प्राचीन इरानी पहचान की वापसी का भी प्रतीक बन चुका है
03:05निर्वासित इरानी राजकुमार के आवान पर चल रहे ये विरोध परदर्शन मौझूदा व्योस्था को सीधे चुनोती दे रहे हैं
03:12वही खामने इस आंदोलन को विदेशी साजिस बताते रहे हैं और राजकुमार पर अमेरिका से जुड़े होने का आरोब भी लगाते रहे हैं
03:20इस पूरी कहानी में असल सवाल यही है कि इरान किस रास्ते पर जाना चाहता है
03:25पैतालिस साल पुराने करांतिकारी जंडे के साथ या फिर तीन हजार साल पुरानी सभ्यता की याद दिलाने वाले पृतीक के साथ
03:32जंडे बदलने की ये जंग दर्शल भविष्ट तै करने की जंग है जहां इतिहास, आस्थाव और आजादी आमने सामने ठड़े हुए है
03:41इस वीडियो में बस इतना ही मेरा नाम वैभो है आप देखते रहिए One India
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