00:00साइंस भी एक पॉइंट पे बहुत बड़े-बड़े साइंटिस आके बोलते हैं कि भीया कोई होना चाहिए
00:03आइंस्टेन उन में से एक्जांपल था, न्यूटन था, लेकिन अब जैसे सूपर्सिशन की बात है
00:08साइंस की लोग, साइंस का साहर लेकर मजभवों को गाली देना अलग बात है, बिलीफ्स को गाली देना है, ओवर ओल एक अलग सा कम्यूटी बनाएंगे कि एथिजम में है, कि एग्जिस्टेंस ओफ गॉड को वो नकार है
00:20अगर गॉड का मतलब ही है सत्य और फिर उसी सत्य को मैंने एक नाम दे दिया इश्वर, तब तो ठीक है, ट्रुथ इस गॉड, तब तो ठीक है
00:30लेकिन ज्यादा तर लोगों के लिए उनका इश्वर पहले आता है, मेरा इश्वर, मेरा अल्ला, मेरा भगवान वो पहले आता है
00:38और उसकी वो कोई जाच परताल नहीं करना चाहते हैं, और उसी को वो सत्य का नाम दे देते हैं, अब बात गलत हो जाती है
00:45एथीजम एक ध्रमित करने वाला शब्द है, इश्वर यदे मनुष्य की कल्पना का नाम है, और लगता है कि है क्योंकि दुनिया में सब धाराओं ने, सब जगों ने, और सब कालों ने, अपने अपने हिसाब से अलग-अलग इश्वरों और भगवानों की बात करी है
01:03अब इतने सारे तो अलग-अलग नहीं हो सकते हैं, तो जाहिर सी बात है कि वो तो मनुष्य की ही कल्पना है, ठीक है, लेकिन सत्य क्या है, सत्य है कल्पना कार का अपने मिध्यात्व को देख लेना, तो सत्य मानवरचित या मानवजनित नहीं हो सकता, सत्य मनुष्य की कल्�
01:33पर आपने अपने हिसाब से अपने काल में अपने पंथ के मुताबेक आपने कोई गौड रचा
01:40और आप मुझसे गह रहे हो कि साहब आप यहां वफा दिखाओ या समर्पन या शषद्धा पूजा वो मुझसे नहीं हो पाएगा
01:47आस्तिक होना एक बाद है इशुअरवादी होना दूसरी बाद है और यह हमें नहीं समझ में आता है आस्तिक होना माने वो जो सत्ते परायन जो टुछ लविंग है जो टुछ लविंग है वो आस्तिक है
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