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SIR पर दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राष्ट्रीय जन-सुनवाई में सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पहले तो यह (मौजूदा सत्ता) कहते रहे कि हम हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, लेकिन संविधान में धर्मनिरपेक्षता का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार अपने फैसलों में इसे मूल आधार कहा है। फिर इन्होंने NRC के बारे में सोचा लेकिन उसमें दिक्कतें थीं, असम की एनआरसी का वाकया आपके सामने है। फिर ये नया खेल लेकर आए SIR और इसके जरिए इन्होंने सोचा कि वोटिंग लिस्ट से ज्यादातर मुसलमानों का नाम हटा देंगे।
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00:00इन्होंने पहले पहले तो खेर ये कहते रहे कि हम हिंदू राश्ट बनाना चाहते हैं फिर इनको ये समझ में आया कि बहुँ समभधान में धर्ण निरपेश्टा को एक मूल आधार माना गया है सुप्रीम कोर्ट में कई पैसलों में और इसलिए हिंदू राश्ट समभधान �
00:30कि हम NRC, National Register of Citizens बनाएंगे और उसमें से हम मुसल्मानों के नाम हटा दे और वो एक्सरसाइज पहले आसाम में करी गई, आसाम में फॉर्चुनेटली, मतलब एक तरह से फॉर्चुनेटली, और तो सुप्रीम कोर्ट ने बहुत जबर्दस उसको पुश्च किया और उसमें भी �
01:00के मॉनिटर करने से कि धर्ब के आधार पर बहुत ज़्यादा इस्क्रिमिनेशन नहीं कर पाए, और इस वज़े से उसमें उस NRC में साम में बहुत लोग चूड़ गये, NRC के बाहर हो गये, क्योंकि वो लोग दस्तावेज नहीं दिखाता है, लेकिन उसमें अधिकतर लोग
01:30बाहर कर देंगे, तो वो भी एक्सरसाइज टक गई, फिर इनको लगा कि हम सिरिजन्शिप अमिट्मेंट एक्ट लाकर जो हिंदू बाहर रहे हैं, उनको वापिस सिरिजन्शिप दे देंगे, लेकिन उसमें ये समझ में आया कि जो लोग उसके लिए अप्लाय करेंगे सिर
02:00हम एनारसी से बाहर कर दिये गए थे, इस वज़े से कि उनके पास डॉकिमंट्स नहीं थे, वो लोग तो इस तरह की एप्लिकेशन नहीं दे सकते थे, नहीं देना चाहते थे, तब इनको लगा कि अच्छा हम नया केल खेलते हैं, अब हम SIR करेंगे, और SIR से इनका नाम वो
02:30इस साइज एक तो बहुत हड़वड़ी में, बिहार में तो आपको पता है कि इनका पहले रूल ये था, विको लिकित रूल था, कि जहां 6 महीं में इलेक्शन के ना बचे हो, वहां पर इंटेंसिव रिविजन नहीं कर सकते, कम से कम 6 महीने बचे होने चाहिए, बिहार में �
03:00कर रहे हैं, कि हम 3 महीने में सारी एक्सराइज इसकी कर रहे हैं, और एक्सराइज में वो पहले कह रहे हैं कि तुम हरे एक जना हम नए से ले से वोटर्स लिस्ट बना रहे हैं, ठीके,
03:14हिंदुस्तान के इतिहास में आज तक कभी नए सिरे से वोटर्स लिस्ट नहीं बनाई गए, हर बार जब भी इंटेंसिव रिविजन भी जब हुआ, तो पुरानी लिस्ट में से काट शाट करी गई, पुरानी लिस्ट में से नाम एड दरे गए, एकड़म नए तरीके से व
03:44में एलेक्शन हुआ था उससे पहले, उसके बाद ये एक्सरसाइज कभी नहीं हुई है, और जो कानून है, रिप्रोदेंटेंटेशन अप पीपल आइक उसमें भी साफ साफ हुआ है, कि इंटेंसिव रिविजन तब करा सकते हैं, एक पहली बात तो इंटेंसिव रिविज
04:14उसके कारण लिखित में आपको देने होगे कि क्यों आप इंटेंसिव रिविजन कराना चाहते हैं, इन्होंने एकदम से जो इंटेंसिव रिविजन का ओडर पास किया, उसमें ये लिख दिया कि हम इतने सारे राज्यों में करा रहे हैं, और कोई आधार नहीं दिया, सिर्
04:44इस वज़े से हम ये इंटेंसिव रिविजन कर रहे हैं, यानि कि आनून में जो लिखा है कि आप एक इंस्टिवन्सी या उसके पार्ट में फोर रिजन्स तुबी रेकॉर्ड़ेट इन राइटिग, वो नहीं कर रहे हैं, वो एक जंडर जंडर पास कर दिया, फिर ये कह �
05:14जल्दी जल्दी में जो लोग बाहर हैं, जो वहाँ पर हैं नहीं, माइग्रेंट वरकर्स वगरा हैं, उनको कहां से जिल्मरीस तौर बढ़े जाते हैं, कहते हैं आप ऑनलाइन भर सकते हैं, आप बताया जाएगा कि कितना मुश्किल कर दिया है नोंने ऑनलाइन बढ़ना �
05:44आप करोड करीम वोटर्स थे आप करोड में से 65 लाज लोगों का नाम काट दिया था यह कहके इन्होंने अनुमरेशन फॉर्म नहीं भड़ा था अब अनुमरेशन फॉर्म तो एक्शली वहां पर तहीं करोड लोगों नहीं भड़ा था
06:01लेकिन इसा रखता है कि इन्स्ट्रक्शन यह थे रिए जो लोग हैं जो लगा कि अपने वोटर्स जो हैं हमारे वोटर्स उनके तो वियों पुद जाकर फॉर्म भरवा रहो जो इंके वोटर्स नहीं है उनके फॉर्म मत ख़गवाओ अगर नहीं भड़े जाएंगे तो उनक
06:31करना नाम चड़वाना है तो पिर आप फॉर्म 6 भरे जिसमें आपको नए वोटर की तरह अप्लाय करना होगा और उस नए वोटर के फॉर्म में ये लिखा हुआ है कि आप पहले कभी वोटर्स लिस्ट में नहीं थे यानि कि आप लोगों से कह रहे हैं कि तुम जूटा डेक्
07:01नाम नहीं था दूसरी बात फॉर्म 6 में एक खास चीज़ है सिर्जन्शिप की बात हुई लोग कह रहे हैं कि हम सिर्जन्शिप चेक करना चाहते हैं पहली बात तो
07:12इलेक्षन कमिशन के बार बार इंस्ट्रक्शन्स गए हैं 2003 के इंटेन्सिब रिविजन के उक्की गाइडलाइनस में लिखा है कि बहुई इलेक्षन कमिशन का काम नहीं है पॉटर्स लिस्ट चेक डर कर के अगर किसी की सिर्थनशिप पर डाउट है तो इलेक्शन कमिशन �
07:42दूसरी बात जब 1995 में यह उत्ता सुप्रीम कोर्ट में उठा था तो उस पर एक पुरा जज्जमेंट आया ऐसी तरह से वो सिटिजन्शिप के आधार पर बहुत सारी लोगों के नाम काट रहते दिली में बंबाई में की इलेक्शन कमिशन तो समय सुप्रीम कोर्ट में यह ब
08:12तरह से नहीं काट सकते हैं अगर किसी का नाम पुरानी वोटर लिस्ट में है तो आप उसको अब्जेक्शन उसके खिलाफ दे सकते हैं लेकिन उसमें आपको यह बताना पड़ेगा कि क्यों यह डाउट अराइज हुआ है कि भई आपका आपकी सिजिजन्शिप डाउट फ�
08:42अब आपकी सिर्फिकेट इन में से कोई डाउट दिखाओ शुप्रीम कोड ने बोला था कोई भी कोई भी सट अपकीमेंट्स पे कंफाइन नी कर सकते हैं वही वही एविदेंस हो जो रिजिमेंट हो यानि कोई तरह अलब नामा दे रहा है कि हमारा हम यहां पैदा हुए थ
09:12जिदन है तो वह भी एविदेंस आपको कंसिडर करना होगा विफॉर आपको फैसला करते हैं तो उसमें यह टीक है कि सुप्रीम कोट ने अधिकार दिया एलेक्शन कमिशन को लेकिन उसमें बहुत सारे कंडिशन्स लगा दिये कि पुराने वोटर इसमें आप थे तो उसको
09:42उसके बाद उसकी सुनवाई करनी होगी सारे डॉक्यमेंट्स लंजदर करने होंगे तब आप कर सकते हैं लेकिन अपकी बार यह लोग बार बार यही कहते हैं कि हम सिर्जन्शिक चेक कर रहे हैं जब बिहार का इन लोग ने ऐसा यार फूरा खतल कर दिया हैं सिर्जन्शिक
10:12इन को इननोने सिर्जन्शिक के आधार पर बाहर किया है भह उनोने एनुमरेशन �any भरे या और उनुने दस्तावेदी नहीं दिये वाले लेकिन सिर्जन्शिक के आधार पर सिर्फ कुछ 100 लोगों को 2500 लोगों को शेस्वाई बाहर किया है
10:35कि फॉर्म सिक्स में खास बात है जब को इन्या जना अपने आपको एंडोई करता है तो इसको तीन तरह के एविडेंस देने होते हैं
10:46कि पहला यह कि वो इसको कोई भी विडेंस इंक्लूडिंग हाथार काड वो दे सकता है कि उसके में घर्जिडिकनि हैं
11:06कि वो यह कोने होता है।
11:15पूर्णा होता है कि मैं हिंगुस्तान का सिपिजन हूं और अगर मेरा ये दावार गलत पाया गया तो मेरा प्रोंसिक्यूशन हो सकता है बस इतना कहना होता है उसके लिए कोई दस्तावेज नहीं दिखाना होता है ये इसकम फॉर्म सिक्स जो की रेप्रोजेंटेशन अप्�
11:45सब्सक्राइब को देने हों अगर जो दॉक्यमेंट्स वो मांग रहे हैं उपको देखना जाए गर आप अधार कार्ट को अधार कार्ट को भी आइड करेंगे लेकिन बारबार इलेक्शन कमिशन के ये कह रहा है कि आधार कार्ट को हम सिलिजन शिप का प्रूफ नहीं मानें
12:15तो पहली बात तो बहुत सारे documents, matriculation certificate भी citizenship का कोई proof नहीं है, तो उसमें जो documents हैं, फुल मिल आकर विहार में हम लोगों ने examine किया कि 50% population के पास उसमें से एक भी document नहीं है, एक भी document नहीं है, यानि कि सिर्फ 50% population के पास उसमें से कोई भी document है,
12:42तो अगर आप उस आधार पर चलेंगे कि इनने से document दिखाओ, तब हम तुमको citizen मानेंगे, तब तो आदे लोग बाहर होने हैं, तो इन्होंने कोई पैमाना नहीं tag किया, कोई standard, कोई कुछ नहीं lay down किया, लेकिन कहते हैं कि हम citizenship eclimate करेंगे, और पूरा जो process है, फिल्कुल पार
13:12को दिये हैं, वो machine readable नहीं दी है, अब जैसे हैं, सब को दिखाई देता है, कि और राहु गांदी ने कई बार response करके ये बार दिखाई कि वही एक ही जने का नाम या एक ही जने का, कि photo दो-दो-सो जगे लगाई गई है, एक ही constituency में दो-सो जगे लगाई गई है, अब अगर machine
13:42और एक deduplication software होता है, वो भी अगर machine readable form में voters list है, तो उसको आप use करके देख सकते हैं कि कौन-कौन से duplicates आगाई, कौन से demographically similar entries हैं, और कौन से photographically similar entries हैं, ये दोनों दीज़ा देखनी होती हैं, उनको demographically मतलब नाम सेम है, father's name सेम है, address सेम है, तो demographically similar है, photo सेम है, तो photographically सेम ह
14:12लेकिन ही कह रहे हैं कि नहीं हम deduplication software नहीं use करेंगे, हम आपको machine readable form में voters list नहीं देगा, है उनके पास machine readable, और कह रहे हैं उसमें हम नहीं देगा, क्यों? कहते हैं कि हम आपकी इससे तो privacy का आनन हो जाएगा, आपकी right to voters की privacy का आनन हो जाएगा, मैं machine readable से कैसे privacy का आनन हो जा�
14:42इनके manual में लिखा है कि जब भी किसी के खिलाफ कोई objection आता है या नहीं नाम की application आती है, edition की application आती है तो उसको उसी दिन website पर डालना होगा, जिससे लोग देख सकें कि वह इसके खिलाफ objection आया है, जिसके इसका नहीं नाम guide होने के लिए आया है, political party देख सकें, वो भी नहीं
15:12Supreme Court के कहने पर इनको देनी पड़ी, लेकिन वो भी नहीं दे रहे थे, और अभी-अभी ये पता लगा है, अभी Indian Express ने ये story publish करी, ये मुझे पहले एक विहार के बड़े credible leader ने मुझे पहले बताया था, एक political party के वो head है, कि Centralized Election Commission of India, यानि दिल्ली से
15:4026 लाख लोगों के खिलाख objections भेजे गए, जिसमें की electoral registration officer के digital signature यूज करेगा, कानून ये कहता है कि वो notice सिर्फ electoral registration officer भेज सकता है, और उसमें reason देना होगा कि आप किसलिए, क्या माँग रहे हैं, क्यों माँग रहे हैं, इसमें एकदम standard form notices में 26 लाख लोगों
16:09को दिल्ली से
16:1026 लाख लोगों का नाम इन्होंने draft रोल में इतने थे उनमें से हटाया, लेकिन objections centralized election commission से गए थे बिल्कुल रोल के खिलाख,
16:31इलेक्टोरल registration officer के सिर्फ digital signatures use करे गया, तो कोई पार दर्शता नहीं, खड़बड़ी में आप कर रहे हैं, लोगों को आप expect कर रहे हैं कि वो वहां से
16:47digital form भरें, आपने digital form भरने का process एक्तम गरवर कर दिया है, और राजिस्थान में एक पार जब 2003 में exercise भी थी, तो राजिस्थान में election commission ने एक बढ़ा अच्छा काम किया था,
17:05यह बोला था कि हम लोग social audit करेंगे, यानि कि polling station by polling station हम लोगों को बुलाएंगे और वहां पर नाम पढ़े जाएंगे, और लोग बताएंगे कि यह आदमी है की नहीं, जिन्दा है की नहीं, यहां से चला गया है की नहीं वगरा वगरा, और उस तरह से जब process किया गया, तो �
17:35इन्वल में भी एक चीज़ ले आई गई कि इस तरह से gram सभा या वाट सभा करके आप social audit करेंगे और उसमें आप नाम में जो कांट शार्ट करनी है या नाम आट करना है वो करेंगे, वो भी नहीं करना है, वो भी नहीं करना है, वो भी नहीं करना है, सब कुछ मतलब कोशि�
18:05करने की कोशिश कर रहे हैं कि मुसल्मानों के नाम और अल्प संख्यों के नाम हटा रहे हैं, तो सुप्रीम कोर्ट में यह सब
18:34रहे हैं, हुआ हुआ है, सुद़वाई चल रही है, लेकिन सुदवाई बहुत धीरे धीरे हो रही है, अभी पांच महीने से रही चल रही है, चलती ही जा रही है और
18:47कोई फोस निर्णे अभी तक नहीं हो पाया है और उनफॉर्टनेटली जब मैंने ये बात बोली सुप्रीम कोड को कि देखें इंडियन एक्सप्रस ने फ्रंट पेज पर ये स्टोरी चापी है कि सेंट्रल एलेक्शन कमिशन के द्वारा लाखों लोगों को नोटिस दिये ग�
19:17जाएं तो सुप्रीम कोड ने बुला कि नहीं यूज पर आर्टिकल्स के बेसिस पर हूं कुछ नहीं कर सकते हैं कि एलेक्टोरल रिजिस्ट्रेशन अफिसर्व को बचारे इतने जरे होएं हैं कि उनको वो दिया गया है कि अगर तुमने फॉर्मली कुछ भी चूँ करी तो
19:47तो मतलब वोटिंग राइट जिसकों की सुप्रीम कोर्ट में अब फंडमेंसल राइट का दर्जा दे रखा है वो इतनी असानी से इतना कैंजोली लोगों का छीना जा रहा है ये सब आज अनफोल्ड हो रहा है तो इसके बारे में बहुत सारे लोग यहां आये हुए हैं जो क
20:17हो प्रणा देट सुझ को इस में आये सहुए है
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