Mokshada Ekadashi 2025 Date and Time वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोक्षदा एकादशी व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही शुभ फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोक्षदा एकादशी व्रत का पारण किया किस दिन किया जाएगा।
00:01मोक्ष दा एकदशी हिंदु धर्म के सबसे पावन व्रतों में से एक मानी जाती है।
00:05ये एकदशी मार्ग शीर्ष महीने के शुकल पक्ष में पड़ती है जो इस बार एक दिसम्मर को मनाई जाए है।
00:10जैसा कि नाम से साफ है, मोक्ष दा का अर्थ है, मोक्ष प्रदान करने वाली।
00:15माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विश्नु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को जन्म और व्रत्यू के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
00:22वही इस दिन अगर कुछ उपाय किये जाए तो व्यक्ति को सुक शान्ती की प्राप्ती हो दी।
00:26आईए इन उपायों के बारे में जानते हैं।
00:28सबसे पहले आता है गीत का पाठ।
00:30मोक्षदाय कदशी और गीता जैनती पर शिरीमद भगवद गीता का संपूर पाठ करना चाहिए अगर ऐसा करना मुश्किल है तो कम सिकम ग्यार में अध्याय का पाठ जरूर करें।
00:39गीता का दान इस पवित्र दिन पर किसी मंदित या भ्रामण को भोचन जरूर कराए और शिरीमद भगवद गीता का दान करें ये उपाय व्यक्ति को ग्यान और मोक्ष की ओर ले जाता है।
01:09अगर आप आर्थिक तंगी से परिशान है तो पूजा के बाद उस मोर पंक को उठा कर तिजोरी या धन इस्थान पर रगदें।
01:17माना जाता है कि इससे माल लक्ष्मी खुश होती है और धन आगमन के द्वार खोलते हैं।
01:21इसके लाबा घर के मुखे द्वार पर मोर पंक लगाने से नकरातमक ऊड़ जादूर होती है और सुक समर्दी बनी रहती है।
01:27मोक्षदाय के द्शी के दिन सुबा जल्दी उड़ का लिस्नान करें और पीले रंग के कपड़े पहने।
01:31भगवान विच्नु और श्रीकृष्ने की पूजा करें।
01:33पूजा में पीले फूल, फल, धूब दीप और तुलसी पत्र जरूर शामिल करें।
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