00:00जम्मू कश्मीर में सरदियों के शुरू होते ही गर्मी देने वाली कांगडी का खयाल आता है।
00:30हमारी इलाके में 20 के करीब खांदान कांगडी बनाने का काम करते थे लेकिन अब ये काम सिर्फ चार लोगों तक ही महदोद रहा है और वो भी बुज़र्ग हैं जबकि नौजवान इस काम के साथ मुंसलिक नहीं हो रहे हैं क्योंकि इसकी मांग में काफी किमी आई है।
01:00हम कई सालों से कांगडिया बनाने का काम कर रहे हैं ये हमारा जर्य माश है कभी ऐसा वक्त भी था जब सर्दियों के मौसन में हर गर में हर फर्द के हाथ में कांगडी होती थी।
01:18लोग पहले से आडर देते थे मगर अब जमाना बदल गया है।
01:23किसी जमाने में कांगडी केवल मिट्टी का बरतन रखने के लिए काम आती थी लेकिन वक्त गुजरने के साथ कारिगरों ने बेत का इस्तेमाल करके इन्हें देसी हीटर बना दिया है।
01:44आमतार पर कांगडी बनाने का काम आदमी करते हैं और महिलाएं इसको बनाने में इस्तेमाल होने वाले बेत को च्छिलने का काम करती है।
01:54जदीद सहुलियात ने अगर्च आसानी पैदा की है लेकिन कांगडी से वाबस्ता कारीगरों के लिए मुश्किल हो गया है।
02:06अब कांगडी बनाने वालों की तैदाद बहुत कम रह गई है क्यूंकि इस काम में महनत ज़्यादा है और आमदानी ना होने के बरावर है।
02:17पहले हम इसी पेशे से अपने पच्चू का पेट पालते थे मगर अब मजबूरी में कई लोगों ने ये काम छोड़ दे है।
02:47एटीवी भारत के लिए पुलवामा से सयदादल मुश्ताक की रिपोर्ट
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