00:00हरे कृष्ण दोस्तों, मेरा एक ही लक्ष्य है, श्रीमत भगवद गीता के साथ सौ शलोकों को हर दिल तक पहुचाना, अगर यह ज्यान आपको छू जाएं, तो इसे साजा कीजिए और जुडिए मेरे साथ इस मिशन में।
00:30हे अर्जुन, इंद्रियों और उनके विश्यों का संपर्ख ही सर्दीगर्मी, सुखरुख का कारण बनता है। यह सभी क्षणिक हैं, आते जाते रहते हैं। इसलिए हे भरत्वन्शी, तू उन्हें सहन कर। सुखदुख और ठंडगर्मी जैसे अनुभव अस्थाई हैं।
01:00जै श्री क्रिश्न, रोज एक शलोक समझने के लिए जुड़े। हरे क्रिश्ना भक्ती वाइब्स के साथ।
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