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  • 3 months ago
हरे भरे पेड़ों के बीच, अफ्रीकन ट्यूलिप के चटकीले रंग, केरल की इडुक्की पहाड़ियों में गजब की खूबसूरती बिखरी हुई है. नारंगी और पीले रंग के फूलों से लदे स्पैथोडिया के पेड़, यहां के मौसम को रंगीन बना रहे हैं.अफ्रीकन ट्यूलिप के फूलों की खासियत ये है कि इन फूलों में पानी होता है. जिसमें मच्छर अंडे देते है और रात के समय फूल पंखुडियां बंद हो जाती है. जिससे अंदर मौजूद अंडे नष्ट हो जाते हैं.इस अनोखे सौदर्य को अंग्रेज 18वीं शताब्दी में भारत लेकर आए. जो चाय बागानों में मच्छरों के प्रकोप को कम करते थे. मलेरिया को फैलने से रोकते थे. इन पेड़ों के तने से ढोल जैसे वाद्य यंत्र बनाए जाते हैं. अफ्रीन ढोल की थाप यहां के लोगों को भले न सुनाई दे. लेकन यहां आने वाले लोग इडुक्की की वादियों में इन ट्यूलिप के फूलों से रोमांचित जरुर हो सकते हैं.

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00:00अफ्रिकन ट्यूलिप के चटकीले रंग केरल की इडुकी पहाडियों में गजब की खुबसूर्ती बिखरी हुई है
00:18ये नारंगी और पीले रंग के फूलों से लदे इस पैथोडिया के पेड यहां के मौसम को रंगीन बना रहे हैं
00:26अफ्रिकन ट्यूलिप की फूलों की खास्यत यह है कि इन फूलों में पानी होता है
00:35जिसमें मच्छर अंडे देते हैं और रात के समय फूल पंखुडियां बंध हो जाती हैं
00:42जिससे अंदर मौजूद अंडे नश्ट हो जाते हैं
00:45इस अनोखे सौंदर्यको अंग्रेज अठारवी सताब्धी में भारत लेकाश्यत यहां
01:15कराएं जो चाय बागानों में मच्छरों के प्रकोब को कम करते थे और मलेरिया को फैलने से रोकते थे
01:23इन पेडों के तने से धोल जैसे वाद्ययंत्र बनाये जाते हैं अफ्रीकन धोल की थाप यहां के लोगों को भले न सुनाई दे
01:32But here the people come from the tulips of tulips
01:38Romance can be used
01:40Bureau Report, ETV, Bharat
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