00:00दिवाली के बाद भाई दूज का तेहवार मनाया चाता है यह भाई दूज का तेहवार भाई बहन के बीच प्यार के बंधन का प्रतीक है अब इस दिन बहने अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है और उनकी सम्रिध्धी और दिरगायों की प्राथना करती है
00:19तो है आज किस वीडियो में जानते हैं कि आखिर भाईया दूज मनाने की शुरुआत कैसे हुई और इतिहास क्या है लेकिन उसे पहले नमस्कार मैं सुतोष और आप बोल्ड सकाई देख रहे हैं
00:31दिवाली के बाद भाईया दूज का तहवार मनाया जाता है रक्षा मंदन की तरह भाईया दूज भी बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है यह तहवार साल में दो बार मनाया जाता है जिसमें साल का पहला भाईया दूज चैत्र मास के कृष्ण पक्च की दूइतिया तिथी
01:01पूर्य देव और उनकी पत्नी छाया की दो संतान थी एक यम्राज और दूसरी यमुना यम्राज अपनी बहन यमुना को बहुत प्रेम करते थे यमुना अपने भाई से बार बार अपने घर आने को कहती थी अब एक बार कार्तिकर शकलत दुईतिया को उन्होंने अपने भा�
01:31इतना प्रेम और आदर देख यम्राज प्रसन्न हुए और यमुना से वर्दान मांगने को कहा जिसके बाद वर्दान में यमुना ने अपने भाई से कहा कि हर साल आप इस दिन मेरे घर आना इसके बाद से ही भाई दूज या फिर यम दूईतिया की परंपरा शुरू हो ग�
02:01दोस्तों यही थी भाई दूज मनाने के पीछे की पौराने को कथा फिलाल इस वीडियो में आपको ये जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट में लिक कर जरूब देगा
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