00:00क्रشनाई वाशुदेवा यहरे परमात्मने प्रणताक्लेशन आशाई गोविंदाई نमुनमा
00:06प्यारे मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं जेष्ठ मास में जो पुर्षोत्तम का महिना पढ़ने वाला है यह पुर्षोत्तम
00:16मास कब से कब तक रहेगा इसी विशेपे आप से चर्चा करते हैं
00:21तो 17 माई 2026 से प्रारंब हो रहा है पुर्शोत्तम का महिना और 15 जुन 2026 को पूर्ण हो जाएगा
00:30पुर्शोत्तम का महिना इस पवित्र माह को पुर्शोत्तम मास कहा जाता है लौंद का महिना कहा जाता है अधिक मास
00:40के रूप में भी इसको जाना जाता है
00:42अधिक मास कुछ लोगों के लिए विसेश सुबता को भी ले करके आता है क्यों क्योंकि इस महिने में भगवान
00:50विश्ट्णू की पूजा विसेश रूप से संपन्न की जाती है और भगवान विश्ट्णू का विसेश आसिरबात प्राप्त होता है
00:58तो जेश्ट का महिना अर्थात अधिक मास कब से सुरू हो रहा है इस माह में हमको क्या-क्या काड़ि
01:05करने चाहिए भगवान विश्ट्णू का पूजन करना चाहिए कलेंडर अंगरेजी की बात करते हैं तो बारा महिने होते हैं लेकिन
01:14हर तीसरे साल में अतिरुक्त महिना जो
01:28तीन वर्स पूर्ण होते हैं तब जा करके एक महना निकलता है जिसको पुर्षोत्तम का महना कहते हैं ये पुर्षोत्तम
01:35का महना है जिसमें भगवान विश्ट्नू ने नरसिंग का अवतार धारन करके भगत प्रहलाद की रक्षा की और हिर्णा कश्यपू
01:47का उद्धार किया �
01:49यह वही पुर्षोत्तम का महना है पुर्षोत्तम महने में भगवानिविष्णू का पूजन विश्चेश रूप से किया जाता है इस मास
01:58में धार्मिक द्रश्टि से अत्यंत ही पवित्र महना बताया गया है साल दोहजार
02:0426 में जेश्ट महा के साथ अधिक मास का जो यह पावन सयोग बन रहा है इस पावन सयोग में
02:12हमको भक्ति करनी चाहिए दान देना चाहिए और आध्यात्मिक कार्य जो आध्यात्मिक जो प्रवचन है जो पूजा है जो पाट
02:24है भक्ति है शत्षंग है स्वाध्याय है आध्यात
02:28कि और जो हमको प्रेरित करें ऐसे कार्णियों को हमको इस परम पवित्र पावन पुर्शोत्तम महिने में करना चाहिए क्योंकि
02:37इस पुर्शोत्तम महिने में जो इस तरह के कार्णियों को करते हैं निश्चित रूप में भगवने विष्ट्णू की क्रपा उनके
02:45ऊपर होती है
02:46अदिक मास 2026 की तिथी की अगर हम बात करें तो इस साल जेष्ट माह का जो अदिक मास है
02:5317 माई 2026 से प्रारंब हो करके रबिवार से शुरू हो करके और 15 जून 2026 सुम बार तक ये
03:02चलेगा
03:02इस दोरान भगवान विश्ट्णू की पूजा करना विसेस रूप से स्रेयशकर है बहुत ही आनंदकारी है बहुत ही पुनिशाली है
03:11इस पामन महिने में हमको वरत जरूर करना चाहिए एक समय हमको भोजन करना चाहिए भूमी पर सयन करना चाहिए
03:20और विसेस रूप से नियम स
03:30सायंकाल भगवानी विष्व्णु का जो मंत्र है और अधिक मास क्यों आता है क्योंकि चंद्रमा के आधार पर एक
03:43साल लगबक 354 से 355 दिनों का जबकि सूर्य के आधार पर 365 से 306 दिनों का होता है
03:54इस अंतर को शंतुलित करने के लिए तीसरे साल एक अतरिक्त महिना जोड़ा जाता है
04:02जिसे अधिक मास कहा जाता है यह महिना चंद्र और सौर्य मास के बीच के अंतर को पूरा करता है
04:10आधिक मास को पुर्शोत्तम मास कहा जाता है आधिक मास को भगवान विश्पनू को इसलिए प्री है क्योंकि इस मास
04:18में स्वयम भगवान विश्पनू ने इस मास को स्वयम ही धारन किया था
04:24पुरशोत्तम को भगवान ने स्वयम धारन किया था और इस कारण इस मास में भगवान विश्पन का आवतार स्री भगवान
04:36कृष्पन की पूया अर्चना का विशेश महत्त बताया गया है
04:40और इस महिने में की गई भक्ती और दान अच्छे पुन्न को प्रदान कराने वाले होते हैं
04:51मित्रों यदि आप चाहते हैं किसी भी तरह की कोई जानकारी आप शंपर करिएगा
04:56मैं पुना मिलता हूँ तब तक के लिए आप सभी को जै स्री कुछना
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