00:00तमिल्नाडू के घने निलगिरी जंगलों के पास बसे एक छोटे से गाव में एक पुरानी किमवदंती प्रचलित है।
00:16कहा जाता है कि जंगल के भीतर एक प्राचीन मंदिर है जो सदियों से श्रापित और विरान पड़ा है।
00:22लोग कहते हैं कि जो भी उस मंदिर में जाता है वह कभी वैसा नहीं लोटता।
00:28लेकिन जिग्यासा और साहस अकसर इन कहानियों को अनसुना कर देते हैं और या कहानी एक ऐसे ही युवक्की है राघव की।
00:36राघव चिन्नेई का एक युवा पत्रकार हमेशा एक अध्भुत कहानी की तलाश में रहता था।
00:42जब उसने गाउ में अपने दादी से उस श्रापित मंदिर के बारे में सुना तो उसकी जिग्यासा जाग उठी।
00:49गाउ के बुज़ुर्गों ने उसे चेतावनी दी, वह मंदिर सिर्फ श्रापित नहीं है, वह जिन्दा है, वह लाल्चियों को सजा देता है।
00:59राघव ने इन चेतावनीयों को अंधविश्वास मानकर नजर अंदास कर दिया।
01:04उसने तै कि वह उस मंदिर तक जाएगा, उसकी सच्चाई को उजागर करेगा और अपनी अगली बड़ी रिपोर्ट तयार करेगा।
01:11अपने इस मिशन के लिए उसने अपने मित्र अर्जुन, एक फोटोग्राफर और काव्या, एक इतिहास की जांकार को साथ लिया।
01:20तीनों ने मिलकर घने निलगिरी के जंगलों की ओर सफर शुरू किया।
01:24रास्ते में हर तरफ सन्नाटा और डरावना महौल था, लेकिन राघव के होसले बुलंद थे।
01:30कई घंटे की पैदल यात्रा के बाद, उन्होंने उसे देखा, वह प्राचीन मंदिर।
01:36वह खंडेहर जैसा लग रहा था, चारों और पेडों और जाडियों से घिरा हुआ।
01:41मंदिर के स्तंभों पर बेले चड़ी हुई थी और दीवारों पर अजीब आकृतिया उकेरी गई थी।
01:47मंदिर के प्रवेश्टवार पर एक तूटी हुई मूर्ती थी, जिसमें देवी के क्रोधित स्वरूप की जहलक मिल रही थी।
01:54राघव ने दरवाजे को धक्का देकर खोल दिया।
01:57अंदर एक अजीब सी ठंडक थी।
02:00दिवारों पर बनी चितरक थाओं में पूजा, बलिदान और खून के द्रिश्य उकेरे हुए थे।
02:06मंदिर के बीचुम बीच काली देवी की विशाल, लेकिन क्षतिग्रस्ट मूर्ती खड़ी थी।
02:11काव्या ने दिवारों पर लिखे शिलालिखों को पढ़ना शुरू किया।
02:16उसने बताया, यह मंदर तब छोड़ा गया जब एक अनुष्ठान गलत हो गया।
02:21पुजारियों ने देवी का आशिरवाद बुलाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने कुछ अंधकार में शक्तियों को जगा दिया।
02:28उधर अरजुन को वहां का माहौल असहज लग रहा था।
02:31उसने वापस लोटने की बात कही, लेकिन राघव ने उसे डाटते हुए कहा, यह वही है चो मैं खोज रहा था।
02:39रात होते होते जंगल अजीब औगरीब आवाजों से गुझने लगा।
02:43तीनों ने मंदिर के पास ही देरा डालने का फैसला किया ताकि आसपास के वातावरन को रिकॉर्ड किया जा सके।
02:50रात के बीच में काव्या ने सुनी, कोई धीमी धीमी आवाज में तमिल में उसका नाम पुकार रहा था।
02:56घबरा कर वह उठी तो देखा कि उसके हाथ पर अजीब से प्रतीक खुदे हुए हैं, जो हलके हलके चमक रहे थे।
03:03डर कर उसने अरजुन और राघव को जगाया।
03:07राघव ने इसे उसकी मन का भ्रम कहकर मजाक में उड़ा दिया।
03:11लेकिन अरजुन जो अपनी ली गई तस्वीरे देख रहा था, अचानक चौंक गया।
03:16उसने राघव को एक तस्वीर दिखाई।
03:19उसमें देवी की मूर्ती के पास एक साया खड़ा था, जिसकी आँखें खाली और डरावनी थी।
03:25राघव ने जब पलट कर देखा, तो वहां कुछ भी नहीं था, लेकिन वह साया तस्वीर में सपश्ट दिख रहा था।
03:33अगली सुबह, तीनों ने मंदिर के अंदर गहराई में जाने का फैसला किया।
03:38काव्या ने एक कुप्त कक्ष खोजा, जो एक चेतावनी के साथ बंद था, जो सो रहा है, उसे मत जगाओ।
03:45काव्या के मना करने के बावजूद, राघव ने इस बरदस्ती उस दरवाजे को खोल दिया।
03:51अंदर एक प्राचीन मूर्ती थी, जो भयावः और अलोकिक उर्जा से भरी हुई थी।
03:57उसकी आखें जीविच्सी लग रही थी, जैसे वे तीनों को घूर रही हो।
04:02तभी जमीन हिलने लगी और कमरे में एक भयंकर चीक कूंज उठी।
04:06तीनों डर कर बाहर भागे, लेकिन बाहर आकर देखा कि जंगल बदल चुका था।
04:12यह अब और भी घना और डरावना हो गया था।
04:15लोटने का रास्ता कहीं नहीं दिख रहा था।
04:18जंगल के भीतर वे भयानक द्रिश्टांतों से घिर गये।
04:22अर्जुन ने अपने मरने का द्रिश्य देखा।
04:25कावया ने अपने सबसे बड़े डर को साकार होते देखा।
04:29और राघव? उसे एक अद्रिश्य शक्ती उसकी सबसे गहरी असुरक्षाओं और गलतियों के बारे में ताना मार रही थी।
04:37हर द्रिश्य उनके सबसे गहरे रहसियों का पर्दाफाश कर रहा था।
04:42कावया ने कबूल किया कि उसने अपनी रिसर्च में धोका किया था।
04:46अर्जुन ने स्विकार किया कि उसने पैसे के लिए अपने भाई के साथ विश्वासकाद किया।
04:51लेकिन राघव ने अपने दोश मानने से इनकार कर दिया
04:54उन्हें मैसूस हुआ कि मंदिर केवल श्रापित नहीं था या उनके दिलों का दरपन था
05:00या उन पर वही भय और पीडा थोप रहा था जो उनके कर्मों ने पैदा की थी
05:05काव्या ने शिलालिक को याद किया मंदिर को शांती चाहिए बलिदान के रूप में
05:11अर्जुन ने डर कर कहा कि राघव को ही छोड़ देना चाहिए क्योंकि वही उन्हें इस खत्रे में लाया था
05:17लेकिन राघव ने इसे मानने से इनकार कर दिया
05:21तभी देवी की मूर्ती चमकने लगी और जंगल उनके चारों और बंध होने लगा
05:26काव्या ने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ी
05:29अगर इस श्राब को तोड़ने के लिए बलिदान चाहिए तो मुझे ले लो उसने कहा
05:35तभी एक प्राचीन पुजारी की आत्मा प्रकट हुई
05:38वह मंदिर का अभिशप्त रक्षक था
05:41उसने कहा केवल बलिदान से कुछ नहीं होगा
05:45तुम्हें अपने सच का सामना करना होगा
05:48काव्या और अर्जुन ने अपनी गलतियों को स्विकार किया और प्रायश्चित की विंती की
05:53लेकिन जब राघव की बारी आई तो उसने अपनी लालच और अहंकार को स्विकार करने से इनकार कर दिया
06:00मंदिर ने प्रतिक्रिया दी
06:02जमीन फटने लगी और राघव चीखते हुए नीचे समा गया
06:07काव्या और अर्जुन को मंदिर ने बाहर फैंक दिया और वे गाव के पास जागे
06:12काव्या और अर्जुन गाव लोट आए हमेशा के लिए बदल चुके थे
06:17उन्होंने गाव वालों को उस मंदिर से दूर रहने की चेतावनी दी
06:22भूला हुआ मंदिर अब भी खड़ा है एक सबक के रूप में यह सिर्फ एक श्रापित स्थान नहीं है
06:28यह एक दरपन है जो हमें हमारे कर्मों का सामना करवाता है
06:33सच्चा प्रायश्चित अपने दोशों को स्वीकार करने और उन्हें सुधारने में है
06:38जो लोग लालच, अहंकार और छल से भरे होते हैं विभूतों से नहीं बलकि अपनी अंतरात्मा से डरते हैं
06:46वीडियो देखने के लिए धन्यवाद
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