00:00रात के दो बचकर पचपन मिनट हुए थे, हमेशा की तरह मैंने उसे गुड नाइट बोला और फोन साइलेंट पर रख दिया, कमरे में अजीब सी शांती थी, सिर्फ पंखी की आवाज और मेरी सांसे, करीब तीन बचकर साथ मिनट पर फोन हलके से वाइबरेट हुआ, स्क्र
00:30आया, वो तो पिछले हफते दूसरे शहर शिफ्ट हो चुकी है, मैंने धीरे से फोन नीचे रखा, और जैसे ही नजर दर्वाजे की तरफ कई, वो आधा खुला हुआ था, और पीछे से किसी के सांस लेने की आवाज, अब मुझे समझ नहीं आ रहा था, फोन फेंकूं, या
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