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  • 11 months ago
राजस्थान के अलवर में सूखी और बंजर जमीन को हराभरा करने का काम यूपी के मेरठ के प्रदीप कर रहे हैं. इन्होंने 2010 में दिल्ली की कंपनी में इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ी और अलवर के धीरोड़ा गांव का रुख किया. यहां इन्होंने पौधे लगाने शुरू किया. इस तपती रेत में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. सबसे पहले उन्होंने पंचवटी के पांच पौधे लगाए, बरगद, पीपल, बेलपत्र, आंवला और सीताशोक. इन पौधों के पीछे धार्मिक और स्वास्थ्य से जुड़े कारण थे. धीरोड़ा गांव की बंजर जमीन पर प्रदीप ने पहले साल 200 पौधे लगाए. इसके बाद हर साल पौधों की संख्या बढ़ती गई. आज तक वे करीब पांच हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं. इनमें से सैकड़ों पौधे अब 20 से 25 फीट ऊंचे पेड़ बन चुके हैं. एक किलोमीटर की परिधि में फैली यह हरियाली अब पूरे इलाके के स्वरूप को बदल चुकी है.धीरोड़ा में पौधारोपण का असर सिर्फ हरियाली तक सीमित नहीं रहा. यहां का तापमान आसपास की तुलना में कम हो गया और भू जलस्तर भी बढ़ा. प्रदीप ने धीरोड़ा गांव में हर्बल नर्सरी स्थापित की, जहां इस समय लगभग 300 प्रजातियों के पौधे हैं. प्रदीप का सपना सरिस्का टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाली सभी वनस्पतियों को एक ही जगह पर लगाना है.

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00:30प्रदीप आज खरीब एक किलोमेटर में 5000 से जादा पेड़ पौधे लगा चुके हैं
00:402021 में हरबल नरसरी बनाई जिसमें खरीब 300 प्रजादियों के पौधे हैं
00:45तपते रेत में हर्याली से तापमान में कमी आई महीं भूज लस्तर भी बढ़ गया
00:51धिरोडा गाउं अब सिक्षा और शोध का केंद्र बन रहा है
01:09छात्र और शोध करता इन पौधों के बारे में जानकारी चुटाते हैं
01:13प्रदीप का सपना सरिस्का टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाली सभी वनसपतियों को एक ही जगह पर लगाना है
01:20पर लगाना है
01:20ब्यूरो रिपोर्ट एटीव भारत
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