00:01क्या हो अगर कोई दरक्त खुद में क्रांती की यादों को सहीज कर रखे हुए हो जी हां उतरप्रदेश के
00:08प्रयागराज में बरकत का एक विशाल पेड खामूशी के साथ देश की आजादी का गवह बने हुए आज भी खड़ा
00:16है इसकी शाखाएं देश के नक्षे के आकार क
00:19एक चबूत्रे के उपर फैली हुई है जिस पर 1947 का साल दर्ज है यहां के लोगों का मानना है
00:27कि उस जमाने में एक रांतीकारियों के मिलने की जगा हुआ करती थी जहां आजादी के विचारों का आदान प्रदान
00:33होता था रड़नीतियों पर चर्चा की जाती थी और ब्रि�
00:48के खिलाफत की और उनके खिलाफ जो अपनी आजादी का बिगुल था और जो रड़नीति थी वो तैयार करने के
00:56परूक्ष में कहीं न कहीं यह बाते निकलकर आती हैं और हम सब प्रियाग राज में अपने आपको गौरोशारी समस्ते
01:04हैं और गौरोबोध होता है कि हम उस प
01:17अंगराम के तमान क्रांधिकारियों ने जगा जगा पर मीटिंग बैठक किया करते थे तो यह जो बर्गत का पेढ़ लगाया
01:26गया है यहां पर चंसेखर आजाद और उनकी टोलियां वहां बैट करके आजादी के लिए रणनीद बनाया करते थे और
01:36यह ब्रिक्ष जब दे�
02:04अब जब भारत अपना अस्तीवा स्वतंतरता दिवस मनानी की तैयारी कर रहा है तब प्रयागराज में बर्गत का ये दरक्त
02:11अपने आन बान और शान से खड़ा है
02:13इसकी जड़ें बीते हुए कल में बेहत मजबूती से जमी हुई है और इसकी कहानी, साहस, बलिदान और आजादी के
02:21लंबे सफर को याद करते हुए आज की और आने वाली पीडियों को हमीशा हमीशा प्रिडिक करती रहेंगी
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