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  • 5 months ago
छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल मैनपाट में एक अनोखा कैफे खुला है.. जहां नाश्ता और खाना के लिए पैसे नहीं देने पड़ते हैं.. बल्कि प्लास्टिक कचरा जमा करना होता है। स्वच्छ भारत मिशन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जिला पंचायत ने ये अनोखी पहल की है. देश में ये अपनी तरह का पहला गार्बेज कैफे है, जिसे ग्रामीण क्षेत्र में खोला गया है। मैनपाट की रोपाखर ग्राम पंचायत में खुला ये गार्बेज कैफे प्रदूषण के खिलाफ एक जंग है. गार्बेज कैफे में जमा हुए प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल करने के लिए वेंडर को भेजा जाएगा.. और वो इस प्लास्टिक वेस्ट का भुगतान सीधे रेस्टोरेंट संचालक को करेगा. 6 साल पहले छत्तीसगढ़ के ही अंबिकापुर से एक गार्बेज कैफे की शुरुआत हुई थी.. जिससे शहर की आबो-हवा को बेहतर करने में मदद मिली थी. अब ग्रामीण क्षेत्र में खोला गया ये गार्बेज कैफे से ना सिर्फ मैनपाट को प्रदूषण मुक्त करने में मदद करेगा.. बल्कि देश में रोल मॉडल भी साबित होगा.

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00:00चछटिसगड के परेडनिस्थल मैनपार्ट में एक अनुखा कैफे खुला है।
00:07जहाँ नाश्ते और खाने के लिए पैसे नहीं देने पड़ते, बलकि प्लास्टिक का कच्रा जमा करना होता है।
00:14स्वच भारत मिशन के प्रतीज आगरुकता फैलाने के लिए जिला पंचायत ने ये अनुखी पहल की है।
00:44देश में ये अपनी तरह का पहला कार्बेज कैफे है, जिसे ग्रामिन शेत्र में खोला गया है।
01:00मैन पाट की रोपा कर ग्राम पंचायत में खोला ये गार्बेज कैफे प्रदूशन के खिलाप एक जंग है।
01:06ग्रामिन शेत्र में खोला गया गार्बेज कैफे ना सिर्फ मैन पाट को प्रदूशन मुक्त करने में मदद करेगा, बलकि देश में रोल मोडल भी साबित होगा।
01:19इटी भारत के लिए सर्गुजा से देश दीपक गुपता की रिपोर्ट।
01:23झाल
01:24मुक्त
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