00:007 और 8 सेतंबर यानि की कल मध्य रात्री के दोरान ब्लड मून आकाश में नजर आया इस दोरान चंदर ग्रहन था लेकिन आखर चंदर ग्रहन के दोरान चांद का रंग लाल क्यों हो गया आई आपको समझाते हैं
00:19जब प्रत्वी सूरी और चंदरमा के बीच आ जाती है तो चंदरमा पर सीधी सूरी की रोश्नी नहीं पहुँच पाती प्रत्वी की उंब्रा यानि गहरी चाया की भीतर आने पर पूर्ण चंदर ग्रहन यानि की टोटल लिूनर एकलिप्स होता है
00:34कल रात ऐसा ही हुआ लगभग 82 मिनिट तक चंदरमा पूरी तरह प्रत्वी की चाया में रहा
00:41सूरी की किरने जब प्रत्वी के चारो ओर से होकर गुजरती हैं तो उन्हें वायुमंडल से होकर गुजरना पड़ता है
00:47इस दोरान रिफ्रैक्शन होता है यानि किरने मुड जाती है
00:51सूरी का सफेद प्रकाश कई रंगों से मिलकर बना है नीली और बैंगनी रोशनी वायुमंडल में बहुत ज़ादा बिखर जाती हैं
01:00लाल और नारंगी रोशनी आसानी से गुजर जाती हैं
01:04चंद्रग्रहन के दोरान केबल वही लाल नारंगी प्रकाश वायुमंडल से निकलकर चांद तक पहुँशता है
01:10यही रोशनी चांद की सतह से परवर्तित होकर हमारी आँखों तक आती है
01:15इसलिए कल चांद ने एक लाल तांबे जैसी चमक धारण कर ली जैसे ब्लड मून कहते हैं
01:23अगर प्रत्वी के वायुमंडल में धूल धुआई या प्रदोर्शन जादा हो तो चांद गहरा लाल या भूरा देखाई देता है
01:29अगर वायुमंडल साफ हो तो चांद हलका नारंगी या तांबे जैसा लगता है
01:33इसलिए कल भारत में कई जगहों पर चांद गारहा लाल और कई जगहों पर हलका तांबे दिखा है
01:59अजए लगता है
02:29झाल झाल
02:59झाल
03:09झाल
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