00:00सूरी ग्रहन जोतिश शास्त्र की एक अत्यंत महत्यपून घटना मानी जाती है।
00:30सूरी ग्रहन जब चंदरमा सूरी और प्रिद्वी के बीच आकर सूरी की किर्णों को प्रिद्वी तक पहुंचने से रोग देता है।
01:00और उत्तर फालगुरी नशत में घटित होगा और इस अउधी में सूरे स्वयम कन्या रासी में गोचर करेंगी।
01:06ऐसे में आप भगवान सूरी की चारिशा का पाट कर सकते हैं।
01:10जिससे ग्रहन के नकारणव प्रोहाव से बचा रहा सकता है।
01:14साथ ही भगवान के नाम का चाब भी आपको इन बुरे प्रोहाव से दूर करेगा।
01:18इस बार साल का दूसरा ग्रहन भारत को छोड़कर ऑस्ट्रेलिया अन्टार्टिका प्रशाथ महा सागर में दिखेगा।
01:27यह ग्रहन भारत में इसलिए नहीं दिखेगा क्योंकि ग्रहन की यओधी के दवरान भारत में रात होगी।
01:33और इसका सूपतक काल भी माने नहीं होगा
01:35लिहाजा इस सूरी ग्रहन का असर भारत में नहीं होगा
01:38वहीं इसके पहले भी इस प्रकार की घटनाएं घट चुकी हैं
01:42पित्रपक्ष के आरम में 7 सितंबर 2006 भाद्रबत पूरिवा पर आंशिंक चंद ग्रहन था
01:48जो की भारत में दिखा था
01:50इसके पंदरा दिन बाद पित्रमोक्ष अमावस्या 22 सितंबर 2006 को वलायाकार सूरी ग्रहन था जो भारत में नहीं दिखा
01:58इसके पहले 1978 में भी यह हो चुका है
02:01जब की पित्रपक्ष का आरम सोरा सितंबर 1978 को पूर्ण चंद ग्रहन से होकर 2 अक्टूबर 1978 को आंशिक सूरी ग्रहन के साथ समापन हुआ
02:11दरसल सूरी ग्रहन तब लगता है जब चंदमा सूर्य और धरती एक सीधी लायन में आ जाते हैं
02:18इस लायन में आने के लिए दो चीज़े जरूरी होती है
02:20सबसे पहले चांद को अमावस्या के फेज में होना चाहिए
02:23यानि जब चांद अपनी काक्षा में घूमते घूमते धरती और सूरज के बीच आ जाता है
02:29दूसरी बात ग्रहाट सिर्फ उसी समय ले सकता है जब एकलिप्स सीजन हो
02:33यह सीजन करीब चौतिय दिन तर चलता है और लगभग छे महीने में आता है
02:37इस समय पर ही सूरज, चांद और धरती एक सता पर आ सकते हैं
02:41फिल्हाल के लिए बस अतना ही बाकिया ब्रेटी बने रही वन डेहने के साथ
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