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Surya Grahan 2025: सूर्य ग्रहण क्यों है खास, इसकी छाया का लोगों पर कितना होगा असर ?। Solar Eclipse|
साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है । ज्योतिष के अनुसार ग्रहण (Surya Grahan 2025) के दौरान ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। वहीं इस अवधि को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं यह आंशिक सूर्य ग्रहण है, जिसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को ढकेगा। पंचांग के अनुसार, साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा? इसके साथ ही इस दिन किन बातों का ध्यान देना चाहिए?

The last solar eclipse of the year is going to take place. According to astrology, it is considered auspicious to do as much worship as possible during the eclipse (Surya Grahan 2025). At the same time, many rules have been made regarding this period. This is a partial solar eclipse, which means that the moon will cover only a part of the sun. According to the Panchang, when will the last solar eclipse of the year take place? Along with this, what things should be kept in mind on this day?.

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~HT.410~PR.338~GR.124~ED.106~GR.122~

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Transcript
00:00सूरी ग्रहन जोतिश शास्त्र की एक अत्यंत महत्यपून घटना मानी जाती है।
00:30सूरी ग्रहन जब चंदरमा सूरी और प्रिद्वी के बीच आकर सूरी की किर्णों को प्रिद्वी तक पहुंचने से रोग देता है।
01:00और उत्तर फालगुरी नशत में घटित होगा और इस अउधी में सूरे स्वयम कन्या रासी में गोचर करेंगी।
01:06ऐसे में आप भगवान सूरी की चारिशा का पाट कर सकते हैं।
01:10जिससे ग्रहन के नकारणव प्रोहाव से बचा रहा सकता है।
01:14साथ ही भगवान के नाम का चाब भी आपको इन बुरे प्रोहाव से दूर करेगा।
01:18इस बार साल का दूसरा ग्रहन भारत को छोड़कर ऑस्ट्रेलिया अन्टार्टिका प्रशाथ महा सागर में दिखेगा।
01:27यह ग्रहन भारत में इसलिए नहीं दिखेगा क्योंकि ग्रहन की यओधी के दवरान भारत में रात होगी।
01:33और इसका सूपतक काल भी माने नहीं होगा
01:35लिहाजा इस सूरी ग्रहन का असर भारत में नहीं होगा
01:38वहीं इसके पहले भी इस प्रकार की घटनाएं घट चुकी हैं
01:42पित्रपक्ष के आरम में 7 सितंबर 2006 भाद्रबत पूरिवा पर आंशिंक चंद ग्रहन था
01:48जो की भारत में दिखा था
01:50इसके पंदरा दिन बाद पित्रमोक्ष अमावस्या 22 सितंबर 2006 को वलायाकार सूरी ग्रहन था जो भारत में नहीं दिखा
01:58इसके पहले 1978 में भी यह हो चुका है
02:01जब की पित्रपक्ष का आरम सोरा सितंबर 1978 को पूर्ण चंद ग्रहन से होकर 2 अक्टूबर 1978 को आंशिक सूरी ग्रहन के साथ समापन हुआ
02:11दरसल सूरी ग्रहन तब लगता है जब चंदमा सूर्य और धरती एक सीधी लायन में आ जाते हैं
02:18इस लायन में आने के लिए दो चीज़े जरूरी होती है
02:20सबसे पहले चांद को अमावस्या के फेज में होना चाहिए
02:23यानि जब चांद अपनी काक्षा में घूमते घूमते धरती और सूरज के बीच आ जाता है
02:29दूसरी बात ग्रहाट सिर्फ उसी समय ले सकता है जब एकलिप्स सीजन हो
02:33यह सीजन करीब चौतिय दिन तर चलता है और लगभग छे महीने में आता है
02:37इस समय पर ही सूरज, चांद और धरती एक सता पर आ सकते हैं
02:41फिल्हाल के लिए बस अतना ही बाकिया ब्रेटी बने रही वन डेहने के साथ
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